समाज गोधरा के शहीदों को नमन March 1, 2012 by सुमंत विद्वांस | 1 Comment on गोधरा के शहीदों को नमन सुमंत 27 फरवरी 2002. ‘आधुनिक’ भारत के इतिहास का एक और काला दिन. इसी दिन इस ‘स्वतंत्र’ और “धर्मनिरपेक्ष” देश में सुबह 7:43 बजे गुजरात के गोधरा स्टेशन पर इसी देश के 58 नागरिकों (23 पुरुषों, 15 महिलाओं और 20 बच्चों) को साबरमती एक्सप्रेस के कोच S-6 में ज़िंदा जला दिया गया. उनका ‘अपराध’ शायद […] Read more »
शख्सियत समाज बलबीर सिंह सीचेवालः जिन्होंने नदी को नई जिंदगी दी February 23, 2012 / February 23, 2012 by हिमांशु शेखर | 1 Comment on बलबीर सिंह सीचेवालः जिन्होंने नदी को नई जिंदगी दी हिमांशु शेखर भारत में आम तौर पर यह देखा गया है अगर किसी पर धर्म और आध्यात्म का रंग काफी ज्यादा चढ़ जाए तो या तो वह यहां-वहां घूमकर प्रवचन करने लगता है या फिर कहीं एकांत में जैसे किसी पहाड़ आदि पर जाकर साधना में लीन हो जाता है. इस देश में ऐसे लोगों […] Read more » Bakbir Singh DSichewal बलबीर सिंह सीचेवाल
समाज राम-रहीम के पचडे में कहां खो गया इंसां February 17, 2012 / February 18, 2012 by वीरभान सिंह | 1 Comment on राम-रहीम के पचडे में कहां खो गया इंसां वीरभान सिंह RAMJAAN में राम और दीपावली में बसते हैं अली हिन्दू-मुसलमान को छोडो, हम बनकर करो भारत निर्माण RAMJAAN और दीपावली, पूरा भारत देश मनाता है, लेकिन क्या किसी ने भी इन शब्दों में छिपे गूढ रहस्य को समझने का प्रयास किया है। धर्मों के ठेकेदारों ने तो सदैव जातिवाद और संप्रदायवाद की विष […] Read more » hindu muslim राम-रहीम
लेख समाज गरीबी का आधुनिकीकरण February 14, 2012 / February 14, 2012 by गंगानन्द झा | Leave a Comment ऐसा बताया जाता रहा है कि बढ़ते हुए परिवर्द्धन के साथ-साथ अभाव की स्थिति में कमी आती जाएगी तथा अन्त में विश्व के हर कोने से गरीबी समाप्त हो जाएगी। परिवर्द्धन (Development) और गरीबी के बीच विलोमानुपाती सम्बन्ध समझा जाता रहा है। पर यह परी-कथा ही निकली। अमीर और गरीब के बीच के फर्क के […] Read more » modernisation of poverty poverty आधुनिकीकरण गरीबी गरीबी का आधुनिकीकरण
समाज देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनते भिखारी वेशधारी February 13, 2012 / February 13, 2012 by निर्मल रानी | 1 Comment on देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनते भिखारी वेशधारी निर्मल रानी हमारे देश में एक अनुमान के अनुसार एक करोड़ से भी अधिक लोग भीख मांगकर अपना जीवन यापन करते हैं। इन भिखारियों में जहां तमाम मजबूर,गरीब,लाचार,शारीरिक रूप से असहाय व अति वृद्ध ऐसे लोग शामिल हैं जो वास्तव में दया के पात्र होते हैं वहीं इनमें काफी बड़ी संख्या ढोंगी,निखट्टू,हट्टे-कट्टे,आलसी व अपराधी प्रवृति […] Read more » beggers देश की सुरक्षा के लिए खतरा भिखारी वेशधारी
लेख समाज बाजार, तकनीकी और नैतिक पतन February 12, 2012 / February 12, 2012 by राजीव गुप्ता | Leave a Comment राजीव गुप्ता जयप्रकाश नारायण ने अपनी एक पुस्तक “समाजवाद से सर्वोदय की ओर” में लिखा है कि “विज्ञानं ने अखिल विश्व को सिकोड़कर एक पड़ोस बना दिया है !” इस बात की सत्यता एवं प्रामाणिकता वर्तमान परिदृश्य की भौतिकता के आधुनिक दौर में हुए तकनीकी विकास को देखकर लगाया जा सकता है ! मसलन देश […] Read more » development in science and technology तकनीकी नैतिक पतन बाजार
