लेखक परिचय

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

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love1हुई पहली फुहार भरी बारिश तो तेरी याद आई

निंदिया से पहले सपनों की बारात

और साथ में

कुछ हलके-हौले से बीत जानें की

बोझिल सी बात भी आई.

हर बूँद के साथ बरसा जो

वो सिर्फ पानी न था.

तेरे यहीं कहीं होने का अहसास भी था उसमें

और तेरी बातों के चलते रहनें का भ्रम भी.

उस बरसतें पानी में कही

गहरे उच्छवासों के साथ

कहे गए शब्दों के बेतरतीब से गजरे भी थे

जो कैसे भी अच्छे ही लगते थे.

गहरी पैठी रंगत के साथ

उठे उठे से रंग

और

अपनी पंखुड़ियों पर

स्फूर्ति और जीवंतता की आभा लिए

वे पुष्प बेतरतीब होकर भी

कितनें ही आकर्षक और मोहक हो गए थे.

बारिश

लगता नहीं कि अब बीतेगी

हाँ कुछ और

यहाँ वहाँ से

और इधर उधर से बीत जाएगा.

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