परिचर्चा : यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार

कांग्रेसनीत यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं। कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेता भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। कांग्रेस के दोमुंहेपन की बानगी देखिए। दिल्‍ली में आयोजित कांग्रेस के 83 वें महाधिवेशन में कांग्रेस अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा पारदर्शिता और शुचिता के पक्ष में रही है जबकि वास्‍तविकता यह है कि वर्तमान संप्रग सरकार अपने कार्यकाल में अब तक 2,50,000 करोड़ से अधिक के घोटाले कर चुकी है।

कुछ प्रमुख घोटाले हैं :

आईपीएल घोटाला

आईपीएल खेल घोटाले ने केन्द्र सरकार के भ्रष्टाचार की कलई खोल दी। इस खेल में करीब 2000 करोड़ रूपये का घोटाला हुआ।

राष्‍ट्रमंडल खेल घोटाला

दिल्‍ली में आयोजित राष्‍ट्रमंडल खेल में हुए भ्रष्‍टाचार से पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हुई। खेल बजट जो शुरू में 2000 करोड़ रूपए का था, बढ़कर 70,000 करोड़ रूपए की भारी भरकम राशि का हो गया। इस खेल में लगभग 8 हज़ार करोड़ करोड़ का खिलवाड़ हुआ।

आदर्श सोसाइटी घोटाला

महाराष्‍ट्र में आदर्श सहकारी आवास घोटाले से कांग्रेस की बड़ी फजीहत हुई क्‍योंकि आवास सोसाइटी ने रक्षा सेनाओं में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कमिर्यों के कल्याण के लिए महाराष्ट्र सरकार से भूमि आवंटित किये जाने की मांग की थी। इस सोसाइटी में 102 आवंटी जिनमें 37 सैन्य अधिकारी शामिल थे।

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, 2जी स्‍पेक्‍ट्रम के आवंटन में उचित प्रक्रिया नहीं अपनाने से सरकारी खजाने को करीब एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इतनी रकम से देश के हर भूखे व्‍यक्ति का पेट अगले दस साल तक भरा जा सकता था।

विपक्षी राजग, वाम, अन्नाद्रमुक और सपा सदस्य 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन, आदर्श आवासीय सोसायटी और राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की। लेकिन कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग ठुकरा दी। इस मसले पर भारतीय संसद के इतिहास में बने अब तक के सबसे लंबे गतिरोध के बाद संसद का शीतकालीन सत्र बिना किसी खास काम काज के संपन्न हो गया। नौ नवंबर से शुरू इस सत्र के दूसरे ही दिन से जेपीसी की मांग को लेकर बना गतिरोध 13 दिसंबर को अंतिम दिन भी नहीं टूट पाया। इस सत्र के 23 दिनों में महज तीन घंटे ही सदन चल पाए और वह भी हंगामे के बीच।

जिस सरकार के कार्यकाल में इतने घोटाले हो रहे हों, उसके प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जब तक देश में भ्रष्टाचारियों पर सख्‍त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक विकसित भारत का सपना साकार नहीं होगा। आपके क्‍या विचार हैं।

45 thoughts on “परिचर्चा : यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार

  1. Gandhi met Chitragupta and asked him as to how his Three Monkeys are doing?

    Chitragupta said they are doing very well in India.

    The one who was blind has become the Law.

    The one who was deaf has become the Government.

    And the one who was dumb is very very happy as he has become the Prime Minister

  2. आपका लेख एक पक्षीय है। सारे राजनैतिक दलों में ऐसे लोग हैं जो भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। क्या भाजपा भ्रष्टाचार से अलिप्त है।भाजपा और भ्रष्टाचारः
    वर्तमान सरकार ने जब से हमें सूचना का अधिकार प्रदान किया है तब से भ्रष्टाचारियों के काले कारनामें सामने आ रहे हैं। यदि यह अधिकार जनता को पहले मिल गया होता तो भाजपानीत सरकार के आधे मंत्री जेल में होते। जिस पार्टी का अध्यक्ष रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद हो और पैसे के बारे में टिप्पण करे कि यह खुदा से कम नहीं, उस पार्टी के बाकी कितने लोगों ने रिश्वत खाई होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है। मीसा में बंदी होने के दौरान जिनके घर में चूल्हा भी मुश्किल से जलता था, वे एन.डी.ए. के शासन के दौरान अरबपति कैसे बन गए।
    जब कर्नाटक में भाजपा का शासन था और रेड्डी बंधुओं और तत्कालीन मुख्यमंत्री येदुरप्पा के भ्रष्टाचार के किस्से समाचार-पत्रों की सुर्खियाँ बन रहे थे, तब आडवाणीजी ने गडकरी से इन लोगों को हटाने के लिए कहा था। गडकरी ने आडवाणीजी की बात बहुत विलम्ब से मानी। परिणाम सबके सामने है।
    चूँकि आडवाणीजी ने येदुरप्पा को हटाने के लिए कहा था, इस कारण अब तमाम ऐसे भ्रष्ट लोगों को भाजपा में वापिस लाने की कोशिशें होंगी जिनको आडवाणीजी के कारण हटाया गया था। गडकरी ने कर्नाटक में भाजपा को धराशायी किया था। अब राजनाथ सिंह पूरे भारत से भाजपा को धराशायी करने के कार्य कर रहे हैं। क्या वे भाजपा को केवल गुजरात तक सिमटा देना चाहते हैं। अमित शाह को उत्तर-प्रदेश की बागडोर सौंपकर राजनाथ सिंह ने अपने से अधिक प्रभावी नेताओं को किनारे लगा दिया है। इसका क्या परिणाम होंगे, यह चुनावों के बाद पता चलेगा।
    भाजपा के अधिकांश प्रवक्ता टी. वी. के विविध चेनलों द्वारा संचालित बहसों में हर मुद्दे पर एक शब्द का प्रयोग अवश्य करते हैं। शब्द है, “शुचिता”। लगता है उनको यह शब्द उसी तरह रटाया गया है जैसे तोता पालने वाले अपने तोता को एक-दो शब्द रटा देते हैं और तोता उन रटे शब्दों का उच्चारण करता रहता है। बहस का मुद्दा चाहें कुछ भी हो, वे बार-बार शुचिता का उच्चारण जरूर करते हैं। लक्ष्मण बंगारू भाजपा पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता नहीं थे, वे पार्टी के अध्यक्ष थे। उन्होंने जो आचरण प्रस्तुत किया तथा जिसे भारत के लोगों ने टी.वी. पर अपनी आँखों से देखा और कानों से सुना, क्या यही शुचिता का प्रतिमान है। उत्तर-प्रदेश में बासपा से भ्रष्टाचार के लिए निकाले गए बाबू सिंह कुशवाहा को चुनाव के समय भाजपा में शामिल करने तथा भाजपा के पक्ष में प्रचार करना भाजपा की शुचिता है। उत्तर-प्रदेश के भाजपा के वर्तमान 47 विधायकों में से 25 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं और इनमें 14 विधायकों पर गम्भीर आरोप है। यह शुचिता ही तो है। कर्नाटक के येदियुरप्पा और रेड्डी बंधु, गुजरात के बाबूभाई बोखरिया और अमित शाह, मध्य प्रदेश के राघव, छत्तीसगढ़ के दिलीप सिंह जूदेव आदि-आदि शुचिता के उदाहरण हैं। यह तथ्य है कि प्रायः प्रत्येक राजनैतिक दल के संसद सदस्य एवं विधायकों पर गम्भीर अपराध के प्रकरण न्यायालय के विचाराधीन हैं मगर यदि हम तुलनात्मक अध्ययन करें तो इस मामले में भाजपा का स्थान पहले नम्बर पर आता है। भाजपा के 118 निर्वाचित माननीयों पर गम्भीर अपराध के केसिस दर्ज हैं। ( देखें – टॉइम्स ऑफ इंडिया, पृष्ठ 9, दिनांक 13 जुलाई, 2013)

