राजनीति विविधा भारत बंद लोकलुभावन या लोकहितकारी June 4, 2012 / June 4, 2012 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफरी देश के किसी न किसी राजनैतिक दल द्वारा समय-समय पर आहूत किया जाने वाला भारत बंद का प्रभाव गत् 31 मई को भी देश के बड़े हिस्से में देखने को मिला। इस बार का भारत बंद का आह्वान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ-साथ वामपंथियों द्वारा भी किया गया था। मज़े […] Read more » भारत बंद भारत बंद लोकलुभावन
विविधा वैचारिक जड़ता लाती ही कुंठा May 30, 2012 / May 31, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment राजस्थान के दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में एडिटोरियल पेज के हैडर पर वाल्तेयर की उक्ति आती है कि हो सकता है में आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूंगा। असल में यह उक्ति स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी को यह प्रतिबिंबत करती है। यह […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान
विविधा अबूझमाड़ में पीडीएस, एक नई सुबह की आहट May 29, 2012 / May 29, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment संजय शेखर उसने कहा कि 55 किलोमीटर से राशन दूकान पर चावल लेने आता है तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। फिर सुबह के सात बजे ही ओरछा स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दूकानों पर सैकड़ों अबूझमारियां आदिवासियों की कतार ने और भी आश्चर्य में डाल दिया। ठंड का मौसम होने की वजह से अभी सूरज […] Read more » अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ पीडीएस
विविधा चलो, कुछ समाजसेवा ही हो जाए May 29, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार हर दिन मिलने वाले शर्मा जी पिछले एक सप्ताह से नहीं मिले, तो मैंने फोन मिलाया। पता लगा कि वे हैं तो नगर में ही; पर जरा व्यस्त हैं। खैर, दो दिन बाद उनके दर्शन हो ही गये। – क्या बात है शर्मा जी, इतनी व्यस्तता ठीक नहीं है कि मित्रों को ही […] Read more » समाजसेवा
विविधा ‘मधुभाई की रचनाएं शोधपरक और प्रेरणाप्रद होती हैं’ May 28, 2012 / May 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on ‘मधुभाई की रचनाएं शोधपरक और प्रेरणाप्रद होती हैं’ प्रो. (डॉ.) मधुसूदन जी अमेरिका में रहते हैं और प्रारंभ से ही प्रवक्ता डॉट कॉम से जुड़े हुए हैं। अपनी सारगर्भित टिप्पणियों से लेखकों का उत्साह बढ़ाने में सबसे आगे रहनेवाले मधुसूदन जी हिंदी भाषा के अनन्य भक्त हैं। भाषा विज्ञान को लेकर प्रवक्ता पर लिखे उनके लेख काफी सराहे गए। पिछले दिनों उनके लेख […] Read more »
विविधा पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्वर चतुर्वेदी May 22, 2012 / May 22, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्वर चतुर्वेदी सत्यमेव जयते सीरियल की इन दिनों खूब चर्चा है। सामाजिक समस्याओं पर समाज का ध्यान खींचने वाले इस सीरियल को लोग विभिन्न चैनलों पर देख रहे हैं। यह पहला ऐसा सीरियल है जो अनेक चैनलों पर एक साथ दिखाया जा रहा है। जिन चैनलों पर दिखाया जा रहा है उनकी रेटिंग में इससे इजाफा हुआ […] Read more » सत्यमेव जयते
विविधा औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो May 22, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो विमल कुमार सिंह ‘आइएएस’ की व्यवस्था को जितना जल्दी समाप्त कर दिया जाए, उतना अच्छा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आइएएस की व्यवस्था समाप्त होते ही देश में खुशहाली छा जाएगी। वास्तविकता यह है कि ‘आइएएस’ हमें विरासत में मिले औपनिवेशिक ढांचे का एक हिस्सा भर है। देष में खुशहाली तब आएगी जब हम […] Read more » IAS आइएएस
विविधा आखिर कहां जा रहे हैं हम May 22, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment नरेश शांडिल्य ‘चार रईसजादों ने चलती कार में एक लड़की से रात भर किया बलात्कार’, ‘पॉश कालोनी की तीन लड़कियां वेश्यावृत्ति का धंधा करती गिरफ्तार’, ‘नशे में धुत्त अमीरजादों ने पटरी पर सो रहे चार लोगों पर अपनी कार चढ़ाई’, ‘नेताजी के बिगड़ैल शहजादे ने पुलिस वाले को पीटा’, …ऐसी खबरें अक्सर हम अखबारों में […] Read more » युवा
विविधा जनसांख्यिकीय परिवर्तन गंभीर संकट की चेतावनी May 21, 2012 / June 6, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment राजेन्द्र चड्ढा भारत में हिन्दू और अन्य मतावलंबियों की जनसंख्या में तेजी से बढ़ रहे असंतुलन ने सीमावर्ती और मध्य भारत में तीव्रता से सर उठा रही सामरिक, गंभीरता को रेखांकित किया है। 1951 से प्रत्येक 10 वर्षों पर होने वाली हर जनगणना हिन्दू और अन्य मतावलंबियों में बढ़ते जनसांख्यिकीय अंतर, जो हिन्दुओं की […] Read more » जनसांख्यिकीय परिवर्तन
विविधा बाजार और मीडिया के बीच भारतीय भाषाएं May 20, 2012 by संजय द्विवेदी | 3 Comments on बाजार और मीडिया के बीच भारतीय भाषाएं हिंदी और भारतीय भाषाओं को लेकर समाज में एक अजीब सा सन्नाटा है। संचार व मीडिया की भाषा पर कोई बात नहीं करना चाहता। उसके जायज-नाजायज इस्तेमाल और भाषा में दूसरी भाषाओं खासकर अंग्रेजी की मिलावट को लेकर भी कोई प्रतिरोध नजर नहीं आ रहा है। ठेठ हिंदी का ठाठ जैसे अंग्रेजी के आतंक के […] Read more » भारतीय भाषा हिंदी
विविधा ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार May 17, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment चौधरी मोहम्मद अयूब कटारिया धरती पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सीमावर्ती जिला कुपवाड़ा अपने अतीत और वर्तमान कारणों से परिचय का मोहताज नहीं है। इसी जिले में स्थित ब्लॉक करालपूरा जिसके बारे में किदवंती है कि यहां कई सदी पूर्व शलुरा से करालपूरा तक एक बहुत बड़ा बाजार हुआ करता था मगर किसी […] Read more » करालपूरा कश्मीर
विविधा कब जगमग होगा गांव May 17, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment सलमान अब्दुस समद बिजली की किल्लत से जुझ रहे बिहार को राज्य में स्थापित एनटीपीसी से पचास प्रतिशत बिजली देने के केंद्र का आश्वासन राज्य के लोगों के लिए राहत देने वाली खबर है। इसे राजनीतिक हित से उपर उठकर राज्य के लिए राजनीतिक दलों के प्रयास का परिणाम ही कहा जाएगा। इस वक्त राज्य […] Read more » गांव