आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया

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आज हिन्दी दिवस पर- मनमोहन कुमार आर्य आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन्  1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान… Read more »

शैक्षिक परिदृष्य में विस्थापित होती हिन्दी

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प्रमोद भार्गव वर्तमान वैष्विक परिदृष्य में हिन्दी अनेक विरोधाभासी स्थितियों से जूझ रही है। एक तरफ उसने अपनी ग्राह्यता तथा तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध करके वैष्विक विस्तार पाया है और वह दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। इसीलिए यह जनसंपर्क और बाजार की उपयोगी भाषा बनी हुई है।… Read more »

स्वार्थ के लिए भोजपुरी और हिन्दी-दोनों को कमजोर करने का कुचक्र

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डॉ. अमरनाथ हिन्दी आज टूटने के कगार पर है. भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग तेज हो गई है. भोजपुरी क्षेत्र के दो सांसदों ने संसद में फिर से यह माँग की है. पिछले 8अगस्त और इसके बाद 15 नवंबर को इस माँग के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर… Read more »

हिन्दी की अस्मिता पर प्रहार करने वाले हिन्दी के अपने ।

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– प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी हिंदुस्तान समाचारपत्र के 13 नवंबर 2016 के अंक में केंद्रीय गृह मंत्री माननीय श्री राज नाथ सिंह के एक सभा में भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए संसद में विधेयक पारित करने का आश्वासन दिया है। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हिन्दी को तोड़ने… Read more »

हिन्दी नहीं रहेगी तो देश टूट जायेगा: प्रा. अनूप सिंह

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हिन्दी दिवस के अवसर पर -मनमोहन कुमार आर्य 14 सितम्बर, 2016 को हिन्दी दिवस है। इस अवसर पर हम आर्य विद्वान प्रा. अनूप सिंह जी (1944-2001) का हिन्दी के महत्व और आर्यसमाज के हिन्दी के प्रचार प्रसार में योगदान पर एक पुराने व्याख्यान को प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रा. अनूप सिंह आर्यसमाज में हमारे प्रवेश… Read more »

हिन्दी दिवस पर आम भारतीय भी जानें क्या है भारत की राजभाषा नीति

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा हम प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाते हैं। सरकारी स्तर पर काम करने वालों को भारत की राजभाषा नीति के बारे में फिर भी काफी जानकारी काम करते करते हो जाती है। परन्तु गैर सरकारी विशुद्ध रुप से आम भारतीय जनता को प्रायः ही राजभाषा नीति के बारे में कोई विस्तृत… Read more »

हिन्दी का वैश्विक फलक

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पवन तिवारी हिन्दी आज भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के विराट फलक पर अपने अस्तित्व को आकार दे रही है। आज हिन्दी विश्व भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। अब तक भारत और भारत के बाहर सात विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं। पिछले सात सम्मेलन क्रमश: नागपुर… Read more »

भारत की प्रथम धार्मिक व सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर प्रचार किया।

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आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन्  1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान पर सत्य को स्थापित करना है। क्या धर्म, समाज… Read more »

स्वामी दयानन्द और हिन्दी

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भारतवर्ष के इतिहास में महर्षि दयानन्द पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने पराधीन भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिए हिन्दी को सर्वाधिक महत्वपूर्ण जानकर मन, वचन व कर्म से इसका प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि हिन्दी शीघ्र लोकप्रिय हो गई। यह ज्ञातव्य है कि हिन्दी को स्वामी दयानन्द जी… Read more »

विश्व में भारत की पहचान – संस्कृत एवं हिन्दी

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–मनमोहन कुमार आर्य- हमारे देश की वास्तविक पहचान क्या है?  विचार करने का हमें इसका एक यह उत्तर मिलता है कि संसार की प्राचीनतम भाषा संस्कृत व आधुनिक भारत की सबसे अधिक बोली व समझी जाने वाली भाषा आर्यभाषा-हिन्दी है। हिन्दी को एक प्रकार से संस्कृत की पुत्री कह सकते हैं। इसका कारण हिन्दी में… Read more »