  3. देश मे चल रहे लूट के लिए कौन जिम्मेदार है जनता को सड़को पर आना ही पड़ेगा और संम्पूर्ण व्यवस्था को बदने के lie देश व्यापी आन्दोलन करना पड़ेगा तभी कुछ होगा एस देश का .जयनारायण कुंतल

  4. भ्रष्टाचार ४-५ निम्नांकित प्रकारसे सफल होता है।
    (१) शासन या प्रशासन का भ्रष्टाचार: (करनेवाला एक पर जानकार बहुत होते हैं)
    (२) बडे न्यायाधिश, न्यायालय का भ्रष्टाचार: (जानकार अधिक ही होते हैं)
    (३) छोटे बडे कार्यालयों -और अधिकारियों द्वारा आचरित भ्रष्टाचार:( ” ” ” ” )
    (४) बिलकुल छोटे; रेल टिकट घर, पुलिस अफसर, इत्यादि। (देनेवाले भी जिम्मेदार)
    (५) देनेवाले भी भ्रष्टाचारकी एक आवश्यक कडी तो है ही। इस कडियोंमें सामान्य नागरिकसे लेकर, मंत्री प्रधान मंत्री(भी उत्तरदायित्वसे मुक्त नहीं है) हर कोई योगदान दे रहा है।
    हिटलर के हर अफसर से लेकर और सामान्य नागरिक तक, हर कोई दोषी था। ठीक वैसे ही।अन्याय देखकर चूप नहीं बैठना चाहिए। ===========उपाय सुझानेवाले टिप्पणी दें।===============
    मेरा कुछ विचार: (क) संपूर्ण पारदर्शिता –समाचार पत्रोंमें प्रकाशित हो।
    (ख) इ गवर्नेंस (नरेंद्र मोदी की परंपरा अपनायी जाए, उसका अध्ययन प्रवक्ता प्रकाशित करें, प्रचारित करें।)
    (ग) काम का निपटारा –कितनी फाईलें सपलता पूर्वक निपटाई गयी, इससे “कार्यक्षमता” (Efficiency ) नापी जाए, और उन्नति का माप दंड लिया जाए।(कितने घंटे कार्यालयमें बैठे थे, इस पर ही नहीं)
    (घ) भ्रष्ट कार्यालयोंके सामने “धरना” आंदोलन चलाया जाए।
    (च) एक विशेष दिवस निश्चित करते हुए–(जैसे जनवरी १-२०११ या २०१२ ) उस दिन्के बाद भ्रष्ट अफसरों पर कडी से कडी कार्यवाही की जाए।सारे समाचार पत्रोंमें पूरा पन्ना छापा जाए।
    N vittal की पुस्तक और शेषन की हिंदी पुस्तकसे निर्देशित उपाय अपनाए जाएं।

  5. कहते हे की पत्रकारिता एक प्रहरी की तरह देश की सेवा निस्वार्थ रूप मे करते हे. लेकिन आज जिस तरह के चेहरे व पत्रकारिता का स्वरुप हम देख रहे हे उससे कौन डरेगा और जब पैसे व् कलम की ताक़त एक साथ मिल कर कार्य को अंजाम देने लग जाये तो फिर कहना की क्या. और इसका असर हम २जि स्पेक्ट्रुम के रूप मे देख ही रहे हे. और यह २जि स्पेक्ट्रुम के रूप मे आज हम एक ट्रेलर देख रहे हे न जाने ऐसे कितनी कहानिया होंगी जो अब तक सबके सामने नहीं आ पाई. जो पकड़ा गया वोह चोर नहीं तो?

    शायद देश मे व्याप्त भ्रस्टाचार के बदते कदम इस बात को चीख चीख कर कह रहे हे की अब कलम की ताकत देश सेवा मे नहीं बल्कि स्वयं की सेवा मे लग रही हे. क्युकी कलम मे ही दूध का दूध और पानी का पानी करने की शमता हे बशर्ते उसका इस्तेमाल देश व् समाज हित मे किया जाये.

    आज पत्रकारिता मे यह देखा जा रहा हे की कैसे किसी पार्टी को नुक्सान पहुचाये और किसे फायदा पहुचे. ऐसा लगता हे मानो चापलूसी की होड़ सी लगी हे. और यह सब अपने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए होता हे जो किसी न किसी रूप मे भ्रस्टाचार को जन्म देता हे.

    कुल मिलकर जब संस्कारो मे कमी रह जाती हे तो कही न कही मनुष्य गलत कार्यो मे लिप्त रहता हे और इस तरह वह अपने फायेदे के लिए जीने लग जाता हे. और इसमे किसी पार्टी का क्या दोष, विदेशी ताकत का क्या दोष.
    आइये अगर सुधार करने की जरुरत सच्चे दिल से महसूस करते हे तो हम इस बहस के माध्यम से प्राण करे की सत्य से नहीं डरेंगे, असत्य के साथ नहीं रहेंगे, अपने स्वार्थ के लिए दूसरो को नहीं गिराएंगे, अपने पेशे पर कोई दाग नहीं आने देंगे, किसी भी कार्य को करने के लिए किसी भी रूप मे रिश्वत नहीं देंगे व् लेंगे. शायद आप कहे की क्या आज के युग मे यह संभव हे पर यह मनुष्य ही हे जो हमेशा असंभव को संभव बनाता आया हे.

    अगर भ्रस्टाचार को जड़ से मिटाना हे तो फिर हमे फिर देश मे १८८० – १९४५ के जैसे हालात बनाने होंगे. जब हम सही मायने मे मिलजुल कर रहेते थे और एक दूसरो की भलाई मे समय व्यतीत करते थे. और एकजुट हो कर अंग्रेजो से जंग लड़ी थी अन्यथा हम अपने की कर्मो को दोष दूसरो पर मड़तेय रहेंगे और यह मात्र एक बहस को मुद्दा बन कर रह जायेगा.

  6. नवीन जोशी जी की टिप्पणी अधिक सार्थक लगी.अधिकाँश टिप्पणियाँ सचमुच उत्तम हैं.
    पर एक विनम्र निवेदन है की हम यह न भूलें की जिन यूरोपीय ताकतों ने भारत को खोखला बनाने का काम डेढ़ सौ साल तक किया वे आज भी अपने स्वार्थ साधने के लिये उसी प्रक्रिया को जारी रखे हुए हैं. नीयत वही है बस तरीके नए हैं. उन्ही में एक तरीका है की हम लोगों को अधिक से अधिक पतित व भ्रष्ट बनाने की प्रबंध करना और साथ- साथ बढ़ा-चढ़ा कर बतलाते जाना की हम बहुत भ्रष्ट हैं.इस प्रकार हमारे मौरल, उत्साह, आत्मविश्वास को तोड़ते जाना. हमें इस षडयंत्र का शिकार बनने से बचना होगा. अपनी बुराईयों के साथ-साथ अपनी श्रेष्ठताओं का भी स्मरण करते और करवाते जायेंगे तो ही इस संघर्ष में विजय प्राप्त कर सकेंगे. केवल बुराईयों व कमियों के गीत गाते रहे तो अपने विनाश का कारण हम स्वयं बनेंगे. यह सूत्र बहुत बड़े महत्व का है,कृपया इस पर सभी देस्भाक्त सज्जन ध्यान दें. इस हथियार का प्रयोग हमारे विरुद्ध बड़ी कुशलता से हमारे चालाक दुश्मन अनेक दशकों से कर रहे हैं. विस्तार जानना हो तो धर्म पाल जी की पुस्तक , दी ब्यूटीफुल ट्री, पढ़ लें.
    जहां तक बात है सोनिया कांग्रेस की तो यह तो सारी की सारी जुंडली ही विदेशी ताकतों की कठपुतली है. इसे सत्ता से हटाये बिना तो अपने देश और समाज के भले की कल्पना भी ना समझी होगी.

