लेखक परिचय

अरविन्‍द विद्रोही

अरविन्‍द विद्रोही

एक सामाजिक कार्यकर्ता--अरविंद विद्रोही गोरखपुर में जन्म, वर्तमान में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में निवास है। छात्र जीवन में छात्र नेता रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक हैं। डेलीन्यूज एक्टिविस्ट समेत इंटरनेट पर लेखन कार्य किया है तथा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा लगाया है। अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 1, अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 2 तथा आह शहीदों के नाम से तीन पुस्तकें प्रकाशित। ये तीनों पुस्तकें बाराबंकी के सभी विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मुफ्त वितरित की गई हैं।

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अरविन्द विद्रोही

भारत में किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देश गैर सरकारी संगठनों को भारी मात्र में धन दे रहे है , इसकी जाँच लोकसभा कि संयुक्त संसदीय समिति या किसी अन्य सक्षम जांच एजेंसी से भारत सरकार को तत्काल करनी चाहिए| भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था ,चुनाव प्रणाली ,संविधान को नकारने का प्रयास व कुचेष्टा करने तथा संसद के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालो की साजिश को बेनकाब करने के लिए भारत भूमि के उन लोगो को आगे आना ही पड़ेगा जो भेड़ चल ना चलते हो | लाखों-करोडों रुपया विदेश से प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनो के कारनामो पर नज़र रखने व इनको आम जनता के सामने लाने की महती भूमिका निभाने के लिए अब भारत भूमि के भूमि-पुत्रों को कमर कसना ही पड़ेगा | गैर सरकारी संगठनों के कर्ता-धर्ताओं ने विदेशो से धन व सम्मान प्राप्ति के लिए भारत को अस्थिर करने, अशांति फ़ैलाने , लोकतान्त्रिक व्यवस्था को ख़त्म करने का षड़यंत्र तो नहीं रचा जा रहा है, यह प्रश्न जेहन में कौंधता रहता है| सरकारी सहायता से संचालित गैर सरकारी संगठन पर धन राशी के बन्दर बाँट के लिए भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियो की भी नज़र रहती है लेकिन विदेशी धन से संचालित गैर सरकारी संगठनो पर कोई प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण नहीं दीखता | इनका रवैया व कार्य पद्धति दोनों अत्यंत रहस्यमयी है | इस पर प्रभावी निगरानी की तत्काल जरुरत है|प्रभावी लोकपाल बिल का गठन भ्रष्‍टाचार को रोकने में एक कारगर कदम होगा यह कहा जा रहा है| लोकपाल विधेयक के गठन की प्रक्रिया चल रही है | संसद ने कुल ५ प्रास्ताविक विधेयको को संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी को भेजा है| ध्यान देने की व गंभीर चिंता की बात यह है कि एक स्व गठित तथा कथित सिविल सोसाइटी के लोग जिन्होंने प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक को भ्रस्टाचार के मुद्दे पर लोकपाल में लाने की मांग पर अपना सर्वस्व झोंक दिया, छोटे सरकारी कर्मचारियो तक को लोकपाल के दायरे में लाने की विशेष मांग रखी कि इससे आम जनता को भ्रस्टाचार से निजात मिलेगी , वही यह सिविल सोसाइटी के स्वयंभू लोग विदेशी धन पाने वाले गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी व सक्षम लोकपाल के अधीन करने कि मांगो का विरोध कर रहे है और इस मांग को कि सभी गैर सरकारी संगठनो को लोकपाल के दायरे में लाया जाये सिरे से खारिज करते है |गैर सरकारी संगठनों को प्रभावी लोकपाल के दायरे से बाहर रखने कि कवायत व प्रयास करने वाले इन तथा कथित सिविल सोसाइटी के लोगों की मंशा को संदेह के घेरे में लाती है | क्या इन लोगों के द्वारा संचालित गैर सरकारी संगठनो को विदेशी धन राशी मिलती है, और अगर हा तो किस लिए? सभी गैर सरकारी संगठनों को यह लोग प्रभावी लोकपाल के दायरे में नहीं लाना चाहते इसका क्या करण हो सकता है? क्या विदेशी धन का गलत कामों में प्रयोग हो रहा है भारत में ? क्या यह इन सिविल सोसाइटी के लोगो का भ्रष्‍टाचार नहीं है? पूरे देश के लोकतंत्र को कठघरे में खड़े करने वाले इन लोगों की संपूर्ण गतिविधिया इनके संविधान विरोधी मानसिकता व सामाजिक चरित्र को परिलक्षित करती है | संसद में गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी लोकपाल के अधीन लाने की चर्चा हुई | हमारा यह भी सुझाव है विदेशी धन व विदेशी सम्मान पाने वाले किसी भी गैर सरकारी संगठन के किसी भी कार्यकर्ता को लोकपाल ना बनाया जाये | लोकतंत्र में भारत के हर देश भक्त का , भूमि पुत्र का शत प्रतिशत विश्वास है | इसी विश्वास को संसद ने और सांसदों ने और अधिक दृठता प्रदान की जब इस तथा कथित सिविल सोसाइटी की हठधर्मिता को नकारते हुये उनकी मांगो को संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी के पास भेजा, जहा बाकि प्रस्तावित बिलों के साथ साथ विचार किया जायेगा | भारत की सरकार ने सभी नागरिको से लोकपाल विधेयक पर प्रस्ताव व सलाह मांगी थी , सभी प्राप्त विधेयको , सुझावों पर संसद की ड्राफ्टिंग कमिटी विचार करके एक प्रभावी लोकपाल विधेयक का प्रारूप बनाएगी| लोकतान्त्रिक व्यवस्था में संसद के सदन ही कानून – विधेयक बनाते है | एब सदन से बाहर खड़े होकर सदन को नियंत्रित करने का संविधान विरोधी कृत्य करने की कुचेस्टा करने वालो से सरकारों को सख्ती से पेश आना चाहिए| सदन ने सभी सुझावों, प्रस्तावों को विचारार्थ ड्राफ्टिंग कमिटी को भेजा इसके लिए सदन को शत-शत नमन| सदन से , सरकार से निवेदन है की देश-समाज हित में विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनो के कर्ता-धर्ताओं के विदेशी संपर्क व मंशा को पता करने की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाये| इनकी मंशा भारत में अराजकता फ़ैलाने व सामाजिक अलगाव पैदा करने की प्रतीत होती है |

