वेद

वेद का ज्ञान और भाषा प्राचीन व अर्वाचीन ग्रन्थों में सबसे उन्नत

संसार में प्रचलित विकासवाद के सिद्धान्त के अनुसार संसार का क्रमिक विकास होता है। उनके अनुसार एक प्रकार के जीवाणु ‘अमीवा’ से मुनष्य व अन्य प्राणी बने हैं। भौतिक जगत व अमीवा किससे बने, इसका समुचित उत्तर उनके पास नहीं है। सूर्य, चन्द्र, पृथिवी व हमारे ब्रह्माण्ड का विकास नहीं अपितु विकास से ह्रास हो रहा है, अतः इस कारण विकासवाद का सिद्धान्त पिट जाता है।

वेदों के नासदीय-सूक्त में सिद्धान्त रूप में सृष्टि की प्रलय व उत्पत्ति का वर्णन है

–मनमोहन कुमार आर्य- ऋग्वेद के मण्डल 10 सूक्त 129 को नासदीय–सूक्त कहते हैं। इस सूक्त

न्यूटन से हजारों नहीं वरन सहस्त्राब्दियों वर्ष पूर्व वेद और वैदिक ग्रन्थों में गुरूत्वाकर्षण के नियम

-अशोक “प्रवृद्ध”-  भारतवर्ष के प्रसिद्ध और जाने-माने वैज्ञानिक एवं भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) के