पर्यावरण में युद्ध स्तरीय सुधार की जरुरत

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– पर्यावरण की अवहेलना के गंभीर दुष्परिणाम समूचे विश्व में परिलक्षित हो रहे हैं। अब सरकार जितने भी नियम-कानून लागू करें उसके साथ साथ जनता की जागरूकता से ही पर्यावरण की रक्षा संभव हो सकेगी। इसके लिए कुछ अत्यंत सामान्य बातों को जीवन में दृढ़ता-पूर्वक अपनाना आवश्यक है। जैसे -प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष यादगार अवसरों (जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ) पर अपने घर, मंदिर या ऐसे स्थल पर फलदार अथवा औषधीय पौधा-रोपण करे, जहाँ उसकी देखभाल हो सके। उपहार में भी सबको पौधो दें। शिक्षा संस्थानों व कार्यालयों में विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारीगण राष्ट्रीय पर्व तथा महत्त्वपूर्ण तिथियों पर पौधों रोपे।

 पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी

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“जब मैं छोटा था बहुत बारिश और बर्फ होती थी। मई के अंत तक पहाड़ बिल्कुल सफेद रहते थे। लेकिन अब बर्फ बहुत ही कम हो गए हैं। सफेद की जगह हरे नजर आते हैं। क्योंकि बारिश ज्यादा होने लगी है”। ये वाक्य है लद्दाख के फ्यांग गांव में रहने वाले 80 वर्षीय टुंडुप वांगाईल का। इसी गांव के 51 वर्षीय रींचेन वांगड़ूज़ बताते हैं कि “साल दर साल वाहनो से निकलने वाले धुंए के कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है”।

पर्यावरण की सुरक्षा – हमारा नैतिक कर्त्तव्य

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यदि कोई चाहकर भी वृ़क्षारोपण के कार्य में सहयोग न दे पाये तो कोई बात नहीं । वह कम से कम इतना सहयोग तो जरूर कर ही सकता है कि – हममें से हर कोई रेल और सडक मार्ग से यात्रा जरूर करता है । इन यात्राओं के दौरान खाये जाने वाले फलों के बीजों को इधर-उधर कचरे के रूप में न फेंककर यात्रा के दौरान ही सडक या रेल मार्ग के किनारे बिखेर दें । उन बिखेरे गये बीजों से कुछ नहीं तो यदि 10 प्रतिशत पौधे ही पनप जायें तो भी पर्यावरण संरक्षण की दिषा में उनका यह बहुत बडा योगदान होगा ।

समस्या के साथ समाधान भी सोचें

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मौसम, पर्यावरण, बिजली और पानी के संकट की बात बहुत लोग कहते हैं। कोई बड़े बांधों का विरोधी है, तो कोई समर्थक। कोई शहरों के पक्ष में है, तो कोई ‘भारतमाता ग्रामवासिनी’ की याद दिलाता है। लेकिन हाल ये है कि ‘मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की।’ दुनिया में इलाज की होम्योपैथी, एलोपैथी, आयुर्वेद, यूनानी,… Read more »

पर्यावरण को लेकर भारत की सराहनीय पहल

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्बन उत्सर्जन को लेकर युरोपियन देशों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जिस तरह से फटकार लगाना शुरू किया है, उससे अब साफ झलकने लगा है कि दुनिया में भारत आज स्वस्थ वैश्विक पर्यावरण को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है। भारत की ओर से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को 22… Read more »

पर्यावरण संरक्षणः चिन्ता नहीं चिंतन करें

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-डॉ. दीपक आचार्य- आज विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी स्थानों पर पर्यावरण के संरक्षण-संवर्धन की धूम है। कार्यक्रमों के आयोजन से लेकर भाषणों तक में पर्यावरण ही पर्यावरण के लिए चिन्ता जाहिर की जा रही है। खूब सारे लोग बरसों से पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन की रट लगाए हुए हैं, आतिथ्य पाकर सम्मान, अभिनंदन और… Read more »

मैगी प्रकरण के बहानेः पर्यावरणीय प्रश्न

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-अरुण तिवारी- मैगी नूडल्स में सीसा यानी लैड की अधिक मात्रा को लेकर उठा बवाल, बाजार का खेल है या स्थिति सचमुच, इतनी खतरनाक है ? इस प्रश्न का उत्तर तो चल रही जांच और बाजार में नूडल्स के नये ब्रांड आने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल, मांग हो रही है कि इस जांच… Read more »

धर्म सीखाता है पर्यावरण की रक्षा करना

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-अभिषेक कांत पाण्डेय- -पर्यावरण दिवस पर विशेष- धरती कभी आग का गोला था, पर्यावरण ने इसे रहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित सारे जीवों, पेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और जीव एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति सत्य है, जो धर्म को धारण करती है, इसीलिए ब्रह्माण्ड में केवल धरती पर ही… Read more »

पर्यावरण-जीवन का आधार

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नवनीत कुमार गुप्ता सूरज से तीसरा ग्रह पृथ्वी, अभी तक के ज्ञात सभी ग्रहों में इकलौता ग्रह है जिसमें जीवन अपने विभिन्न रूपों में पनपता है। यह जीवित ग्रह अंतरिक्ष से नीले रंग का दिखाई देता है। आज से लगभग 1400 करोड़ वर्ष पहले अंतरिक्ष में एक बड़ा धमाका हुआ था, जिसे ‘बिग बैंग’ सिद्धांत… Read more »

भारतीय चिंतन में पर्यावरण – राजीव पाठक

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5 जून को प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। किसी भी दिवस को मनाने की औपचारिकता को अब हम सबने अपने व्यवहार में सहजता से स्वीकार कर लिया है। कोई भी दिवस हो उसके बारे में उसी दिन गंभीरता से चिंतन, सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा जनजागरूकता अभियान का श्री… Read more »