कला-संस्कृति

अब न बुद्ध हैं, न आम्रपाली, न ही वह वैशाली रही; क्या गणतंत्र है?

 [वैशाली, बिहार से यात्रा संस्मरण] राजीव रंजन प्रसाद भगवान महावीर की जन्मस्थली –वैशाली तीन बार

हे बुद्ध आपने तो रास्ता दिखाया था हम ठौर पर ही मंदिर बना कर बैठ गये

[राजगीर से यात्रावृतांत] राजीव रंजन प्रसाद  राजगीर (राजगृह) को निहारता हुआ मैं उस बुद्धकालीन भारत