कविता माँझी February 26, 2024 / February 26, 2024 by श्लोक कुमार | Leave a Comment ले चल कश्तीबान उस पारहै दरिया एक आधारसमंदर की तरंगे रहे पुकारले चल कश्तीबान उस पारबीच समंदर में लगता त्रास बार-बारखेता चल कश्ती मेरे यारबारिश की बूंदे रहे पुकारचंचला बुला रही शैतानले चल कश्तीबान उस पारतम बनता जा रहा मेरे आखिर का आधारकश्ती की शिकस्त रूप, बताता उसकी कैफियतदेख समंदर का नैराश्य, करता कश्ती का […] Read more » माँझी
कविता वही तो ईश्वर है February 22, 2024 / February 22, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायकआना जाना जिसपर निर्भरवही तो ईश्वर हैअमर होने की सबकी तमन्नापर निश्चित जहाँ मृत्यु डरवही तो ईश्वर हैजन्म देनेवाली जोड़ी जो चाहतीवो नहीं हो पाताचाह नहीं पर जो हो जातावही तो ईश्वर हैआनेवाला जो चाहता वो नहीं होताजो नहीं चाहता वो हो जातावही तो ईश्वर हैतुम चाहते बेटापर वो आ जाती बेटी बनकरवही […] Read more » वही तो ईश्वर है
कविता फूलों जैसी कली है बेटी February 17, 2024 / February 17, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment प्रियंका कोशियारी कपकोट, उत्तराखंड फूलों जैसी कली है बेटी। तितली जैसी उड़ान है उसकी। कर सकती है वो भी सबकुछ। अपने पिता की शान है वो। मेहंदी के रंग के बदले। हाथों में होगी कलम उसके।। ना बांधो यूं ज़ंजीरों में उसको। तोड़ दो सारे बंधन उसके।। साक्षरता का दीप जलाकर। अंधियारा वह दूर भगाएगी।। न […] Read more » फूलों जैसी कली है बेटी
कविता वे दिन थे मेरे लिए बेहद खास February 17, 2024 / February 17, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment करीना थायत कक्षा-9 गरुड़, उत्तराखंड वे भी दिन थे मेरे लिए बेहद खास। जब खेलने का था मुझको अहसास।। अब तो जिंदगी से है यही आस। दोबारा खेलने का मौका आए मेरे पास।। न थी चिंता, न थी कोई फिक्र। बस याद आ रहे हैं खेलकूद के दिन। जब खेलते हैं बच्चे सारे दिन। याद […] Read more » Those days were very special for me
कविता आँसू February 12, 2024 / February 12, 2024 by श्लोक कुमार | Leave a Comment तसव्वुर सा सराय मेंरा बना कब्रअश्क बन गए बरखाउर की बेकरारी बना टेकये बिनाई भी परवश बिन तुम्हारेअश्क से व्रण को भर रहादेखकर तुम्हे यू निष्प्राणखुद का वजूद ख़त्म कर रहासमंदर सूखा , अश्क भी सूख गएन जाने कैसी इश्क लगाईहर लफ्ज़ में तुम्हारे वियोग ही आईऊषा तम सा लग रहा हैंकालिख बनी हया मेरीअहोरात्र […] Read more » अपराध पर घड़ियाली - आँसू
कविता हे राम तुम सृष्टि के पहले करुणाकर हो February 7, 2024 / February 7, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक हे राम तुम सृष्टि के पहले करुणाकर हो तुम्हारे समय में एक बर्बर डाकू रत्नाकर थे तुमने ही उनके दिल में करुणा जगाई हे प्रभु तुम्हारे आने से करुणा जग में आई तुमने ही जग में रिश्ते की मर्यादा लाई हे प्रभु तुम कितने अच्छे हो हमें अच्छा बना दो हममें नहीं […] Read more » O Ram you are the first compassionate one of the universe.
कविता जब रावण ब्राह्मण था तो उनका भांजा शंबूक शूद्र कैसे? February 6, 2024 / February 6, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक बहुजन सवर्ण की राजनीति करनेवाले जातिवादियों कहो जब रावण ब्राह्मण था तो उनका भांजा शंबूक शूद्र कैसे? पेड़ से उलटा लटककर भला कौन महामानव तप करते? भला ऐसे ऊट-पटांग तप से किसी विप्र के बालक मरते? सच्चाई यह है कि राम के समय में जाति नहीं बनी थी सूर्य चन्द्र जड़ चेतन […] Read more » When Ravana was a Brahmin then how could his nephew Shambuk be a Shudra?
कविता आया वसंत February 5, 2024 / February 5, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है आया…!मंजरियां खिल रही हैंआम्र टहनियां हैं झूम रहींभ्रमरों और मधुमक्खियों का गुंजन हैतितलियां फूलों के रसास्वादन में मशगूल हैं। ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है आया…!मृदु कोमल कच्चे वृंत इठलायेबावली, मस्तमौला हवाएंझूम रहीं हैं आज फिजाएंधूप बिछ रही है मैदानों, पठारों और पहाड़ों में। ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है आया…!गेहूं,चना और […] Read more » spring has come
कविता मणिपुर ए छीजन February 1, 2024 / February 1, 2024 by श्लोक कुमार | Leave a Comment नारी का विशेष स्थानयदि ऐसा नहीं तो नही उत्थानयुगों – युगांतर से हम सब ने यह जानानारी ही वीरता की मूरत मानानारी अबला नहीं सबलाअबला अक्स का ध्वंस कर बनी वीर बालासबला की गाथा , सुने ये इहलोक वालाऐसी उत्कृष्टता, ऐसी वीरता लागे मधुबनशालाउस रात कहां तुम सोये थेजिस रात्रि मैं रोई थीकोई नही बचाने […] Read more » मणिपुर ए छीजन
कविता सबको खुश रखने के बजाए सबके साथ खुश रहना February 1, 2024 / February 1, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक अगर जीना है तो सबको खुश रखने के बजाए सबके साथ खुश रहना होगा माना जीवन एक नाटक है स्वाभाविक है जीवन में नाटक हो जाना मगर बुरा तब होता जब जैसा तब तैसा खुद को नहीं दिखने देना जिसके साथ रिश्ते में बंध गए उसके साथ चाहिए हमेशा सामंजस्य बिठाना कलह […] Read more » सबको खुश रखने के बजाए सबके साथ खुश रहना
कविता मंत्र है, साक्षात शिवशक्ति February 1, 2024 / February 1, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव हमारा देश अनादिकाल से ज्ञान-विज्ञान की गवेषणा, अनुशीलन एवं अनुसंधान का प्रमुख केन्द्र रहा है जिसमें विद्या की विभिन्न शाखाओं में हमारे ऋषिमुनियों-ज्ञानियों ने धर्म दर्शन, व्याकरण, साहित्य, न्याय, गणित ज्योतिष सहित अनेक साधनाओं का प्रस्फुटन किया है जिनमें मंत्र, तंत्र और यंत्र का भी […] Read more » The mantra is Shiva Shakti in person
कविता हम जो छले, छलते ही गये January 25, 2024 / January 25, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment 15 अगस्त की वह सुबह तो आयी थीजब विदेशी आक्रांताओं से हमेंशेष भारत की बागड़ोर मिलीहम गुलाम थे, आजाद हुयेआजादी के समय भी हम छले गये थेआज भी हम अपनों के हाथों छले जा रहे है।भले आज हम आजादी में साँसे ले रहे हैपर यह कैसी आधी अधूरी आजादी ?पहले अंगे्रेजों के जड़ाऊ महल बनाते […] Read more » We who were deceived continued to be deceived.