धर्म-अध्यात्म समाज महर्षि दयानन्द का वर्णव्यवस्था पर ऐतिहासिक उपेदश July 29, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on महर्षि दयानन्द का वर्णव्यवस्था पर ऐतिहासिक उपेदश आज से लगभग 140 वर्ष पूर्व हमारा समाज अज्ञान व अन्धकार से आवृत्त तथा रूढि़वादी परम्पराओं में जकड़ा हुआ था। सामाजिक विषमता अपने जटिलतम रूप में व्याप्त थी। ऐसे समय में महर्षि दयानन्द ने वेद एवं वैदिक साहित्य से समाज सुधार के क्रान्तिकारी विचारों व मान्यताओं को प्रस्तुत किया था। यह भी तथ्य है कि […] Read more » महर्षि दयानन्द वर्णव्यवस्था
धर्म-अध्यात्म योगेश्वर श्री कृष्ण, गीता एवं वेद July 27, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on योगेश्वर श्री कृष्ण, गीता एवं वेद श्री कृष्ण योगेश्वर थे, महात्मा थे, महावीर, धर्मात्मा व सुदर्शनचक्रधारी थे। वह वेदभक्त, ईश्वरभक्त, देशभक्त, ऋषियो व योगियों के अनुगामी थे। पूज्यों की पूजा व अपूज्यों की अवहेलना व उपेक्षा के साथ उनको दण्डित करते थे। अन्यायकारियों के लिए वह साक्षात काल थे। उन्होंने अपना सारा जीवन वेद धर्म का पालन करके व्यतीत किया। […] Read more » गीता एवं वेद योगेश्वर श्री कृष्ण
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा और इसका पुर्नजन्म July 25, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on जीवात्मा और इसका पुर्नजन्म हम इस विस्तृत संसार के एक सदस्य है। चेतन प्राणी है। हमारा एक शरीर है जिसमें पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां, मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार आदि अवयव हैं। शरीर से हम सुख व दुख का भोग करते हैं। हम चाहते हैं कि हमें कभी कोई दुख न हो परन्तु यदा-कदा जाने-अनजाने सुख व दुःख […] Read more » जीवात्मा पुर्नजन्म
धर्म-अध्यात्म समाज दक्षिण भारत के संत (12) सन्त निंबार्कचार्य July 25, 2015 by बी एन गोयल | 3 Comments on दक्षिण भारत के संत (12) सन्त निंबार्कचार्य बी एन गोयल आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी के तट पर स्थित गाँव वैदूरपट्नम। अरुण मुनि और जगन्ती देवी नामक दंपति का घर । दिन का समय । अचानक एक सन्यासी ने घर के दरवाजे पर दस्तक दी । ‘भिक्षाम देहि’। घर जगन्ति देवी और नियमानन्द नाम का छोटा बालक। गृहिणी भिक्षा देने […] Read more » दक्षिण भारत के संत सन्त निंबार्कचार्य
धर्म-अध्यात्म वैज्ञानिक कृत्य अग्निहोत्र-होम से आरोग्यता सहित अनेक लाभ July 23, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमने अद्यावधि जो अध्ययन किया है उसके आधार हमें लगता है कि भारत की संसार को सबसे प्रमुख देन वेदों का ज्ञान है। यदि वेदों का ज्ञान न होता तो वैदिक धर्म व संस्कृति अस्तित्व में न आती और तब सारा संसार अज्ञान व अन्धकार से ग्रसित व रूग्ण होता। आज भी अधिकांशतः यही स्थिति […] Read more » अग्निहोत्र-होम
धर्म-अध्यात्म संसार को किसने धारण किया है? July 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सभी आंखों वाले प्राणी सूर्य, चन्द्र व पृथिवी से युक्त नाना रंगों वाले संसार को देखते हैं परन्तु उन्हें यह पता नहीं चलता कि यह संसार किसने व क्यों बनाया और कौन इसका धारण व पालन कर रहा है? जिस प्रकार प्राणियों के शरीर का धारण उसमें निहित जीवात्मा के द्वारा होता है, इसी प्रकार […] Read more » ‘संसार को किसने धारण किया है
