आदमी अगर दुःखी है तो स्वविचार व मन से

—विनय कुमार विनायक
भारत में जातिवाद का जहर भरा है,
अपनी जाति का दुष्ट व अत्याचारी भी प्यारा है,
मगर ये भी सोलहों आने है सही
स्वजाति विरादरी से ज्यादा बुरा पराया होता नहीं!

पराया अपरिचित हो या सुपरिचित हो
पराया आपसे निरपेक्ष या आपका सापेक्ष होता है,
पराए में परायापन है, तो विरोध भी कम है,
पराए को अपना बनालो तो पराए में अपनापन है!

स्वजाति के नाम पर आमतौर पर
आदमी को बेईमान व बदनाम होते हुए देखा
मगर स्वजाति गोत्रज भाई से बढ़कर
दूसरा पराया हानिकारक होता कदापि नहीं!

स्वजाति सत्कर्म, सत्संग हेतु कभी आते नहीं,
स्वजाति अवांछित लाभ के लिए आते सदा हीं,
स्वजाति आपकी ईमानदारी को घृणा से देखते,
जबकि पराए आपके नेकनीयत में खुदाई पाते!

जर जमीन जायदाद का विवाद अधिकतर
सगे संबंधी काका भतीजा भाई गोतिया से होता,
किसी की सफलता और उपलब्धि पर
सर्वाधिक शिकायती लहजा स्वजाति का ही होता!

आदमी को है अगर दुःख,सुख, कष्ट या कमी
तो उसका जिम्मेदार आदमी होता है स्वयं ही,
आदमी व्यवहार से प्यार पाता या मार खाता,
पर आदमी सदा दूसरे को जिम्मेवार ठहराता!

आदमी हमेशा दूसरों में निकालता नुक्ताचीनी,
आदमी हमेशा करता अपने मन की मनमानी,
आदमी अक्सरा अपनी वजह से परेशान रहता,
आदमी अपनी खामियां कभी परख नहीं पाता!

आदमी को अगर दुःख है, दुःख का कारण वे ही,
आदमी के दुःख की दवा खुद के सिवा कहीं नहीं,
आदमी किसी वाद में घिरे तो तर्क विचार से डरे,
आदमी चाहे मुक्ति तो वाद से बंधना ठीक नहीं!

तुम्हारे मर्ज की दवा राम शलाका प्रश्नावली नहीं,
तुम्हारे दुःख का इलाज पुराण कुरान एंजिल नहीं,
तुम बुद्ध महावीर गुरु ज्ञान अद्यतन किए बिना
सिर्फ वेद बाइबल कुरान में निदान पाओगे नहीं!

आदमी अपने ईश धर्मग्रंथ की झूठी बड़ाई करते,
आदमी के पूजा नमाज में ईश्वर खुदा नहीं होते,
आदमी विधर्मियों को नाखुश करने में लगे रहते,
आदमी पूजा नमाज से नफ़रत के माहौल बनाते!

आदमी अगर दुःखी है तो स्वविचार व मन से,
आदमी अगर छले जाते तो स्वजाति स्वजन से,
आदमी भ्रष्ट होते स्वजाति विरादरी की वजह से,
आदमी अगर धोखाधड़ी करते तो खुद के रब से!
—विनय कुमार विनायक

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