शिवराज की ‘किसान पुत्र’ की छवि को चोट पहुँचाने की रणनीति

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  लोकेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ‘यूएसपी’ है- किसान पुत्र की छवि। यह छवि सिर्फ राजनैतिक ही नहीं, अपितु वास्तविक है। शिवराज सिंह चौहान किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने खेतों में अपना जीवन बिताया है। इसलिए उनके संबंध में कहा जाता है कि वह खेती-किसानी के दर्द-मर्म और कठिनाइयों को भली प्रकार समझते… Read more »

कर्नाटक की विपक्षी एकता का सबब

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ललित गर्ग कर्नाटक में जनता दल-सेकुलर के नेता एचडी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद की शपथ का समारोह मोदी बनाम बाकी राजनीतिक दलों की एकता के रूप में उभरकर सामने आया है। एक सशक्त एवं प्रभावी लोकतंत्र के लिये सशक्त विपक्ष का होना जरूरी है, जिसके दर्शन नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद नहीं हो… Read more »

कर्नाटक सत्ता की चाबी राज्यपाल के हाथ

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कर्नाटक सत्ता की चाबी राज्यपाल के हाथ प्रमोद भार्गव कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने त्रिषंकु जनादेश या है। इसके साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लिहाजा कांग्रेस ने तत्परता दिखाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगोड़ा की पार्टी जेडीएस को न केवल बिना मांगे समर्थन दे दिया है, बल्कि देवगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी… Read more »

भाजपा की सरकार, कांग्रेस का नाटक

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भाजपा की सरकार, कांग्रेस का नाटक सुरेश हिन्दुस्थानी सरकार बनाने के लिए उठे राजनीतिक तूफान के बीच आखिरकार कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के नेता बी. एस. येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। लेकिन सरकार बनने के बाद यह तूफान थम गया हो, ऐसा अभी नहीं लग रहा। कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर… Read more »

कर्नाटक में सरकार के लिए फंसा पेच

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सुरेश हिन्दुस्थानी कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं। परिणामों ने जो तस्वीर दिखाई है, उसमें देश में लगातार बढ़ती जा रही भाजपा सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर उभर कर आई है। इसे भाजपा के लिए दक्षिण में प्रवेश करने के लिए दरवाजा भी माना जा सकता है। हालांकि परिणामों ने त्रिशंकु… Read more »

न्यायपालिका की स्वायत्तता का सवाल

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  जावेद अनीस भारतीय लोकतंत्र के दो आधार स्तंभों के बीच की टकराहट अपने चरम पर पहुंच चुकी है और फिलहाल इसके थमने का आसार नजर नहीं आ रहा हैं, विधायिका और कार्यपालिका के बीच की हालिया टकराहट भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गयी यह टिपण्णी कि… Read more »

 महाभियोग का फोग !

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देवेंन्द्रराज सुधार  लोकतंत्र में विपक्ष गलत कामों को रोकता है। वह सत्ता पक्ष की तानाशाही पर नकेल कसता है। शक्तियों के अविवेकपूर्ण उपयोग पर नजर गड़ाए रखता है। एक मजबूत विपक्ष नियमों और सिद्धांतों की बुनियाद पर सत्ता पक्ष के लोगों की नाक में दम करके रखता है। लेकिन यह घोर विडंबना है कि नाक… Read more »

लोकतंत्र को खतरा और हकीकत

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र आज जरा-जरा सी बात पर लोकतंत्र को खतरा बताया जाना आम हो गया है। अपने-अपने तरीके से लोग इसकी व्याख्या करने में लगे हैं। जेएनयू से अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर शुरू हुआ विवाद, गुजरात जातीय हिंसा से होते हुए सुप्रीम कोर्ट के जजों तक जा पहुंचा है। इन सभी घटनाक्रमों… Read more »

लोकतंत्र का लचीला और खुला स्वरूप रहे बरकरार

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प्रधानमंत्री जी ने गत दिनों दो निजी टी वी चैनलों को दिए अपने साक्षात्कारों में अपने मन की बात हमेशा की तरह हमारे साथ की। एक मुद्दा जिसे माननीय राष्ट्रपति महोदय ने बजट सत्र के प्रारम्भ में दिए गए अभिभाषण में सम्मिलित कर आधिकारिकता और महत्व दोनों प्रदान कर दिए- वह था- लोक सभा और… Read more »

पंजाब के निकाय चुनावों का हिंसक होना? 

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ललित गर्ग पंजाब के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को विधानसभा चुनावों की ही तरह ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है। पूरे देश में भाजपा का परचम फहरा रहा है, हाल ही में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने जीत हासिल करके कांग्रेसमुक्त भारत की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है लेकिन पंजाब के… Read more »