  7. भ्रष्ट्राचार के खिलाफ १९४७ में लाल किल्ले से भाषणबाजी करते आये हुवे नेहरू से लेकर मनमोहन तक के सब पंतप्रधान की इस के खिलाफ लढा देने की ताकद नहीं है . इनकी खुर्सी ही भ्रष्ट्राचार के पावं पर खड़ी है. बेईमान लोकप्रतिनिधि , दलाल भ्रष्ट्र नोकरशाही , गुंडे बाहुबली इनके शिकंजे में हमारा पंतप्रधान कैद में है. इसलिए उससे भ्रष्ट्राचार के खिलाफ लढा देने की ताकद नहीं. और आज भ्रष्ट्राचार की सबसे बड़ी गटरगंगा खुद्द कांग्रेस ही बन चुकी है. इसीलिए इस कांग्रेस ने मनमोहन नामक प्याद्दे को पंतप्रधान बनाया है. जो एक खिलौना है . आज बिहार में कांग्रेस जित जाती तो इस खिलोने को फेककर राहुल को पंतप्रधान बनाया जाता. सबसे पहले भ्रष्ट्राचार , बेईमानी, भूखंड घोटाला, इन अपराध को अजमिनपात्र गुन्हा मानकर इन अपराधी को जेल में सड़े देना इनकी मालमत्ता जप्त करना, इनके वैवाहिक जोड़ीदार बच्चो को भी जेल ड़ाल देना .

  8. आजादी के पहले भी जब कांग्रेसी सरकारें बनी थीं तब से इनका भ्रष्टाचार चालू है .यहाँ तक की महात्मा गांधी तक ने अपनी चिंता जताई थी . यह तब तक तो छोटे मोटे पैमाने पे था .नेहरू ने पटेल के निधन के बाद चुन चुन कर इमानदारों को कमजोर कर ऐसे कांग्रेस वालों को आगे किया जिनकी छवि भ्रष्टाचारियों की थी .टंडन जी जैसे महीने में सौ रुपयों में और एक जोड़ी कपडे में गुजारा करने वाले को कांग्रेस की अध्यक्षता से बाहर किया और भ्रष्टाचारी चमचों को बढ़ावा दिया क्योंकि उनकी राजनैतिक जमीन और जमीर दोनों नदारत थे और चमचागिरी ही उनकी औकात .शास्त्री जी अपवाद थे और जब जन नेता बन कर उभरे तो संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृय्यु हो गयी ,जो आज भी एक रहस्य ही है .
    इंदिरा ने भ्रष्टाचार और चाटुकारिता को कांग्रेसी संस्कृति और संस्थागत रूप दे दिया .भारत के इतिहास के महा अभिशाप की शुरुआत हो गयी . अब मुक्ति कैसे मिले ? यह हिमालय से भी ऊँचा सवाल है परन्तु जितनी बड़ी चुनौती उतना ही बड़ा अवसर भी होता है .यह ग्रहण काल भारत की परीक्षा की घड़ी है और नौजवानों से ही उम्मीद है की वह अपने लिए कैसा भारत चाहते हैं .खतरा भी की माध्यम वर्ग जिस से पुनर्निर्माण की उम्मीद होती है वह ‘ माया ‘ में उलझ गयी है .

  9. कृपया अपने दामन में झांक कर देखें, दिन प्रतिदिन के जीवन में हम कितनी इमानदार हैं ] बस सारा भ्रष्टाचार यहीं से शुरू होता है और जैसे हम राजनीती शक्ति के निकट पहुंचाते जाते हैं उसका अनुपात भी वैसे ही बढ़ता जाता है | यही बात सरकार दर सर्कार होती चली जावेगी. इस से पहले वाली सर्कार के पास इतने मौके कह्हन थे की इतना पचा पते. अब जब मौका आया है तो लूटो रजा मजेमे लालू जी ने भी तो अपने ज़माने की बढ़िया मलाई खाई है अगली सरकार का क्या भरोसा इसका रिकार्ड भी तोड़ देवे
    राष्ट्रीय स्टार पैर , व्यक्तिगत स्टार पैर हमें विश्लेषण करना होगा की हम इतने भ्रश्ताच्री क्यों हैं | क्रिकेट का खेल क्या भ्रष्टाचार नहीं है?. पैर हम उसके खिलाडियों को भारत रत्न देने की बात कहते है इस खेल के क्या फायदे है जर्रा सोचिए | खिलाडियों ने कितने जन कल्याण के काम किये और कितना घर भरा. वही बात उद्योग पतियों , या कमाऊ डाक्टरों की भी है. आप क्यों तड़पते है? क्यों की आप विपन्नता से गुजर रहे हैं तो आप को काटोचता है यह सब. आप भी यदि महानगरीय व्यापारियों की तरह दीपावली या विवाह में लाखों की आतीश बजी या पटाखे रख कर देते होते तो आप भी इस भ्रष्टाचार से बेफिक्र रहते |दुर्भाग्यवश यह भ्रष्ह्ताचार आने वाली पीढ़ियों के वन्शसूत्र में ऐसे घुस गया है जैसे अनुवांशिक रोग होते हैं जैसे कैंसर | आत्मा विश्लेषण, आत्मा निरिक्षण और आत्मा साक्षात्कार ही बस एक तरीका है इस भ्रष्ट समाज को बदलने का. हम उसीकी एक इकाई हैं

  10. मै तो इस सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा की इस समस्या से निजात के लिए भ्रष्ट लोगो को एक कड़ा दंड दे दिया जाये क्योंकि ….. मै मानता हु ऐसा करना मुस्किल हो सकता है…. पर जब तक प्रत्येक आदमी की सोच मै इसके दंड का डर नहीं बैठ जाता … तब तक भ्रष्ट लोगो की टोली की संख्या में कमी नहीं आयगी …हा याद रहे की एक कोई बड़ा अफसर या नेता बनने से पहले वो व्यक्ति भी आम आदमी ही होता है….

    तो इस दीमक को दिमाग से निकाल कर ही भविष्य में होने वाली ऐसी हरकतों को रोका जा सकता है…..|

    धन्यवाद |

  11. कांग्रेस और गाँधी परिवार ने लम्बे समय से देश को लूटा hi है… pahle राहुल के पुरखों ने लूटा अब ये लूट रहा है… आज देश की जो bhi हालत है uske लिए कांग्रेश और ये लूटेरा खानदान ही जिम्मेवार है….. इतना ही नहीं देश टुकड़ों में बनता तो कांग्रेस की नीति से…, देश सांप्रदायिक आग में झुलस रहा है तो कांग्रेस की वजह से…, विकिलीक्स पर भी खुलासा हुआ है की कांग्रेस राजनीति के लिए dharm का दुरूपयोग करती है….. इसकी नीतियों की वजह से आज लाखों हिन्दुओं को कश्मीर में अपने घर और जमीन से हाथ धोना पड़ा है…. बहुत हैं से घोटाले और अव्यवस्थाएं है जो कांग्रेस की देन है….

  12. कांग्रेश नाम ही है ठेकेदारों, गुंडों, ओर दलालों के समूह का, इसलिये यह घोटाले तो होना ही थे. यह तो कांग्रेश का मूल स्वभाव है.

  13. जहाँ भ्रष्टाचार के उन्मूलन की बात केवल काग़ज़ों की शोभा बढ़ाने या विरोधियों और आलोचकों से राजनीतिक बाज़ी मारते रहने के लिये की जाती हो, जहाँ भ्रष्टाचार का उन्मूलन करने-कराने वाले योग्यता, क्षमता, निष्पक्षता और ईमानदारी के आधार पर नहीं, वंश, जाति, पहुँच, चमचागीरी और पैसे के आधार पर चुने और नियुक्त किये जाते हों, जहाँ भ्रष्टाचार को राजनीतिक मुद्दा बनाकर केवल वोट और नोट बटोरने और येन-केन-प्रकारेण कुर्सियाँ पाने और उनसे चिपके रहने की लोलुपता जीवन का अंग बन गई हो और जहाँ ट्रांसपेरैंसी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं द्वारा महाभ्रष्ट देश घोषित कर दिये जाने के बावजूद दूसरों को भ्रष्ट सिद्ध करने और स्वयं को महान और बेदाग़ घोषित करते जाने के लिये किराये के ढिंढोरचियों से आकाश गुँजाया जाता हो, वहाँ भ्रष्टाचार का उन्मूलन नहीं हो सकता । वह उल्टे और बढ़ेगा । अंग्रेज़ी की एक पुरानी कहावत को (हिन्दी में) इस तरह दुहराया जा सकता है – यदि धन नष्ट हो जाये, तो कुछ नहीं नष्ट हुआ, यदि स्वास्थ्य नष्ट हो जाये, तो किंचित् नाश हुआ है, लेकिन यदि चरित्र नष्ट हो जाये, तो सर्वस्व नष्ट हो गया है, ऐसा मानना चाहिये । भारत के पास सब कुछ है, जिसकी वृद्धि भी हो रही है, लेकिन चरित्र का घोर पतन हो रहा है और देश भ्रष्ट से भ्रष्टतर होता जा रहा है ।

  14. Kya net par is paricharcha me bhag liya ja sakta hai ? Main in dino Kampala, Uganda, Africa me hoon. Sambhav ho to batayen.

  15. सिन्‍हा जी
    कांग्रेस के बारे में हमने जहां तक पढ़ा लिखा और सुना है– उसके मुताबिक कांग्रेस हमेशा से भ्रष्‍टाचघ्‍रियों के लि‌िए सबसे उम्‍दा नीड़ रही है। पैसे के की माया से वो तब से पीड़ित है जब देश ने आजादी की खुली हवा में सांस भी नहीं ली थी। लोकeमान्‍य तिलक के दुनिया से जाने के बाद जो फंड जुटाया गया उसमें भ्रष्‍टाचार के खूब आरोप लगे थे- मां कस्‍तूरबा के जाने जो पैसा फंड जुटाया गया वो भी भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ गया। इतना ही नहीं उन्‍नीस सौ छियालिस में ब्रिटिश भरतीय सेना ने पूरे देश मे अंग्रेजी हुकूमत से बगावत कर आजादी छीन ली- जो उसकी स्‍वाभाविक नियति है। लेकिन कांग्रेसी नेताओं ने छल किया। और बाद में जॉर्ज पंचम के कसम खाकर कुर्सी पर बैठ गए। बंटवरा कराया ‍ सो अलग‍ — विकल्‍प भी तो नहीं है- अगर यही लुटेरा लोकतंत्र देश का भविष्‍य है तो नई पीढ़ी इससे कतई इत्‍तेफाक नहीं रखती। ऐसा ना हो कि कहीं वो बागी ना हो जाए।

  16. समस्या है, तो समाधान भी तो है. समाधान की बात करो यार. और समाधान की तरफ देखते ही पहले ध्यान में आता है की समस्या के मूल कारण को जाना जाए. भ्रष्टाचार का मूल है पैसे को मिला अधिमूल्य. पैसा ही सारी समस्याओं का हल है, पैसा ही सारे तालों की कुंजी है, पैसा ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य है… यह धरना हम सबकी है. इस धारणा से बंधकर जिसे भी अवसर मिलता है, जैसे भी पैसा पाने की राह दिखाई देती है, उसे लपका लिया जाता है. जो पकड़ा गया, वहा दोषी बना जाता है, बाकी सबा उसे गरियाते हैं. जबकि भ्रष्टाचार का मूल कारण तो सभी मानवों के भीतर मौजूद है. इलाज करना है, तो इस वृत्ति को samajh कर इस का इलाज करना होगा. कहिये है कोइ तैयार? जो भी तैयार है उसे समाधान मिला ही समझें.

  17. हम लोगों ने अपनी भडास निकाल ली.कुछ अन्य टिप्पणियों के बाद संपादक जी का सन्देश आएगा की अब इस विषय पर टिपण्णी बंद की जाती है.भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचारियो को इससे कुछ हानि होगी क्या?क्या इसके बाद भ्रष्टाचार कुछ कम हो जायेगा?अगर आप लोग ऐसा सोचते हैं तो गलत सोचते हैं ऐसा कुछ भी नहीं होगा.भ्रष्टाचार इसी तरह दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करता रहेगा.आप पूछेंगे उपाय क्या है?क्या हम इसी तरह हाथ पर हाथ धर कर बैठे रहे?नहीं मैं यह नहीं कहता ,पर मैं यह अवश्य कहता हूँ की दूसरों को दोष देने के पहले हमें यह अवश्य सोचना होगा की कही हम भी तो उसी में से नहीं है?आप में से बहुत लोग अभी भी कार्यरत है.आप अपने आप से पूछिए की कही आप भी तो भ्रष्ट नहीं है?सबसे बड़ा बहाना होता है की जब पूरा सिस्टम भ्रष्ट है तो मैं अकेले क्या कर लूँगा?कुछ लोगों आगे बढ़ कर विरोध की चेष्टा की तो उसमे से एक आध को जान से हाथ धोना पड़ा.क्या उनको पता नहीं था की उन्हें जान भी गवानी पड़ सकती है?फिर भी वे आगे बढे.अगर हम अगर तहे दिल से स्वयं इस पर अमल करे और अपने आप को कायरता की परिधि से बाहर लायें तो कोई कारण नहीं की हम भ्रष्टाचार को खत्म न कर सके. महाकवि दिनकर के कविता की कुछ पंक्तिया याद आती है की तुम एक अनल कण हो केवल.अनुकूल हवा लेकिन पाकर ,छपद तक जा सकते उड़कर .जीवन ज्योति जगा सकते अम्बर में आग लगा सकते.कहने का तात्पर्य यह है की इस दिशा में जब तक हर आदमी बिना दूसरे की और देखे पहला कदम नहीं उठाएगा तब तक भ्रष्टाचार यो ही बढ़ता रहेगा और हम एक बहस से दूसरे बहस तक जाते रहेंगे.

  18. आदरणीय संपादक जी सबसे पहले इस प्रकार की खुली परिचर्चा के लिए धन्यवाद… कांग्रेस और घोटाला ये शब्द सुनकर अब तो लगने लगा हे की ये एक दुसरे के निक नाम हे.. चाहे कोई घोटाला कहे या कांग्रेस लोग दोनों से ही एक भाव समझने लगे हें…. पर इन सब के कार्य कलापों को देख कर मन में आक्रोश उत्पन्न होता हे जब सब कहते हें की सोनिया और मनमोहन बेदाग हें तो में पूछता हूँ की दग्दारों के पक्ष लेना क्या जुर्म नहीं हे… और जब बीजेपी ने जेपीसी की मांग की हे तो क्यों उसको पूरा किया..? क्या वो जांच कूद बीजेपी ही करने वाली थी… जांच तो जाँच हे और जब तक सब की सहमती से नहीं होगी आप किसी को कितना भी साफ़ कहना पर लोग नहीं मानेगे… और कांग्रेस के ये मसीहा सोनिया और राहुल.. इनके तो ख़ानदान ही घोटालों से पनपा हे.. और मुझे शर्म आती हे की ये कांग्रेसी देशभक्त और पार्टी भक्त न होकर केवल सोनिया और राहुल भक्त हो गए… हे… और फिर देश भर में अपने उल जलूल बयानों से जनता को इन मुद्दों से भटकने में लगे हें… अब किसको चिंता हे इस देश की ओए जनता की…. जब राजा भ्रष्टाचारी तो जनता लुटती रोये रे…
    वो तो भरें पेट घोटालों से जनता भूखी सोये रे…
    भूख आतंक और भ्रष्टाचार फेल रहा देश में…
    सत्ता आँख मूँद कर बड़े चैन से सोये रे…
    मित्रो इस हालत में लोग बीजेपी पर आरोप लगा रहे हें तो में भी कहता हूँ वो भी चोर हो सकती हे… पर हमारा सिद्धांत कहता हे की जब चोरों में से ही chunav karna हे तो में सबसे kam चोर का ही चुनाव करूँगा अर्थात कांग्रेस तो चोरों का बादशाह बन गया हे इस स्थिति में मैं बीजेपी का ही चुनाव करूँगा अब फेसला आपने ही करना हे…

