महत्वपूर्ण लेख क्रीमीलेयर एक धोखा है- अजा एवं अजजा वर्गों में क्रीमीलेयर सम्भव नहीं!

क्रीमीलेयर एक धोखा है- अजा एवं अजजा वर्गों में क्रीमीलेयर सम्भव नहीं!

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’- मोहनदास कर्मचन्द गांधी द्वारा देश के सभी वंचित वर्गों को हमेशा के लिये पंगू बनाये रखने के लिये जबरन थोपे गये…

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जन-जागरण यूं धुएं में न उड़ाओ जिंदगी यारो

यूं धुएं में न उड़ाओ जिंदगी यारो

-अरुण तिवारी- तंबाकू नशा है और इसे इस्तेमाल करने वाले – नशेड़ी! संभव है यह संबोधन तंबाकू खाने वालों को बुरा लगे, लेकिन समय का…

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राजनीति आधे-अधूरे सच के मायने

आधे-अधूरे सच के मायने

-वीरेन्द्र सिंह परिहार- 16 फरवरी 2011 को प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था -‘गठबंधन सरकारों की गई मजबूरियां होती है, जिसके कारण कई…

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जरूर पढ़ें आप क्यों चाहते हैं कि विरोधी भी करें मोदी-मोदी!

आप क्यों चाहते हैं कि विरोधी भी करें मोदी-मोदी!

-संजय द्विवेदी- -भाजपा सरकार को राजनीतिक विरोधियों की आलोचना से घबराने की जरूरत नहीं- भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार इन दिनों इस बात के…

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परिचर्चा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला पर खड़ा होता भारत

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला पर खड़ा होता भारत

-डा.सौरभ मालवीय-          “राष्ट्र सर्वोपरि” यह कहते नहीं बल्कि उसे जीते है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। पिछले कुछ दशकों में भारतीय जनमानस का…

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धर्म-अध्यात्म मनुष्य समाज के लिए हानिकारक फलित ज्योतिष और महर्षि दयानन्द

मनुष्य समाज के लिए हानिकारक फलित ज्योतिष और महर्षि दयानन्द

–मनमोहन कुमार आर्य-  सृष्टि का आधार कर्म है। ईश्वर, जीवात्मा एवं प्रकृति तीन अनादि, नित्य और अविनाशी सत्तायें हैं। सृष्टि प्रवाह से अनादि है परन्तु…

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राजनीति बिहार में अति-पिछ़ड़ी जातियों के मतदाता निश्चित तौर पर निर्णायक भूमिका में रहेंगे

बिहार में अति-पिछ़ड़ी जातियों के मतदाता निश्चित तौर पर निर्णायक भूमिका में रहेंगे

-आलोक कुमार- आसन्न बिहार विधानसभा चुनावों में  अति-पिछ़ड़ी जातियों के मतदाता  निश्चित तौर पर निर्णायक भूमिका में रहेंगे । द्रष्टवय है कि ९० के दशक…

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राजनीति आज भी इतिहास की गोद मे बैठा है बिहार..!

आज भी इतिहास की गोद मे बैठा है बिहार..!

आज भी इतिहास की गोद मे बैठा है बिहार..! जब भी बिहार की बात की जाती है इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को इससे अलग नही किया…

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धर्म-अध्यात्म मूर्तिपूजा, तीर्थ व नामस्मरण का सच्चा स्वरूप और स्वामी दयानन्द

मूर्तिपूजा, तीर्थ व नामस्मरण का सच्चा स्वरूप और स्वामी दयानन्द

–मनमोहन कुमार आर्य- महर्षि दयानन्द न केवल वेदों एवं वैदिक साहित्य के विद्वान थे अपितु उन्हें पुराणों सहित सभी अवैदिक धार्मिक ग्रन्थों व पुस्तकों का…

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व्यंग्य केले.. ले लो, संतरे.. ले लो!

केले.. ले लो, संतरे.. ले लो!

-अशोक गौतम- वह इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का मजनू फिर अपनी प्रेमिका के कूचे से आहत हो आते ही मेरे गले लग फूट- फूट…

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जरूर पढ़ें कितने आजाद हम और हमारा स्वाभिमान ?

कितने आजाद हम और हमारा स्वाभिमान ?

-अभिषेक कुमार तिवारी- हम एक आजाद देश में रहते हैं। हमारा देश एक गणतंत्र है। संविधान के कानूनों और नियमों के आधार पर सभी लोग…

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चिंतन आत्मबंधन तोड़ें, मुक्ति का आनंद पाएं

आत्मबंधन तोड़ें, मुक्ति का आनंद पाएं

-डॉ. दीपक आचार्य-   हम सभी लोग स्वतंत्र हैं स्वतंत्रता का सुकून देने के लिए पैदा हुए हैं। लेकिन हममें से अधिकांश लोग इस सत्य…

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