कविता कक्षा अध्यापक September 5, 2014 / September 5, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on कक्षा अध्यापक भारतेंदु मिश्र- -शिक्षक दिवस की पूर्व सन्ध्या पर शिक्षक बन्धुओं के लिए एक गीत- मेरी कक्षा में पढ़ते हैं बच्चे पूरे साठ मेरे लिए सभी बच्चे हैं नई तरह के पाठ। कुछ पाठों में भावसाम्य है कुछ पाठों में कठिनाई है एक पाठ बिल्कुल सीधा है एक पाठ बिल्कुल उलझा है इनमें कुछ सीधे […] Read more » कक्षा अध्यापक शिक्षक दिवस
कविता मेरा मौन September 4, 2014 / September 4, 2014 by के.डी. चारण | 4 Comments on मेरा मौन के.डी. चारण मुझमें एक मौन मचलता है, भावों में आवारा घुलकर मस्त डोलता है, मुझमें एक मौन मचलता है। शिशुओं की करतल चालों में, आवारा यौवन सालों में, मदिरा के उन्मत प्यालों में, बुढ्ढे काका के गालों में, रोज बिलखता है। मुझमें एक मौन मचलता है। लैला मज़नू की गल्पें सुनकर, औरों की आँँखों […] Read more » मेरा मौन
कविता हर रात August 31, 2014 / August 31, 2014 by रवि कुमार छवि | Leave a Comment -रवि कुमार छवि- वो हर रात मेरे साथ सोती है कभी तकिया बन कर तो कभी चादर बनकर वो मेरे बदन से ऐसी लिपटती मानो चंदन के पेड़ पर सांप वो कभी प्रेमिका बनती कभी माशूका कभी चकले की वो लड़की जिसके जिस्म को कईयों ने अपनी नज़र में तराशा उसकी शरारत सोने नहीं देती […] Read more » नींद नींद कविता हर रात
कविता मोबाइल से पानी August 30, 2014 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment -प्रभूदयाल श्रीवास्तव- मोबाइल से पानी मोबाइल का बटन दबा तो, लगा बरसने पानी। धरती पर आकर पानी ने, मस्ती की मनमानी| चाल बढ़ी जब मोबाइल पर, लगा झराझर झरने। नदी ताल पोखर झरने सब, लगे लबालब भरने। और तेज फिर और तेज से, चाल बढ़ाई जैसे। आसमान से लगे बरसने, जैसे तड़-तड़ पैसे। किंतु […] Read more » मोबाइल मोबाइल कविता मोबाइल से पानी
कविता जीवन का मोड़ August 28, 2014 by राघवेन्द्र कुमार 'राघव' | Leave a Comment –राघवेन्द्र कुमार “राघव”- ये जीवन का कौन सा मोड़ है, जहाँ मार्ग में ही ठहराव है। दिखते कुछ हैं करते कुछ हैं लोग, यहाँ तो हर दिल में ही दुराव है । किस पर ऐतबार करें किसे अपना कहें, हर अपने पराए हृदय में जहरीला भाव है । अपना ही अपने से ईर्ष्या रखता है, […] Read more » जीवन का मोड़ हिन्दी कविता
कविता इतना तो आसान नहीं August 27, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on इतना तो आसान नहीं -दीपक शर्मा ‘आज़ाद’- पंछियों के जैसे पर फैलाना, इतना तो आसान नहीं; खुले आसमान में मंजिल पा जाना, इतना तो आसान नहीं ; ( 1 ) मुझे सबने अपनी उम्मीद का एक जरिया माना है , सबकी निगाहों से छिप जाना, इतना तो आसान नहीं ; ( 2 ) सच पाने की जिद में आशियाँ […] Read more » इतना तो आसान नहीं हिन्दी कविता
