धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-६४ (महाभारत पर आधारित उपन्यास अंश) November 19, 2011 / December 3, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (भीष्म-वध के लिए भीष्म से मंत्रणा) विपिन किशोर सिन्हा सूर्यवंशी क्षत्रिय नित्य ही लक्ष-लक्ष की संख्या में विनाशकारी युद्ध की भेंट चढ़ रहे थे। लेकिन सूर्य को इससे क्या? वह चौथे दिन भी प्रखरता से निकला। कौरवों ने वृषभ व्यूह की रचना की, हमने गजराज। प्रतिदिन कम से कम एकबार मैं और पितामह आमने-सामने होते […] Read more » कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म मौत की आहुतियां लेते यज्ञ November 12, 2011 / December 3, 2011 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव धार्मिक आयोजनों में जताई जाने वाली श्रद्धा और भक्ति से यह आशय कतई नहीं निकाला जा सकता कि वाकई इनमें भागीदारी से इहलोक और परलाक सुधरने वाले हैं। बल्कि जिस तरह से धार्मिक स्थलों पर हादसे घटने का सिलसिला शुरू हुआ है, उससे तो यह साफ हो रहा है कि हम इनमें शिरकत […] Read more » मौत की आहुतियां यज्ञ
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-५८ (महाभारत पर आधारित उपन्यास अंश) November 12, 2011 / December 3, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (श्रीकृष्ण का विराट रूप दर्शन और महासमर की घोषणा) विपिन किशोर सिन्हा दुर्योधन का क्रोध दावानल की भांति बढ़ता जा रहा था। सांप की तरह फुफकारते हुए अपने सैनिकों को आदेश दिया – “मथुरा के कारागार में जन्म लेनेवाले इस यादव को इसके मूल स्थान पर भेजना अत्यन्त आवश्यक है। बांध लो इस छलिया को […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-५५ November 6, 2011 / December 5, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (शान्ति-दूत के रूप में श्रीकृष्ण) विपिन किशोर सिन्हा शान्ति-स्थापना के अन्तिम प्रयास के रूप में श्रीकृष्ण को हस्तिनापुर भेजना निश्चित किया गया। जाने के पूर्व मैं, युधिष्ठिर, भीमसेन, नकुल. सहदेव और सात्यकि मंत्रणा के लिए श्रीकृष्ण के पास बैठे। महाराज युधिष्ठिर युद्ध के पक्ष में नहीं थे। शान्ति-स्थापना हेतु वे अपने आधे राज्य का त्याग […] Read more » Episodes of Mahabharata Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-५४ November 6, 2011 / December 5, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (संजय को श्रीकृष्ण और अर्जुन का उत्तर) विपिन किशोर सिन्हा श्रीकृष्ण हमारे लिए भगवान बन चुके थे। वे हमारे प्रत्येक कार्य के कारक और नियंत्रक की भूमिका में आ चुके थे। वे हम पांचो भ्राताओं और द्रौपदी के आत्मबल थे। संकट के समय लगता था, कृष्ण ही एकमात्र संबल हैं। संजय के कुटिल प्रस्ताव का […] Read more » episodes of mahabharta Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म कहो कौन्तेय-४९ (महाभारत पर आधारित उपन्यास अंश) October 31, 2011 / December 5, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment (द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा और कर्ण की पराजय) विपिन किशोर सिन्हा अब मेरे सामने लाल अश्वों से युक्त रथ पर आरूढ़ परमपूज्य गुरुवर द्रोणाचार्य थे। मैंने उनके रथ की परिक्रमा की, प्रणाम किया और सम्मुख उपस्थित हो निवेदन किया – “हे मेरे परमपूज्य गुरुवर! युद्ध में आप सदैव अजेय रहे हैं। आपको ज्ञात है कि दुर्योधन के […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
धर्म-अध्यात्म अटल आस्था का अनूठा पर्व छट पूजा October 30, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment नागमणि पाण्डेय छठ पूजा का प्रारंभ महाभारत काल में कुंती द्वारा सूर्य की आराधना व पुत्र कर्ण के जन्म के समय से माना जाता है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, […] Read more » festival अटल आस्था छट पूजा
धर्म-अध्यात्म माटी का दीया अब कहां झिलमिलाए! October 29, 2011 / December 5, 2011 by अखिलेश आर्येन्दु | Leave a Comment अखिलेश आर्येन्दु बचपन में हम सभी भार्इ माटी के दीये को दीपावली के दिन बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ जलाते थे। मां कहती थी माटी के दीये जलाने से ही लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। लेकिन इसके पीछे छिपे सामाजिकता और रोजगार को हमने नहीं समझा था। मां कहती थी, ‘दीया जलाते […] Read more » अब कहां झिलमिलाए! माटी का दीया
धर्म-अध्यात्म कुम्भ : परंपरा, इतिहास एंव वर्तमान October 29, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो विकास सिंघल कुम्भ शब्द का अर्थ ही होता है अमृत का घड़ा यानि ज्ञान का घड़ा और कुम्भ प्रथा से स्पष्ट अभिप्राय है , ज्ञान के घड़े का सदुपयोग. हमारा राष्ट्र भारत आदिकाल से ही संतो, ऋषियों और मुनियों की धरती रही है. इस देश की धरती ने कालिदास जैसे मूर्खो को भी ज्ञानी बनाया […] Read more » history present इतिहास एंव वर्तमान कुम्भ : परंपरा
धर्म-अध्यात्म प्रतिशोध की भावना सत्य से अलग करा देती है October 28, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on प्रतिशोध की भावना सत्य से अलग करा देती है संत श्री देवराहाशिवनाथदास भगवान के द्वारा प्राप्त हुई प्रसाद का सदुपयोग न करने से जीव महापाप का भागी होता है। मनुष्य को प्रसाद रूप मे जो बुद्धि मिली है, वही तो भगवत् प्रसाद है। जिसको बुद्धि नहीं मिली है, वही तो भगवत् प्रसाद है। जिसको बुद्धि नहीं मिली है उसको भगवत कृपा से दूर समझें। […] Read more » truth प्रतिशोध की भावना संत श्री देवराहाशिवनाथदास
धर्म-अध्यात्म भगवान धनवंतरी व यम पूजन का दिन धनतेरस October 28, 2011 / December 5, 2011 by श्याम नारायण रंगा | Leave a Comment श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्य आज धनतेरस हैं। पांच दिन के दिपोत्सव का आगाज धनतेरस से ही होता है। हिन्दू पंचाग के अनुसार कार्तिक बदी तेरस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। आज का दिन आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धनवंतरी का जन्मदिन है इस कारण यह दिन धनवंतरी जयंति के रूप में मनाया जाता […] Read more » Dhanteras God भगवान धनवंतरी यम पूजन का दिन धनतेरस
धर्म-अध्यात्म ‘श्री लक्ष्मी’ का पौराणिक एवं वैश्विक स्वरूप October 27, 2011 / December 5, 2011 by राजेश कश्यप | 1 Comment on ‘श्री लक्ष्मी’ का पौराणिक एवं वैश्विक स्वरूप राजेश कश्यप प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को श्री लक्ष्मी पूजन के रूप मे दीपोत्सव अर्थात् दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन की बड़ी अपार महता है। यूं तो यह पर्व मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के चौदह वर्ष वनवास पूरा करके वापिस अयोध्या में लौटने की खुशी में मनाया जाता है। लेकिन, इसके […] Read more » ‘श्री लक्ष्मी’ global nature पौराणिक वैश्विक स्वरूप