जल, जंगल, जमीन और हमारे बुद्घिजीवी

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राकेश कुमार आर्य ‘जमीन से जुड़े रहने’ का मुहावरा बड़ा प्रसिद्घ है। इस मुहावरे का एक अर्थ ये भी है कि अपनी भारतमाता, गौमाता और जननीमाता से जुड़े रहना। कोई देश या संप्रदाय माने या न माने पर यह सच है कि उसके देश के लोगों में पारस्परिक सदभाव और समभाव, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक… Read more »

जल संकट से कैसे उबरे देश

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सूखे से देश के लोगों की स्थिति बड़ी ही दयनीय बन चुकी है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय को सक्रिय होकर सरकार को उसका कत्र्तव्य बोध कराया गया है। देश के नौ राज्य इस समय भयंकर सूखे की चपेट में हैं। लोगों के लिए इस सबके बीच यह एक अच्छी… Read more »

ईश्वर, माता-पिता, आचार्य, वायु, जल व अन्न आदि देवताओं का ऋणी मनुष्य

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य इस संसार में पूर्व जन्म के प्रारब्ध को लेकर जन्म लेता है। माता-पिता सन्तान को जन्म देने व पालन करने वाले होने से सभी सन्तानें इन दो चेतन मूर्तिमान देवताओं की ऋणी हैं। माता अपनी सन्तान को दस महीनों तक गर्भ में रखकर उसे जन्म देने योग्य बनाती है, इससे उसे… Read more »

भारत में पानी के बाजार को बेचैन दुनिया ?

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-प्रमोद भार्गव- -संदर्भः संयुक्त राष्ट्र एवं ईए वाटर के अध्ययन की रिपोर्ट- हाल ही में भारत में बढ़ती जल समस्या के परिप्रेक्ष्य में भयभीत करने वाली रिपोर्ट आई है। जल क्षेत्र की एक प्रमुख परामर्शदाता संस्था ईए वाटर की अध्ययन रिपोर्ट जारी हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में 10 साल के भीतर जल समस्या इतनी भीषण… Read more »

सबके साथ सबका विनाश (भा १)

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–डॉ. मधुसूदन – (एक) क्या, शीर्षक गलत है? नहीं; चौंकिए नहीं, शीर्षक गलत नहीं है। अति अति गंभीर समस्या हैं। भारत की जल समस्या मात्र गंभीर नहीं, अति गम्भीर ही नहीं, पर, अति अति गंभीर हैं। विश्वके जल विशेषज्ञ भी यही कहते हैं। वैश्विक विशेषज्ञों की सामूहिक चर्चाओं, आयोजित गोष्ठियों, और वृत्तपत्रों के समाचारों के… Read more »

जल संरक्षण – धरा संरक्षण

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-निर्मल रानी- जब भी दुनिया जल संरक्षण दिवस मनाती है या फिर जिन दिनों में धरती गर्मी के भीषण प्रकोप का सामना करती है प्राय: उन्हीं दिनों में हम जैसे तमाम लेखकों, समीक्षकों व टिप्पणीकारों को जल संरक्षण हेतु कुछ कहने, सुनने व लिखने का ख्याल आता है। हमारा देश एक बार फिर गर्मी की… Read more »

पानी रे पानी तू हर जगह, लेकिन पीने को एक बूंद नहीं

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स्‍टाजिंग कुजांग आंग्‍मो  लेह की सड़कों पर चलते हुए जैसे-जैसे मैं पुरानी बातों को याद करती हूं, तो बचपन की यादें किसी फूल की तरह ताजा हो जाती हैं। ऐसा लगता है कि जैसे कल की ही बात हो जब मैं अपने साथियों के साथ इन हरे भरे चारागाहों, सुंदर और भव्य इलाकों और हीरे… Read more »

जल की उपलब्धता और भारतीय ग्राम

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-आलोक कुमार यादव भूमंडलीकरण के इस दौर में भारत के ग्रामीण जन जिन मुख्य समस्याओं से रू-ब-रू होना पड़ रहा है उनमें से एक भूजल स्तर का गिरना भी है। जल जीवन की अनिवार्यता है इतिहास इस बात का साक्षी है कि अधिकतर आदि सम्यताएं विभिन्न नदी-घाटियों में जन्मी और फली-फूली है। अनेक महत्वपूर्ण नगर,… Read more »