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    मोदीराज के तीन माह

    -जगदीश-

    Narendra_Modi

    लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनके टीम को जानदार सफलता मिली, इसमें कोई दो राय नहीं होना चाहिए। ऐसे में  एनडीए सरकार ने मंगलवार को तीन माह पूरा कर लिया है। बीते तीन महीने में मोदी सरकार के द्वारा तमाम घोषणाएं की गई। घोषणाओं को कैसे हकीकत में बदला जाय, यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।

    सरकार के फैसले किस कदर फायदेमंद साबित होंगे, इसका संदेश जनता तक पहुंचाना भी सरकार की नई चुनौती है। सरकार के लिये जो सबसे बड़ी चुनौती है कि महंगाई से देश की जनता को कैसे राहत पहुंचे। बात बीमा में विदेशी निवेश की समय सीमा बढ़ाने  की हो या फिर किसानों और गरीबों के हित में डब्ल्यूटीओ में उठाए गए मुद्दे और डिजिटल इंडिया संबंधी लिए गए अहम फैसले जैसे तमाम ऐलान का उक्त सरकार को जवाब देना ही होगा। कयास व खबरों की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन फैसलों के बारे में जनता के बीच गए संदेश से संतुष्ट नहीं हैं। मोदी चाहते हैं कि जनता जाने कि ये फैसले क्यों और किस उद्देश्य से लिए गए हैं। साथ ही जनता को सीधे क्या लाभ मिलेगा। इस बात की जानकारी भी जनता को हो। उड़ती खबरों को माने तो मोदी सरकार के  सौ दिन पूरे होने पर सरकार अपने फैसलों के बारे में जनता को बता सकती है। संतोष की बात यह की उक्त सरकार के द्वारा अन्य देशो से दोस्ताना सम्बंध की रणनीति जरूर विदेश नीति के तहत  अच्छा कदम है। उक्त सरकार के तीन माह हुए और मात्र दस दिन में सौ दिन पूरे होंगे। किसी भी सरकार के लिये सौ दिन का समय सरकार के कामकाज को दर्शाने के लिये कम भी नहीं कहा जा सकता है। आज से पूरे देश में जिस तरह की मोदी की लहर थी वह लहर अब अवरोध का शिकार होता प्रतीत हो रही है। उदाहरणस्वरूप बिहार विधानसभा के उपचुनाव को सामने रखा जा सकता है। लालू वहां तेजी के साथ हाशिए पर जा रहे थे और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासत भी डगमगा रही थी। लग रहा था कि इनके बचे-खुचे करियर को मोदीराज या लहर समाप्त कर देगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, चुनावी परिणाम आया कि बिहार में भाजपा को चार व महागठबंधन को छः सीटें मिली। देश की जनता अब खुद को देश-दुनिया से जोड़ रही है जिसमें नये जमाने की मीडिया का अहम रोल है। ऐसे में मोदी सरकार के लिये बतकही से ज्यादा काम को अंजाम देना फायदेमंद होगा।

    1 COMMENT

    1. मोदी और उनके समर्थकों की सबसे बड़ी घोषणा थी कि वे सौ दिनों में विदेशों से कालाधन वापस लाएंगे.इसी तरह यह भी प्रचार का अंग था कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएंगे.महंगाई कम करने के लिए भी तत्काल कदम उठाने की बात की गयी थी.इन सब मुद्दों पर जब आजतक कुछ काम नहीं हुआ ,तो जनता को असंतोष दिखाना ही था,जो उन्होंने उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक दिखा दिया.

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