कविता संकल्प November 15, 2023 / November 14, 2023 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment दीपों के इस महा उत्सव में एक दीप कर्म-ज्योति का हम भी जलाएं। धरा के गहन तिमिर को हर लें हम स्वमेव दीपक बन जाएं।। भारत के नवोत्थान के प्रयत्नों में एक अमर प्रयत्न हम भी कर जाएं। उत्कृष्ट भारत के निर्माण में काम आए हम नींव के पत्थर बन जाएं।। नवयुग के इन निर्माणों […] Read more » Resolution
कविता अगर ब्राह्मणवाद बुरा है तो बहुजनवाद भला कैसे? November 9, 2023 / November 9, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ये कैसी है दोयम दर्जे की घृणित मानसिक प्रवृत्ति कि एक तरफ सीता राम को मान रहे काल्पनिक मगर राम द्वारा शूद्र शंबूक हत्या को वास्तविक! ये कैसी समाज को विभाजित करने की है दुर्नीति कि वाल्मीकीय रामायण को मिथ्या कथा समझते मगर पेरियार के सीता चरित्र हनन को सच कहते! अगर […] Read more » If Brahminism is bad then how can Bahujanism be good?
कविता हे वीणापाणि आज इतना तो कीजिये November 9, 2023 / November 9, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment हे वीणापाणि आज इतना तो कीजिये तेरी वंदना कर सकु मुझे दो क्षण तो दीजिये दो पुष्प चरणों में धरू इंतजाम ऐसा कीजिये अवशेष नही हो वंदना मेरी अर्चना पूरी कीजिये कभी दो पग चलकर,मैं मंदिर न तेरे आया दो नयनों की करुण व्यथा,मैं तुझे सुना न पाया अश्रु भरे इन नयनों की,लाज आज […] Read more » Hey Veenapani
कविता मनुष्य का ज्ञान हमेशा अपने माँ-पिता के ज्ञान से कम होता November 9, 2023 / November 9, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक मनुष्य का ज्ञान हमेशा अपने माँ-पिता के ज्ञान से कम होता मनुष्य उम्र के साथ-साथ आवश्यकतानुसार ज्ञान अर्जन संवर्धन करता ज्ञान न तो शत प्रतिशत अर्जित होता और न पूर्णतः संचित संवर्धित होता बल्कि समय के साथ ज्ञान विस्मृत होते जाता किन्तु ज्ञान अनुभव रुप में आजीवन स्मृत रहता मनुष्य सदा ज्ञान […] Read more »
कविता एक टीस अंतरमन में November 6, 2023 / November 6, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जब भी मेरे प्राणों में अवतरित होता है सत्यगीत देह वीणा बन जाती है, सत्य बन जाता है परमसंगीत। एक टीस सी उठती है हृदय में, किसी को मैं दिखला न सका जीवन सॉसों के बंधन पर, ह़दय के क्रंदन को मैं जान न सका। रिसता प्राणों से जो हरपल, जैसे टूट रहा सॉसों का […] Read more » एक टीस अंतरमन में
कविता प्रकृति के विरुद्ध आचरण ही मृत्यु का कारण होता November 6, 2023 / November 6, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक जीव जगत को चलानेवाला सातवें आसमान में बैठा कोई ईश्वर अल्लाह खुदा अवतार पैगम्बर नहीं होता, जो भी होता जन-जन कण-कण धरा-गगन में होता, प्रकृति के विरुद्ध आचरण ही मृत्यु का कारण होता! ये धरा जल पवन अगन गगन के मिलन से जीवन, ये धरणी हमें धारण करती,धरा ही अन्न धन भोजन, […] Read more » प्रकृति के विरुद्ध आचरण ही मृत्यु का कारण होता
कविता आज जैन बौद्ध वैदिक सिख मिलकर हिन्दू कहलाने लगे November 3, 2023 / November 3, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक वर्तमान हिन्दू धर्म बौद्ध जैन धर्म का ब्राह्मणीकरण है, बुद्ध ने कहा ‘एस धम्मो सनंतनो’ धम्म ही सनातन है! सच यह है कि बौद्ध धर्म का धम्म ही सनातन धर्म है, बुद्ध का ये धम्म सनातन है,सनातन कोई धर्म नहीं है! बुद्ध के धम्म औ वैदिक धर्म में अंतर होता बहुत अधिक, […] Read more »
कविता दानी और उदार होने के लिए जरूरी नहीं है धनी होना November 3, 2023 / November 3, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक दानी और उदार होने के लिए जरूरी नहीं है धनी होना अक्सर अधिक धनी व्यक्ति अत्यधिक कृपण होता ज्यों-ज्यों धन बढ़ते जाता त्यों-त्यों कृपणता बढ़ती जाती! कृपण व्यक्ति अंततः अपना ही कर लेता है क्षति धन जमा करने की नशा ऐसी होती कि हर रोजमर्रा के खर्च में करने लगता है वो […] Read more » It is not necessary to be rich to be charitable and generous.
कविता मैं तो तेरे पास हूँ November 3, 2023 / November 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मैं तो तेरे पास हूँ अन्तर्मन के आंखे खोल वंदे मैं तो तेरे पास हूँ कर्म में धर्म में भक्ति में शक्ति में राग में रंग में हरदम बैठा मैं तेरे साथ हूँ । सरिता में सिंधु में धरा में गगन में अगन में पवन में करता मैं ही वास हूँ ॥ सृष्टि में वंदनीय […] Read more » I am with you
कविता निजत्व की ओर November 2, 2023 / November 2, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मेरा नगर शाश्वत काल से अत्यन्त रमणीक और सुन्दर रहा है और उसका महाशून्य कार आकाश शाश्वत निर्मल असीम नीलिमा लिये रहा है। न जाने कहां से मॅडराते घने काले बादलों ने मेरे नगर के सौन्दर्य को निगल लिया है। मैं दूसरे नगर में गया हूँ तब मेरे नगर में ये बादल शुभ्र रहे थे […] Read more » निजत्व की ओर
कविता कहाँ गये पखेरू, वीरान पेड़ रोते November 2, 2023 / November 2, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आज भी दरवाजा खोलते ही, मुझे अपने घर से नजर आता है नीम का पेड़, जो देवी की मडिया से सटकर खड़ा है। और कुछ दूरी पर एक विशाल इमली का पेड़ हुआ करता था जिसे चंद स्वार्थियों ने जड़ से काटकर जमीन पर कब्जा कर विशाल भवन खड़ा किया है। घर के पिछवाड़े की […] Read more » Where have the birds gone
कविता आज हर कोई छोटे से कारण से रूठ जाता November 2, 2023 / November 2, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक आज का समय है छल-छंद का आज का समय है घृणा द्वेष जलन का आज का समय है बेगानापन का आज का समय नहीं है अपनापन का आज का रिश्ता झटके में टूट जाता आज हर कोई छोटे से कारण से रूठ जाता एक वाट्सएप मैसेज छूने नहीं छूने पर डबल […] Read more »