धर्म-अध्यात्म गायत्री मन्त्र व उसका प्रामाणिक ऋषिकृत अर्थ July 21, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment बुद्धि को शुद्ध कर ईश्वरीय प्रेरणा प्रदान कराने वाला गायत्री मन्त्र व उसका प्रामाणिक ऋषिकृत अर्थ गायत्री मन्त्र आध्यात्मिक एवं सामाजिक जीवन में एक श्रेष्ठ वेदमन्त्र के रूप में विश्व में जाना जाता है। इसमें दी गई शिक्षा के मनुष्यमात्र के लिए कल्याणकारी होने के प्रति कोई भी मतावलम्बी अपने आप को पृथक नहीं कर […] Read more »
धर्म-अध्यात्म ‘हम सद्ग्रन्थों का स्वाध्याय कर धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष को सिद्ध करें।’ July 19, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनुष्य एक विचारशील या बुद्धिमान प्राणी है। मनुष्य का बुद्धि तत्व अन्य सभी प्राणियों से विशिष्ट होने के कारण मनुष्य की स्थिति सभी प्राणियों से श्रेष्ठ व उत्तम है। अन्य प्राणियों की तरह से मनुष्य भी अन्न, फल व दुग्धादि पदार्थों का भोजन करता है, ऐसा अनेक प्राणी भी करते हैं परन्तु वह सब […] Read more » मोक्ष को सिद्ध करें सद्ग्रन्थों का स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म त्रैतवाद ‘ईश्वर-जीव-प्रकृति’ सिद्धांत के उद्गाता महर्षि दयानंद July 17, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on त्रैतवाद ‘ईश्वर-जीव-प्रकृति’ सिद्धांत के उद्गाता महर्षि दयानंद महर्षि दयानन्द ने जब उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वैदिक धर्म का प्रचार आरम्भ किया तो उस समय त्रैतवाद की कहीं चर्चा नहीं होती थी। विद्वत जगत में आचार्य शंकर प्रोक्त अद्वैतवाद प्रतिष्ठित था जो केवल एक ईश्वर की ही सत्ता को मानता है, जीव व प्रकृति की पृथक व अनादि स्वतन्त्र सत्ता को […] Read more » ईश्वर-जीव-प्रकृति’ त्रैतवाद महर्षि दयानंद
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार विविधा श्री जगन्नथ रथयात्रा का भारतीय परम्परा में महत्व July 16, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment १७ जुलाई पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया को ओडिशा व गुजरात सहित देश के अनेकानेक हिस्सों में निकाली जाने वाली इस यात्रा का विशेष महत्व है। यह रथयात्रा मुख्यरूप से ओडिशा का सबसे बड़ा ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का पर्व है। इस दिन ओडिशा की सड़को पर तिल रखने की भी जगह […] Read more » श्री जगन्नथ रथयात्रा
धर्म-अध्यात्म आओ, सोम-सरोवर के भक्ति रस-जल में स्नान कर आनन्दित हों July 16, 2015 / July 16, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सामवेद उपासना तथा ईश्वर की स्तुति-गान का वेद है। उपासना ईश्वर के पास बैठकर आनन्द में सराबोर होना है। इसे सोम सरोवर का स्नान भी कह सकते हैं। पं. चमूपति महर्षि दयानन्द के आदर्श अनुयायी थे। वह उर्दू, अरबी, फारसी व अंग्रेजी के विद्वान होने के साथ संस्कृत व हिन्दी के भी विद्वान थे। आपने […] Read more » भक्ति रस
धर्म-अध्यात्म सबके लिये जीने का सुख? July 15, 2015 / July 15, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग खुशी एवं मुस्कान जीवन की एक सार्थक दिशा है। हर मनुष्य चाहता है कि वह सदा मुस्कुराता रहे और मुस्कुराहट ही उसकी पहचान हो। क्योंकि एक खूबसूरत चेहरे से मुस्कुराता चेहरा अधिक मायने रखता है, लेकिन इसके लिए आंतरिक खुशी जरूरी है। जीवन में जितनी खुशी का महत्व है, उतना ही यह महत्वपूर्ण […] Read more » सबके लिये जीने का सुख?