  19. संजीव जी आप शरद पवार द्वारा किया गया चीनी घोटाला भूल गए और कांग्रेस के नेताओं और सोनिया और राहुल द्वारा यह कहना की भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जायेगा एक मजाक ही है जब स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए एक भ्रष्ट व्यक्ति को सीवीसी बना दिया जाये और तो और कामनवेल्थ खेलों के जांच के लिए बनाई गयी शुंगलू कमेटी आडिट के लिए एक ऐसी फर्म(मेहता एंड को.) को अनुबंधित करती है जो पहले से ही आइओए(IOA) का आडिट का कार्य करती है और ये आवेदन उसी दिन स्वीकार कर लिया जाता है जिस दिन (मेहता एंड को.) अपना आवेदन प्रस्तुत करती है इसके अतिरिक्त सुरेश कलमाड़ी को अभी तक पद मुक्त नहीं किया गया है और आयोजन समिति को अभी तक भंग नहीं किया गया है जिसके कारण सीबीआई को कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सुरेश कलमाड़ी को हटाने की मांग करनी पड़ती है जो अभी तक स्वीकृत नहीं हुई है
    सोचकर शर्म आती है की देश के कुछ विद्वान कांग्रेस को इसलिए नहीं घेरते क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है की इससे वो बीजेपी के साथ खड़े दिखाई देंगे जो वो करना नहीं चाहते क्योंकि इससे उनकी क्षद्म धर्मनिरपेक्ष छवि प्रभावित होगी चाहे देश लुट जाये ये बीजेपी को ही गाली देने में व्यस्त रहेंगे

  20. आदरणीय सम्पादक जी आप ने काग्रेस नेत्रितु यूपीए सर्कार में हुए घोटालो के चर्चा के है, तो आप पंडित नेहरु से लेकर मनमोहन सर्कार तक देखे तो इसका इतिहास से लेकर वर्तमान तक भ्रस्ताचार की बू देखि जा रही है. काग्रेस के लिए ये कोई नयी बात नहीं है. क्योकि इसका जमन ही हुआ भ्रस्ताचार पर प्रदा डालने के लिया.
    धन्यबाद,
    राजेश कुमार,
    दूरदर्शन समाचार,
    nai दिल्ली

  21. २-जी स्पेक्ट्रम घोटालो के आलोक में श्री मनमोहन सिंह जी का कहना है की उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वे पब्लिक अकाउंट कमिटी (PAC) के सामने आने के लिए तैयार है अगर मनमोहन सिंह जी (कांग्रेस) इतनी ही निष्पक्ष है तो वह जेपीसी के गठन से मुकरती क्यूँ है…सांच को आंच क्या ?
    इस वक़्त देश में घोटाले अपनी चरम सीमा पर है. राहुल गाँधी को जबरदस्ती श्री राजीव गाँधी बनाने पर जोर दिया जा रहा है.

  22. भ्रष्टाचाररूपी महामारी : असहाय लोकतंत्र !
    ……………………………………………….
    भ्रष्टाचार वर्त्तमान समय में कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं रही वरन यह एक महामारी का रूप ले चुकी है महामारी से तात्पर्य एक ऐसी विकराल समस्या जिसके समाधान के उपाय हमारे हाथ में शायद नहीं या दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि इसकी रोकथाम के उपाय तो हैं पर हम रोकथाम की दिशा में असहाय हैं, असहाय से मेरा तात्पर्य भ्रष्टाचार होते रहें और हम सब देखते रहें से है।

    भ्रष्टाचार में निरंतर बढ़ोतरी होने का सीधा सीधा तात्पर्य यह माना जा सकता है कि देश में संचालित व्यवस्था का कमजोर हो जाना है, यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका व व्यवस्थापिका इन तीनों महत्वपूर्ण अंगों के संचालन में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार का समावेश हो जाना है अन्यथा यह कतई संभव नहीं कि भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ता रहे और भ्रष्टाचारी मौज करते रहें।

    यह कहना भी अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि भ्रष्टाचार रूपी महामारी ने लोकतंत्र की नींव को हिला कर रख दिया है ! ऐसा प्रतीत होता है कि लोकतंत्र के तीनों महत्वपूर्ण अंग न्यायपालिका, कार्यपालिका व व्यवस्थापिका एक दूसरे को मूकबधिर की भांति निहारते खड़े हैं और भ्रष्टाचार का खेल खुल्लम-खुल्ला चल रहा है। भ्रष्टाचार के कारनामे बेख़ौफ़ चलते रहें और ये तीनों महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं आँख मूँद कर देखती रहें, इससे यह स्पष्ट जान पड़ता है कि कहीं न कहीं इनकी मौन स्वीकृति अवश्य है !

    एक क्षण के लिए हम यह मान लेते हैं कि ये तीनों व्यवस्थाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं यदि यह सच है तो फिर भ्रष्टाचार, कालाबाजारी व मिलावटखोरी के लिए कौन जिम्मेदार है ! वर्त्तमान समय में दूध, घी, मिठाई लगभग सभी प्रकार की खाने-पीने की वस्तुओं में खुल्लम-खुल्ला मिलावट हो रही है, ऐसा कोई कार्य भर्ती, नियुक्ति व स्थानान्तरण प्रक्रिया का नजर नहीं आता जिसमें लेन-देन न चल रहा हो, और तो और चुनाव लड़ने, जीतने व सरकार बनाने की प्रक्रिया में भी बड़े पैमाने पर खरीद-फरोक्त जग जाहिर है।

    भ्रष्टाचार, कालाबाजारी व मिलावटखोरी के कारण देश के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं हालात निरंतर विस्फोटक रूप लेते जा रहे हैं यदि समय रहते सकारात्मक उपाय नहीं किये गए तो वह दिन दूर नहीं जब आमजन का गुस्सा ज्वालामुखी की भांति फट पड़े और लोकतंत्र रूपी व्यवस्था चरमरा कर ढेर हो जाए, ईश्वर करे ऐसे हालात निर्मित होने के पहले ही कुछ सकारात्मक चमत्कार हो जाए और ये महामारियां काल के गाल में समा जाएं, वर्त्तमान हालात में यह कहना अतिश्योक्तोपूर्ण नहीं होगा की भ्रष्टाचार ने महामारी का रूप धारण कर लिया है और लोकतंत्र असहाय होकर उसकी चपेट में है !

  23. सभी को भ्रष्ट कहने से समस्या का समाधान नहीं होगा . केवल कहने के कर्तव्य की इतिश्री होगी . भ्रष्टाचार ऊपर से आता है. उच्चासीन पदों पर धन पहुंचाने की व्यवस्था है. एक श्रंखला बनी हुई है. इसलिए जरूरी है कि ऊपर से रोक लगे. तब नीचे बैठे अधिकारी और कर्मचारी भी रुकेंगे. आम आदमी मजबूर किये जाने पर देता है और फिर अगर सरकारी नौकरी में हुआ तो ऊंचे बैठे लोगों को लेते देख खुद भी लेता है.

