धर्म-अध्यात्म स्वास्थ्य-योग बाबा रामदेव की इमेजों का जादू October 27, 2010 / December 20, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 20 Comments on बाबा रामदेव की इमेजों का जादू -जगदीश्वर चतुर्वेदी टेलीविजन युग की यह खूबी है कि जो टीवी पर्दे पर दिखता है वही सत्य है। जो पर्दे पर नहीं दिखता उसका अस्तित्व भी दर्शक मानने को तैयार नहीं होते। इस तरह के दर्शकों की अनेक प्रतिक्रियाएं मेरे बाबा रामदेव पर केन्द्रित लेखों पर सामने आयी हैं। वे टेलीविजन निर्मित यथार्थ और प्रचार […] Read more » Baba Ramdev बाबा रामदेव
धर्म-अध्यात्म संतों महंतों के ट्रस्टों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए October 26, 2010 / December 20, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 22 Comments on संतों महंतों के ट्रस्टों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए -जगदीश्वर चतुर्वेदी ‘योगसूत्र’ में योग के क्रियात्मक पक्ष की चर्चा की गई है। यह यौगिक क्रिया ध्यान लगाने की औपचारिक कला, मानव का आंतरिक स्थिति में परिवर्तन लाने, और मानव चेतना को पूर्ण रूप से अंतर्मुखी बनाने से संबद्ध थीं। ए.ई.गौफ ने ‘फिलासफी ऑफ दि उपनिषदाज’(1882) में लिखा है कि योग का आदिम समाजों, खासकर […] Read more » Public property संतों की सार्वजनिक संपत्ति
धर्म-अध्यात्म स्वास्थ्य-योग समाज को सभ्य बना रहे हैं बाबा रामदेव October 23, 2010 / December 20, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 21 Comments on समाज को सभ्य बना रहे हैं बाबा रामदेव -जगदीश्वर चतुर्वेदी बाबा रामदेव फिनोमिना मध्यवर्गीय घरों में घुस आया है। बाबा के सिखाए योगासन के अलावा उनकी बनाई वस्तुओं का भी बड़े पैमाने पर घरों में सेवन हो रहा है। देशी बाजार की उन्नति के लिहाज से यह अच्छा है। बाबा रामदेव को लेकर मुझे कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। वे बहुत ही अच्छे […] Read more » Baba Ramdev बाबा रामदेव
धर्म-अध्यात्म ऋग्वेद प्राचीन भारतीय समाज का गीत दर्पण October 18, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment – हृदयनारायण दीक्षित सभी जीवधारी शरीर और प्राण का संयोग हैं। लेकिन मनुष्य विशिष्ट है। मनुष्य जिज्ञासु है। बाकी प्राणी शारीरिक जरूरतों में सीमित हैं। जिज्ञासा की प्यास मनुष्य को प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है। जिज्ञासा जानकारी की इच्छा है। दुनिया के सभी भूखंडों के मनुष्य में जिज्ञासा थी लेकिन इसका प्रामाणिक इतिहास नहीं मिलता। […] Read more » Indian ऋग्वेद
धर्म-अध्यात्म सांप्रदायिक एवं सामाजिक सौहार्द्र का प्रतीक बना विश्व का सबसे ऊंचा रावण October 18, 2010 / December 20, 2011 by तनवीर जाफरी | 2 Comments on सांप्रदायिक एवं सामाजिक सौहार्द्र का प्रतीक बना विश्व का सबसे ऊंचा रावण -तनवीर ज़ाफरी दशहरा पर्व केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। राजा दशरथ पुत्र मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम के जीवन की प्रमुख घटनाओं का मंचन इस पर्व के दौरान रामलीला के रूप में किया जाता है। विशेष कर इस दौरान अपने भाई भरत को […] Read more » Dussehra दशहरा
धर्म-अध्यात्म भारतीय सभ्यता का परमानंद है दुर्गापूजा October 15, 2010 / December 21, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment -जगदीश्वर चतुर्वेदी आज दुर्गा अष्टमी है और पश्चिम बंगाल का माहौल एकदम भिन्न है। समूचा प्रांत दुर्गा में डूबा है। जगह-जगह मंडपों में लाखों लोगों की भीड़ लगी है। लोगों की उत्सवधर्मिता का आलम यह है कि कल शाम को अचानक तेज बारिश हो गयी तो कुछ देर के लिए लगा कि अब लोग नहीं […] Read more » Indian Culture दुर्गापूजा
धर्म-अध्यात्म वैदिक सिंधु – सरस्वती सभ्यता October 15, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on वैदिक सिंधु – सरस्वती सभ्यता – कृष्णनारायण पांडेय सिंधु, सरस्वती, गंगा तथा नर्मदा नदियों के क्षेत्र में हड़प्पा, मोहेनजोदड़ो में प्राप्त पुरातात्विक सामग्री के विस्तार से इस क्षेत्र में वैदिक प्रकृति पूजा की संस्कृति दृश्यमान है। 84 लाख योनियों के जीवों से अलग मनुष्य की जाति एक ही होती है अतः विश्व की सभी सभ्यताएं आर्य-अनार्य न होकर ‘मानव संस्कृति’ […] Read more » Vaidic hindu वैदिक सिंधु सरस्वती सभ्यता
धर्म-अध्यात्म भारत का योग दर्शन October 15, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment – बजरंगलाल अत्रि दर्शनशास्त्र में योगदर्शन का विशेष महत्व है। इसीलिए भारतीय या वैदेशिक अथवा आस्तिक या नास्तिक समस्त दार्शनिक संप्रदाय किसी न किसी रूप में योग साधना करते हैं। इसका कारण है कि योगसाधना समस्त दर्शनों और विशेषकर सांख्यदर्शन का व्यवहारिक पक्ष है। योग दर्शन और साधना उतनी ही पुरानी है जितनी पुरानी मानव […] Read more » Yog योग
धर्म-अध्यात्म यह आस्था बनाम कानून नहीं, यह कानून द्वारा आस्था का अनुमोदन है October 6, 2010 / December 21, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | 8 Comments on यह आस्था बनाम कानून नहीं, यह कानून द्वारा आस्था का अनुमोदन है -लालकृष्ण आडवाणी मैंने अपने जीवन के शुरु के बीस वर्ष कराची में बिताए। इस दौरान मैं दो ही भाषाओं को जानता था एक मेरी मातृभाषा सिंधी और दूसरी अंग्रेजी, जिसमें मेरी पढ़ाई हुई। फिल्मों के प्रति मेरे शौक के चलते मैं हिंदी कुछ-कुछ समझ लेता था और टूटी-फूटी बोल भी लेता था लेकिन मैं हिन्दी […] Read more » Ram Birthplace श्रीरामजन्मभूमि
धर्म-अध्यात्म डा. डेविड फ्रॉले उर्फ वामदेव शास्त्री October 6, 2010 / December 21, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | 1 Comment on डा. डेविड फ्रॉले उर्फ वामदेव शास्त्री -लालकृष्ण आडवाणी गत् सप्ताह मुझे योग और आयुर्वेद के विशेषज्ञ एक महान वैदिक विद्वान जो वर्तमान में न्यू मैक्सिको के सांटा फे स्थित अमेरिकन इंस्टीटयूट ऑफ वैदिक स्टडीज के प्रमुख हैं, से मिलने का सुअवसर मिला। यह वेदाचार्य डेविड फ्रॉले के रुप में जन्मे परन्तु हिन्दू धर्म के प्रति उनके आकर्षण से वह वामदेव शास्त्री […] Read more » Vamed Shastri डा. डेविड फ्रॉले वामदेव शास्त्री
धर्म-अध्यात्म ‘हम राम मंदिर बनाने के बहाने फंडामेंटलिज्म के मार्ग पर चल पड़े हैं’ October 4, 2010 / December 21, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 26 Comments on ‘हम राम मंदिर बनाने के बहाने फंडामेंटलिज्म के मार्ग पर चल पड़े हैं’ -जगदीश्वर चतुर्वेदी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बैंच का जब से फैसला आया है। रामभक्त अब लखनऊ बैंच के भक्त हो गए हैं। मैं उन्हें लखनऊभक्त के रूप में ही चिह्नित करूँगा। वे लखनऊ बैंच के जजमेंट को यूनीवर्सल बनाने में लगे हैं। आस्था के सिद्धांत को कानून का सिद्धांत बनाना चाहते हैं। यह लखनवी […] Read more » Ayodhya Movement अयोध्या आंदोलन श्रीरामजन्मभूमि
धर्म-अध्यात्म मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना October 4, 2010 / December 21, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 4 Comments on मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना -फ़िरदौस ख़ान मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन है, हिन्दोस्तां हमारा… हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए सबसे बड़ा कलंक हैं, और जब यह दंगों के रूप में सामने आती है तो इसका रूप और भी भयंकर हो जाता है। दंगे सिर्फ जान और माल का ही नुक़सान नहीं […] Read more » Violence मजहब हिंसा