हर उम्र वैसे अजीब होती है

ये सत्तर की उम्र भी अजीब होती है,
बुढ़ापे की दहलीज़ होती है,
इसके आगे जितनी मिल जाये,
सूद पर व्याज होती है।

 

 

सत्तर की उम्र में भी रोमांस होता है,
अंदाज़ ज़रा सा अलग होता है
तुमने दवाई खाई
अब आराम करलो,
ऐसी बातें होती है।

 

 

किसको कितनी दवाइयां निगलनी है
किस किस डाक्टर को दिखाना है,
जांच करानी है, अस्पताल जाना है।
दवाई खाकर फिर
किसी नये काम में लग जाना है।

 

 

बच्चे क्या कर रहे हैं….
मत सोचो
अपनी ज़िन्दगी जीने दो….
खुश रहो खुश रहने दो
सत्तर की उम्र कुछ ऐसी होती है।

 

 

बेटे ने कहा
मां मेरी कमीज़ में बटन लगा देना,
मां को तो नई उर्जा मिलती है,
काम तो बहुत करने का मन करता,
पर शरीर अब
जल्दी थक जाता है
सत्तर की हो या अस्सी की
हौसले की क्या उम्र होती है!

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