विनय कुमार'विनायक'

बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

नारी क्या है एक दिन बन के देखो

---विनय कुमार विनायकनारी क्या है?एक दिन बन के देखोसुबह उठ किचन देखोनाश्ता टिफीन के साथकार्यालय विदाकर देखोजाने से उसके आनेतकप्रतीक्षा...

आरम्भ में ब्रह्म एक था

---विनय कुमार विनायकआरंभ में ब्रह्म एक था,‘एको ब्रह्म दूजा नास्ति'ब्रह्म द्विजाकर हो बनापुरुष-प्रकृति और सृष्टि! आरंभ में वेद तीन थाऋक्,साम,...

सृष्टि के आरंभ से हम कहांतक गुजरे

---विनय कुमार विनायकसृष्टि के आरम्भ से!वैदिक कर्मकाण्डी ब्राह्मणयोग ज्ञानी क्षत्रिय बनेऋग्वेद पुरुषसुक्त कहताब्रह्मा के मुख ब्राह्मण होते,क्षत्रिय ब्रह्मा के बाहु!मुख...

हे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें

-----विनय कुमार विनायकहे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें!मैं मंत्रवेत्ता;चतुर्वेद/पंचमवेद/वेदों का वेदकल्पसूत्र-निरुक्त-शास्त्र-गणित-विज्ञान का ज्ञाता!किन्तु दुर्बलचित्/कर्मवित्/मंत्रवित्शोकाकुल रहता हूंअस्तु;आत्मवेत्ता नहीं हूं!हे भगवन!मैं शब्दज्ञानी/अभिधानी/नाम का ज्ञानीसिर्फ...

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