महिला-जगत मर्दवादी महिषासुर और स्त्रीवादी दुर्गा – सारदा बनर्जी January 12, 2013 by सारदा बनर्जी | Leave a Comment लोग स्त्री पर जब भी बात करते हैं तो उसे मां, बहन, बीवी, चाची, बुआ, ताई के नज़रिए से देखने पर ज़ोर देते रहते हैं। लेकिन वे स्त्री को एक नागरिक के नज़रिए से नहीं देख पाते। एक स्त्री की सबसे अहम और आधुनिक पहचान नागरिक की पहचान है। वह मां, बहन, बीवी, चाची से […] Read more » नारीवाद मर्दवाद
महिला-जगत महिला विरोधी मानसिकता रखने वालों का महिलाएं करें बहिष्कार January 11, 2013 by निर्मल रानी | 1 Comment on महिला विरोधी मानसिकता रखने वालों का महिलाएं करें बहिष्कार निर्मल रानी नई दिल्ली में गत् 16 दिसंबर की रात एक 23 वर्षीय छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म तथा उसकी सिंगापुर में हुई मौत के बाद जहां देश व दुनिया में इसकी घोर निंदा की जा रही है तथा ऐसे बलात्कारियों के विरुद्ध कठोरतम सज़ा का प्रावधान किए जाने की मांग की जा रही […] Read more »
महिला-जगत महिला आंदोलन की आयातित शब्दावली – मधु किश्वर January 5, 2013 / January 5, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 5 Comments on महिला आंदोलन की आयातित शब्दावली – मधु किश्वर किसी भी सामाजिक मर्ज की दवा करने के लिए उस समाज की नब्ज को ढंग से पकड़ना पड़ता है। किसी डॉक्टर की चाहे नीयत जितनी भी अच्छी हो लेकिन मान लीजिए वह किसी पीलिया के मर्ज को निमोनिया मानकर इलाज शुरू कर दे तो जाहिर है, ऐसे मरीज का बेड़ा गर्क ही होगा। या फिर […] Read more »
महिला-जगत स्त्री-भाषा – सारदा बनर्जी December 26, 2012 by सारदा बनर्जी | 3 Comments on स्त्री-भाषा – सारदा बनर्जी स्त्री की भाषा पुरुष की भाषा से स्वभावत: भिन्न होती है। स्त्री भाषा के मानदंड पुरुष भाषा के मानदंड से बिल्कुल अलग होते हैं। चाहे ‘पाठ’ के आधार पर कहें या बोलचाल की भाषा के आधार पर। स्त्री पाठ का यदि ठीक-ठीक विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इसकी प्रकृति पुरुष पाठ […] Read more »
महिला-जगत सभ्य समाज के निर्माण की चुनौती- अरविंद जयतिलक December 23, 2012 by अरविंद जयतिलक | 1 Comment on सभ्य समाज के निर्माण की चुनौती- अरविंद जयतिलक औरत को भोग और वासना का उपनिवेश समझ रखे हैवानों की दरिंदगी और अघोरतम् कृत्यों से देश एक बार फिर शर्मसार हुआ है। घटना देष की राजधानी दिल्ली की है जहां चलती बस में ड्राइवर और उसके साथियों द्वारा एक छात्रा से गैंगरेप किया गया और फिर मारपीट कर सड़क पर फेंक दिया गया। दिल […] Read more » बलात्कार
महिला-जगत बलात्कारियों से जूझें, भले ही जान चली जाए December 23, 2012 / December 23, 2012 by गिरीश पंकज | 6 Comments on बलात्कारियों से जूझें, भले ही जान चली जाए गिरीश पंकज दिल्ली में चलती बस में युवती से सामूहिक बलात्कार, छत्तीसगढ़ में एक पाँच साल की बच्ची से दुष्कर्म। ऐसी घटनाएँ समाज को दहला देती हैं, लोग गुस्से में भर कर सड़कों पर उतर आते हैं और धीरे-धीरे गुस्सा ‘बुद्धू बक्से’ (टीवी) के सम्मोहन में कहीं खो जाता है। दिल्ली के सामूहिक बलात्कारी पकड़े […] Read more » बलात्कार
