जानिए वैवाहिक जीवन में तनाव के कारण

विवाह हमारे पारम्परिक सोलह संस्कारों में से एक है, जीवन के एक पड़ाव को पार करके किशोरावस्था से युवास्था में प्रवेश करने के बाद व्यक्ति को जीवन यापन और सामाजिक ढांचे में ढलने के लिए एक अच्छे जीवन साथी की आवश्यकता होती है और जीवन की पूर्णता के लिए यह आवश्यक भी है परन्तु हमारे जीवन में सभी चीजें सही स्थिति और सही समय पर हमें प्राप्त हो ऐसा आवश्यक नहीं है इसमें आपके भाग्य की पूरी भूमिका होती है और जन्मकुंडली इसी भाग्य का प्रतिरूप होती है जहाँ बहुत से लोगो का वैवाहिक जीवन शांति और सुखमय व्यतीत होता है वहीं बहुत बार देखने को मिलता है के व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में हमेशा तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है आपस में वाद विवाद या किसी ना किसी बात को लेकर वैवाहिक जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिती बनी ही रहती है ऐसा वास्तव में व्यक्ति की जन्मकुंडली में बने कुछ विशेष ग्रह योगों के कारण ही होता है आईये इसे ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जानते हैं।

विवाह संस्कार भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह मनुष्य को परमात्मा का एक वरदान है। कहते हैं, जोड़ियां परमात्मा द्वारा पहले से ही तय होती हैं। पूर्व जन्म में किए गए पाप एवं पुण्य कर्मों के अनुसार ही जीवन साथी मिलता है और उन्हीं के अनुरूप वैवाहिक जीवन दुखमय या सुखमय होता है। कुंडली में विवाह का विचार मुखयतः सप्तम भाव से ही किया जाता है। इस भाव से विवाह के अलावा वैवाहिक या दाम्पत्य जीवन के सुख-दुख, जीवन साथी अर्थात पति एवं पत्नी, काम (भोग विलास), विवाह से पूर्व एवं पश्चात यौन संबंध, साझेदारी आदि का विचार किया जाता है।

यदि कोई भाव, उसका स्वामी तथा उसका कारक पाप ग्रहों के मध्य में स्थित हों, प्रबल पापी ग्रहों से युक्त हों, निर्बल हों, शुभग्रह न उनसे युत हों न उन्हें देखते हों, इन तीनों से नवम, चतुर्थ, अष्टम, पंचम तथा द्वादश स्थानों में पाप ग्रह हों, भाव नवांश, भावेश नवांश तथा भाव कारक नवांश के स्वामी भी शत्रु राशि में, नीच राशि में अस्त अथवा युद्ध में पराजित हों तो उस भाव से संबंधित वस्तुओं की हानि होती है। (उत्तर कालामृत) वैवाहिक जीवन के अशुभ योग यदि सप्तमेश शुभ युक्त न होकर षष्ठ, अष्टम या द्वादश भावस्थ हो और नीच या अस्त हो, तो जातक या जातका के विवाह में बाधा आती है। यदि षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश सप्तम भाव में विराजमान हो, उस पर किसी ग्रह की शुभ दृष्टि न हो या किसी ग्रह से उसका शुभ योग न हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा आती है।

