पर्यावरण आपदा प्रबंधन की मिसाल October 22, 2013 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on आपदा प्रबंधन की मिसाल प्रमोद भार्गव मौसम विभाग की सटीक भविष्यवाणी और आपदा प्रबंधन के समन्वित प्रयासों के चलते फेलिन चक्रवात बड़ी जनहानि का कारण नहीं बन पाया। इस परिप्रेक्ष्य में हमारी तमाम एजेंसियों ने आपदा से कुशलतापूर्वक सामना करके एक भरोसेमंद मिसाल पेश की है, जो सारहनीय व अनुकरीय है। ओड़ीशा और आंध्रप्रदेश के लोग तूफान की खबर […] Read more » फेलिन
पर्यावरण फेलिन: अभी एक परीक्षा और बाकी है.. October 14, 2013 / October 14, 2013 by अरुण कान्त शुक्ला | Leave a Comment हमेशा कुप्रबंधन, संवेदनहीनता, लापरवाही और अदूरदर्शिता के लिए विरोधियों से आलोचना और झाड़ खाने वाली सरकारों ने इस बार जिस तरह समुद्री चक्रवात से लाखों लोगों की जिंदगियां बचाईं, उसके लिए ओड़िसा तथा आंध्र की राज्य सरकारों के साथ साथ आपदा प्रबंधन में पूर्ण सतर्कता बरतने के लिए केंद्र सरकार की भी प्रशंसा की जानी […] Read more » फेलिन
पर्यावरण पर्यावरण सन्तुलन के लिए गाय आवश्यक September 28, 2013 / April 9, 2014 by राकेश कुमार आर्य | 9 Comments on पर्यावरण सन्तुलन के लिए गाय आवश्यक राकेश कुमार आर्य गौवध निषेध पर संविधान सभा में बड़ी रोचक बहस हुई थी। पूर्वी पंजाब के जनरल पंडित ठाकुरदास भार्गव, सेठ गोविंददास, प्रो. छिब्बनलाल सक्सेना, डा. रघुवीर (सी.पी. बेरार : जनरल) मि. आर.बी. धुलिकर, मि. जैड, एच. लारी (यूनाईटेड प्रोविन्स मुस्लिम सदस्य) तथा असम से मुस्लिम सदस्य रहे सैय्यद मुहम्मद सैदुल्ला सहित कई विद्वान […] Read more » पर्यावरण सन्तुलन के लिए गाय आवश्यक
पर्यावरण राजनीति विज्ञान परमाणु दायित्व कानून से खिलवाड़ September 27, 2013 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक केंद्र की यूपीए सरकार देश की सुरक्षा के साथ किस तरह खिलवाड़ करती है परमाणु दायित्व कानून पर उसके लचर रुख से स्वत: स्पष्ट हो जाता है। अगर यह सच है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमेरिकी दौरे में अमेरिका के साथ परमाणु करार तय भारतीय कानून के अनुरुप नहीं होगा तो यह […] Read more » परमाणु दायित्व कानून से खिलवाड़-
टॉप स्टोरी पर्यावरण कुरान या बाइबल में गोमांस खाने का आदेश नही दिया गया August 8, 2013 / August 8, 2013 by गिरीश जुयाल | 1 Comment on कुरान या बाइबल में गोमांस खाने का आदेश नही दिया गया गिरीश जुयाल गोवा गोमांस मांग रहा है। पशुओं के वध पर अदालत की सख्ती के बाद गोवा के चर्च ने सरकार से ईसाइयों और मुस्लिमों के लिए गोमांस की जरुरी व्यवस्था करने की मांग की है। चर्च ने गोमांस को लेकर अदालत द्वारा लगाई गई कठोर पाबंदियों को अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताते […] Read more » कुरान या बाइबल में गोमांस खाने का आदेश नही दिया गया
पर्यावरण ज़हरीला पानी गांव को बना रहा है विकलांग July 16, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment सूर्याकांत देवांगन एक पल के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि जो पानी हमें जीवन प्रदान करता है वह कभी किसी को इस तरह असहाय बना दे कि अपनी सारी जिंदगी विकलांग के रूप में काटने को मजबूर हो जाए। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला स्थित रामानुजनगर विकासखंड़ के हनुमानगढ़ में यही देखने को मिल […] Read more »