    भ्रष्टाचार की जड़ में कांग्रेस सरकारें हैं. यह लोग निर्भय और निरंकुश हैं. केंद्र से कांग्रेस की सरकारों को कम से कम १५ वर्षों के लिए हटाना होगा. तब देश में सत्ता और विपक्ष के बीच एक कार्यकारी संतुलन उत्पन्न होगा .

    सामान्य जनता को भी वैकल्पिक संचार माध्यमों से अपनी आवाज़ उठाकर कुशल एवं स्वच्छ नेतृत्व वाले लोगों को आगे लाना होगा . परिवर्तन संभव है.

  24. सर्वप्रथम श्री संजीव जी, संपादक प्रवक्ता को बधाई जिन्होंने ने एक मंच दिया. इस देश में कुछ बोलने और करने का अधिकार तो केवल संसद भवन में बैठे सांन्सदो को और आई.ऐ.स. अफसरों को है. बाकी तो सब आम इंसान है.

    * हमारे देश का दुर्भाग्य है की इस देश की नीतिया नियम ऐसे लोग बनाते है जिन्हें यह नहीं मालुम होता है की गुड तेल का भाव क्या है, या गुड तेल बोतल या पन्नी में मिलता है (अर्थात इतने अमीर या उच्छ बल्कि अति उच्छ वर्ग से होते है). या फिर २२-२३ साल के नौजवान नवयुवती होती (अर्थात आई, ए. एस.) जिन्हें जीवन का कोई भी ठोस अनुभव नहीं होता है
    * आजादी के बाद से तो इस देश में भ्रष्टाचार होते रहे है. कहा जाता है पकड़ा जाय तो चोर. जो सामने आ गए वोह भ्रस्ताचार बाकी तो देश चल रहा है.
    * आजादी के बाद बाद भी हम पूर्ण रूप से झूठा इतिहास पढ़ रहे है, अपने बच्चो को पढ़ा रहे है. सच्चाई का पता नहीं, खून में उबाल कहाँ से आएगा. स्वाभिमान का जज्बा कहाँ से आयेगा. नेतिकता केवल किताबो में दिखती है, जिस महूल में हम है वाही माहोल अपने बच्चो को दे रहे है.
    * इस देश की विडम्बना ही है की हमारे कानून के अनुसार रोटी चोरी करने वाले को तो जेल की सजा मिलेगे किन्तु करोडो – अरबो की चोरी / घपला / घोटाला करने वालो का कुछ नहीं होता है.
    * इस देश में भ्रष्टाचार की पौध किसने तैयार की है, हर जानकर व्यक्ति जनता है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी तरह बर्बाद हुए बहुत से देश आज पूर्ण विकसित है क्यों, क्योंकि उन्होंने विकाश किया है. पिछले ६० साल में हमारे देश ने भी बहुत विकाश किया है किन्तु फिर भी आजादी के समय से ज्यादा गरीबी क्यों. जो विकास हुआ वोह तो स्विस बेंको में बंद है. किसका पैसे है जाहिर है मंत्रियो और अफसर साहो का है.

  25. adarnya संजीव जी …
    आप जो कह जो बाते कह रहे है इस लेख में उसका मै बिलकुल समर्थन करता हु… पर एक तरफ हम इस परिवर्तनशील समाज को देखते हुए कहे तो एक बात ये भी समज आती है | हो सकता है की कोंग्रेस की जगह पर वीजेपी या अन्य कोई सरकार भी होती तो ये घोटाले होने से रुक थोड़ी सकते थे क्योंकि हर एक व्यक्ति हर एक से आगे बढ़ने को तैयार है और इस प्रतियोगिता वाले दौर में कोई भी नहीं चाहता की वो किसी से पीछे रहे | और इसके लिए हर व्यक्ति छोटे से छोटा रास्ता अपनाने के चक्कर में भ्रष्टाचार को अपनाने लगा है या लगता है| जिसके मोह में हर जगह परिवारवाद फैला हुआ है ….. क्योंकि हर कोई चाहता है की घूम फिर के पैसा उसके जेब जाना चाहिए … और रही मै प्रत्येक वाक्य में “हर” शब्द का प्रयोग क्यों कर रहा हु तो में बताना चाहता हु की इस शब्द का प्रयोग मेने इसलिए किया क्योंकि हर एक किसी न किसी रूप में कही न कही भ्रष्टाचार करता ही है… हो सकता १०० प्रतिशत में से है १० प्रतिशत लोग भ्रष्टाचार न करते हो पर उन १० प्रतिशत भ्रष्टाचार न करने वाले लोगो पर ८० प्रतिशत भ्रष्टाचार करने वाले भरी पड़ेंगे | और रही इसे कैसे ख़त्म किया जाये तो मेरी नजर में एक ही उपाए है की जो भी भ्रष्टाचार करता गया पाया जायेगा उनपर जुरमाना लगाया जाये जो उनके व्यक्तिगत आय से लिया जाये इसके साथ- साथ एक ही बार की सुनवाई के बाद उन्हें कड़ी सजा दे दी जाये … फिर चाहे वो बड़ा अफसर , नेता या आम आदमी या कोई किसी छोटे से सरकारी दफ्तर का बाबू हो …..और किया गया भ्रष्टाचार छोटा हो या बड़ा हो….. क्योंकि भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार है चाहे छोटा या बड़ा | ये भ्रष्टाचार की बिमारी समाज से तभी जायगी जब प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग में भ्रष्टाचार के बाद होने वाली कार्यवाही को सुनते ही उसके दिमाग में एक डर बैठ जाये |
    धन्यवाद …..

  26. संजीव जी आप क लेख बहुत अच्छे होते है और मै इन को शेयर करना चाहता हु फसबूक पर पर आप्शन नहीं है .किरपा करे कोई आप्शन सुरु करे जिससे हम इन लेखो को जयादा लोगो को पढ़ा सके.

  27. SAHI LIKHA HAI AAP NE ITNE GHOTALO K BAAD BHI RAHUL GANDI KEH RAHE HAI KI BHARSTACHAR KO KHATAM KARENGE .KYA UNHJE NAHI PATA HAI KI UNKI PARTY MAI KITNE GHOTALE HO RAHE HAI..
    AB TO KEHNA PADEGA KI CONGRESS K HANTH BHARSTACHAAR KA SAATH

  28. जब तक इस देश और समाज के साथ गद्दारी के लिए इस देश के सभी मंत्रियों की ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट सार्वजनिक रूप से नहीं कराया जाता और दोषियों को जनता के हवाले कर जूते चप्पल से मार खाने के लिए नहीं किया जाता तब तक इस देश में जनतंत्र नहीं आएगा और शर्मनाक स्तर का भ्रष्टाचार का दूर होना मुश्किल है…..

  29. Dear sir,It is real fact that right from the time of nehru , who was a dormant P.M., lazy&lithargic,allowed corruption to grow.They allowed scandals take place, with share to party brass.system need achange immediately. R.C.GUPTA.ph.9278533402

  30. संजीव जी इस सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आये है, राव सरकार में जब ये वित्त मंत्री थे तब से भ्रष्टाचार के जन्म देने के कामों में -आया- की भूमिका निभा रहें है हर्षद मेहता —केतन पारिख जैसे बड़े-बड़े घोटाले पैदा किये है इसबार छह साल में इनकी कारगुजारियां सामने है। कांग्रेस की नीति है वह मोहरे आगे की कर भ्रष्टाचार कराती है, भेद खुलने पर उसको शूली पर चढ़ा कर हाथ झाड कर खुद पाक साफ बताती है।

  31. २,५०,००० करोड़ मतलब २,५०,००, ००,००,००,००० रुपये का घोटाला. मतलब दो नील ५० खरब रुपये का घोटाला, शर्म कीजिये मनमोहन जी. वैसे ये नील..खरब न हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री कहे जाने वाले आपकी समझ में आयेंगे न सोनिया जी के. हिंदी भी तो नहीं आती आपको.