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4 Comments on "गैर सरकारी संगठनों और पूंजीवादी -साम्राज्यवादी ताकतों का दुष्चक्र"

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vijai mathur
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धन्यवाद महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने हेतु। जिद्दी और भावावेश मे बहने वाले न माने तो क्या किया जा सकता है ?परंतु सरकार को त्वरित कदम उठाना ही चाहिए।

श्रीराम तिवारी
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आलेख की विषय वस्तु बेहद गंभीर और दृष्टिकोण समीचीन है.बेहतर आलेख के लिए विद्रोही जी को धन्यवाद और प्रवक्ता.कॉम को साधुवाद कि उत्कृष्ट चिंतन और रचनात्मक धारणाओं को अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया.

डॉ. राजेश कपूर
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श्री आर. सिंह जी की टिपण्णी से पूरी तरह सहमती प्रकट करते हुए मुझे नहीं लगता की इस से अधिक सही और संतुलित कुछ और इस लेख के बारे में कहा जा सकता है.

आर. सिंह
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श्री अरविन्द विद्रोही जी ,आपने अन्य बातों के साथ यह भी लिखा है की “ध्यान देने की व गंभीर चिंता की बात यह है कि एक स्व गठित तथा कथित सिविल सोसाइटी के लोग जिन्होंने प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक को भ्रस्टाचार के मुद्दे पर लोकपाल में लाने की मांग पर अपना सर्वस्व झोंक दिया, छोटे सरकारी कर्मचारियो तक को लोकपाल के दायरे में लाने की विशेष मांग रखी कि इससे आम जनता को भ्रस्टाचार से निजात मिलेगी , वही यह सिविल सोसाइटी के स्वयंभू लोग विदेशी धन पाने वाले गैर सरकारी संगठनो को प्रभावी व सक्षम लोकपाल के अधीन… Read more »
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