गजल:दोस्त की शक्ल में दुश्मन से बचा ए भाई…..

इक़बाल हिंदुस्तानी

सारी दुनिया का ना तू ठेका उठा ए भाई,

तेरा जो फ़र्ज़ है तू उसको निभा ए भाई।

 

तेरी दौलत से हमें कुछ नहीं लेना देना,

कितनी इज़्ज़त है तेरे दिल में दिखा ए भाई।

 

कोई तालीम हो कोई भी ज़बां हो चाहे,

अपने बच्चे का तू किरदार बना ए भाई।

 

मुझको क्यों छोटा बनाने को परेशां हो तुम,

इक बड़ी से बड़ी लक्कीर बना ए भाई।

 

जिनको पैसे से नहीं प्यार उसूलों से हो,

ऐसे रूठे हुए यारों को मना ए भाई।

 

सबके हो के भी किसी के ना रहे तुम कैसे,

हो सके तो हमको भी ये राज़ बता ए भाई।

 

चापलूसों की क़द्र हैं यहां यारों की नहीं,

दोस्त की शक्ल में दुश्मन से बचा ए भाई।

 

तू ने पाला है भरम तू है कवि सबसे बड़ा,

खुद को इंसान बना पहले बड़ा ए भाई।।

 

 

नोट-फ़र्ज़ः कर्तव्य, तालीमः शिक्षा, किरदारः चरित्र, उसूलः सिध्दांत

 

1 thought on “गजल:दोस्त की शक्ल में दुश्मन से बचा ए भाई…..

  1. मुझको क्यों छोटा बनाने को परेशां हो तुम,

    इक बड़ी से बड़ी लक्कीर बना ए भाई।

    सुन्दर अभिव्यक्ति

Leave a Reply

%d bloggers like this: