विविधा अपमान को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत August 9, 2011 / December 7, 2011 by वीरेन्द्र जैन | 4 Comments on अपमान को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत वीरेन्द्र जैन यह परम्परा सी बन गयी है कि प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बाद हर क्षेत्र से दो एक समाचार ऐसे आते हैं जिनमें राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का समाचार होता है। यह अपमान शाम को झंडा न उतारने या झंडे को उल्टा फहराये जाने से सम्बन्धित होता है। इस खबर […] Read more » अपमान को पुनर्परिभाषित
विविधा ये कैसी आजादी August 8, 2011 / December 7, 2011 by पंकज व्यास | 6 Comments on ये कैसी आजादी पंकज व्यास चाहे लोकपाल बिल हो, या काला धन भारत में लाने की मांग, इस आजाद (?)देश में विरोध के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। अन्ना हजारे से लेकर बाबाराम देव तक जो घटनाक्रम चला, व चल रहा है, उससे यह सवाल सहज ही उठ जाता है कि क्या आजादी का पंछी […] Read more » independence आजादी
विविधा गरीबी हटाने के सरकारी तरीके August 7, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव वे जिला प्रमुख है। उनके कार्यालय के ऊपर कोई मंजिल नही है पर उन्हें ऊपर से आदेश आते रहते हैं। इस बार कुछ इस तरह का आदेश आया। गरीबी हटाओ मंत्रालय, भारत सरकार आदेश ः- आपको ज्ञात है कि 33 प्रतिशत भारत गरीब है। इससे प्रगति की रफ्तार असंतुलित हो गई […] Read more » poverty गरीबी
कला-संस्कृति विविधा सांस्कृतिक साम्राज्यवाद August 5, 2011 / August 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on सांस्कृतिक साम्राज्यवाद कैलाश बुधवार देश को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो जाने के बाद भी अक्सर यह दुख दुहराया जाता है कि हमारी दास मानसिकता नहीं गई पर मेरा भय एक नई दासता के बारे में है। पिछले साम्राज्यवादी कंगूरे ढह गए पर हम बेसुधी में एक नए साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेके जा रहे हैं। लाखो […] Read more » सांस्कृतिक साम्राज्यवाद
विविधा भारतीय सनातन परंपरा के रचनाकार धर्मपाल August 5, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डा. अमित शर्मा एक सनातनी कर्मवादी के रूप में श्री धर्मपाल ने एक भरपूर जिन्दगी जी और एक गरिमामय मृत्यु को प्राप्त हुए। 1919 में जलियांवाला बाग की घटना की राख और 1920 में तिलक महाराज की भस्म के बीच महात्मा गांधी ने अपनी एक जगह बनायी और भारत में स्वराज पाने की अथक कोशिश […] Read more » Dharam धर्मपाल
विविधा मीणा जी, ब्राह्मणों के मूल देश के बारे में जरा बताएँगे! August 5, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 10 Comments on मीणा जी, ब्राह्मणों के मूल देश के बारे में जरा बताएँगे! कौशलेन्द्र प्रिय भारतीय अनार्य ……..एवं …..विदेशी आर्य बंधुओ ! सादर नमन ! ! ! निवेदन है कि मीणा जी के विचारों पर आक्रोशित होने की नहीं बल्कि चिंतित होने की आवश्यकता है….कारण यह है कि यह मात्र मीणा जी का ही नहीं बल्कि मीणा जी जैसे अनेकों लोगों का विचार है…अतः उनके विचारों की उपेक्षा […] Read more »
विविधा बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने: भाग 8 August 4, 2011 / December 7, 2011 by रामदास सोनी | Leave a Comment रामदास सोनी काला पन्ना जो लिखा जा रहा है पिछली कड़ी में हमने इस्लामिक आतंकवाद के बारें में संक्षेप में चर्चा की। विचार श्रृंखला के इस अंतिम भाग में अब दूसरे प्रकार के आंतकवाद के बारें में थोड़ा सा चिंतन करें। भारत में मार्क्सवाद की विचारधारा से उपजे हुए विभिन्न संगठनों के आंतकवादी दस्ते सामाजिक […] Read more » Indian History भारतीय इतिहास
विविधा वीर जवानों से ऐसा बर्ताव करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है… August 3, 2011 / December 7, 2011 by सुरेश चिपलूनकर | 1 Comment on वीर जवानों से ऐसा बर्ताव करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है… सुरेश चिपलूनकर अपनी जान पर खेलकर देश के दुश्मनों से रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सरकार और नौकरशाही का संवेदनहीन रवैया जब-तब सामने आता रहता है… 1) संसद पर हमले को नाकाम करने वाले जवानों की विधवाओं को चार-पाँच साल तक चक्कर खिलाने और दर्जनों कागज़ात/सबूत मंगवाने के बाद बड़ी मुश्किल से पेट्रोल पम्प […] Read more » Democracy लोकतंत्र
विविधा ‘सचमुच, आपकी नीयत ही सही नहीं है डॉ. मीणा जी’ August 2, 2011 / December 7, 2011 by डॉ. राजेश कपूर | 3 Comments on ‘सचमुच, आपकी नीयत ही सही नहीं है डॉ. मीणा जी’ डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ की टिप्पणी के जवाब में डॉ. राजेश कपूर की टिप्पणी डॉ. मीना जी, आपकी नीयत पर पाठकों को बार-बार संदेह होता रहा है. आज आपने एक बार फिर से साबित कर दिया कि सचमुच आपकी नीयत ही सही नहीं है. मेरे और इंजी.दिवस गौड़ जी के उकसावे में (सम्पादक महोदय के अनुसार मेरे उकसावे में) […] Read more »
विविधा लोकपाल: अब विपक्ष की बारी July 30, 2011 / December 7, 2011 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on लोकपाल: अब विपक्ष की बारी प्रमोद भार्गव आखिरकार सरकार ने जन आकांक्षाओं के विपरीत लोकपाल विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। मसौदा सामने आने के बाद सब जान गए हैं कि यह विधेयक नख-दंत विहीन है और इसके आने अथवा नहीं आने से भ्रष्टाचार पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। हालांकि केंद्र से ऐसा ही प्रारूप लाए जाने […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार लोकपाल विधेयक
विविधा मैं हिन्दू होने पर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करता हूँ : डॉ. मीणा July 30, 2011 / December 7, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 17 Comments on मैं हिन्दू होने पर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करता हूँ : डॉ. मीणा प्रवक्ता डॉट कॉम के लोकप्रिय व नियमित कंट्रीब्यूटर डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ ने यह टिप्पणी डॉ. कुसुमलता केडिया के लेख ‘ईसाई धर्म और नारी मुक्ति’ पर एक टिप्पणीकार डॉ. राजेश कपूर के उकसावे पर की थी। ‘प्रवक्ता’ पर प्रकाशित डॉ. मीणा के लेखों पर लंबी चर्चा होती रही है। उनके विचार व व्यक्तित्व को लेकर […] Read more » hindu हिन्दू
विविधा फूट डालो और राज करो July 30, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार संप्रग सरकार एक नया विधेयक ”साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम पास करने जा रही है। इसका उद्देश्य साम्प्रदायिक, घटनाओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाना बताया जा रहा है। पर वास्तविकता में इस कानून का आशय है-हिन्दू आक्रामक है, तथा मुस्लिम ईसाई तथा दूसरे अल्पसंख्यक पीड़ित है। इस प्रस्तावित विधेयक में ऐसा […] Read more » Communal violence bill साम्प्रदायिक एवं लाक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक