लेख समाज फ़ेसबुक से दुःखी January 24, 2012 / January 24, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment आजकल हर कोई फ़ेसबुक से दुःखी है. सबसे ज्यादा दुःखी तो सरकार है. सरकार फ़ेसबुक से इतना दुःखी हो चुकी है कि वो इस पर बैन करने की बात कहने लगी है. और अब तो न्यायालय भी चीनी तर्ज पर फ़ेसबुक को ब्लॉक करने की धमकियाँ देने लगी है. उधर फ़ेसबुक में घुसे पड़े रहने […] Read more » Facebook फ़ेसबुक फ़ेसबुक से दुःखी
लेख समाज आस्था के नाम पर शोर से कब तक ब्लैकमेल किया जाता रहेगा ? January 24, 2012 / January 24, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment -इक़बाल हिंदुस्तानी अंधश्रध्दा और कर्मकांड के बहाने लोगों का जीना हराम मत करो! प्रैस काउंसिल के प्रेसीडेंट और न्यायविद मार्कंडेय काटजू का कहना है कि जब भारत वैज्ञानिक रास्ते पर था, तब उसने तरक्की की। साइंस के सहारे हमने विशाल सभ्यताओं का निर्माण हज़ारों साल पहले किया, जब अधिकतर यूरोप जंगलों में रहता था, उन […] Read more » Blackmail आस्था आस्था के नाम पर शोर ब्लैकमेल
समाज अभिव्यक्ति और धर्म की आजादी के मायने! January 18, 2012 / January 18, 2012 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 3 Comments on अभिव्यक्ति और धर्म की आजादी के मायने! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ राजस्थान की राजधानी जयपुर में ‘जयपुर फेस्टीवल’ में शीर्ष साहित्यकारों को आमन्त्रित किया गया था, जिनमें भारत मूल के ब्रिटिश नागरिक सलमान रुश्दी को भी बुलावा भेजा गया| सलामन रुश्दी की भारत यात्रा के विरोध में अनेक मुस्लिम संगठन आगे आये और सरकार द्वारा उनके दबाव में आकर सलमान रुश्दी को […] Read more » salman rushdi in India salman rushdi visit to India अभिव्यक्ति की आजादी के मायने धर्म की आजादी के मायने सलमान रुश्दी
समाज अनाज के उचित प्रबंधन से ही होगी खाद्य सुरक्षा January 16, 2012 / January 16, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment अनूप आकाश वर्मा संभव है….गरीबों को कानूनी खाद्य सुरक्षा देने की सोच के पीछे यही महत्वपूर्ण विचार रहा होगा कि हर व्यक्ति को भोजन का अधिकार मिले क्योंकि किसी भी भूखे आदमी के लिए जाहिर तौर पर राजनीतिक व अन्य अधिकारों का मतलब शून्य ही है| किसी भी मनुष्य के स्वस्थ जीवन की पहली शर्त […] Read more » proper menagement of food grains rottening food grains अनाज उचित प्रबंधन खाद्य सुरक्षा
समाज हम दूसरों को अपने हिसाब से क्यों चलाना चाहते हैं ? January 16, 2012 / January 15, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी ऐसा चूंकि संभव ही नहीं जिससे टकराव व हिंसा बढ़ रही है! लियो टॉलस्टाय ने कहा है कि हर आदमी दुनिया बदलने की तो सोचता है लेकिन खुद को बदलने की नहीं । एक बात हम सबकी ज़िंदगी में कॉमन है। वह यह है कि हम खुद से आगे पीछे देखने को तैयार […] Read more » live and let others live people need to control on others नियंत्रण
समाज बंधन मुक्त विवाह : डॉ. मधुसूदन January 7, 2012 / January 7, 2012 by डॉ. मधुसूदन | 14 Comments on बंधन मुक्त विवाह : डॉ. मधुसूदन डॉ. मधुसूदन उवाच Wedlock Unlocked An Inside Look at an Open Marriage By Redsy for YourTango49 पर आंशिक रूपसे आधारित काल के गर्भसे ,एक नया आविष्कार जन्म ले चुका है। सारे बन्धनों को तोडने वाले प्रगतिवादियों के लिए शुभ समाचार। ॥ विवाह को बंध मुक्त कर दो॥ An Inside Look at an Open Marriage अंदर […] Read more » An Inside Look at an Open Marriage marriage institution Wedlock Unlocked विवाह संस्था