    वैसे क्या जोड़ी है आपकी, एक विदेशी और दूसरा उसके साथ ही विश्व बैंक का एजेंट. आपसे हिंदुस्तान की भलाई की उम्मीद बेमानी है…

    लेकिन नोट कर लीजिये…आप अपनी करनी से देश में क्रांति को रास्ता दे रहे है….

    संभव है बाबा रामदेव जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, इस क्रांति के अग्रदूत हों. उनके आरोप अब सही लगने लगे हैं की आप नेताओं ने देश का लाखों करोड़ रूपया विदेशी बैंकों में जमा किया है. आप से यह उम्मीद करनी ही बेमानी है की देश की इस अकूत संपत्ति को वापस लाने के लिए आप पहल भी करेंगे…

    अरे मैं ये क्या लिख गया, राहुल बाबा कहीं बाबा रामदेव को भी हिन्दू आतंकवादी न घोषित कर दें..

    संपादक जी, इस पहल के लिए बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद.

  32. चोरों का सरदार ! सिंह फिर भी इमानदार ?
    क्या इमानदारी की परिभाषा ही बदल गई ?
    तोहमतें आयेंगीं अहमद शाह दुर्रानी पर
    आप दिल्ली रोज़ ही लूटा करें ……..
    जब चोर ही चौकीदार बने बैठे हों तो आम आदमी किससे फ़रियाद करे !
    चोरों को पकड़ने के लिए सोनिया मैडम ने अपने ही उच्चक्के दौड़ा दिए …
    देखो ! इनका हश्र भी चाचा क्वात्रोची जैसा ही होगा !!!!!!

  33. Aadarniya संपादक जी

    कांग्रेस की सर्कार तो शुरुआत se ही भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है, अतत इससे से ईमानदारी की अपेक्षा करना हमारी मुर्खता है. अब जब एक विदेशी महिला को देश का कर्णधार बना दिया गया है aur उसके अनुभवहीन बेटे को देश का भावी प्रधानमंत्री घोषित कर दिया गया है तो यह सब तो होगा ही. क्योंकि, जब तक आपकी ईमानदारी खरीद नहीं ली jayegi आप उसे अपना नेता कैसे मान सकते हैं, जिसे न तो देश की चौहदी पता है, ना संस्कृति, ना समस्या, इसकेलिए तो चाटुकारों को आर्थिक तौर पर मालामाल करना ही होगा और ऐसा भ्रष्टाचार के माध्यम से ही संभव है. यदि हमें इससे लड़ना है, तो हमें जय प्रकाश नारायण की tarah जन आन्दोलन छेदना होगा, अन्यथा हमारा देश एक bar फिर परतंत्र हो jayega और हमारी संस्कृति हमेशा हमेशा के लिए मिट जाएगी और इतालियन संस्कृति और भाषा का हमें दस बनाना padega और शहीदों का बलिदान bekar हो jayega.

  34. ऐसे आपके द्वारा दिए गए शीर्षक से मेरी टिपण्णी हट कर है क्योंकि भ्रष्टाचार को मैं किसी एक सरकार की देन नहीं मानता.ऐसे यह अवश्य है की ज्यादातर बड़े घोटाले कांग्रेस शासन में सामने आयें हैं.ऐसे देश में सबसे ज्यादा शासन काल भी इन्ही का रहा है पर मेरे ख्याल से हमाम में सब नंगे हैंमेरे विचार से किसी एक को दोष देने के पहले हमें अपने गरेबान में झाकना होगा.

  35. संजीव जी आपने यह आन्दोलन छेड़ा है तो कुछ सोच समझ कर ही छेड़ा होगा,.वैसे आप युवा है. आप में उत्साह भी बहुत है,पर हम जैसे बूढों के लिए तो भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जिस पर आजादी के बाद से ही बहस चलती रही और भ्रष्टाचार बढ़ता रहा .बहुत घोटाले हुए और यह हमेशा रहा की पहला घोटाला दूसरे से छोटा साबित हुआ.बहुत दिन नहीं गुजरे जब ६४ करोड़ का बोफोर्स घोटाला हुआ था.आज के घोटालों को देखते हुए वह एक बच्चा घोटाला लगता है.मेरे कहने का तात्पर्य केवल इतना ही है की जब एक बड़ा घोटाला हो जाता है तो छोटे घोटाले को लोग अपने आप भूल जाते हैं.कहानी इसी तरह चलती रही है और चलती रहेगी.सजा तो किसी घोटाले के लिए किसी को होती नहीं.छुट पुट पकड़ धकड अवश्य होती है,पर नतीजा वाही ढ़ाक के तीन पात. मामला गंभीर अवश्य है,पर समस्या का समाधान तब तक संभव नहीं जब तक भ्रष्टाचार द्वारा अर्जित लाभ की जब्ती न शुरू हो और फैसला और सजा जल्द न हो.देखिये आपके बिहार में इस दिशा में कुछ कदम उठाये गए लगते हैं शायद कुछ नया निकल कर आये.
    आज वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण केलिए बहुत योजनाओं पर विचार विमर्श होता रहता है,पर मेरे विचार से ये लोग इसके अधिकारी नहीं,क्योंकि आज का वरिष्ठ नागरिक भ्रष्टाचार का सूत्रधार है.इन्ही लोगों द्वारा रोपे गए छोटे पौधे ने आज विकराल रूप ले लिया है . भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए भी इन्ही को आगे आना होगा.पहले तो राष्ट्र से अपनी गलतियों के लिए माफ़ी मांगनी होगी.फिर सुधार के रास्ते बताने होंगे.चूँकि यह सम्भव नहीं है अतः पुश्त दर पुश्त भ्रष्टाचार पनपता रहेगा ,आगे बढ़ता रहेगा और लोग समय बिताने के लिए इस पर वाद विवाद करते रहेंगे.

  36. काँग्रेस सरकार के क्रिया कलाप एक विद्वेषपूर्ण नीति एवं असहिष्णु प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि काँग्रेस एक सांप्रदायिक आधार पर काम करने वाली पार्टी है और कूटनीति के साथ वह दूसरे दलों को सांप्रदायिक घोषित करती रहती है। भ्रष्टाचार के साथ-साथ देखा जा सकता है कि महँगाई, कश्मीर समस्या , चीन के प्रति ढुल-मुल रवैया, आंतरिक सुरक्षा, किसानों द्वारा आत्महत्या, …. इन सभी मुद्दों पर सरकार विफल है। अपने भाषणों के समय काँग्रेस नेताओं के चेहरों पर सूचना तंत्र पर अपने एकाधिकार और अपने प्रचार को कर पाने की सफलता की विजयी मुस्कान देखी जा सकती है। देश की बदहाली पर दुखी होने के बजाय यह लोग अब भी यही कह रहे हैं कि इन्होंने कुछ गलत नहीं किया। धिक्कार है …। पर देश की जनता कुछ यूँ कह रही है, सुनने वाले सुन सकते हों तो सुनें ….