समाज मुख्यमंत्री का मौनव्रत February 6, 2012 / February 6, 2012 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भ्रष्टाचार-निषेध से जुड़े एक लंबित विधेयक को अनुमोदित कराने के लिए अपने संपूर्ण मंत्री मण्डल के साथ दिल्ली में मौनव्रत साधने की धमकी देने का जुमला छोड़ा है। मध्य-प्रदेश राज्यमंत्री परिषद् से पारित यह विधेयक भारत सरकार के गृह मंत्रालय में बीते एक साल से लटका हुआ […] Read more » Shivraj Singh Chauhan मुख्यमंत्री का मौनव्रत
समाज बदहाली का शिकार : घरेलु महिला कामगार February 5, 2012 / February 5, 2012 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | 1 Comment on बदहाली का शिकार : घरेलु महिला कामगार घरेलू जीवन के रोजमर्रा के तंत्र में कामवाली बाइयों के महत्व को किसी भी तरह से कम करके नहीं आंका जा सकता है। चाहे कामकाजी महिलाएं हों या खांटी घरेलू महिलाएं, कामवाली बाइयों के बिना उनके जीवन की तस्वीर पूरी नहीं उभरती है। कम से कम भारत में तो कामवाली बाइयों को बुनियादी आवश्यकता कहा […] Read more » maid servant घरेलु महिला कामगार बदहाली का शिकार
लेख समाज राइट टू रिकाल February 1, 2012 / February 1, 2012 by अब्दुल रशीद | 2 Comments on राइट टू रिकाल अब्दुल रशीद लोकतंत्र में कहा जाता है सत्ता जनता से जनता के लिए जनता के द्वारा चलता है। लेकिन क्या ऐसा होता है? आज जनता के वोट द्वारा सत्ता भले ही चुनी जाती है लेकिन न तो सत्ता जनता के हित में काम करती है और न ही जनता के भागीदारी को समझती है कारण […] Read more » Democracy Right to Recall राइट टू रिकाल लोकतंत्र
समाज इंसान और जानवर के बीच बढ़ता टकराव January 31, 2012 / January 31, 2012 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | 2 Comments on इंसान और जानवर के बीच बढ़ता टकराव डॉ. आशीष वशिष्ठ वन्य प्राणियों के गांवों एवं शहरों में प्रवेश, खेती-पालतू पशुओं को नुकसान पहुंचाने और मनुष्यों पर घातक हमला करने की घटनाएं देश भर में भी बढ़ रही हैं। वन क्षेत्रों के निकट के गांवों एवं कस्बों में ऐसी घटनाएं आए दिन हो रही हैं। वनों में रहने वाले बंदर जब-तब गांव और […] Read more » increasing conflict between human and animal increasing struggle between human and animals इंसान इंसान और जानवर के बीच बढ़ता टकराव जानवर के बीच बढ़ता टकराव
समाज सर्दी, सिहरन और एक दुखद सच्चाई ? January 31, 2012 / January 31, 2012 by वीरभान सिंह | 1 Comment on सर्दी, सिहरन और एक दुखद सच्चाई ? वीरभान सिंह यह हाड कंपाने वाली ठंड। बस, रजाई में दुबके पडे रहें और हाथ बाहर न निकालना पडे। अपना हाथ पानी में भले ही कटकर गिरता हुआ सा लगे, पर मां अपने हाथ से गरमा-गरम पकौडियां, मटर और आलू भरे पराठे देती रहे। चाय-काॅफी की गर्माहट मिलती रहे। ज्यादा शौक चढे तो चोक-चोराहों पर […] Read more » shivering people in cold unbeatable cold सर्दी सिहरन
महिला-जगत समाज यूपी के कामांधों की कलंक कथा और चुनावी घोषणा पत्र January 31, 2012 / January 31, 2012 by वीरभान सिंह | 4 Comments on यूपी के कामांधों की कलंक कथा और चुनावी घोषणा पत्र बलात्कार पीडिताओं को नौकरी नहीं इंसाफ चाहिए कोशिश ये करो प्रदेश में बलात्कार ही ना हो वीरभान सिंह उत्तर प्रदेश में सत्ता की लडाई जीतने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इस बार महिला कार्ड खेला है। हाल ही में सिद्धार्थ नगर की चुनावी सभा में योजनाओं की घोषणाओं का वायदी […] Read more » government jobs to raped women चुनावी घोषणा पत्र बलात्कार पीडिता लडकी को सरकारी नौकरी यूपी के कामांधों की कलंक