विविधा अंडमान : बदलाव की बयार के तीस साल May 27, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -एस. बालाकृष्णन बंगाल की खाड़ी के पूर्व में स्थित भारत के पन्ना द्वीपों की यह दूसरी यात्रा थी। जब इंडियन एयरलाइन्स का जहाज वीर सावरकर हवाई अड्डे पर उतरा तो तीस साल पहले के पोर्ट ब्लेयर की छवि दिमाग पर छायी हुई थी। उस समय का जीवन स्मृति पटल पर अंकित था। अतीत की छवि […] Read more » Andman अंडमान
विविधा हमारे देश की सारी समस्या का हल – हिन्दी है May 27, 2010 / December 23, 2011 by सतीश कुमार आर. रावत | 5 Comments on हमारे देश की सारी समस्या का हल – हिन्दी है -सतीश कुमार आर. रावत “हमारा देश सन 1947 में आजाद हुआ” यह शब्द हमें हर जगह और हर दिन सुनने को मिलता है पर यह है नहीं। क्या आपने कभी सोचा है कि चीन, जापान, अमेरीका, ब्रिटेन आदि देश इतनें विकसित क्यों हैं? इसका एक छोटा जवाब (उत्तर) है, कि उन्हों ने अपनी मात्र भाषा […] Read more » hindi हिंदी
विविधा नंदीग्राम से वेदांत विश्वविद्यालय तक- सरकारी दमन की एक ही गाथा May 24, 2010 / December 23, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 2 Comments on नंदीग्राम से वेदांत विश्वविद्यालय तक- सरकारी दमन की एक ही गाथा -डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री 12 मई 2004 को मुम्बई में वर्ली में रहने वाले चार लोगों ने मिलकर भारतीय कम्पनी अधिनियम की धारा 25 के अन्तर्गत स्टरलाईट फाउंडेशन का पंजीयन करवाया। इस धारा के अंतर्गत पंजीयन होने वाली कम्पनियां प्राइवेट होती हैं और उनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि जनसेवा करना होता है। फाउंडेशन का […] Read more » Vedant University वेदांत विश्वविद्यालय
विविधा अंग्रेजी की रोटी में जहर May 22, 2010 / December 23, 2011 by विश्वमोहन तिवारी | 18 Comments on अंग्रेजी की रोटी में जहर –एयर वाइस मार्शल विश्वमोहन तिवारी जब भी भारत में अंग्रेजी भाषा की भूमिका पर चर्चा होती है विद्वान लोग अक्सर प्रश्न करते हैं कि यह कैसे कहा जा सकता है कि ‘अंग्रेजी भाषा ने पारिवारिक प्रेम के स्थान पर प्रत्येक सदस्य को मात्र अपने स्वार्थों के लिये ही उत्तरदायी बना दिया है? नारी स्वातंत्र्य के […] Read more » National Language राष्ट्रभाषा हिंदी
विविधा बहुमुखी प्रतिभा के धनी – भैरोंसिंह शेखावत May 21, 2010 / December 23, 2011 by विनोद बंसल | 1 Comment on बहुमुखी प्रतिभा के धनी – भैरोंसिंह शेखावत – विनोद बंसल 23 अक्टूबर 1923 को राजस्थान के सीकर जिले के खाचारियावास गांव में अध्यापक श्री देवी सिंह शेखावत के घर जन्मे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत बहुमुखी प्रतिभा व बहुआयामी व्यक्तित्व के घनी थे। श्री भैरो सिंह ने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से सिर्फ राजस्थान ही नहीं, […] Read more » Versatility बहुमुखी प्रतिभा
विविधा माथे की बिन्दी- हिन्दी (संविधान, संसद और हम) May 21, 2010 / December 23, 2011 by रत्नेश त्रिपाठी | 1 Comment on माथे की बिन्दी- हिन्दी (संविधान, संसद और हम) -रत्नेश त्रिपाठी एक प्रतिष्ठित पत्रिका में हिन्दी के ऊपर देश के कुछ बुद्धिजीवियों का विचार पढ़ा, आश्चर्य तब अधिक हुआ जब कुछ युवाओं के साथ अन्य तथाकथित बुद्धिजीवियों नें हिन्दी की अंग्रेजी की पैरवी की। हम इस स्थिति के लिए दोष किसे दें। संविधान को, संसद को, सरकार को, लोक प्रशासकों को या खुद को, […] Read more » hindi हिन्दी
