सज्जाद हैदर

स्वतंत्र लेखक

कुरान में तीन तलाक का ज़िक्र नहीं : न्यायालय

ज्ञात हो कि एआईएसपीएलबी के प्रवक्ता मौलाना यासबू अब्बास ने कहा कि समय की मांग है अब कड़ा कानून लाया जाये। यह सती विरोधी कानून की तरह हो, जो किसी महिला को पीड़ित होने से बचाए और यह सुनिश्चित करे की दोषी को सजा मिले। शिया समुदाय में एक बार में तीन तलाक के लिए कोई जगह नहीं है।’’ तीन तलाक का मुद्दा पूरी तरह से पुरुषवादी वर्चस्व से जुड़ा है और इसका कुरान में कोई उल्लेख नहीं है।

सत्ता की ठसक का प्रमाण

यह कार्य स्वयं महिला सम्मान के रक्षक विधायक जी के द्वारा एक महिला अधिकारी के प्रति किया गया है तो इससे स्पष्ट रूप से साफ हो जाता है कि जब एक महिला (आई.पी.एस.) अधिकारी को एक विधायक के अहंकार का सामना करना पड़ता है तो प्रदेश की साधरण जानता एवं आम जन-मानस का क्या हाल होगा।

अब चुहे बने शराबी : वाह रे बिहार पुलिस

इन चूहों ने रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाया, योजना बनाई तथा बड़ी चतुराई पूर्वक सभी बिन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार किया तथा योजना बद्ध तरीके से इस बड़े कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। क्योंकि यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित था, अत: इस संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बड़ी चतुराई के साथ रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाते हुए थानों के पिछले द्वार से प्रवेश किया क्योंकि थाने के मुख्य द्वार पर एक पुलिस वाला पहरा दे रहा था, जो संगीन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा हुआ था, इसी कारण चूहों ने पिछले द्वार से प्रवेश की योजना बनाई, जिसके सहारे शराब के भंडार गृह तक योजना बद्ध तरीके से पहुंच गए।

दिमाग में लाल बत्ती की ठसक बरकरार ।

क्योकि संभवतः सत्ता की हनक की मानसिकता प्रशंसनीय थी, तभी उसपर डंडे नहीं चटकाए गए, उसकी मानसिकता से लाल बत्ती नहीं उतारी गई,..तभी तो सत्ता की हनक एवं सत्ता की ठसक लिए, बिना लाल बत्ती के ही नेता जी का जलवा कायम है,…और विधायक जी सत्ता के अहंकार में चूर हैं,.. उन्हें तनिक भी इस बात का भय भी नहीं की हमारे ऊपर भी कार्यवाही हो सकती है,… शायद विधायक जी को यह लगता है की हम न्याय पूर्ण हैं, और हमारी प्रत्येक कार्य शैली न्याय संगत है, क्योकि हम सत्ता में हैं,…तो समझना पड़ेगा की सत्ता में होने की ठसक क्या इस बात का साक्ष्य है, की सत्ताधारी व्यक्ति के द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य भारतीय संविधान के अंतर्गत न्याय पूर्ण होता है,…इसको बड़ी गंभीरता से समझना पडेगा,…तथा इसकी परिभाषा का पुनः विस्तारपूर्वक गहनता से अध्ययन करना पड़ेगा|…