जनगणना और हम

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-विजय कुमार हर दस साल बाद होने वाली जनगणना का कुछ अंश पूरा हो चुका है, जबकि मुख्य काम (संदर्भ बिन्दु) नौ से 28 फरवरी, 2011 तक होगा। इससे संबंधित दो विषय महत्वपूर्ण हैं। एक है धर्म और जाति का, जबकि दूसरा भाषा और बोली का है। इन दोनों पर विचार कर हमें अपनी भूमिका… Read more »

सिर्फ नरमुंडों की गिनती नहीं लोकजीवन का आईना भी

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-संजय द्विवेदी देश में दुनिया की विशालतम जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है। सही अर्थों में जनगणना का आशय सिर्फ नरमुडों की गितनी की कवायद नहीं है वरन अपने समाज और लोकजीवन को, उसकी खुशहाली, बदहाली और विकास के मानकों का रेखांकन भी है। हर 10 साल पर की जाने वाली जनगणना के निष्कर्षों… Read more »

अलग से हो ओबीसी की जनगणना : छगन भुजबल

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नागपुर। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल ने कहा है अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण की व्यवस्था मजबूत करने के लिए जनगणना में ओबीसी अलग से निष्कर्ष निकलनी चाहिए। सिविल लाइन्स स्थित रवि भवन में पत्रकारों से बातचीत में भुजबल ने कहा कि जिस तरह से जनगणना में अनुसूचिज जाति, जन जाति के लिए अलग… Read more »

2011 की जनगणना से सुलझ सकते हैं अनसुलझे सवाल

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आज महिला आरक्षण के मुद्वे पर जिस तरह से कोटे के अंदर कोटे की बात की जा रही है, उसका सही समाधान तभी हो सकता है, जब सभी जाति एवं धर्म के पुरुषों और महिलाओं की संख्या हमें ज्ञात हो। मंडल आयोग के रिर्पोट के आधार पर पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था… Read more »