लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

मैं बाबा रामदेव को प्यार करता हूँ। मोहन भागवत को भी प्यार करता हूँ। मदर टेरेसा, सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, प्रकाश कारात को भी प्यार करता हूँ। वैसे ही हिन्दुस्तान के हिन्दुओं, ईसाईयों, सिखों,जैनियों,बौद्धों को भी प्यार करता हूँ। इन सबके साथ मैं मुसलमानों को भी प्यार करता हूँ।

मेरा मानना है इस संसार में मनुष्य से घृणा नहीं की जा सकती,उसी तरह पशु-पक्षियों से भी नफरत नहीं की जा सकती। मुझे मोहन भागवत एक मनुष्य के नाते प्रिय हैं। संघ के नाते मैं उनका आलोचक हूँ। इसी तरह बाबा रामदेव मनुष्य ने नाते, एक योगी के नाते प्रिय हैं। एक योगव्यापारी के नाते मैं उनका आलोचक हूँ। इसी तरह मुझे पंकज झा और उनके तमाम संघभक्त दोस्त भी प्रिय हैं। वे मेरे शत्रु नहीं हैं। मैं नहीं समझता कि वे अपनी तीखी प्रतिक्रियाओं से कोई बहुत बड़ा अपकार कर रहे हैं। वे मनुष्य प्राणी के नाते हमारे बंधु हैं ।

हिन्दुओं में कुछ लोग मेरे लेखन से असहमत हों। वे इस कारण तरह-तरह के निष्कर्ष निकाल रहे हैं। मैं निजी तौर पर उनका भी शुक्रगुजार हूँ जो मुझमें बुखारी देख रहे हैं। वे अभी न जाने क्या-क्या नहीं बना देंगे। क्योंकि मैं उनके गंभीर विचारों को अपनी आलोचना से डिस्टर्व कर रहा हूँ। वे बेहद परेशान हैं।

उनका मानना है कि मैं इतना खराब हिन्दू क्यों हूँ जो हिन्दू होकर हिन्दुओं के जो तथाकथित गौरवपुरूष हैं उनकी आलोचना लिख रहा हूँ। मैं यहां किसी से यह प्रमाणपत्र लेना या उसे प्रमाणपत्र देना नहीं चाहता कि कौन कितना बड़ा हिन्दू है। कौन सही हिन्दू हैं या मुसलमान हैं। यह आपकी अपनी निजी मान्यता की समस्या है। इसके लिए किसी को प्रमाणपत्र देने का ठेका नहीं दिया जा सकता।

हिन्दुओं में जो लोग आलोचनात्मक विवेक की हत्या करने,हिन्दुओं में हिन्दुत्व के नाम पर गुलामी की भावना,अंधराष्ट्रवाद, हिन्दुत्व की अंधी होड़ में झोंकने के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें हम कभी क्षमा नहीं कर सकते। उनके प्रति हमारा आलोचनात्मक रूख हमेशा रहेगा। हिन्दू कभी विचारअंध नहीं रहे हैं।

हिन्दुत्व के प्रचारकों ने विचार अंधत्व पैदा किया है। हिन्दू धर्म में विचारों की खुली प्रतिस्पर्धा ती परंपरा रही है और यह परंपरा उन लोगों ने ड़ाली थी जो लोग कम से कम आरएसएस में कभी नहीं रहे।

संघ परिवार और उसके संगठनों के विचारों की उम्र बहुत छोटी है। हिन्दू विचार परंपरा में वे कहीं पर भी नहीं आते। वे हिन्दुत्व के नाम पर आम लोगों में पराएपन का प्रचार कर रहे हैं, घृणा पैदा कर रहे हैं। इसके लिए मुझे किसी प्रमाण देने की जरूरत नहीं हैं। हिन्दुत्व के नए सिपहसालारों ने जिस तरह के व्यक्तिगत और विषय से हटकर अपने विचार मेरे लेखों पर व्यक्त किए हैं। वे इस बात का प्रमाण हैं कि संघ परिवार की विचारधारा अंततः किस तरह घृणा के प्रचारक तैयार कर रही है।

प्रवक्ता डॉट कॉम लोकतांत्रिक मंच है और उसे इस रूप में काम जारी रखना चाहिए। मेरा विनम्र अनुरोध है कि जो लोग मेरे लेखों पर अपनी राय बेबाक ढ़ंग से देना चाहते हैं वे विषय पर अपनी राय दें और व्यक्ति के रूप में मुझे केन्द्र में रखकर न दें।

मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि हिन्दूशास्त्रों की शिक्षा मुझे श्रेष्ट हिन्दू विद्वानों से मिली है, उसी तरह मार्क्सवाद की भी शिक्षा श्रेष्ठ मार्क्सवादी विद्वानों से मिली है। एक हिन्दू के जितने संस्कार होने चाहिए वे मेरे भी हुए हैं।

मैं जानता हूँ कि संघ के अधिकांश मतानुयायी हिन्दू धर्म के अधिकांश पूजा-पाठ, विधि-विधान, मंत्रोपासना, देवपूजा आदि के बारे में किसी भी किस्म की हिन्दूशास्त्र में वर्णित परंपरा का पालन नहीं करते।

जो लोग हिन्दुत्व के नाम पर उलटी-सीधी बातें मेरे लेखों पर लिख रहे हैं वे ठीक से एक धार्मिक हिन्दू की तरह चौबीस घंटे आचरण तक नहीं करते। हिन्दुत्ववादी यदि एक अच्छे हिन्दूपंथानुयायी भी तैयार करते तो भारत की और हिन्दू समाज की यह दुर्दशा न होती।

हिन्दुत्ववादियों की हिन्दू धर्म के उत्थान में कोई रूचि नहीं है। वे हिन्दू धर्म के मर्म का न तो प्रचार करते हैं और नहीं आचरण करते हैं। इस मामले में वे अभी भी कठमुल्ले इस्लामपरस्तों से पीछे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि हिन्दुत्ववादियों ने अपने को राष्ट्रवाद, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, हिन्दु उत्थान, हिन्दू एकता आदि के बहाने हिन्दुत्ववादी राजनीति से जोड़ा है।

उल्लेखनीय है हिन्दुओं के लिए ज्ञान में श्रेष्ठता का वातावरण बनाने में सघ परिवार की कभी भी कोई सकारात्मक भूमिका नहीं रही है। बल्कि संघ परिवार अन्य फासिस्ट संगठनों की तरह बौद्धिकता और बुद्धिजीवियों से घृणा करना सिखाता रहा है। बेसिर-पैर की हांकने वाले गपोडियों को प्रोत्साहन देता रहा है। संघ के विचारों का हिन्दी के बुद्धिजीवियों और लेखकों पर कितना असर है, इसे जानकर ही उनके विचारों की शक्ति का अंदाजा लगा सकते हैं। हिन्दी में अधिकांश बड़े लेखक-साहित्यकार संघ के प्रभाव से आज भी मुक्त है। संघ के पास पांच बड़े श्रेष्ठ हिन्दी लेखक और समीक्षक नहीं हैं।

संघ परिवार की विचारधारा से प्रभावित हिन्दी में शिक्षक मिल जाएंगे लेकिन बड़े प्रतिष्ठित साहित्यकार मुश्किल से मिलेंगे। हिन्दुत्ववादी बताएं इसका क्या कारण है? हमारे संघ भक्त जबाब दें कि प्रेमचंद को बोल्शेविक क्रांति क्यों पसंद थी और वे साम्प्रदायिकता से घृणा क्यों करते थे?