यदि सप्तम भाव में क्रूर ग्रह हो, सप्तमेश पर क्रूर ग्रह की दृष्टि हो तथा द्वादश भाव में भी क्रूर ग्रह हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा आती है। सप्तमेश व कारक शुक्र बलवान हो, तो जातक को वियोग दुख भोगना पड़ता है। यदि शुक्र सप्तमेश हो (मेष या वृश्चिक लग्न) और पाप ग्रहों के साथ अथवा उनसे दृष्ट हो, या शुक्र नीच व शत्रु नवांश का या षष्ठांश में हो, तो जातक स्त्री कठोर चित्त वाली, कुमार्गगामिनी और कुलटा होती है। फलतः उसका वैवाहिक जीवन नारकीय हो जाता है। यदि शनि सप्तमेश हो, पाप ग्रहों क साथ व नीच नवांश में हो अथवा नीच राशिस्थ हो और पाप ग्रहों से दृष्ट हो, तो जीवन साथी के दुष्ट स्वभाव के कारण वैवाहिक जीवन क्लेशमय होता है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण में हमारी कुंडली का “सप्तम भाव” विवाह का भाव होता है अतः हमारे जीवन में विवाह, वैवाहिक जीवन, पति, पत्नी आदि का सुख सप्तम भाव और सप्तमेश (सातवें भाव का स्वामी) की स्थिति पर निर्भर करता है। इसके आलावा पुरुषों की कुंडली में “शुक्र” विवाह, वैवाहिक जीवन और पत्नी का नैसर्गिक कारक होता है तथा स्त्री की कुंडली में विवाह, वैवाहिक जीवन और पति सुख को “मंगल” और “बृहस्पति” नियंत्रित करते हैं अतः जब किसी व्यक्ति की कुंडली में वैवाहिक जीवन को नियंत्रित करने वाले ये घटक कमजोर या पीड़ित स्थिति में हो तो वैवाहिक जीवन में बार बार तनाव, वाद–विवाद या उतार चढ़ाव की स्थिति बनती है।

हर घर की यही कहानी है कि पहले जो दो लोग आपस में एक दूसरे से इतना प्रेम करते थे वही आज छोटी-छोटी बात पर आपस में झगड़ते हैं. कभी-कभी तो झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि कई दिन तक एक दूसरे कि शक्ल तक नहीं देखते. शादी में बेवफाई का क्या कारण है। हाल ही में एक रिसर्च के अनुसार 10 प्रतिशत तलाक पार्टनर की बेवफाई के कारण होते हैं। पति-पत्नी इस कारण से अपने रास्ते अलग-अलग कर लेते हैं यह स्वाभाविक है लेकिन बहुत से लोगों का रिश्ता इसलिए खराब हो जाता है क्यों कि वे एक दूसरे को धोखा देते हैं। यह काफी चौकाने वाला लगे लेकिन ये सच है बहुत से असंतुष्ट पार्टनर अपने साथी से अलग होने से पहले उसको धोखा देते हैं। पुरुषों का धोखा देना और महिलाओं का धोखा देना अलग-अलग तरह का होता है। कुछ पुरुष तो इस रिश्ते के अलावा बाहर मजे लेने के लिए ही अपनी पत्नी को धोखा देते हैं।

कुछ पुरुष जब तक परेशानी में नहीं पड़ते तब तक शर्म महसूस नहीं करते हैं। जहां तक महिलाओं का सवाल है वे अपने साथी को खास तौर पर धोखा तब देती हैं जब वे अपने आपको रिश्ते में भावनात्मक रूप से अकेला पाती हैं। स्त्री-पुरुषों में धोखा देने का तरीका और आदत अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन धोखा देने के पीछे उद्देश्य लगभग एक जैसा ही होता है।
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जानिए किन विशेष ग्रहयोग के कारण होता हैं वैवाहिक जीवन में संघर्ष––

यदि कुंडली के सप्तम भाव में कोई पाप योग (गुरु–चांडाल योग, ग्रहण योग अंगारक योग आदि) बना हुआ हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और बाधाएं उपस्थित होती हैं।
यदि सप्तम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनती है।
राहु–केतु का सप्तम भाव में शत्रु राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बनता है।
यदि सप्तम भाव के आगे और पीछे दोनों और और पाप ग्रह हो तो यह भी वैवाहिक जीवन में बाधायें उत्पन्न करता है।
सप्तमेश का पाप भाव (6,8,12) में बैठना या नीच राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में उतार चढ़ाव का कारण बनता है।
पुरुष की कुंडली में शुक्र नीच राशि (कन्या) में हो, केतु के साथ हो, सूर्य से अस्त हो, अष्टम भाव में हो या अन्य किसी प्रकार पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष उत्पन्न होता है।
स्त्री की कुंडली में मंगल नीच राशि (कर्क) में हो, राहु शनि से पीड़ित हो बृहस्पति नीचस्थ हो राहु से पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में बाधायें और वाद विवाद उत्पन्न होते हैं।
पाप भाव (6,8,12) के स्वामी यदि सप्तम भाव में हो तो भी वैवाहिक जीवन में विलम्ब और बाधाएं आती हैं।
सप्तम में शत्रु राशि या नीच राशि (तुला) में बैठा सूर्य भी वैवाहिक जीवन में बाधायें और संघर्ष देता है।

विशेष – यदि पीड़ित सप्तमेश, सप्तम भाव, शुक्र और मंगल पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में वैवाहिक जीवन की समस्याएं अधिक बड़ा रूप नहीं लेती और उनका कोई ना कोई समाधान व्यक्ति को मिल जाता है, वैवाहिक जीवन की समस्यायें अधिक नकारात्मक स्थिति में तभी होती हैं जब कुंडली में वैवाहिक जीवन के सभी घटक पीड़ित और कमजोर हो और शुभ प्रभाव से वंछित हों।
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कभी-कभी किसी जन्मकुंडली में द्विविवाह योग होता है, जिसके फलस्वरूप जातक या जातका का वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है। ऐसे में दोनों को पुनः छोटे से रूप में पंडित से विवाह रस्म करवाना चाहिए। विवाह शुभ मुहूर्त या लग्न में ही करना चाहिए, अन्यथा दाम्पत्य जीवन के कलहपूर्ण होने की प्रबल संभावना रहती है। यदि ऐसा नहीं हुआ हो अर्थात यदि विवाह शुभ मुहूर्त या शुभ लग्न में नहीं हुआ हो, तो विवाह की तिथि व समय का विद्वान ज्योतिषाचार्य से विश्लेषण करवाना चाहिए और शुभ मुहूर्त या लग्न में पुनः विवाह करना चाहिए।

पारिवारिक सुख की प्राप्ति हेतु यदि पति-पत्नी के संबंधों में कटुता आ जाए, तो पति या पत्नी, या संभव हो, तो दोनों, ऊपर वर्णित मंत्र का पांच माला जप इक्कीस दिन तक प्रतिदिन करें। जप निष्ठापूर्वक करें, तनाव दूर होगा और वैवाहिक जीवन में माधुर्य बढ़ेगा।

मंगल दोष के कारण वैवाहिक जीवन में कलह या तनाव होने की स्थिति में निम्नोक्त क्रिया करें। पति या पत्नी, या फिर दोनों, मंगलवार का व्रत करें और हनुमान जी को लाल बूंदी, सिंदूर व चोला चढ़ाएं। तंदूर की मीठी रोटी दान करें। मंगलवार को सात बार एक-एक मुट्ठी रेवड़ियां नदी में प्रवाहित करें। गरीबों को मीठा भोजन दान करें। मंगल व केतु के दुष्प्रभाव से मुक्ति हेतु रक्त दान करें। चांदी का जोड़ विहीन छल्ला धारण करें।
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पति पत्नी के बीच प्रेम कम होने का अन्य कारण वास्तु दोष भी होता हैं —

—-जब दंपत्ति एक ही बेड पर दो अलग-अलग गद्दे का उपयोग करते हैं तो उनके बीच होने वाला मतभेद बढ़ने की संभावना और अधिक हो जाती है।
—पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाये रखने के लिए बेड को कभी भी घर के बीम के नीचे नहीं लगाना चाहिए।बीम अलगाव का प्रतीक माना जाता है जो रिश्तों में दूरियां लाता है।
—-नवविवाहित दंपत्ति को संतान प्राप्ति तक वायव्य यानी उत्तर पश्चिम या उत्तर दिशा के मध्य के शयन कक्ष में सोना चाहिए। इससे प्रेम बढ़ता है और जल्दी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।
—-पति पत्नी के संबधो में मजबूती के लिए बैडरुम की दिवारो को गुलाबी या पीले रंग से कलर करवाना चाहिए। तथा छत पर यदि लोहे की गाटर लगी हो तो उसके नीचे बैड नही लगाना चाहिए।
—-वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए घर में रोजाना या कम से कम सप्ताह में एक बार नमक मिले पानी का पौछा अवश्य लगाये।
—यदि पति पत्नी में ज्यादा कलह रहता है तो घर के लिए आटा शनिवार को ही पिसवाएं या खरीदे। इस आटे में यदि कुछ पिसे काले चने का आटा भी मिला सके तो ज्यादा शुभ परिणाम  सामने आते है।
— पति-पत्नी जिस कमरे में सोते है उस कमरे में ड्रेसिंग टेबल नहीं होना चाहिए। यदि ड्रेसिंग टेबल उसी कमरे में रखना पड़े तो उससे इस प्रकार रखे की सोते और उठाते समय उस पर नजर ना पड़े।यदि ऐसा करना अनिवार्य हो तो रात को सोने से पहले इस दर्पण को किसी चादर से ढक देना चाहिए।
—–पति पत्नी में मधुर संबधो के लिए बैडरुम की दिवार पर राधा-कृष्ण, खिले हुए गुलाब, या हंसते हुए बच्चे का चित्र लगाना भी शुभ माना जाता है।
—-पति पत्नी के बीच का प्रेम और विश्वास बनाए रखने के लिए बिस्तर पर बिछे तकिए का खोल और चादर दो तीन दिनों पर बदलते रहना चाहिए।
—-पति एवं पत्नी के संबंधों में परस्पर प्रेम व मधुरता बढ़ाने हेतु शयनकक्ष में बिस्तर पर लाल रंग की चादर अथवा कम्बल या रजाई आदि का प्रयोग करने से भी काफी लाभ मिलता है। शयनकक्ष में कोई भी जल का स्रोत अथवा जल का चित्र एवं असली पौधा नहीं होना चाहिए। सोते समय दंपत्ति सिर या पैर सीधे दरवाजे की तरफ नहीं होने चाहिए एवं बिस्तर के ऊपर कोई प्रत्यक्ष दिखती हुई बीम नहीं होनी चाहिए।
—-आजकल धातु से निर्मित पलंगों का चलन काफी बढ़ गया है किन्तु वास्तु की मान्यताओं के अनुसार धातु निर्मित पलंग दाम्पत्य जीवन में टकराव व कटुता की भावना उत्पन्न करता है। अतः पलंग धातु का न बनवाकर लकड़ी का ही बनवाना चाहिए।
—–नैर्ऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिमी दिशा प्रेम एवं विवाह की दिशा है। इस दिशा को उचित प्रकार से सक्रिय करके दाम्पत्य सम्बन्धों की कटुता समाप्त की जा सकती है। दाम्पत्य संबंधों में प्रांगढ़ता बढ़ाने हेतु शयनकक्ष के अन्दर दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक नर व एक मादा मैन्डारिन बत्तखों की मूर्ति जोड़े से लगाएं।
—-शयनकक्ष के दक्षिण-पश्चिम भाग में दो असली क्वाट्र्ज क्रिस्टल रखने से भी दाम्पत्य संबंधों में परस्पर प्रेम व प्रांगढ़ता की वृद्धि होती है। विवाहित दंपत्ति का एक साथ खिंचा हुआ चित्र शयनकक्ष के अन्दर उसकी दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से दाम्पत्य जीवन का तनाव दूर होता है।
—-शयनकक्ष में यदि कोई दर्पण इस प्रकार से लगा हुआ है जिसमें सोते समय पति अथवा पत्नी का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है, तो वास्तु की मान्यता अनुसार इस प्रकार शयनकक्ष में लगा दर्पण शैनेः शैनेः दाम्पत्य सम्बन्धों में भारी तनाव उत्पन्न कर देता है। अतः दर्पण को इस प्रकार से शयनकक्ष में लगाएं की सोते समय उसमें दंपत्ति का प्रतिबिम्ब न दिखलाई पड़े। यदि किसी कारण से ऐसा करना संभव न हो पा रहा हो तो दर्पण को किसी परदे आदि से ढक कर रखें।
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आपके वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानी के निवारण के लिए निम्न उपाय करें —

वैवाहिक जीवन में यदि तनाव या संघर्ष की स्थिति हो तो इसके पीछे कुंडली में बने कुछ विशेष ग्रहयोग तो होते ही हैं अतः यदि इनके लिए समय से सटीक उपाय निरंतर रूप से किये जाएँ तो निश्चित ही उनका सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में बने ग्रहयोग भिन्न होने से सबके लिए व्यक्तिगत उपाय भी अलग ही होते हैं पर यहाँ हम कुछ ऐसे सामान्य उपाय बता रहे हैं जो वैवाहिक जीवन की समस्यायों में सभी के लिए उपयोगी हैं –

रोज रात में सोने से पहले चने की दाल को भिगो दे. सुबह उठने पर नहाने के बाद इसे गुड़ में मिलाकर किसी गे को खिला दे. इसके अलावा भगवान् विष्णु के मंदिर में जाकर बेसन के लड्डू चढ़ाये गरीबो में बाँट दे.
यदि वैवाहिक जीवन में तनाव है तो शुक्ल पक्ष से हर सोमवार को साबूत हल्दी पानी से भरे कुएं में डाले।(shukhi shadi ke tone totke)  तनाव जल्दी ही समाप्त हो जायेगा।
पति पत्नी में मतभेद होने की स्थिति में 11 गोमती चक्रो को लाल रंग की सिंदूर की डिब्बी में रखकर इस डिब्बी को घर मे किसी साफ जगह पर रखे। मतभेद दूर होकर घर में प्रेम का माहौल तैयार होगा।
वैवाहिक जीवन में शांति और प्रेम के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को एक घी की कटौरी भरकर पति पत्नी को उसमें अपना चैहरा देखना चाहिए । और फिर इस कटौरी को घी सहित किसी मंदिर में चढ़ा दे।
नियमित रूप से थोड़े से केसर को दूध में भिगो कर अपनी नाभि में लगाए, रोज केसर के दूध का सेवन करे.
हर गुरुवार के दिन केले की जड़ का पूजन चने की दाल गुड़ से करे, गरीबो को केलो का दान करे.
अपने सप्तमेश ग्रह के मंत्र का जाप करें।
यदि सप्तम भाव में कोई पाप योग हो या पाप ग्रह हो तो उसका दान करें।
पुरुष जातक शुक्र मंत्र – ॐ शुम शुक्राय नमः का नियमित जाप करें।
स्त्री जातक – ॐ अंग अंगरकाय नमः का जाप करें।
पुरुष जातक प्रत्येक शुक्रवार को गाय को चावल की खीर खिलाएं।
स्त्री जातक प्रत्येक मंगल और गुरूवार को गाय को गुड खिलाएं।
किसी भी देवी के मंदिर में जाकर देवी माँ को सिंदूर अर्पित करे पांच सुहागनों को सिंदूर को उपहार स्वरुप दे.
शुभ फल पाने के लिए करे पारद से बने गणेशजी की पूजा
भगवान को मधुपर्क चढाने से होती है सभी मनोकामनाएं पूरी
गणेशजी की पूजा में ज़रूर करे शमी के पत्तो का प्रयोग |
यदि पति पत्नी पूरी तरह से वैवाहिक सुख प्राप्त नही कर पा रहे हो तो 4 रविवार तक लगातार सुबह पीपल के पेड के सामने तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
यदि पति पत्नी में ज्यादा कलह रहता है तो घर के लिए आटा शनिवार को ही पिसवाएं या खरीदे। इस आटे में यदि कुछ पिसे काले चने का आटा भी मिला सके तो ज्यादा शुभ परिणाम  सामने आते है।
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 जानिए अनुभूत उपाय : —

उचित समय पर विवाह हेतु कन्या को कम से कम सवा पांच रत्ती का पुखराज सोने की अंगूठी में गुरुवार को बायें हाथ की तर्जनी में और कम से कम सात रत्ती का फीरोजा चांदी की अंगूठी में शुक्रवार को बायें हाथ की कनिष्ठिका में धारण कराना चाहिए। इनके अतिरिक्त उपाय व निवारण में यंत्र की पूजा भी करनी चाएि। यदि कुंडली में वैधव्य योग हो, तो शादी से पहले घट विवाह, अश्वत्थ विवाह, विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम विवाह विवाह कराना तथा प्रभु शरण में रहना चाहिए।

वैवाहिक जीवन में सुखानुभूति हेतु सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए निम्नलिखित मंत्र का जप विधि विधानपूर्वक करना चाहिए।

मंत्र : ऐं श्रीं क्लिम् नमस्ते महामाये महायोगिन्धीश्वरी। सामान्जस्यम सर्वतोपाहि सर्व मंगल कारिणीम्॥

शुक्ल पक्ष के गुरुवार को स्नान करके शाम के समय पूजा प्रारंभ करें। पूजा के समय मुख-पश्चिम की ओर होना चाहिए। दुर्गा जी का चित्र सामने रखकर गाय के घी का दीप जलाएं। समान वजन की सोने की दो अंगूठियां देवी मां के चरणों में अर्पित करें। गुलाब के 108 पुष्प 108 बार मंत्र पढ़कर अर्पित करें। लाल चंदन की माला से 21 दिन तक प्रतिदिन एक माला जप करें। 21 दिन बाद मां के चरणों में अर्पित अंगूठियां लेकर एक किसी योग्य और कर्मनिष्ठ ब्राह्मण को दे दें और दूसरी स्वय पहन लें। यह पूजा-अर्चना निष्ठापूर्वक करें, दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।

इसके अतिरिक्त श्री दुर्गा-सप्तशती का स्वयं पाठ करें। अष्टकवर्ग के नियमानुसार यदि सर्वाष्टक वर्ग में सातवें विवाह भाव में शुभ बिंदुओं की संखया जितनी कम हो, दाम्पत्य जीवन उतना ही दुखद होता है। वर्ग में बिंदुओं की संखया 25 से कम होने की स्थिति में वैवाहिक जीवन अत्यंत दुखद होता है।

लाल किताब के योग एवं उपाय शुक्र एवं राहु की किसी भी भाव में युति वैवाहिक जीवन के लिए दुखदायी होती है। यह युति पहले भाव 4 या 7 में हो, तो पति-पत्नी में तलाक की नौबत आ जाती है या अकाल मृत्यु की संभावना रहती है।

उपाय —यदि ऐसा विवाह हो चुका हो, तो चांदी के गोल वर्तन में काजल या बहते दरिया का पानी और शुद्ध चांदी का टुकड़ा डालकर किसी धर्मस्थान में देना चाहिए। साथ ही एक चांदी के बर्तन में गंगाजल या किसी अन्य बहते दरिया का पानी और चांदी का टुकड़ा डालकर अपने पास रखना चाहिए। यह उपाय विवाह से पूर्व या बाद में कर सकते हैं। यदि सातवें भाव में राहु हो, तो विवाह के संकल्प के समय बेटी वाला चांदी का एक टुकड़ा बेटी को दे। इससे बेटी के दाम्पत्य जीवन में क्लेश की संभावना कम रहती है। यह उपाय लग्न में राहु रहने पर भी कर सकते हैं, क्योंकि इस समय राहु की दृष्टि सातवें भाव पर होती है। यदि भाव 1 या 7 में राहु अकेला या शुक्र के साथ हो, तो 21 वें वर्ष या इससे पूर्व विवाह होने पर वैवाहिक जीवन दुखमय होता है। अतः उपाय के तौर पर विवाह 21 वर्ष के पश्चात ही कुंडली मिलान करके करें।

सूर्य और बुध के साथ शुक्र की युति किसी भी भाव में होने पर वैवाहिक जीवन में कुछ न कुछ दोष अवश्य ही उत्पन्न होता है, जिससे दाम्पत्य जीवन दुखमय रहता है। उपाय तांबे के एक लोटे में साबुत मूंग भरकर विवाह के संकल्प के समय हाथ लगाकर रखना चाहिए और इसे जल में प्रवाहित करना चाहिए। यदि यह उपाय विवाह के समय न हो सके, तो जिस वर्ष उक्त तीनों ग्रह लाल किताब के वर्षफलानुसार आठवें भाव में आएं, उस वर्ष कर सकते हैं। शुक्र यदि आठवें भाव में हो, तो जातक की पत्नी सखत स्वभाव की होती है, जिससे आपसी सामंजस्य का अभाव रहता है। इस योग की स्थिति में विवाह 25 वर्ष की उम्र के बाद ही करना चाहिए। इसके पहले विवाह करने पर पत्नी के स्वास्थ्य के साथ-साथ गृहस्थ सुख पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। उपाय आठवें भाव में स्थित शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए नीले रंग के फूल घर से बाहर जमीन में दबा दें या गंदे नाले में डाल दें।