विविधा हृदय प्रदेश के माथे पर कुपोषण का कलंक May 21, 2010 / December 23, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on हृदय प्रदेश के माथे पर कुपोषण का कलंक -लिमटी खरे समूचे देश में कुपोषित बच्चों की खासी तादाद देखने को मिल रही है। यह आज की कहानी नहीं है, आजादी के पहले से ही देश में बच्चों को पर्याप्त और पोष्टिक भोजन न मिल पाने के चलते उनका विकास अवरूद्ध होता रहा है। देश में कुपोषित बच्चों की तादाद में तेजी से इजाफा […] Read more » Madhya Pradesh कुपोषण मध्यप्रदेश
विविधा सिर्फ नरमुंडों की गिनती नहीं लोकजीवन का आईना भी May 20, 2010 / December 23, 2011 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment -संजय द्विवेदी देश में दुनिया की विशालतम जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है। सही अर्थों में जनगणना का आशय सिर्फ नरमुडों की गितनी की कवायद नहीं है वरन अपने समाज और लोकजीवन को, उसकी खुशहाली, बदहाली और विकास के मानकों का रेखांकन भी है। हर 10 साल पर की जाने वाली जनगणना के निष्कर्षों […] Read more » Census ओबीसी जनगणना जनगणना
विविधा फिर चोर निकला एक और ‘सिकंदर’ May 20, 2010 / December 23, 2011 by निर्मल रानी | 2 Comments on फिर चोर निकला एक और ‘सिकंदर’ -निर्मल रानी गत् दो दशकों से तकनीकी शिक्षा विशेषकर आयुर्विज्ञान अथवा चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में जैसा आर्थिक उछाल देखा जा रहा था उसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आमतौर पर यह बात प्रचलित हो चुकी थी कि मेडिकल शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को मेडिकल कॉलेज की प्रतिष्ठा तथा प्रसिध्दि के […] Read more » Ketan Desai केतन देसाई
विविधा सार्थक पहल जल सेवा : पानी ही अमृत है May 19, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments on जल सेवा : पानी ही अमृत है -फ़िरदौस ख़ान भारत में हमेशा से ही सेवा की परंपरा रही है। जल सेवा भी इसी संस्कृति से प्रेरित है। उपनिषद में कहा गया है कि ‘अमृत वै आप:’ यानि पानी ही अमृत है। इसके अलावा पानी को ‘शिवतम: रस:’ यानि पेय पदार्थों में सबसे ज्यादा कल्याणकारी बताया गया है। गरमी के मौसम में प्यासे […] Read more » Water Service जल सेवा
विविधा हिंदी भारत की आत्मा है May 13, 2010 / December 23, 2011 by डॉ. सौरभ मालवीय | 22 Comments on हिंदी भारत की आत्मा है -सौरभ मालवीय भारतीय समाज में अंग्रेजी भाषा और हिन्दी भाषा को लेकर कुछ तथा कथित बुद्धिजीवियों द्वारा भम्र की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। सच तो यह है कि हिन्दी भारत की आत्मा, श्रद्धा, आस्था, निष्ठा, संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई है। बोली की दृष्टि से संसार की सबसे दूसरी बड़ी बोली हिन्दी […] Read more » hindi राष्ट्रभाषा हिंदी
विविधा राष्ट्रमण्डल के निहितार्थ May 12, 2010 / December 23, 2011 by बालमुकुन्द पाण्डेय | 1 Comment on राष्ट्रमण्डल के निहितार्थ -बालमुकुन्द पाण्डेय चित्रकूट में भरत मिलाप का दृश्य जब सामने आता है तो देखने को मिलता है कि भरत के साथ आयी हुई सेना को देखकर लक्ष्मण का मन विकृत हो जाता है और वे भरत के सेना पर आक्रमण करने के लिए आक्रोशित होकर श्रीराम जी से अनुमति मांगते हैं। स्वभाव से शान्त व […] Read more » Commonwealth राष्ट्रमण्डल