मैं नहीं जानता कि संघ परिवार के लोगों को मुसलमानों से खासतौर पर नफरत क्यों हैं? मैं निजी तौर पर मुसलमानों और इस्लाम से बेहद प्यार करता हूँ। मैं निजी तौर पर बुद्धिवादी हिन्दू हूँ और हिन्दूधर्म की तमाम किस्म की रूढ़ियों को नहीं मानता। मुझे हिन्दूधर्म की बहुत सी अच्छी बातें पसंद हैं। पहली, हिन्दू धर्म अन्य किसी धर्म के प्रति घृणा करना नहीं सिखाता। हिन्दू धर्म ने अन्य धर्मों के प्रति घृणा का नहीं प्रेम का संदेश दिया है। इसी तरह वर्णाश्रम व्यवस्था के जो बाहर है ,उनके प्रति घृणा की बात कहीं नहीं लिखी है। खासकर मुसलमानों के खिलाफ किसी भी किस्म के घृणा से भरे उपदेस नहीं मिलते।

इसके विपरीत हिन्दूधर्म के विभिन्न मत-मतान्तरों और सृजनकर्मियों पर इस्लाम का गहरा प्रभाव दर्ज किया गया है। मुझे इस्लाम धर्म की कई बातें बेहद अच्छी लगती हैं । इन बातों को हमारे हिन्दुत्ववादियों को भी सीखना चाहिए। प्रथम, जो मनुष्यों को गुमराह करते हैं वे शैतान कहलाते हैं। दूसरी बात, मनुष्य सिर्फ एकबार जन्म लेता है।

इसके अलावा जो चीज मुझे अपील करती है वह है इस्लामी दर्शन की किताबों का गैर इस्लामिक मतावलंबियों के द्वारा किया गया अनुवाद कार्य और उनके प्रति इस्लाम मताबलंबियों का प्रेम।

एक मजेदार किस्से का मैं जिक्र करना चाहूँगा। गैर मुस्लिम अनुवादक अपने धर्म को बदलना नहीं चाहते थे। हमें जानना चाहिए कि इन अनुवादकों के संरक्षकों की नीति क्या थी? इसका अच्छा उदाहरण है इब्न जिब्रील का। खलीफा मंसूर (754-75 ई.) ने एक बार जिब्रील से पूछाकि ,तुम मुसलमान क्यों नहीं हो जाते, उसने उत्तर दिया- ‘‘अपने बाप-दादों के धर्म में ही मरूँगा। चाहे वे जन्नत (स्वर्ग)में हों, या जोज़ख (नरक) में,मैं भी वहीं उन्हीं के साथ रहना चाहता हूँ।’’ इस पर खलीफा हँस पड़ा,और अनुवादक को भारी इनाम दिया। इस घटना का जिक्र महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने ‘दर्शन-दिग्दर्शन’ नामक ग्रंथ में किया है।

इस्लाम दर्शन की हिन्दू दर्शनशास्त्र की तरह विशेषता है कि इस्लाम दर्शन की विभिन्न धारणाओं को लेकर मतभिन्नता। इस्लाम दर्शन इकसार दर्शन नहीं है। यहां अनेक नजरिए हैं। यह धारणा गलत है कि समूचा इस्लाम दर्शन किसी एक खास नजरिए पर जोर देता है।

राहुल सांकृत्यायन की ‘दर्शन-दिग्दर्शन’ किताब का जिक्र मैं खासतौर पर करना चाहूँगा और अपने पाठकों से अनुरोध करूँगा कि वे इसे जरूर पढ़ें। हिन्दी में राहुल सांकृत्यान ने पहलीबार इस्लाम दर्शन और धर्म पर बेहद सुंदर और प्रामाणिक ढ़ंग से लिखा था।

जिस तरह हिन्दुओं में धर्मशास्त्र है और उससे जुड़ा वैविध्यपूर्ण आचारशास्त्र है वैसे ही इस्लाम में भी वैविध्यपूर्ण आचारशास्त्र है। उनके यहां आचारशास्त्र के अनेक महान ग्रंख लिखे गए हैं। इस्लाम में ऐसे भी मतावलंबी है जो आस्था के पैमाने से इस्लाम को देखते हैं और ऐसे भी विचार स्कूल हैं जो बुद्धिवाद के पैमाने के आधार पर इस्लाम धर्म को व्याख्यायित करते हैं।

यह कहना गलत है कि मुसलमान सिर्फ धार्मिक आस्था के लोग होते हैं। सच यह है कि उनके यहां मध्यकाल से लेकर आधुनिककाल तक बुद्धिवादियों की लम्बी परंपरा है। ऐसी ही परंपरा हिन्दू धर्म के मानने वालों में भी है। मुझे इस्लाम की बुद्धिवादी परंपरा से प्यार है। यह ऐसी परंपरा है जिससे समूची दुनिया प्रभावित हुई है। आओ हम यह जानें कि मुसलमान कठमुल्ला नहीं होता बल्कि बुद्धिवादी होता है। इस्लाम के धार्मिक और आचारगत मतभेदों में विश्वास करता है। उनके यहां भी विवेकवाद की परंपरा है।

29 Responses to “आओ मुसलमानों से प्यार करें”

  1. Bipin Kishore Sinha

    समस्या तब खड़ी होती है जब जिन्ना कहें कि मैं श्रीकृष्ण से अधिक गीता के विषय में जानता हूं। एक जमाना था (५०-६० का दशक) जब कम्युनिस्ट होना फैशन था जैसा आज जीन्स पहनना। चतुर्वेदी जी उसी युग के कम्युनिस्ट हैं। ऐसे कई कामरेड मेरे मित्र थे जिन्होंने मार्क्स को कभी पढ़ा ही नहीं था। चतुर्वेदी जी के सारे लेख सतही होते हैं, चाहे वे साम्यवाद पर हों, राष्ट्रवाद पर हों, हिन्दुत्व पर हो या इस्लाम पर हो। अगर शनि ग्रह पर कोई धर्म होगा तो वे उसपर भी लिख सकते हैं। इस्लाम के बारे में उनका ज्ञान अत्यन्त दयनीय है। क्या वे बता सकते हैं कि इस्लाम में काफ़िर की क्या परिभाषा है? कुरान के अनुसार इस्लाम को न मानने वाले विशेष रूप से सारे बुतपरस्त कफ़िर हैं और एक सच्चे मुसलमान का यह फ़र्ज़ होता है कि वह काफ़िरों को इस्लाम के पाक रास्ते पर ले आए। पहले काफ़िर को समझाया-बुझाया जाय। अगर वह समझाने से इस्लाम कुबुल कर लेता है तो ठीक है, वरना उसे जबर्दस्ती इस्लाम कुबुल कराया जाय। इसके बाद भी अगर वह इन्कार करता है तो उसे मारकर उसकी खाल में तबतक भूसा भरा जाय जबतक वह तौबा न कर ले (जब वह मर ही जाएगा तो तौबा क्या खाक करेगा)। इस तरह जो मुसलमान काफ़िर को मुसलमान बनाता है या बनाने की कोशिश में शहीद हो जाता है, उसे शबाब (पुण्य) मिलता है। मरने के बाद उसे जन्नत मिलता है जहां असंख्य खूबसूरत हूरें उसकी खिदमत में चौबिसों घंटे मुस्तैद रहती हैं। कुरान के अनुसार सिर्फ़ और सिर्फ़ इस्लाम ही पाक मज़हब है, बाकी मज़हब अल्लाह की खिलाफ़त करते हैं। इसलिए हर सच्चे मुसलमां का यह फ़र्ज़ बनता है कि पूरी दुनिया को इस्लाम के झण्डे के नीचे चाहे जैसे हो ले आए। खुदा की यही इच्छा है, यही फ़रमान है। आज इस्लामी आतंकवाद के पीछे यही दर्शन काम करता है। कम्युनिस्टों को भारत, और भारतीयता से पता नहीं क्यों इतनी घृणा है कि वे हर उस संगठन, विचारधारा और व्यक्ति का समर्थन करते हैं जो इस देश को खण्डित करने का प्रयास करते हैं। नक्सलवादियों और आतंकवादियों के प्रति उनका सहज प्रेम और समर्थन उनकी रणनीति का हिस्सा है।

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  2. vimlesh

    इस्लाम धर्म की सभी विशेस्ताओ को जानने के लिए

    कृपया इस लिंक पर क्लिक करे —

    http://bhandafodu.blogspot.com/

    जहा श्री बी एन जोशी जी इस्लाम की सच्चाईयों से आप सभी को परिचित करायेगे .

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  3. Satyarthi

    अल्लाह का स्वरुप और आदतें उजागर करने के लिए विमलेश जी को अनेक धन्यवाद् .स्पष्ट है की विमलेश जी ने इस्लामी धर्म ग्रंथों का अच्छा अध्ययन किया है यदि विमलेश जी कुरान शरीफ और हदीस में अल्लाह के हिन्दुओं ,सिखों ,जैनिओं पारासिओं तथा अन्य गैर -मुस्लिम धर्मवलम्बिओन के सम्बन्ध में दिए गए अहकाम (निर्देश) के बारे में भी इसी प्रकार लिख सकें तो जनता का बड़ा उपकार होगा .
    चतुर्वेदी जी से निवेदन है की आपका मुस्लिम प्रेम नितांत झूठा और आत्म प्रशंसा से प्रेरित लगता है लोग आपको सच्चा मुस्लिम प्रेमी तभी मानेगे जब आप केवल ५ वर्षा के लिए पाकिस्तान या सौऊदी अरब में रह कर अपने मुस्लिम प्रेम का ठोस प्रमाण देंगे

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  4. vimlesh

    चतुर्वेदी जी खास आपके लिए

    मुसलमान अपने अल्लाह को सबसे बड़ा और महान बताते हैं .और बात बेबात पर “अल्लाहो अकबर “का नारा लगाकर खुद को अल्लाह का सच्चा बन्दा साबित करने की कोशिश करते रहते हैं .सब जानते हैं कि यही नारा लगाकर हमलावरों ने कई देश बर्बाद कर दिए ,यही नारा लगा कर आतंकवादी निर्दोष लोगों के गले काटते हैं ,और यही वाक्य कहकर मुसलमान मूक जानवरों को हलाल करते हैं.
    लेकिन कुछ मूर्ख सेकुलर और अज्ञानी लोग बिना अल्लाह के बारे में जानकारी के ईश्वर और अल्लाह को एकही बताते है ,मुसमान भी अलह के बारे में सिर्फ उतना ही जानते हैं ,जो कुरान और हदीसों में लिखा है .वह नहीं जानते कि अल्ल्लाह का शरीर कैसा है ,उसका स्वभाव कैसा है ,उसकी दिनचर्या क्या है और वह किस भाषा में बात करता है ,आदि
    मुसलमान यह भी दावा करते है कि ,अल्लाह के बारे में मुहम्मद को पूरी जानकारी थी .क्योंकि वह अक्सर अल्लाह से मिलने जन्नत जाया करता था,और अल्लाह से सम्बंधित छोटी छोटी जानकारी अपने साथियों को देता रहता था ,जिसे वह लोग लिख लेते थे .
    आज वह जानकारी आपके सामने प्रस्तुत की जा रही है ,जो मैंने इस्लाम की प्रमाणिक साईट से संकलित की है .इसमे सिर्फ हिंदी अनुवाद मेरा है ,बाकी अरबी ,अंगरेजी अंश दीगयी साईट से लिए गए है .
    ध्यान से पढ़िए अब अल्लाह की असलियत का भंडा फोड़ा जा रहा है –

    1-अल्लाह के हाथ और उंगलियाँ हैं
    Allah has hands, fingers and fingertips

    We read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 246:
    हाथ होना अल्लाह का गुण है हम इसे मानते है जैसे दूसरी बातें मानते हैं

    الْيَدَانِ صفةٌ ذاتيةٌ خبرِيَّةٌ لله عَزَّ وجَلَّ ، نثبتها كما نثبت باقي صفاته تعالى

    “Possession of two hands is a quality of Allah, we believe in it as we believe in other qualities”

    On page 184, we read:
    हथेलियाँ होना अल्लाह की विशेषता है ,जो हदीसों से साबित है

    الْكَفُّ صفةٌ ذاتيةٌ خبريةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجَلَّ بالأحاديث الصحيحة

    “Palm of the hand is a quality of Allah almighty proven by Sahih Hadiths”

    On page 32, we read:
    अल्लाह की उंगलियाँ होना हदीस से साबित है

    الأَصَابِعُ صفةٌ فعليَّةٌ خبريَّةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجَلَّ بالسُّنَّة الصحيحة.

    “Fingers are Allah’s quality proven by Sahih Sunnah”

    On page 36, we read:
    अल्लाह की उंगलियाँ और अगली पोर भी हदीस से साबित है

    الأَنَامِلُ صفةٌ ذاتيةٌ خبريَّةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجَلَّ بالحديث الصحيح.

    “The Fingertip is a quality of Allah almighty proven by Sahih Hadith”
    हाथों से चीजें उठाना अल्लाह की विशेषता है और कुरान और हदीस से साबित है

    On page 26, we read that Allah (swt) uses his hands to lift things:

    الأَخْذُ بِالْيَدِ صفةٌ فعليةٌ خبريَّةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجَلَّ بالكتاب والسنة.

    “Lifting by the hand is a quality of Allah proven by Quran and Sunnah.”

    Similarly Salafi scholar Hamad bin Nassir al-Mu’amar states in Al-Tauhfa al-Madania, page 129:
    अल्लाह के दो हाथ हैं.

    وأن له يدين

    “He (Allah) has two hands”
    2-अल्लाह के दौनों हाथ दायीं तरफ हैं
    Allah has two right hands

    We read in Al-Wajiz fi Aqidat Al-Salaf al-Saleh by Abdullah al-Athari, page 47:
    अल्लाह ने आदम को अपने दायें तरफ के दौनों हाथों से बनाया था

    وأَنَ الله تعالى خلق آدم – عليه السلام- بِيَديه ، وأَن كلتا يديه يمين

    “Allah almighty created Adam (pbuh) with his own two hands both of which are right sided”
    3-अल्लाह का चेहरा ,पैर ,टांगें ,पिंडली ,हाथ ,कमर ,कूल्हा ,और पीठ है
    Allah has a face, legs, feets, a shin, hands, waist, hips and flanks
    About Allah (swt) possessing flank, Muhammad Sidiq Khan al-Qanooji records in Katf al-Thamar fi Bayan Aqidat Ahl al-Athar, page 76:
    मुहम्मद सिद्दीकी अल कनूजी ने कत्फल समार वल बयान अकीदत अल अतहर में लिखा है कि अलाह की विशेषता है कि उसके हाथ ,उंगलियाँ ,बायाँ पैर ,टांगें ,चेहरा ,आत्मा ,ऑंखें भी हैं और वह नीचे उतरना ,पहुंचना,बातें करना सभी काम करता है