    जो तुम सोचते हो कि यह देश है ठंडा अब न जागेगी चिंगारी कभी
    जो तुम समझते हो कि यहाँ अब न रहे लड़ने वाले कोई
    तो हम बता दें तुम्हें कि हमारी अच्छाई हमारी कमजोरी नहीं
    लिए शोले हम घूमते हैं अब भी, आग जलेगी तुम्हें खाक में मिलाने तक … ।

    ऐ वतन को लूटने वालों तुम खाते हमारा ही हो
    ऐ वतन को तोड़ने वालों तुम्हारी साँसें हम चलने दें, तभी तक हैं
    पर तुम्हें लगने लगा है कि तुम बन शासक हमें नेस्तनाबूत कर सकते हो
    खड़े हो रहे हैं देखो नौजवां हमारे, लड़ने को, तुम्हारी सत्ता हटाने तक… ।

  37. संजीव जी नमस्कार
    इस परिचर्चा में भाग लेने से पहले मै सभी पाठकों और पत्रकारों महोदय से ये पूछना चाहता हूँ कि क्या यदि कोई संघटन जो भस्त्र हो, जिसके नेता मिथ्या प्रलाप करते हों, चोर हों यदि उस संगठन से हेड कि कुर्सी किसी ईमानदार को दे दी जाये तो वे व्यक्ति ईमानदार कहलायेगा,

  38. हमारे भ्रस्त नेता गण कृपया भारत के विकाश के बारे में थोरा शोचे, भारस्ताचार आयर बलात्कार के अलावा न्यूज़ में , कुछ नहीं रहता है .
    थैंक्स माय बरास्त नेता .

  39. congress ki dukan me sab bhed chal chalne wale hai ,kahte hai ki bhed apna dimag nahi lagaati agar ek bhed kuyen me kud jaye to saari kud jaati hai,isi tarah in congressi bhedo ko sirf sirf darwariyo ki tarah gulaami hi aati hai congress ke neta desh ko kaha le ja rahe hai iske bare me koi nahi sochata.

  40. भ्रस्टाचार के खिलाफ उठ रही आवाजो को कम करने के लिए ही कांग्रेस हिन्दू आतंकवाद का काल्पनिक डर दिखा कर देश को गुमराह करने की गलती कर रही है, इससे विरोधी दलों की किसी संभावित एकता का दरवाजा भी स्वतः बंद हो जायेगा,क्योंकि इस देश में धर्मनिरपेक्ष उसी को मानते है जो हिंदुत्व को गाली दे , लेकिन राहुल बाबा यह क्यों भूलते हो कि ` ये पब्लिक है – सब जानती है.
    अब समय आ गया है कि सभी लोग इस देश की सभी समस्याओ की जड़ भ्रस्टाचार रूपी दानव के खिलाफ एकजुटता दिखाए और इसका समूल नाश हो.

  41. सब सत्ता पर विदेशी राजमाता का आज्ञाकारी सरदार सरदारी कर रहा हो तो उससे पारदर्शिता और शुचिता की बात करना बेमानी है.
    युवराज विदेशी लोगों से देश की समस्यां डिस्कस कर रह है या फिर नया होव्वा खड़ा कर रहा देश दुनिया के सामने……. देखो जी हमारे यहाँ हिंदू आंतकवाद तैयार हो है…..
    राजमाता मुग्ध है…. अपने व्यक्तित्व पर : देखो कैसे मैंने १ अरब जनसँख्या के देश में अपना सिक्का जमा रखा है.

    अंधकार के इस युग में जब मीडिया तक बेबस दिखाई दे रही है….. तो बस इन्टरनेट ही ऐसा साधन नज़र आ रहा है….. जहाँ थोड़ी रौशनी की किरण नज़र आती है..

    आपके जज्ज्बे को सलाम…… जो एक बहस तैयार कर रहे हैं :
    भवदीय
    दीपक डुडेजा

  42. आदरणीय भाई संजीव सिन्हा जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो प्रेरक आंदोलन छेड़ा है उसके लिए उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद। कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार से कड़ाई से निबटने का सिर्फ कागजी भाषण दे रहे हैं। कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार से निबटने का पांच सूत्री एजेंडा तय करके इतिश्री समझ ली। राहुल गांधी और प्रधानमंत्री ने उस पर तेज अमल की बात कह कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया। लेकिन यह सर्वविदित हो चुका है कि सभी मंत्री भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं बस अभी तक बात यही है कि ‘जो पकड़ा गया वो चोर कहलाया है’।

    वर्ष 2010 को भ्रष्टाचार वर्ष कहना भी सही रहेगा क्योंकि यदि इस दौरान हुए घोटालों की कुल रकम जोड़ी जाए तो वह अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से जितनी होगी। मनमोहन सिंह 9 प्रतिशत की दर से विकास की बात कह रहे हैं लेकिन उनकी सरकार घोटालों में 100 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है।

    मैं श्री सिन्हा जी को एक बार पुनः धन्यवाद देते हुए उनके द्वारा शुरू की गई इस महाबहस में भाग लेने का अवसर प्रदान करने पर अपने को धन्य समझता हूं। निश्चित रूप से उनके द्वारा अथक मेहनत से मुहैया कराए गए इस मंच से ऐसे विचार सामने आएंगे जो देशवासियों को झकझोर कर रख देंगे और भ्रष्टाचार रूपी दैत्य का विनाश संभव हो सकेगा।

    जय हिन्द, जय हिन्दी
    नीरज कुमार दुबे

  43. आदरणीय सम्पादक जी…मै क्षमा चाहता हूँ पिछले कुछ समय से प्रवक्ता से दूर रहा…दरअसल मै अपने ऑफिशियल ट्यूर पर था, समय ही नहीं मिला..
    आपके विचारों से पूर्णत: सहमत हूँ, मनमोहन सिंह को पद पर बने रहने का कोई अधकार नहीं है…किन्तु वह भी क्या करे, अपना दिमाग चलाना कब सीखा है मनमोहन सिंह जी ने…जो मैडम ने कह दिया वही तो करना पड़ता है…जिस दिन मैडम बोल देंगी कि पद युवराज राहुल के लिए छोड़ दो तब अवश्य छोड़ देंगे…भारत माता के सम्मान की चिंता उन्हें क्यों होने लगी, उन्हें तो सोनिया माता के सम्मान कि अधिक चिंता है…
    घोटाले दर घोटाले करने वाली कांग्रेस राष्ट्रमंडल खेलों के खर्चे बढ़ने के सवाल पर महंगाई का बहाना बनाने लगी…इस पर पहला तो जवाब यही होगा कि महंगाई तो कांग्रेस की ही देन है…और महंगाई ही यदि कारण होता भी तो खर्चा दो या तीन गुना बढ़ना चाहिए था, किन्तु यहाँ तो खर्चा पैंतीस गुना अधिक हो गया…साफ़ है सोनिया माता के सम्मान में कितना खर्चा हुआ है और वह एक आम भारतीय नागरक की जेब से निकाला गया है…मनमोहन सिंह हमारे प्रधान मंत्री हैं जवाब उन्हें देना ही पड़ेगा और यदि जवाब देने की औकात नहीं है तो पद पर बने रहने की भी उनकी कोई औकात नहीं है, उन्हें पद छोड़ देना चाहिए…

  44. सँभवतः भ्रष्टाचार और भारतीय लोकतंत्र का चोली दामन का साथ बन चुका है … आदमी या सत्ता का दल नही व्यवस्था बदलने की जरूरत प्रतीत हो रही है … पहले भी पुरानी सरकारो के समय डायरी कांड , हवाला कांड , शक्कर घोटाला , यूरिया घोटाला , सैन्य सामान की खरीदी का मामला … जाने क्या क्या हुआ .. जांच अधूरी … किसी को कोई सजा नही … लोग भूल गये … आज के घोटाले तो सबको दिख ही रहे हैं … ठगी तो जनता ही जा रही है …. …

  45. जब देश में भ्रस्टाचार अपने उत्कर्ष पर hai तभी बौराए भ्र्स्तचरिओन ne एक नया shigoofa हिन्दू आतंकवाद ka भी छोड़ दिया है ..कितना बचकाना है उनका यह प्रलाप … जनता हस रही है.. राहुल बाबा की मई बहुत ijjat करता था लेकिन इस प्रलाप से तो उनके ऊपर दया आती है. बेचार्रा …..उसे अपनी पार्टी के भर्स्ट rajnitygya नहीं दिखाई पद रहे हैं..

Leave a Reply

%d bloggers like this: