सिनेमा विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री

विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री

  कमल हासन ने अपनी सारी जमा पूँजी लगा कर एक फ़िल्म बनाई विश्वरूपम । एक मोटे अनुमान के अनुसार भी इस फ़िल्म के निर्माण…

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गजल- सत्येन्द्र गुप्ता

मन लगा यार फ़कीरी में क्या रखा दुनियादारी में ! धूल उड़ाता ही गुज़र गया तो क्या रखा फनकारी में ! वो गुलाब बख्शिश में…

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टॉप स्टोरी प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए इतना मंथन क्यों

प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए इतना मंथन क्यों

राघवेंद्र प्रसाद मिश्र लोकसभा चुनाव 2014 में होने हैं और इसके मध्य चुनाव होने के कोई आसार भी नजर नहीं आ रहे है। ऐसे समय…

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मीडिया देश को बदनाम करती बेलगाम कट्टरपंथी ताक़तें

देश को बदनाम करती बेलगाम कट्टरपंथी ताक़तें

निर्मल रानी भारत में विभिन्न धर्मों में सक्रिय कट्टरपंथी शक्तियां अपने ज़हरीले व नापाक अभियान को आगे बढ़ाने में अपनी पूरी ताक़त झोंके हुए हैं।…

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कविता कविता – यायावर

कविता – यायावर

वह मेरे खाने के पीछे पड़ा था जब मैं खाना चाहता था अपना रुखा-सूखा खाना ।   वह मेरी नींद चुराना चाहता था जब मैं…

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बच्चों का पन्ना मिलो और मुस्कराओ

मिलो और मुस्कराओ

आखिर जिस बात का अंदेशा था वही हुआ|रमाकांत की म्रृत्यु के बाद उनके दोनों बेटों में ठन गई|मां रेवती के लाख समझाने पर भी राधाकांत…

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विधि-कानून लोकपाल विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी

लोकपाल विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी

भारत में किसी भी निकाय को स्वायतता या स्वतन्त्रता की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारत में स्वायतता का कोई अभिप्राय: ही नहीं है| जो…

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कविता चिन्ह

चिन्ह

कोई अविगत “चिन्ह” मुझसे अविरल बंधा, मेरे अस्तित्व का रेखांकन करता, परछाईं-सा अबाधित, साथ चला आता है ।   स्वयं विसंगतिओं से भरपूर मेरी अपूर्णता…

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शख्सियत अटलजी का भारतीय राजनीति में योगदान

अटलजी का भारतीय राजनीति में योगदान

देवेश खंडेलवाल गीता का महत्व सबके लिए तथा हमेशा के लिए है क्योंकि यह जिंदगी के तीन मूलभूत सवालों का संतोषजनक उत्तर देती है. हम…

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महिला-जगत सम्मान तलाशती नारी का ‘नुमाईशी’ बनता शरीर

सम्मान तलाशती नारी का ‘नुमाईशी’ बनता शरीर

निर्मल रानी देश की राजधानी दिल्ली में गत् 16 दिसंबर को हुई सामूहिक बलात्कार की घटना ने जहां पूरे देश में नारी उत्पीडऩ के विषय…

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गजल कौन किसको क्या कहे . ।

कौन किसको क्या कहे . ।

कामिनी कामायनी रायगा है उनकी महफिल,है वहाँ दीवाने सब , बेरहम,महरुम बंदे ,बदगुमानी से है भरे । किसको है फुर्सत यहाँ पर ,बज्म का देखे…

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कविता सू्र्यदेव का स्वागत

सू्र्यदेव का स्वागत

सू्र्यदेव का स्वागत मै बाँहें फैला कर करता हूँ, आग़ोश मे लेलूँ सूरज को, महसूस कभी ये करता हूँ।   उदित भास्कर की किरणे, जब…

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