डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

कश्मीर घाटी में आतंकियों से लेकर फारुक अब्दुल्ला की राजनीति तक नोटबन्दी का क़हर

डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री नोटबन्दी के चलते किसको लाभ हुआ और किसको हानि , राजनीति

काला धन अपनी सत्ता खो बैठा

सरकार के इस क़दम से घबराहट तो पाकिस्तान की आई एस आई में है , पाकिस्तान के उन तस्करों में है जो नेपाल और बंगलादेश के रास्ते तस्करी में अरसे से संलग्न थे । नोटों के बन्द होने से इन की कमर टूट गई है । सीमा के उस पार भी घबराहट है और जो आतंकी अन्दर घुस चुके हैं , उनके भी हाथ पाँव फूले हुए हैं । काग़ज़ के जिन नोटों की झलक दिखा कर वे घाटी के लोगों को सड़कों पर नाच नचवाते थे उन नोटों की ताक़त अब समाप्त हो गई है । कश्मीर घाटी के आतंकी संगठनों की हालत पंचतंत्र के उस चूहे के समान हो गई है , जिस के बिल के नीचे से स्वर्ण मुद्राओं से भरा घड़ा निकाल लिया गया है और अब वह लाख ज़ोर लगाने पर भी दूर खूँटी पर लटके सत्तू के थैले तक नहीं पहुँच पा रहा है ।

कश्मीर घाटी में आतंकी संगठनों की नई रणनीति

लेकिन महबूबा मुफ़्ती ने आतंकियों के राजनैतिक दबाब और आतंक के भय में आने से इन्कार कर दिया । उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकी और उनके समर्थक अपने बच्चों को तो बाक़ी प्रदेशों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं और ग़रीब के बच्चों को आगे करके उनका दोहन कर रहे हैं । सैयद अहमद शाह गिलानी की पोती के हाथ में पोथी और लाल चौक में ज़मीन पर बैठ कर सब्ज़ी बेचने वाले के बेटे के हाथ में पत्थर ।

एमनेस्टी इंटरनैशनल और दिग्विजय सिंह , प्रसंग जम्मू कश्मीर को लेकर एक नई बहस का

  डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री एमनेस्टी इंटरनैशनल पश्चिम की एक ऐसी संस्था है जिसका दावा