कविता एक विरहणी के अंगो का हाल June 20, 2018 / June 20, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी मस्तिष्क अब घूम रहा है, हर तरफ तुझ को ढूंढ रहा है क्यों ये चक्कर काट रहा है ,तेरे से क्या ये मांग रहा है आँखे भी अब बरस रही है,तेरे दर्शन को तरस रही है पलके भी अब भीग रही है,तेरे रूमाल को तरस रही है गेसू भी ये बिखरे […] Read more » “आँखे एक विरहणी के अंगो का हाल गोरे गाल लाल दांत भी सर्दी माथे की बिंदिया
कविता कितना प्यार करती हूँ तुमको June 19, 2018 / June 19, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कितना प्यार करती हूँ तुमको शायद तुम ये जानते नहीं दूर रहकर भी कितने पास हूँ क्यों तुम ये मानते नहीं ? तुम मेरे सूर्य देव हो,मै किरण हूँ तुम्हारी दिन निकलते ही साथ चलती हूँ तुम्हारे सुबह जो सुनते हो पक्षियों की चहचहाट मै ही तो गुनगुनाती हूँ कान में तुम्हारे उपवन में जो […] Read more » आगमन कितना प्यार करती हूँ तुमको पश्चिम मंद समीर
कविता समाज अस्तित्व June 19, 2018 / June 25, 2018 by डॉ छन्दा बैनर्जी | Leave a Comment डॉ. छन्दा बैनर्जी मैं एक फोटो फीचर जर्नलिस्ट हूँ । शहर के सांस्कृतिक गतिविधियों से सम्बन्धित फीचर तैयार करता हूँ । साधारणतया ऐसे कार्यक्रम जहाँ किसी महापुरुष की जन्म शताब्दी समारोह हो या कोई दिवस विशेष पर मनाया जाने वाला वार्षिकी समारोह, सहसा मुझे आकर्षित नहीं कर पाते । चूँकि मीडिया के प्रोफेशन में हूँ […] Read more » अस्तित्व आकाशवाणी उपन्यास फीचर जर्नलिस्ट
कविता कब तक शहादत देते रहेगे हम,अपने वीर जवानो की June 17, 2018 / June 17, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कब तक शहादत देते रहेंगे हम अपने वीर जवानो की उठो जवानो अब देर करो मत,कसम तुम्हे अपनी जवानी की काट लाओ धड सहित सर अब उन आंतकवादियों शैतानो की सबक सिखा तो अब उनको तुम,उनके किये हुये कारनामो की कब तक भारत माँ अपने सपूतो का शीश चढाती जायेगी कब तक दुल्हने अपनी मांग […] Read more » अपने वीर जवानो की आंतकवादियों कब तक शहादत देते रहेगे हम पाकिस्तान लाहौर
कविता सोशल मीडिया का असर June 15, 2018 / June 15, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment शेयर कर लेते है,सारी दुनिया को सोशल मीडिया के द्वारा शेयर नहीं कर पाते माँ-बाप से जिन्होंने दुनिया में उतारा माफ़ कर देते है माँ-बाप,अपने बच्चों को,जो गलती करते बार बार पर बच्चे माफ़ नहीं करते,माँ-बाप को जो गलती करते है एक बार ये कैसे सोशल मीडिया है,जो अपनों से रहते है हम दूर अपने […] Read more » कुल्हाड़ी मार नमक छिडक माँ-बाप सोशल मीडिया का असर
कविता इफ्तार पार्टी तो बहाना है,हमे तो महागठबंधन बुलाना है June 14, 2018 / June 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment इफ्तार पार्टी करना तो केवल एक बहाना है इस बहाने तो महागठबंधन को बुलाना है बुलाया है उन नेताओ को जो रोजा नहीं रखते रोजा बिना रखे टोपी पहन कर मुसलमान बनते अगर ये सर्व धर्म समान है और धर्मो को क्यों नहीं बुलाते ? भारत में जैन,सिख,बोध धर्म भी है उनको क्यों नहीं बुलाते […] Read more » इफ्तार पार्टी जैन बहाना है बोध धर्म विपक्ष सिख हमे तो महागठबंधन बुलाना है