    ومن صفاته سبحانه : اليد (1) ، واليمين (2) ، والكف (3) ، والإصبع (4) ، والشمال (5) ، والقدم (6) ، والرجل (7) ، والوجه (8) ، والنفس (9) ، والعين (10) ، والنزول (11) ، والإتيان (12) ، والمجيء (13) ، والكلام (14) ، والقول (15) ، والساق (16) ، والحقو (17) ، والجنب (18)…..
    His almighty qualities are: hand, left hand, palm of the hand, finger, left hand, feet, leg, face, soul, eye, coming down, coming, arrival, talking, saying, shin, waist, flank…
    4-अल्लाह पालथी मार कर बैठता है
    Allah sits on the throne in a cross legged position
    तफ़सीर अल तबरी में लिखा है कि मुहम्मद बिन किस ने कहा एक आदमी कअब के पास गया और पूछा हमारा खुदा कहाँ है .यह सुनकर लोगों ने उसको फटकार कर कहा तेरी यह सवाल करने की हिम्मत की हुई .लेकिन कअब ने कहा इसके लिए तुझे प्रयास करना होगा और जानकारी लेना होगी तूने पूछा है ,अल्लाह इस समय एक बड़े सिंहासन पर पैर पर पैर चढ़ा कर बैठा है

    We read in Tafsir al-Tabari:

    Muhammad bin Qays narrated that A man came to Ka’b and asked him, ‘O Ka’b, where is our Lord?’ People rebuked him, saying: ‘You dare ask such about Allah?’ Ka’b answered, ‘If you are learned, strive to learn more. And, if you are ignorant, seek knowledge. You asked about our Lord. He is above the great Throne, sitting, placing one of His legs over the other.
    5-अल्लाह टहलता है
    Allah moves from one place to another
    आना और जाना यह अल्लाह की विशेषता है ,जो कुरान और हदीस से साबित है

    We read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 18:

    الإتْيَانُ وَالْمَجِيءُ صفتان فعليتان خبريَّتان ثابتتان بالكتاب والسنة.

    “Coming and arrival are two qualities which are proven by the Quran and traditions”

    We read in Sharh al-Aqida al-Wasetiya by Imam Ibn Uthaimin, page 176:
    सुन्नी मानते हैं कि अल्लाह शारीरिक रूप से आता है

    وأهل السنة والجماعة يثبتون أن الله يأتي بنفسه هو

    “Ahlulsunnah believes that Allah physically comes”

    We read in Al-Wajiz fi Aqidat Al-Salaf al-Saleh, by Abdullah al-Athari, page 50:
    6-अल्लाह लिख सकता है

    Allah can write
    लिखना और चित्रकारी करना यह अल्लाह की विशेषता है ,जो कुरान और हदीस से साबित है ,अल्लाह जब चाहे ,जो चाहे लिख सकता है
    we read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 181:

    الْكِتَابَةُ وَ الْخَطُّ صفةٌ فعليَّةٌ خبريَّةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجلَّ بالكتاب والسنة ، فهو سبحانه يكتب ما شاء متى شاء

    “Writing and drawing are qualities of Allah almighty proven by the Quran & traditions, he almighty writes what ever he wants whenever he wants”

    We read in Sharh al-Aqida al-Wasetiya by Imam Ibn Uthaimin, page 185:

    7-अल्लाह मटरगश्ती करता है
    Allah performs jogging
    हदीसों से अल्लाह की मटरगश्ती साबित है

    We read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 232:

    الْهَرْوَلَةُ صفةٌ فعليةٌ خبريَّةٌ ثابتةٌ لله عَزَّ وجَلَّ بالحديث الصحيح.

    “Jogging is a quality of Allah almighty proven by Sahih Hadith”

    We read in Fatawa al-Aqida by ibn Uthaimin, page 112:
    क्या कोई हमें इस विश्वास से रोक सकता है कि अल्लाह मटरगश्ती करता है

    وأي مانع يمنع من أن نؤمن بأن الله تعالى يأتي هرولة

    “What could forbid us from believing that Allah performs jogging?”

    In Fatawa al-Lajnah al-Daema lelbuhuth by Ahmad al-Duwaish, page 196, we read the following fatwa of late Salafi/Wahabi leader Ibn Baz:
    सवाल .क्या अल्लाह मटरगश्ती करता है ?
    जवाब .हाँ

    س : هل لله صفة الهرولة ؟

    ج : نعم

    Question: Is jogging a quality of Allah?
    Answer: Yes.

    8-अल्लाह धोका देता है ,चिढ़ाता है
    Allah cheats and mocks
    धोका देना अल्लाह की आदत है जो कुरान और हदीस से साबित है

    We read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 89:

    الخداعُ صفةٌ من صفات الله عَزَّ وجَلَّ الفعليَّة الخبريَّة الثابتة بالكتاب والسنة

    “Cheating is a quality of Allah proven by the Quran and Sunnah”

    On page 116, we read:
    अविश्वासी लोगों को चिढाना अल्लाह का स्वभाव है जो कुरान हदीस से साबित है,

    السُّخْرِيَةُ بِالكافِرينَ من الصفات الفعليَّة الخبريَّة الثابتة لله عَزَّ وجَلَّ بالكتاب والسنة.

    “Mocking the disbelievers is a quality of Allah, proven by Quran and traditions”
    9-अल्लाह ईर्ष्या करता है
    Allah can be jealous
    ईर्ष्या करना अल्लाह की विशेषता है ,जो उसे ही शोभित है

    We read in Sefat Allah by Alawi al-Saqaaf, page 160:

    يوصف الله عَزَّ وجلَّ بالغَيْرة ، وهي صفةٌ فعليَّةٌ خبريَّةٌ تليق بجلاله وعظمته

    “Jealousy is a quality of Allah almighty and it’s a suitable quality for him.”

    10-अल्लाह ऊब जाता है
    Allah sometimes feels bored
    अल्लाह तब तक नहीं ऊबता ,जब तक कोई उसे उबा न दे ,यह उसका गुण है

    We read in Al-Fatawa wa al-Rasael by Muhammad bin Ibrahim, Volume 1 page 209:

    ((فإنَّ الله لا يَمَلُّ حتى تملُّوا)): من نصوص الصفات

    “((Allah doesn’t feel bored till ye get bored)) this an evident of quality”

    One of the revered Imams of Salafies namely Imam Ibn Uthaimin records in Fatawa al-Aqidah, volume 1 page 85:
    शेख ने पूछा कि क्या हम्मान लें कि अलह ऊब जाता है ,क्या यह उनका गुण है रसूल ने कहा है जब तक कोइअल्लह को उबा नहीं देता वह नहीं ऊबता है कुछ विद्वान् इसे अल्लाह की विशेषता मानते हैं .

    سئل فضيلة الشيخ : هل نثبت صفة الملل لله عز وجل ؟
    فأجاب بقوله : جاء في الحديث عن النبي عليه الصلاة والسلام قوله (( فإن الله لا يمل حتى تلموا)) فمن العلماء من قال إن هذا دليل على إثبات صفة الملل لله

    The Sheikh was asked: ‘Shall we believe that feeling bored is a quality of Allah?’
    He replied: ‘It is narrated from the prophet (pbuh) that he said: ‘((Allah doesn’t feel bored till ye get bored))’ some scholars declared that this is a proof that feeling bored is a quality of Allah.’
    11-अल्लाह ख़ुशी में फारसी और गुस्से में अरबी बोलता है
    Allah converses in Persian when content and in Arabic when angry
    कुछ रिवायतों से साबित होता है कि दया करते समय फारसी बोलता है ,यानि गैर अरबी भाषा जी सीरियन और हिब्रू आदि ,लेकिन जब नाराज होता है तो अरबी भाषा बोलता है.

    The Sunni scholar Imam Ismail Haqqi al-Barousawi al Naqshbandi (died 1127 AH) in his esteemed commentary of the Holy Quran, namely Ruh al-Bayan, Volume 10 page 480 under the commentary of Surah al-Qadr states:

    وفى بعض الاخبار ان الله تعالى اذا تكلم بالرحمة تكلم بالفارسية والمراد بالفارسية لسان غير العرب سريانيا كان او عبرانيا واذا تكلم بالعذاب تكلم بالعربية

    “And some narrations state that when Allah (swt) converses in kindness He does so in Farsi (Persian), Farsi meaning a language other than the language of the Arabs; be it Syrian or Hebrew, and when He makes reference to punishment, He converses in Arabic”
    .
    अब इतना पढ़ने के बाद अज्ञानी सेकुलर अल्लाह को ईश्वर मानें तो हमें उनकी बुद्धि पर दया आती है .
    मेरी ऐसे अल्लाह को मानने वालों से गुजारिश है इस अल्लाह का पल्ला छोड़ो ,और कोई भलाई के काम करो ,जिस से दुनिया का भला हो .आप सब से यह भी निवेदन है कि इस लेख की जानकारी अपने मित्रों को जरूर दें ,ताकि सबको मुसलमानों के अल्लाह की हकीकत पता चल सके .और वह अल्लाह को ईश्वर समझने की भूल नहीं करें ..
    नोट -अल्लाह के बारे में यह लेख का पूर्वार्ध है ,बाकी भाग जल्द ही पोस्ट किया जायेगा .आप प्रतीक्षा करिए .

    http://www.answering-ansar.org/wahabis/en/chap5.php

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  5. vimlesh

    चतुर्वेदी जी आपके सपनो को पंख लगे हमारी शुभ कामना .

    नींद में ही पड़े पड़े आराम से रिलेटेड लिंक १ बार अवश्य पद लेना .

    http://bhandafodu.blogspot.com/

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  6. मदन मोहन शर्मा ‘अरविन्द’

    Madan Mohan 'Arvind'

    जाति-धर्म के नाम पर विवाद उत्पन्न करने का काम अगर राजनीतिग्य करते हैं तो उनका निहित स्वार्थ फ़िर् भी समझ मे आता है, लेकिन तथाकथित बुद्धिजीवी अगर ऐसे प्रयास करे, असङ्गत तर्क-वितर्क करे, तो इस प्रकार के क्रिया कलाप को दुर्भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जाये. कोयी अपने घर की दीवार गिरा कर कहे कि अब मै अपने घर का हाल ठीक से समझता हु, देखो मेने इसकी एक-एक ईट गिन ली है तो ऐसी समझ को लाखो सलाम

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  7. ajit bhosle

    यह लेख गहरी नींद में सपने देखते हुए लिखा गया है क्योंकि इसमें वे सारी बातें हैं जो इंसान होश में कह ही नही सकता इसलिए लेखक को माफ़ किया जाता है.

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  8. RAJ

    मजा नहीं आया पूरी तरह से मुसलमी बदबू आ रही है रही बात अल्लाह की ऐसे काल्पनिक जिव का कई अस्तित्व नहीं है वो आप को क्या देंगा

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  9. nand kashyap

    जगदीश्वर जी आप वैज्ञानिक सोच के साथ तर्कपूर्ण सन्दर्भ सहित अपनी बातो को रखते हैं जबकि कट्टरपंथी हमेशा उन्माद के साथ रहते हैं और एक बार उनके दिमाग में किसी के लिए घृणा भर जाये तो वाही उनकी प्रेरणा बन जाता है .अब सोचिये जरा कि अपने ही देश के सभी दर्शनों के अध्ययन का भी जो लोग विरोध करते हों उनसे बहुत उम्मीद नहीं हो सकता बेशक वे भी मनुष्य हैं .मुश्किल यह है कि ब्हु धारा और बहु दर्शन वाले हिदुत्व को ये कट्टरपंथी हिन्दू इस्लाम से प्रेरित हो कर इसे भी फतवों का धर्म बना देना चाहते हैं तभी तो हजारों सालों से चले आ रहे अपने वर्चस्वा को बचा पाएंगे ऐसा ये लोग सोचते हैं जबकि लोकतान्त्रिक चेतना किसी के भी वर्चस्वा को नहीं मानता येही कारण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कि शाखाओं में उनके ही पुराने सदस्यों के बच्चे तक भी नहीं जाना चाहते .इनके लिए मुक्ति कि चेतना सबसे बड़ा सांस्कृतिक पतन है और इसलिए ये हेर उस व्यक्ति से घृणा करते हैं जो तर्क के साथ समता और समानता कि बात ,सबसे प्रेम कि बात करता हो .नन्द

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  10. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.प्रो. मधुसूदन उवाच

    आ. चतुर्वेदी जी:
    आपने कभी कोई इस्लामी प्रथाकी आलोचना की है? क्यों नहीं?
    चतुर्वेदी जी पलभर मान भी लें, कि आप सभीसे प्रेम करते हैं।और इसलिए सभीसे समान व्यवहार करते हैं, अपेक्षित तो यही है।
    इस समान व्यवहार में. जैसा आप हिंदु संस्थाओं को संघको, बाबा रामदेव को, इत्यादि को, अपनी आलोचना का विषय बनाते हैं, वैसे ====
    ***आपने कभी कोई इस्लामी प्रथाकी, जैसे कि, इस्लाम में नारियों के प्रति असमानता के व्यवहार की, नारी शिक्षाके प्रति इस्लाम की उदासीनता की, बुरके़ की प्रथा की, इत्यादिको आलोचना का विषय बनाया है? क्यों नहीं? मुझे याद करा दीजिए।कृपा की अपेक्षा है।

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    • saddu

      जनाब डॉ.प्रो. मधुसूदन उवाच जी
      आप का लिखा पढ़ा बहुत अच्छा लगा पढ़ कर के आप को मुस्लिम औरतों उनके पर्दों में रहने उनकी शिक्षा में हो रही उदासीनता इतयादी के बारे में कितनी फिक्र है | आप का बहुत बहुत शुक्रिया|
      अब मै हिन्दू धर्म और उसकी कुछ ख़ास बातों पर आप का धयान आकर्षित करना चाहता हूँ 1-आप ने लिखा नारियों के परती असमानता का व्यवहार:-मै आप को बताता हूँ असमानता कहाँ है असमानता हिन्दू धरम की बुन्याद है खाश कर नारियों के पार्टी | हिन्दुओं के धर्मिक गरंथ के हिसाब से उस महिला को जिन्दा रहने का कोई हक नहीं है जिसके पति की मौत हो जाए उसे उसके पति की चिता पर ही ज़बरदस्ती जला दिया जाता था सती पर्र्था|

      2-सामूहिक रूप से औरतों की इज्ज़त उतरना जो की महाभारत में लिखा है हसिनापुर के दरबार में हिन्दुओं ने द्रोपदी का वस्त्र उतर कर नंगा कर दिया |

      3-एक औरत के एक साथ पांच पति |

      4-हिन्दू औरतों का मंदिर में देवताओं से विवाह फिर उनका हिन्दू समाज के द्वारा शारीरिक शोषण |

      5-हिन्दू राजाओं की कई कई रानियाँ

      6-हरयाणा को देखिये वहां के हिन्दू बेटियों को कोख में ही मरवा देते हैं |

      7-पर्दा — आप को भारत की ज़यादा तर जगह पर औरते हिन्दू हो या किसे भी सभ्य धरम की घूंगट जरूर करती है करे भी क्यों नहीं आप जैसे लोग बहुत हैं बाज़ार में |

      8-हरयाणा में ही हिन्दू औरत को खरीदता है भोगता है मन बहर जाए फीर बेचता है औरत बार बार बिकती है वो भी हिन्दू है जो खरीदता बेचता है वो भी हिन्दू है |

      9–आज भी आपलोग हिन्दू गरीब और कमज़ोर तबके के हन्दू मर्दों को साथ में बैठने नहीं देते मगर उनकी औरतों के मज़े लेने में कोई बुराई नहीं समझते एक बात बता दू वो ज़यादातर औरते हिन्दू हैं |

      10– इसी नकाब बुर्के का सहारा लेकर गैर मुस्लिम औरतें घरके बहार मज़े करती हैं और सभ्य गैर मुस्लिम समाज को पता तब चलता है जब कोख 9 महीने का होता है

      डॉ साहेब आतंकवाद की क्या परिभाषा ज़रा आप ही बता दिज्ये ? इंतजार रहे गा जनाब

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  11. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    मैं इक कट्टर हिन्दु हुँ और एक स्वयंसेवक भी मैं एक बार संध्या करता हुँ और प्रत्येक दिन शाखा जाता हुँ,मेने सभी १० उनिषद,ब्रह्म्सुत्र,गीता पढि है और मुझे इन्हे पढने की प्रेरणा संघ ने दी है,मैं सत्य बोलता हुँ उसकि प्रेरणा भी संघ से मिलि है,मैं हिंसा नही करता उसकि प्रेरणा भी संघ से मिलि है,मैं कही भी किसी विषय पर बोल सकता हुँ ये मुझे संघ ने सिखाया है,हिन्दुओं के किसी भी वैचारिक दर्शन पर बात रख सकता हुँ यह संघ ने सिखाया है,राष्ट्र के लिये काम करने का जज्बा संघ ने दिया है,अपनी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं को तितांजलि देकर राष्ट्र के लिये काम करते लोगॊ को देखा है और उनसे प्रेरणा ली है वो सभी संघ से ही है,क्या मेरे लिये इसके ज्यादा कोयी प्रमाण चाहिये???रही बात एक कम्युनिस्ट के हिन्दु धर्म पर बोलने की तो हमें कम्युनिस्टो से हिन्दु धर्म सिखने की जरुरत नही है,पुरी तरिके से भर्ष्ट हो चुके आज के साहित्य समाज को क्या पैमाना बना रहे सहाब???मेरे राज्य मे ढुंढने से भी कोयी कम्युनिस्ट नही मिलेगा है और हर घर मे संघ से जुडा हुवा कोयी ना कोय़ि मिल जायेगा,क्या यह संघ की स्विकार्यता और कम्युनिस्टो की नाकामी नही???
    जो लोग पुरी दुनिया में असफ़ल हो चुके है जिन लोगो ने बंगाल का भट्टा बैठा दिया है वो लोग संघ को बतायेंगे कि कौन स्विकार्य है या कौन नही??एक आवाज पर ग्राम के ग्राम उमड आते है,संघ का सामान्य सा स्वयं सेवक भी इतना ज्यादा स्विकार्य होता है अपने अपने क्षेत्र मे कि हर काम के लिये लोग उससे पुछते है या उसको ही आगे करते है,क्या यह उपल्बधि नही है??
    संघ बढ रहा है उसकि मिर्ची लगना स्वाभावैक ही है,अपनी वैचारिक पराजय को कौन स्वीकार करेगा,अत: कम्युनिस्ट और जातीवादि लोग उछल कुद करेंगे ही असत्य-घॄणा-देशद्रोह ही जिनका स्वाभाव है उअन्से अपेक्षा करना व्यर्थ है,सुर्य को लाईट दिखाने की चेष्टा मुर्खता है संघ सुर्य के समान है जहा भी संघ है वहा वहा सब ठिक है जहा संघ नही वहा गडबड शरु,जल्द ही बंगाल व केरल से कम्युनिस्टो के पँअव उखड जायेंगे,केरल मे तो उनके कार्य्क्र्ताओ के संघ मे आने का सिल्सिला शरु हो ही चुका है तभि तो वो वहा पर हिंसा पर उतर आये है………………….वैचारिक खोखला पन कब तक टहरेगा????पुरे देश मे तो यह गुब्बार फ़ुट ही चुका है इन दोनो राज्यो मे फ़ुट जायेगा……………….

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  12. एल. आर गान्धी

    l.r.gandhi

    चतुर्वेदी जी मुसलमानों के प्यार के’ मारे ‘हिन्दू पाकिस्तान में २२% से २ % रह गए यही हाल कश्मीर का भी है. अप में इतना ही मुस्लिम प्रेम हिलोरें मार रहा है तो क्यों न आप पाक या कश्मीर घाटी में चले जाते …वेसी भी आप को प्रेम रोग हो ही गया है.

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  13. Anwar Ahmad

    आपकी लेखनी दमदार और विचार साफ़ सुथरे हैं। ऐसे लोगों को समाज जीने नहीं देता।
    खुदा आपको अपनी हिफ़्ज़्ाो-अमान में रखे , आमीन या रब्बल आलमीन !

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  14. deepak.mystical

    deepak dudeja

    @ मैं निजी तौर पर उनका भी शुक्रगुजार हूँ जो मुझमें बुखारी देख रहे हैं।
    जनाब, आप बुखारी जी के पिछले जीवन को देखिये…….. आप सचमुच उन्ही की जीवन शैली आपना रहे हैं.
    @मैं इतना खराब हिन्दू क्यों हूँ जो हिन्दू होकर हिन्दुओं के जो तथाकथित गौरवपुरूष हैं उनकी आलोचना लिख रहा हूँ।
    ये बात यहाँ “प्रवक्ता” पर पूछने से अच्छा है – आप अपने अभिवावक से पूछें.
    @हिन्दू कभी विचारअंध नहीं रहे हैं।
    @हिन्दुत्व के प्रचारकों ने विचार अंधत्व पैदा किया है।
    आपके हिसाब से पिछले ६० साल में ही हिंदुत्व के प्रचारक निकले ….. उससे पहले के महापुरुषों के व्यक्तित्व पर आपने मार्क्सवाद की धुल चड़ा दी.
    @एक हिन्दू के जितने संस्कार होने चाहिए वे मेरे भी हुए हैं
    हमें नहीं लगता. व्यक्ति के संस्कार उसके व्यक्तित्व से पता चलते हैं – ये नहीं की आप अल्बम से फोटो दिखाओ कि आपका भी जनेऊ और मुंडन संस्कार हुवा था.
    @संघ परिवार की विचारधारा से प्रभावित हिन्दी में शिक्षक मिल जाएंगे लेकिन बड़े प्रतिष्ठित साहित्यकार मुश्किल से मिलेंगे।
    ऐसा क्यों है…. ये परिपाटी हमारे प्रथम प्रधान मंत्री शुरू कर गए हैं की अगर आपको महान लेखक बनना है तो हिंदुत्व को जितनी गाली दोगे – आप सरकारी गलियारों में उतने ही ज्यादा पूजनीय माने जावोगे. अत आज पर इतना बवाल क्यों ..
    @ मैं निजी तौर पर बुद्धिवादी हिन्दू हूँ और हिन्दूधर्म की तमाम किस्म की रूढ़ियों को नहीं मानता।
    नेहरु जी के “बुद्धिवादी हिन्दू” पर आप चल रहे हैं…… और ये जरूरी तो नहीं की हिंदू ही रुदिवादी हो….
    @इसके अलावा जो चीज मुझे अपील करती है वह है इस्लामी दर्शन की किताबों का गैर इस्लामिक मतावलंबियों के द्वारा किया गया अनुवाद कार्य और उनके प्रति इस्लाम मताबलंबियों का प्रेम
    ये अपनी अपनी पसंद है साहेब………. कुछ पश्चिम के लोग आज जनेऊ धारण कर हाथ में तुलसी की माला लिए घूम रहे हैं – जिन पर आपको शर्म अआती है….. और इस्लाम का आपका जो प्रभाव है उस पर तो कोई शिक्षित व्यक्ति ही PhD कर सकता है…. मुझ में इतना सामर्थ नहीं.
    @जिस तरह हिन्दुओं में धर्मशास्त्र है और उससे जुड़ा वैविध्यपूर्ण आचारशास्त्र है वैसे ही इस्लाम में भी वैविध्यपूर्ण आचारशास्त्र है।
    कहाँ है, एक फतवे पर तो ईद का फैसला होता है…….. और यहाँ पर दो दो त्यौहार मनाये जाते हैं कोई कहता है की आज एकादशी है और दूसरा पंडित कहता है की नहीं कल १० बजे के बाद है. वहाँ एक ही फतवे में सर झुक जाते हैं.
    बाकि आप विचारक है………… पढ़ें-लिखे विद्वान है……. भगवन ने आपको उस घर जन्म दिया है जो समाज को रास्ता दिखाते है और इस तरह की उल-फिज्जुल बाते कर के आप किस का भला कर रहे है वो आप जानते हैं…….
    जय राम जी की.

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  15. shishir chandra

    इस लेख में भी चतुर्वेदी जी ने अपने आपको विद्वान और बाकी सब को मुर्ख समझने का मोह संवरण नहीं कर पाए हैं.
    चतुर्वेदी जैसे बिके हुए लोग घृणा के अलावा कोई ज्ञान नहीं दे सकते. हिन्दू और संघ को यहाँ तो पर्यायवाची ही मान लिया है. चतुर्वेदी अपने बडबोलेपन और ओछा व्यवहार के कारन एक सामान्य व्यक्ति के रूप में भी असफल है.
    अपने लेखक होने पर भी चतुर्वेदी को बहुत दंभ है. क्या संघ के पक्ष में लिखने वाले ये सुर अनपढ़ है? किसी को बड़ा और छोटा बनाने का पैमाना बदल गया है चतुर्वेदी जी . सचाई ये है की सच बात बोलने वाले की मार्केट value कम हो गयी है इसलिए आपको ऐसा लगा रहा है की संघ की तरफ हिंदी के विद्वान नहीं है. आप ही बताइए आपको देश में कितने लोग जानते हैं? आपका संघ के आकलन का पैमाना पूरी तरह अस्वीकार्य है.
    मेरी नजर में तो साहित्यकारों को किसी भी संगठन से अलग होना चाहिए. और हमारे वामपंथी बुद्धिजीवियों को शायद इस मैनर्स का ज्ञान ही नहीं है.

    Reply
  16. Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    प्रवक्ता पर प्रकट कथित हिन्दुवादियों के विचारों से श्री चतुर्वेदी जी की निम्न बात प्रमाणित होती है :-

    “हिन्दुत्ववादियों की हिन्दू धर्म के उत्थान में कोई रूचि नहीं है। वे हिन्दू धर्म के मर्म का न तो प्रचार करते हैं और नहीं आचरण करते हैं। इस मामले में वे अभी भी कठमुल्ले इस्लामपरस्तों से पीछे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि हिन्दुत्ववादियों ने अपने को राष्ट्रवाद, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, हिन्दु उत्थान, हिन्दू एकता आदि के बहाने हिन्दुत्ववादी राजनीति से जोड़ा है।”

    शुभकामनाओं सहित।

    आपका
    -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) एवं सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित हिन्दी पाक्षिक समाचार-पत्र), मो. ०९८२९५-०२६६६

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  17. Rajeev Dubey

    क्या संघ वाले मुस्लिम विरोधी हैं , खबरों में तो था कि उनका एक राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन भी है ?

    क्या पंकज जी मुस्लिम विरोधी हैं ? उन्होंने ऐसा लिखा हो कहीं पर तो पता नहीं, कृपया मार्गदर्शन करियेगा ….

    आप भी शायद मुस्लिम प्रेम की बात निजी तौर पर कह रहे हैं क्योंकि इस्लाम की एक आस्था और धर्म के रूप में तो कोई लड़ाई किसी से क्या होगी ?

    वह तो जब इस्लाम का राजनीतिकरण कर एक विचारधारा के रूप में सत्ता की सीढ़ी की तरह दुरूपयोग होता है तब ही लोग विरोध करते हैं – वह भी इस्लाम का नहीं, ऐसा दुरूपयोग करने वालों का – और शायद आप भी ऐसी स्थिति का विरोध करेंगे .

    इस्लाम या हिन्दू दर्शन पर एक व्याख्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक विमर्श करने की छूट तो सभी को है . यह विरोध नहीं कहा जा सकता . यह व्यक्तियों से प्रेम न होने का सबूत भी नहीं कहा जा सकता .

    किसी धर्म या दर्शन का आचरण व्यक्ति की रूचि , परिवेश एवं मानसिक / बौद्धिक झुकाव से सम्बन्ध है और इसमें सभी को स्वतन्त्रता है इस देश में .

    शायद आप एवं पंकज जी दोनों ही विचारधारा की बात करते-करते व्यक्तिगत रूप से कटुता की तरफ बढ़ रहे हैं , यद्यपि ऐसा सामने से कहते नहीं हैं . पर वैचारिक विवाद में दोनों ही पक्षों को स्वयंसिद्ध बातों को ईमानदारी से स्वीकार करते रहना चाहिए तो वार्तालाप पर विश्वास बना रहता है . ऐसा करने की जिम्मेदारी बड़ों की ज्यादा है और ऐसा ही अपेक्षित भी है .

    Reply
  18. अहतशाम "अकेला"

    बहुत अच्छे विचार हैं बधाई हो! अच्छा लिखा
    एक बार जिब्रील से पूछाकि ,तुम मुसलमान क्यों नहीं हो जाते, उसने उत्तर दिया- ‘‘अपने बाप-दादों के धर्म में ही मरूँगा। चाहे वे जन्नत (स्वर्ग)में हों, या जोज़ख (नरक) में,मैं भी वहीं उन्हीं के साथ रहना चाहता हूँ।’’
    बहुत अच्छा उदाहरण है कुछ कट्टरपंथियों के लिए

    Reply
  19. Anil Sehgal

    आओ मुसलमानों से प्यार करें – by – जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

    श्री जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी ने इस लेख में यह लिखा है :

    (१) ….. ” मुझे इस्लाम धर्म की कई बातें बेहद अच्छी लगती हैं । इन बातों को हमारे हिन्दुत्ववादियों को भी सीखना चाहिए। प्रथम, जो मनुष्यों को गुमराह करते हैं वे शैतान कहलाते हैं। दूसरी बात, मनुष्य सिर्फ एकबार जन्म लेता है।”

    .(२) …. “संघ परिवार और उसके संगठनों के विचारों की उम्र बहुत छोटी है। हिन्दू विचार परंपरा में वे कहीं पर भी नहीं आते। वे हिन्दुत्व के नाम पर आम लोगों में पराएपन का प्रचार कर रहे हैं, घृणा पैदा कर रहे हैं।”

    माननीय इन्द्रेश जी संघ परिवार के संगठन “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” का काम देखते हैं. मुस्लिम समाज के साथ संवाद स्थापित किया है.

    इस कार्य के करते श्री जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी यह मानते होंगे कि श्री इन्द्रेश जी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का कार्य करते मुस्लिम समाज के प्रति लोगों में पराएपन का प्रचार कर रहे हैं और घृणा पैदा कर रहे हैं. मनुष्यों को गुमराह कर रहे हैं और श्री इन्द्रेश जी शैतान हैं.

