विश्ववार्ता ‘अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीयता’ का दूषित परिवेश

‘अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीयता’ का दूषित परिवेश

-राकेश कुमार आर्य-    स्वतंत्रता आंदोलन के काल में जो लोग अंग्रेजों की चाटुकारिता करते हुए राष्ट्रीय आंदोलन में अपनी सक्रियता प्रदर्शित कर रहे थे,…

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राजनीति क्योंकि मैं आम आदमी हूं… हां…हां…मैं आम आदमी हूं…

क्योंकि मैं आम आदमी हूं… हां…हां…मैं आम आदमी हूं…

-आलोक कुमार-    मनोदशा और व्यथा एक आम आदमी की “क्योंकि मैं आम आदमी हूं…हां…हां.. मैं आम आदमी हूं …” तुम देश और जनता का…

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धर्म-अध्यात्म Default Post Thumbnail

“आर्यों की भारत में घुसपैठ” के झूठ की जड़

  -डॉ. मधुसूदन-    सारांश *** एशियाटिक सोसायटी का षड्यंत्र *** कड़वे रस में डूबा गुलाब जामुन *** डॉ. अम्बेडकर का निरीक्षण-विश्लेषण *** विवेकानंदजी की चुनौती…

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राजनीति रामविलास का भाजपा मिलाप…!

रामविलास का भाजपा मिलाप…!

-तारकेश कुमार ओझा-   लोजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के अपने परंपरागत मित्र लालू प्रसाद यादव या नीतीश कुमार के बजाय भाजपा…

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राजनीति अस्तित्व में आया तीसरा मोर्चा

अस्तित्व में आया तीसरा मोर्चा

-प्रमोद भार्गव-   अकसर आम चुनाव के पहले सिर उठाने वाले तीसरा मोर्चे के पैरोकारों ने 11 क्षेत्रीय दलों का गठबंधन वजूद में ला दिया…

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आर्थिकी ‘मुहावरा रह गई दाल-रोटी’

‘मुहावरा रह गई दाल-रोटी’

-भरतचंद्र नायक-   हर मुल्क का आत्मदर्शन, प्रतिबद्धताएं और वर्जनाएं होती हैं जो कौम की दिशा निर्देश बनती है। भारत में दाल रोटी की पूर्ति…

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धर्म-अध्यात्म शिवरात्रि को हुई दैवीय प्रेरणा से मूलशंकर महर्षि दयानन्द बने

शिवरात्रि को हुई दैवीय प्रेरणा से मूलशंकर महर्षि दयानन्द बने

-मनमोहन कुमार आर्य-    महर्षि दयानन्द का जन्म-काल का नाम मूलशंकर था। उनके पिता श्री करषनजी तिवारी पौराणिक ईश्वर शिव के कट्टर भक्त थे। सन्…

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राजनीति उत्तर प्रदेश में चुनावी समर- हत्या, दंगों और विकास के मुद्दों का असर

उत्तर प्रदेश में चुनावी समर- हत्या, दंगों और विकास के मुद्दों का असर

-अरविन्द विद्रोही-    लोकसभा चुनाव का जंग लड़ने व जीतने के लिए राजनेताओं-राजनैतिक दलों ने चुनावी रण में अपने-अपने योद्धाओं को उतारना शुरू कर दिया…

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पर्व - त्यौहार सर्वधर्म संभाव का प्रतीक बराड़ा का महाशिवरात्रि उत्सव

सर्वधर्म संभाव का प्रतीक बराड़ा का महाशिवरात्रि उत्सव

-निर्मल रानी-    हमारा देश भारतवर्ष स्वयं में अनेकानेक ऐसेे धार्मिक त्यौहारों, सामाजिक आयोजनों तथा परंपराओं को समेटे हुए हैं जो समय-समय पर हमें अपनी प्राचीन…

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राजनीति अपने ही देश में बेगाने हिंदू

अपने ही देश में बेगाने हिंदू

-सचिन शर्मा-    कांग्रेसनीत संप्रग -2 सरकार व छद्म सेक्यूर पार्टियों ने लगता है कि देश से हिंदुओं के सफाये का मन पूरी तरह बना…

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कविता Default Post Thumbnail

जय हो पण्डित लेखराम

-विमलेश बंसल ‘आर्या’-   जन्म लिया था रावलपिंडी, पाढीवार के कुहुटा ग्राम-2। तारा का अनमोल सितारा, जय हो पंडित लेखराम-2॥ 1. थे पंडित, विद्वान, साहसी, सच्चे देशभक्त…

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व्यंग्य जैसे कैसे हो गया बस !

जैसे कैसे हो गया बस !

-अशोक गौतम-     बरसों से महसूस होने का सारा सिस्टम खटारा होने के बाद भी कई दिनों से मैं महसूस कर रहा था कि…

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