कविता मोदी के मन की बात -तुम मुझे हटा ना पाओगे June 13, 2018 / June 13, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम मुझे हरा ना पाओगे तुम मुझे हटा ना पाओगे महागठबंधन बनाया है तुमने सबको बुलाया है तुमने सबको मिलाया है तुमने मिलाकर भी ना मिला पाओगे तुम मुझे हरा ना पाओगे तुम मुझे हटा ना पाओगे घर-बार छोड़ दिया देश के लिये पत्नि छोड़ दी राष्ट्र हित के लिये लगा हूँ देश के विकास […] Read more » तुम मुझे हटा ना पाओगे तुम मुझे हरा ना पाओगे मोदी के मन की बात - मोदी बोले राहुल बोला
कविता प्रकाश धरा आ नज़र आता June 12, 2018 / June 12, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment गोपाल बघेल ‘मधु’ प्रकाश धरा आ नज़र आता, अंधेरा छाया आसमान होता; रात्रि में चमकता शहर होता, धीर आकाश कुछ है कब कहता ! गहरा गहमा प्रचुर गगन होता, गुणों से परे गमन वह करता; निर्गुणी लगता पर द्रढी होता, कड़ी हर जोड़ता वही चलता ! दूरियाँ शून्य में हैं घट जातीं, विपद बाधाएँ व्यथा ना देतीं; घटाएँ राह से हैं छट जातीं, रहनुमा कितने वहाँ मिलवातीं ! भूमि गोदी में जब लिये चलती, तब भी टकराव कहाँ करवाती; ठहर ना पाती चले नित चलती, फिर भी आभास कहाँ करवाती ! संभाले सृष्टा सब ही करवाते, समझ फिर भी हैं हम कहाँ पाते; हज़म ‘मधु’ अहं को हैं जब करते, द्वार कितने हैं चक्र खुलवाते ! Read more » आ नज़र आता आकाश प्रकाश धरा भूमि गोदी
कविता सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है June 12, 2018 / June 12, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कलयुग में सब बदलने लगे है सूरज,चाँद भी बदलने लगे है ये भी अब मजे लेने लगे है अपनी आदत बदलने लगे है इंसान की तरह बदलने लगे है एक दूजे को धोखा देने लगे है “सूरज” की जरा असलियत तो देखो, सुबह सैर को निकलता है “किरन” के साथ दोपहर को रहता है “रौशनी” […] Read more » कलयुग चाँद सूरज सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है
कविता आज भी तरसते है हम उन सब लम्हों के लिये June 11, 2018 / June 11, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कुछ लम्हें आये जिन्दगी में,कुछ लम्हों के लिये आज भी तरसते है हम,उन सब लम्हों के लिये ख़ुदा ने हमसे कहा,कुछ तो मांग लो मुझ से मैंने कहा,बिताये लम्हें दे दो,कुछ लम्हों के लिये मेरे मुक्कदर में आये थे आप,कुछ लम्हो के लिये मैं सारी रात रोई, बिताये हुये उन लम्हों के लिये आते नहीं […] Read more » आज भी तरसते है ख़ुदा ने हमसे जिन्दगी तरस मेरे मुक्कदर हम उन सब लम्हों के लिये
कविता रावण के मन की पीड़ा June 5, 2018 / June 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम मुझे यू ना जला पाओगे तुम मुझे यू भुला ना पाओगे तुम मुझे हर साल जलाओगे मार कर भी तुम ना मार पाओगे जली लंका मेरी,जला मैं भी तुम भी एक दिन जला दिए जाओगे मैंने सीता हरी,हरि के लिये राक्षस कुल की बेहतरी के लिये मैंने प्रभु को रुलाया वन वन में तुम […] Read more » नगर में नारी नारी का मरण प्रभु को रुला राम से युद्ध रावण के मन की पीड़ा
कविता तुलसी को मिली पत्नि फटकार June 5, 2018 / June 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुलसी को मिली पत्नि फटकार छोड़ दिया था उसने घरवार लिख दिया था ग्रन्थ महान तुलसी बने एक कवि महान पत्नि छोड़ भागे जो लोग वही बने विद्वान व भगवान गौतम बुद्ध महावीर स्वामी पत्नि छोड़ थे बने भगवान् पत्नि छोड़ भागे जो मोदी आज बने है वे देश प्रधान अडवाणी छोड़ न सके पत्नि […] Read more » गौतम बुद्ध तुलसी को मिली पत्नि फटकार पत्नि छोड़ पार्टी प्रधान महावीर स्वामी