कविता मैं जलता हिंदुस्तान हूं… August 21, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 9 Comments on मैं जलता हिंदुस्तान हूं… –कुलदीप प्रजापति- मैं जलता हिंदुस्तान हूं, लड़ता, झगता, उबलता, अंगारों सा सुलगता हुआ , फिर भी देश महान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं| आतंकवाद बना दामाद मेरा, भ्र्ष्टाचार ने चुराया चीर मेरा, हो रहा जो हर धमाका, चीर देता दिल मेरा, कहते हैं जब सोने की चिड़ियां, आंख मेरी रोती हैं, क्योंकि मेरी कुछ संतानें इस युग मैं भूखी सोती हैं, कई समस्याओं से झुन्झता मैं निर्बल-बलवान हूँ , मैं जलता हिंदुस्तान हूं| नारी की जहां होती हैं पूजा , अब वहां वह दर रही , लूट ना ले कोई भेड़िया , इस डर वो ना निकल रही , प्यार के स्थान पैर बाँट रहे अब गोलियां, कहाँ गई मेरे दो बेटों की, प्यार भरी बोलियां, जाति आरक्षण से टूटता और खोता अपना सम्मान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं| हैं बदलती रंग टोपियां , भाषा नहीं बदल रही , राजनीति एक की चड़थी, अब दलदल में वो बदल रही, मर्द अब मुर्दा बना बस खड़ा सब देखता , जिसके हाथों में है लाठी, दस की सौ में बेचता , हर समय, हर जगह झेलता अपमान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं| Read more » भारत मैं जलता हिंदुस्तान हूं हिन्दुस्तान
कविता कैसा वह नया ज़माना होगा August 21, 2014 by जावेद उस्मानी | 2 Comments on कैसा वह नया ज़माना होगा -जावेद उस्मानी- आओ देखें आने वाला अपना कल कितना सुहाना होगा। कैसा अपना जीवन होगा कैसा वह नया ज़माना होगा ! हर तरफ अजब धुंध होगी, अपना चेहरा अनजाना होगा सच और झठ को तोलने का , बस एक ही पैमाना होगा ! कहने को मेरी सूरत होगी मगर, अफसाना उनका होगा गीत कोई भी […] Read more » कविता कैसा वह नया ज़माना होगा हिन्दी कविता
कविता विधान सभा चुनाव August 20, 2014 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment -रवि श्रीवास्तव- राज्यों का विधान सभा चुनाव , देता है अब यही सुझाव, सोच समझ कर नेता चुनना , आगे को न तुम पछताव | चुनाव करीब आने पर देखो , बना रहे सब प्रोपोगंडा, जीत मिलेगी जैसे ही उनको ,सारा मामला होगा ठंडा। सभी पार्टियाँ को तो देखो , कर रहे इक दूसरे पर […] Read more » चुनाव कविता विधान सभा चुनाव व्यंग्य कविता
कविता ये जीवन का कौन सा मोड़ है August 19, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on ये जीवन का कौन सा मोड़ है -राघवेंद्र कुमार- जहां मार्ग में ही ठहराव है। दिखते कुछ हैं करते कुछ हैं, यहाँ तो हर दिल में ही दुराव है। किस पर ऐतबार करें किसे अपना कहें, हर अपने पराए हृदय में जहरीला भाव है। अपना ही अपने से ईर्ष्या रखता है, हर जगह अहम् का टकराव है । अरे “राघव” तू यहाँ […] Read more » जीवन जीवन के मोड़ ये जीवन का कौन सा मोड़ है
कविता पीड़ा August 19, 2014 by बीनू भटनागर | 1 Comment on पीड़ा -बीनू भटनागर- पीड़ा के खोल कर द्वार, बहने दो अंसुवन की धार। धैर्य के जब खुल गये बांध, पीड़ा ही पीड़ा रैन विहान। पीड़ा तन की हो या मन की, सुध ना रहती किसीभी पलकी। पीड़ा सहने की शक्ति भी, पीड़ा ही लेकर आती है, पीड़ा बिना कहे आ जाती, जाने को है बहुत सताती। […] Read more » पीड़ा हिन्दी कविता
कविता चक्र August 15, 2014 by बीनू भटनागर | 1 Comment on चक्र -बीनू भटनागर- प्रत्यूष काल, किरणों का जाल, सूर्योदय हो गया, क्षितिज भाल। तारे डूबे तो, सूर्य उगा, चंदा भी थक कर, विदा हुआ। पक्षियों का गान कहे हुआ विहान। नींद से उठकर, मिट गई थकान। उषा काल के , रवि को प्रणाम! मध्याह्न काल मे, सूर्य चढ़ा, ठीक गगन के बीच खड़ा, धरती का […] Read more » चक्र हिन्दी कविता