सर्वजन हितार्थ उपाय जातक या जातका की जन्मपत्री में किसी भी प्रकार का दोष या कुयोग होने के कारण विवाह में बहुत बाधाएं आती हैं। इन बाधाओं के फलस्वरूप न केवल लड़का या लड़की बल्कि समस्त परिवार तनावग्रस्त रहता है।

यहां कुछ उपाय प्रस्तुत हैं, जिनका उपयोग करने से इन बाधाओं से बचाव हो सकता है। ये उपाय जन्मपत्री नहीं होने की स्थिति में भी किए जा सकते हैं। वर प्राप्ति हेतु मंत्र गुरुवार को किसी शुभ योग में उक्त मंत्र का फीरोजा की माला से पांच माला जप करें। यह क्रिया ग्यारह गुरुवार करें, विवाह शीघ्र होगा। सोमवार को पारद शिवलिंग के सम्मुख उक्त मंत्र का 21 माला जप करें। फिर यह जप सात सोमवार को नियमित रूप से करें, शीघ्र विवाह के योग बनेंगे।

भुवनेश्वरी यंत्र के सम्मुख उक्त मंत्र का सवा लाख जप करें, शीघ्र विवाह योग बनेंगे। मंत्र : कात्यायनी महामाये महायोगिनी धीश्वरी। नन्द गोपसुतं देवि पतिं ते कुरु ते नमः । मां पार्वती के चित्र के सामने, पूजा करने के पश्चात उक्त मंत्र का ग्यारह माला जप करें। यह क्रिया 21 दिनों तक नियमित रूप से करें, मां पार्वती मनोवांछित वर प्रदान करेंगी।
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हम आपको कुछ अन्य सामाजिक कारण बता रहे हैं जिनसे आप जानेंगे कि पति-पत्नी शादी के बाद एक दूसरे को धोखा क्यों देते हैं।

शादी में बेवफाई के कारण : जब कोई पार्टनर रिश्ते में नजरंदाज किया गया महसूस करता है तो उसके बेवफाई करने के अवसर बढ़ जाते हैं। ऐसा होने पर वह किसी और की तलाश शुरू कर देता है और फिर मौका मिलते ही धोखा देना शुरू कर देता है। चूंकि यह गलत है इसलिए यहीं से रिश्ते में बेवफाई का बीज बोने की तैयारी शुरू होती है।

ज्यादा की चाह : शादी में बेवफ़ाई का दूसरा कारण है कुछ ज्यादा पाने की तमन्ना करना। जब किसी पार्टनर को रिश्ते में खुशी और आनंद नहीं मिलती है तो निःसन्देह गुपचुप तरीके से कुछ और पाने की चाह रखता है और फिर रिश्ता टूट जाता है।

असंतुष्टि की सीमा पार होना : बहुत से पति पत्नी हैं जो एक दूसरे से संतुष्ट नहीं हैं। हालही में किए गए अध्ययन के अनुसार 50 प्रतिशत पार्टनर बेवफ़ाई के कारण रिश्ता तोड़ देते हैं। इस प्रकार असंतुष्टि भी एक कारण है जिससे पार्टनर एक दूसरे को धोखा देते हैं।

बोर होना या जीवन में उदासी छाना बोर होना : जितना समान्य लगता है उतना है नहीं, इससे रिश्ते भी टूट सकते हैं। एक्स्पर्ट्स के अनुसार यह भी बेवफाई का कारण हो सकता है। कुछ लोग हैं जो शादी के कुछ सालों बाद रिश्ते में हुई बोरियत को झेल लेते हैं लेकिन कुछ लोग हैं जो मनोरंजन के लिए रिश्ते के अलावा बाहर कहीं मुह मारते हैं।

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