महिला-जगत पुसंवाद को कितना डिस्टर्ब करता है स्त्रीवादी सोच – सारदा बनर्जी December 17, 2012 by सारदा बनर्जी | 9 Comments on पुसंवाद को कितना डिस्टर्ब करता है स्त्रीवादी सोच – सारदा बनर्जी क्या वजह है कि कोई स्त्री लेखिका जब पितृसत्ताक समाज के पुंसवादी रवैये की आलोचना करती हैं तो उन्हें पुरुषों की कटुक्ति का सामना करना पड़ता है? हमारा समाज अपने रवैये में बेहद पुंसवादी है और इस पुंसवाद के प्रभाव को स्त्रियां हर पल झेल रहीं हैं। लेकिन जब कोई स्त्री इन विषयों पर रौशनी […] Read more » स्त्री विमर्श
महिला-जगत तेजाब-पीड़िता सोनाली मुखर्जी और स्त्री-हिंसा – सारदा बनर्जी December 11, 2012 by सारदा बनर्जी | 3 Comments on तेजाब-पीड़िता सोनाली मुखर्जी और स्त्री-हिंसा – सारदा बनर्जी ऐसी वारदातें जो स्त्री के देह से होकर उसके मन तक को नारकीय यंत्रणा का नृशंस शिकार बना दे, देश के लिए शर्म हैं और ऐसे लोग जो इस तरह की गुनाहों के गुनहगार होते हैं , वे देश और समाज से बहिष्कृत किए जाने के योग्य हैं। इस संदर्भ में उल्लेखनीय है तेजाब हमले […] Read more »
महिला-जगत एकल परिवार और स्त्री – सारदा बनर्जी December 4, 2012 by सारदा बनर्जी | 4 Comments on एकल परिवार और स्त्री – सारदा बनर्जी आज के ज़माने में स्त्रियों के लिए एकल परिवार एक अनिवार्य शर्त बन गया है। स्त्री की आत्मनिर्भरता और सामाजिक गतिशीलता के विकास के लिए एकल परिवार बेहद ज़रुरी है। संयुक्त परिवार में स्त्रियों के पास अपने लिए समय नहीं होता। अपने आप को समझने और अपनी प्रतिभाओं के विकास का उन्हें बिल्कुल ही मौका […] Read more » एकल परिवार
महिला-जगत पितृसत्ताक समाज में पुंसवादी पर्वों के चंगुल में फँसीं स्त्रियां – सारदा बनर्जी November 29, 2012 by सारदा बनर्जी | 3 Comments on पितृसत्ताक समाज में पुंसवादी पर्वों के चंगुल में फँसीं स्त्रियां – सारदा बनर्जी भारत का पितृसत्ताक ढांचे में बना समाज अपने उत्सवों में भी बेहद पुंसवादी है। देखा जाए तो त्योहारों का अपना एक आनंद होता है। लेकिन आनंद के उद्देश्य से जितने भी त्योहारों या व्रतों की सृष्टि की गई है वे सारे आयोजन कायदे से पितृसत्ताक मानसिकता का ज़बरदस्त परिचय देता है। यह एक आम बात […] Read more »
महिला-जगत स्त्री-आधुनिकता विचारों में है या ‘जीन्स’ में – सारदा बनर्जी November 29, 2012 by सारदा बनर्जी | 1 Comment on स्त्री-आधुनिकता विचारों में है या ‘जीन्स’ में – सारदा बनर्जी आज अधिकतर भारतीय स्त्रियां प्रचलित भारतीय वस्त्रों की जगह जीन्स को वरीयता दे रही हैं। इसकी वजह है मार्केट में जीन्स का व्यापक तौर पर उपलब्ध होना और जीन्स का कम्फर्ट-लेबल । इसके अतिरिक्त जीन्स स्टाइलिश ड्रेस के रुप में भी माना जाता है। साथ ही यह आधुनिकता का भी परिचायक है। यही वजह है […] Read more »
महिला-जगत विकास के नाम पर विस्थापन झेलती आदिवासी महिलाएं November 16, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on विकास के नाम पर विस्थापन झेलती आदिवासी महिलाएं अशोक सिंह आदिवासी विद्रोहों के इतिहास में भले ही स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता है लेकिन आदिवासी औरतों के बलिदान की गाथाएं अब भी इतिहास की वस्तु नहीं बन पायी। पहले की तरह आज भी उनके सवाल, उनके मुद्दे हाशिए पर धकेले जाते रहे हैं। विकास विस्थापन और महिलाएँ एक ऐसा ही ज्वलंत और बुनियादी […] Read more » आदिवासी विस्थापन