लेख समाज महिला क्रू मेंबर्स के जीत के मायने(Air India crew members) January 4, 2012 / January 4, 2012 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ प्रेरणा दूबे भारतीय समाज में जाति के आधार पर भेदभाव, धर्म के आधार पर भेदभाव, प्रदेश के आधार पर भेदभाव, रूप-रंग के आधार भेदभाव, छोटे-ब़डे के आधार पर भेदभाव और अमीर-गरीब के आधार पर भेदभाव को देखकर लगता है। पता नहीं कि इसके धर्म-दर्शन कहां चले गए? सुना था कि शकों, हुणों, कुशाणों, पहलवों, […] Read more » crew members of AirIndia lady crew menbers in AirIndia महिला क्रू मेंबर्स के जीत
महिला-जगत लेख समाज आखिर कब रुकेंगी औरतों पर होती यातनाएं ? December 11, 2011 / December 15, 2011 by अन्नपूर्णा मित्तल | 12 Comments on आखिर कब रुकेंगी औरतों पर होती यातनाएं ? हमारा समाज पुरुष प्रधान देश है. यहाँ औरतें शुरू से ही जुर्म का शिकार होती रही हैं. शादी के पहले उस पर बेटी, बहन के नाम पर पाबंदी लगाई जाती है. थोड़ी सी आज़ादी पर ही उसके भाई, पिता, नाते रिश्तेदार घर की मर्यादाएं तोड़ने का आरोप लगा डालते हैं. वहीं शादी के बाद उसे […] Read more » torture on woman Woman woman suffering औरत यातनाएं
महत्वपूर्ण लेख समाज सेक्यूलरवाद या जिम्मीवाद : शंकर शरण November 1, 2011 / December 5, 2011 by शंकर शरण | 7 Comments on सेक्यूलरवाद या जिम्मीवाद : शंकर शरण संसद पर आतंकी हमले के मुख्य अपराधी मुहम्मद को फाँसी की सजा से मुक्त करने के लिए जम्मू-कश्मीर विधान सभा प्रस्ताव पास करने वाली थी। अभी भी उस की संभावना बनी हुई है। इस पर भारतीय मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग लगभग मौन रहा। मानो उसे इस से कोई मतलब न हो। कल्पना करें, यदि किसी […] Read more » secularism जिम्मीवाद सेक्यूलरवाद
महत्वपूर्ण लेख समाज मानसिक जातियां -भाग तीन : डॉ. मधुसूदन November 1, 2011 / January 19, 2012 by डॉ. मधुसूदन | Leave a Comment Castes of Mind पर आधारित द्रविडि़यन -आर्यन भेद का धूर्त निर्माता- मिशनरी रॉबर्ट काल्डवेल (१) रॉबर्ट काल्डवेल रॉबर्ट काल्डवेल जब पहले पहल, (१८३८ में ) दक्षिण भारत आया , तब हमारे नये धर्मांतरित ईसाइयों को ”चावल भूखे ख्रिष्टान” (Rice Christians) कहकर शासक (अंग्रेज़ ) भी उनका तिरस्कार किया करते थे। हर वर्ष काल्डवेल अपनी […] Read more » Castes of Mind मानसिक जातियां
धर्म-अध्यात्म समाज करते किस मुँह से हो गुरबत की शिकायत गालिब… October 22, 2011 / December 5, 2011 by शंकर शरण | 14 Comments on करते किस मुँह से हो गुरबत की शिकायत गालिब… शंकर शरण सच्चर समिति, रंगनाथ मिश्र आयोग, आदि से लेकर सोनिया जी के सनकी सलाहकार तक सभी प्रभावशाली लोग भारत में मुसलमानों के प्रति ‘भेद-भाव’ को ही उनके पिछड़ने की वजह मान कर चलते हैं। तदनुरूप आंकड़े ढूँढते और तर्क गढ़ते है। पर जरा पूरी दुनिया पर निगाह डालें। पूरी दुनिया में लगभग 60 इस्लामी […] Read more » Muslim मुसलमान
समाज आदिवासी प्रगति : ग्यारह अवरोधक October 13, 2011 / December 5, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 17 Comments on आदिवासी प्रगति : ग्यारह अवरोधक डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आजादी के तत्काल बाद संविधान में सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक रूप से सर्वाधिक कमजोर जिन दो वर्गों या समूहों को चिह्नत किया गया था, उनमें एक आदिवासी वर्ग है, जिसे संविधान में ‘अनुसूचित जनजाति’ कहा गया था, संविधान में उसे दलित के समकक्ष खड़ा कर दिया था| इसके चलते वर्तमान में […] Read more » आदिवासी