पर्यावरण ‘‘प्रकृति का प्रतिशोध है या मौत की बारिश’’ June 28, 2013 / June 28, 2013 by विजन कुमार पाण्डेय | 1 Comment on ‘‘प्रकृति का प्रतिशोध है या मौत की बारिश’’ भगवान भोले नाथ बड़े भोले हैं, लेकिन जब उनका गुस्सा फूटता है तो सर्वनाश होता है। देवभूमि उत्तराखंड में आई भयंकर प्राकृतिक आपदा को इसी गुस्से के प्रतीक रूप में देखने की जरूरत है। यह भूक्षेत्र प्राकृतिक संपदा से भरा पड़ा है। लेकिन जिस प्रकार से उत्तराखंड विकास की अग्रिमपंति में आ खड़ा हुआ था। […] Read more » ‘‘प्रकृति का प्रतिशोध है या मौत की बारिश’’
पर्यावरण प्राकृतिक आपदा ऐसे ही नहीं आती June 26, 2013 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on प्राकृतिक आपदा ऐसे ही नहीं आती विपिन जोशी, उत्तराखंड उत्तराखंड में बीते सप्ताह कुदरत का जो क़हर टूटा उसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। तबाही का ऐसा खौ़फनाक मंजर पहले नहीं देखा गया। हांलाकि 1970 में चमोली जिले में गौनाताल में बादल के फटने से डरावने हालात बन गये थे, लेकिन इस प्रकार की क्षति नहीं हुई थी क्योंकि […] Read more »
पर्यावरण उत्तराखण्ड में हाहाकार ..!.कौन है इसका जिम्मेदार …? कौन सुनेगा पीड़ितों की पुकार …? June 24, 2013 by श्रीराम तिवारी | 4 Comments on उत्तराखण्ड में हाहाकार ..!.कौन है इसका जिम्मेदार …? कौन सुनेगा पीड़ितों की पुकार …? आदिकाल या पाषाण युग या हिमयुग से या सभ्यता के उदयकाल से ही जिसने-आग, हवा , पानी, आकाश और बुद्धि की प्रबलता को स्वीकार किया था वो ‘मानव’ ‘इंसान’- जगतीतल के समस्त प्राणियों में सबसे चालाक और मेधा शक्तिसंपन्न होने से प्रकृति का सबसे बड़ा दोहनकर्ता , उपभोगकर्ता एवं विनाशकर्ता था , उसीने गाँव ,नगर […] Read more » उत्तराखण्ड में हाहाकार ..!.कौन है इसका जिम्मेदार ...? कौन सुनेगा पीड़ितों की पुकार ...?
पर्यावरण आधुनिक विकास की देन है, देवभूमि आपदा June 22, 2013 / June 22, 2013 by प्रमोद भार्गव | 5 Comments on आधुनिक विकास की देन है, देवभूमि आपदा भगवान भोले नाथ का गुस्सा,प्रतीक रूप में मौत के ताण्डव नृत्य में फूटता है। देवभूमि उत्तराखंड में आई भयंकर प्राकृतिक आपदा को इसी गुस्से के प्रतीक रूप में देखने की जरूरत है। इस भूक्षेत्र के गर्भ में समाई प्राकृतिक संपदा के जिस दोहन से उत्तराखंड विकास की अंग्रिम पांत में आ खड़ा हुआ था,वह विकास […] Read more » आधुनिक विकास की देन है देवभूमि आपदा
पर्यावरण प्रकृति के प्रहार को जरा समझिए June 22, 2013 by अरविंद जयतिलक | 4 Comments on प्रकृति के प्रहार को जरा समझिए उत्तराखंड में कुदरत का कहर प्रकृति से खिलवाड़ का नतीजा है। वनों की अंधाधुंध कटाई और नदियों के कोख को लहूलुहान करने का घातक परिणाम है। इस प्रतिकार ने देवभूमि उत्तराखंड समेत समूचे मानवता को हिलाकर रख दिया है। कुदरत के कहर से रामबाड़ा और गौरीकुंड का अस्तित्व मिट गया है। हजारों साल पुराना केदारनाथ […] Read more » प्रकृति के प्रहार को जरा समझिए
पर्यावरण भूमंडल का बढ़ता तापमान और हम June 20, 2013 by निर्मल रानी | Leave a Comment पूरे विश्व में जि़म्मेदार लोग विशेषकर वैज्ञानिक वर्ग इस बात को लेकर गत एक दशक से बेहद चिंतित दिखाई दे रहे हैं कि पृथ्वी का तापमान अर्थात् ग्लोबल वॉर्मिंग में दिनोंदिन इज़ाफ़ा होता जा रहा है। वैज्ञानिकों की चेतावनी तथा उनकी भविष्यवाणी के अनुसार इस भूमंडल के बढ़ते तापमान के दुष्परिणाम भी तेज़ी से सामने […] Read more » भूमंडल का बढ़ता तापमान और हम