धर्म

कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150 जयन्ती पर विशेष- दीन-हीन का सम्मान पद है धर्म

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हिंदी के बुद्धि‍जीवि‍यों में धर्म ‘इस्‍तेमाल करो और फेंको’ से ज्‍यादा महत्‍व नहीं

सच्चाई से धर्म का पालन करके धरती पर स्वर्ग उतारा जा सकता है – अखिलेश आर्येन्दु

छान्दोग्योपनिषद् में धर्म शब्द की उत्पत्ति ‘धृ’ धातु में ‘मन्’ प्रत्यय से बताई गई है।