गोपाल बघेल 'मधु'

President Akhil Vishva Hindi Samiti​ टोरोंटो. ओंटारियो, कनाडा

उठे कहाँ मन अब तक !

शब्द परश रूप गंध, रस हैं तन्मात्रा;
छाता जब श्याम भाव, होता मधु-छत्ता !

राधा भव-बाधा हर, मिल जाती भूमा;
अणिमा महिमा गरिमा, भा जाती लघिमा !
तनिमा तरती जड़ता, सुरभित कर उर कलिका;
झंकृत तन्त्रित झलका, सुर आता रस छलका !