    ” दूसरी बात, मनुष्य सिर्फ एकबार जन्म लेता है ” – यह श्री जगदीश्वर चतुर्वेदी जी को इस्लाम धर्म की बात बेहद अच्छी लगती हैं । और यह मानते हैं कि इस बात को हिन्दुत्ववादियों को भी सीखना चाहिए.

    क्या श्री जगदीश्वर चतुर्वेदी जी से पूछना सकता हूँ कि उनकी राय में :

    ” मनुष्य सिर्फ एकबार जन्म लेता है ” मानने वाला आम लोगों में हिन्दू कहला पायेगा ?

    इन ऊपर लिखे दो विषयों पर प्रवक्ता.कॉम अपने पाठकों के लिए श्री जगदीश्वर चतुर्वेदी जी का या किसी अन्य विद्वान का प्रवचन करवा दें.

    – अनिल सहगल –

    Reply
  20. Aryan

    जगदीश्वर जी मुझे लगता हे की आपको बातों का बेलेंस करना अछि तरह आता है.. पहले आप भावनाओ को भड़काते हें.. और सांप्रदायिक शब्द की उत्पत्ति के जनक आप जैसे लोग हैं कोई हमारी संस्कृति को गलत कहे फिर एसा नहीं एसा है करके सशोधन करे… समझ में नहीं आता आप किस मानसिकता वाले आलोचक हैं? और मई बताना चाहूँगा की मई भी संघ की shakha में jata hun और जितना सम्पर्क मेरा संघियों से हें उतना ही मेरा मुस्लिम दोस्तों से.. अगर सच में पूछा जाये तो उनको भी आज इस चीज का पछतावा हे जो गलती उनके पुरखों ने की..और उनको भी गर्व हे इस संस्कृति पर हम एक दुसरे के यहाँ आते जाते हें कभी हमने एक दुसरे की पूजा पद्दति का विरोध नहीं किया.. वल्कि हम उनमे परस्पर शामिल भी होते हैं.. कभी एसा नहीं लगा की हम हिन्दू हें या वो मुसलमान..
    उनको हमारी तरह ही उन लोगों पर गुस्सा आता हे जो इस देश को बर्बाद करने पर तुले हें.. उनका भी मानना हे की जो लोग यहाँ हिंसा और आतंकवाद फेला रहे हें वो कभी मुसलमान नहीं हो सकते… अब आप ही बताओ अगर हमने nafarat या कट्टरता का पाठ सीखा होता तो क्या हम साथ रह पाते.. और श्रीमानजी आपको ये भी पता होगा की संघ को कभी देश के उन सभी मुसलमानों पर कभी आपत्ति नहीं हुई जो सामान्य समाज के साथ जी रहा हे ये तो उन कट्टर कठमुल्लाओं के पेट ला दर्द हे जिनको ये बात हजम नहीं हो रही की यहाँ ये सब शांति के साथ जी रहे हैं… संघ क्या पुरे देश के लोग इसे कठमुल्लाओं के खिलाफ खड़े होते हें तो आप जैसे विद्वान लोग इसको साम्प्रदायिकता का नाम देते हें… फिर तो चतुर्वेदी जी मई कहता हूँ हटाओ लोगों के दिलों दिमाग से वो नाम जिन्होंने अपना धर्म और जवानी इस धरती की रक्षा के नाम कर दी.. और अकबर, गौरी , गजनी, अफजल , कसाब को महापुरुष बनाओ क्युकी ये भी मुसल मान हैं… अब मै भी आपका लेख पढ़कर संशय में हूँ किस मुसलमान से प्यार करूँ…. कृपया उत्तर दें?

    Reply
    • saddu

      जनाब

      भारत माता के लिए पहली क़ुरबानी जिसने दिया उसका नाम टीपू सुल्तान था और वो मुस्लमान है ,बहादुर शाह ज़फर मुस्लमान है ,अस्फकुलाह मुस्लमान है अब्दुल हमीद मुस्लमान है कितने नाम तो आप जैसों ने हटवा दिए इतिहास के किताबो से (आप ने साध्वी परज्ञा,असीमानंद ,कर्नल ,जैसे आतंकवादियों का नाम तो छोर ही दिया जो की —-उ आतंकवादी हैं

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  21. मिहिरभोज

    यह कहना गलत है कि मुसलमान सिर्फ धार्मिक आस्था के लोग होते हैं। सच यह है कि उनके यहां मध्यकाल से लेकर आधुनिककाल तक बुद्धिवादियों की लम्बी परंपरा है।….हाईली कंफ्यूज्ड

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  22. भारतीय़ नागरिक

    चतुर्वेदी जी, मुसलमानों से हमें भी प्यार है, लेकिन उनकी कट्टर मानसिकता से नहीं, किन्तु आप उसी मानसिकता को चाहते हैं इसलिये आपके लेख इकतरफा होते हैं…. धार्मिक होना, न होना एक अलग बात है और धर्म विशेष के नाम पर गाली खाना एक अलग बात. मैं धार्मिक नहीं, लेकिन धर्म विशेष के नाम पर आप मुझे गरिया नहीं सकते..

    Reply
  23. पंकज झा

    पंकज झा.

    सर धन्यवाद इस जबाब के लिए. अगर बन पड़ेगा तो फ़िर कुछ लिखने की कोशिश करूँगा. लेकिन फिलहाल दो जिज्ञासाओं का समाधान करने की कृपा करें. पहला आपने लिखा ”जो लोग हिन्दुत्व के नाम पर उलटी-सीधी बातें मेरे लेखों पर लिख रहे हैं वे ठीक से एक धार्मिक हिन्दू की तरह चौबीस घंटे आचरण तक नहीं करते।” आप कथित धार्मिक हिंदू के लिए चौबीस घंटे का एक ‘ड्यूटी चार्ट’ बना कर देने की कृपा करेंगे? मैंने ‘राम पटल’ नाम की एक पुस्तिका कभी ज़रूर पढ़ी थी जिसमे इस तरह के चौबीस घंटे का वर्णन था. लेकिन ऐसा हर पुस्तक आपको विभिन्न संप्रदायों के लिए ही मिलेगा. समग्र रूप से हिंदुत्व के लिए ऐसी अगर चौबीस घंटे के लिए कोई पद्धति बता पाएं तो आभारी होऊंगा.
    दूसरी बात आपने बड़ी कुशलता से मुसलामानों की बात कर स्वयं को उनका रहनुमा बना लेने की कोशिश की. आखिर लेखों कि किस पंक्ति में आपको मुस्लिम विरोध दिखा? इसीलिए तो निवेदन कर रहा हूँ कि बिना किसी तरह के भरकाऊ लेखन के भी आप हम जैसों का मार्गदर्शन कर सकते हैं….सादर.

    Reply
  24. Agyaani

    चतुर्वेदी महाराज जी,
    आपके लेखन से और अभिव्यक्ति से किसी को भी कोई आपति नहीं है लेकिन महत्वपूर्ण ये है की आप मुद्दा क्या उठा रहे है और किस तरीके से उठा रहे हैं! खामियों को स्वीकार करने में हम हीनता का अनुभव नहीं करते! आप कटाक्ष करिए, जरुर करिए लेकिन सही सन्दर्भ में करिए ताकि एक समालोचक के रूप में भी आपको सम्मान मिल सके दुत्कार नहीं!
    बाबा रामदेव जी के शिविर कभी न कभी जरुर जाइए और वहां के अनुभव का सच्चे मन से जरुर विश्लेष्ण प्रवक्ता पर छापियेगा! अवश्य ही आपको आपकी अंतरात्मा विगत में लिखे लेखों के लिए पुनर्विचार करने पर बाध्य करेगी!
    धन्यवाद सहित !

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