कविता सबसे प्यारा नाम ‘मां’ April 29, 2024 / April 29, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment दिया दसिलाकपकोट, उत्तराखंड किसी ने पूछा जरा बताना,दुनिया का सबसे प्यारा नाम नाम,मैंने हंस कर उसे कहा,तुम्हें इतना सोचना क्यों पड़ा?वो दो अक्षर का प्यारा नाम,दुनिया जानती है वह है मां,बच्चों की खुशियों की खातिर,जग से लड़ जाती है मां,तनिक भी विपदा आए जो बच्चे पर,तो घर सर पर उठा लेती है मां,खुद भूखी रह […] Read more » The sweetest name is 'Mother'
कविता बेटी से गृहणी April 20, 2024 / April 20, 2024 by अजय एहसास | Leave a Comment एक बेटी जब ससुराल जाती है, वो बेटी का चोला छोड़गृहणी बन जाती है,जो बातें घर पर अम्मा से कहती थीससुराल में छिपा जाती है। थोड़ा सा दर्द होने परबिस्तर पकड़ने वाली बिटियाअब उस दर्द को सह जाती है,तकलीफें बर्दाश्त कर जाती हैपर किसी से नहीं बताती है। सिरदर्द होने पर जो अम्मा सेसिर दबवाती […] Read more » बेटी से गृहणी
कविता पेट्रोल पंप April 16, 2024 / April 16, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment उसे पेट्रोल पम्प मिल गया है ये सुना अभी, कैसे हुआ ये चमत्कार अवाक हैं सभी , अब और भी लघु लगने लगी है मेरी लघुता, इस पेट्रोल पंप से उसकी कितनी बढ़ेगी प्रभुता अब सालेगी न उसे कोई बात चिंता की, भले ही बाबूजी की पेंशन रहे जब-तब रुकती, क्योंकि पेट्रोल पंप को होना […] Read more »
कविता चलो एक नई शुरुआत करते हैं April 11, 2024 / April 11, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सिमरन सहनीमुजफ्फरपुर, बिहार चलो एक नई शुरुआत करते हैं।ज्यादा नहीं थोड़ी खुशियां बेटियों के नाम करते हैं।।ना कभी खुद को समझे कमजोर ऐसी ताकत देते हैं।सुनसान राहों में भी चल सके अकेले, ऐसी हिम्मत देते हैं।।चलो एक नई शुरुआत करते हैं।ज्यादा नहीं थोड़ी खुशियां बेटियों के नाम करते हैं।।खुल के जीने का इनको एहसास देते […] Read more » चलो एक नई शुरुआत करते हैं
कविता आज दर पर आनेवाला हर कोई मेहमान नहीं होता March 28, 2024 / March 28, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज दर पर आनेवाला हर कोई मेहमान नहीं होता,अब भोली सूरत दिखनेवाला भी कातिल शैतान होता! आज दोस्त व दुश्मन आसानी से पहचाने नहीं जाते,चाहे मानो या ना मानो पर साधु वेश में रावण आते! कोई भी खुशामदी दरवाजे पर आकर कहे भैया दीदी,उसके द्वारा की गई प्रशंसा से मत पसीजो बहन जी! […] Read more » आज दर पर आनेवाला हर कोई मेहमान नहीं होता
कविता मैं उम्र की उस दहलीज पर हूँ March 27, 2024 / March 27, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं उम्र की उस दहलीज पर हूँजब चाह नहीं होती है नई दोस्ती करने कीकिसी अमीर ओहदेदार के पास सटकर बैठने कीकिसी पद पैसा प्रतिष्ठा वाले की खुशामद करने की! बस इतनी सी चाहत हैकि बचपन का हमउम्र साथी सलामत होऔर उनके घुटने में इतनी जरूर ताकत होकि अपने घर छत की सीढ़ी […] Read more » मैं उम्र की उस दहलीज पर हूँ
कविता ‘का’ (सीएए) का मतलब क्या होता? March 18, 2024 / March 18, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक‘का’ (सीएए) का मतलब क्या होता?वैसा मानव जिसने धरती पर जन्म लिया थामगर पूरी वसुंधरा में नहीं था नागरिक कहीं काजिसे जद्दोजहद के बाद ‘का’ से मिली नागरिकता! वैसा मानव जो अपनी ही जन्मभूमि से कट गया थाआज से पचहत्तर वर्ष पूर्व आजादी के वक्त बँट गयाअफगानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश का बना हिस्साजो सनातनी […] Read more » सीएए
कविता वो मसीहा कहाँ हैं कहाँ हैं March 13, 2024 / March 13, 2024 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment यह दिलकशीयह जिस्मफरोशी का माहौलयह बद नियतीयह लुटती हुई जिंदगी का माहौलजिन्हें गुरुर खुद पर थावो मसीहा कहाँ है कहाँ है। माँ-बाप कीपैरों तले रौदी हुई पगड़ियाँये गुमराह बच्चेयह भटकती हुई नस्लें हमारीइज्जत को तार तार करते हुए लोगवो नुमाइंदे वतन के कहां हैं।वो मसीहा कहाँ है कहाँ है। ये डरे डरे से लोगये सहमी […] Read more » वो मसीहा कहाँ हैं कहाँ हैं
कविता मेरी हर एक साँस पर March 12, 2024 / March 12, 2024 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment तुम मेरे जीवन की आशाविश्वास हो तुम मेरे मन काठंडक सी मिल जाती हैजब पास तुम्हारे होता हूँहर लम्हा तुम्हें सोचता रहता हूँअकेलेपन की कुंठा से..मैं घबरा ही जाता हूँजब दूर कभी हो जाते होतुम संबल बनकर साथ रहोहर मुश्किल की घड़ियों मेंशान्त सरोवर की लहरों सीबहती रहो मेरे मन मेंउसे समर्पित सारा जीवनअर्पण सब […] Read more »
कविता पूजा पद्धति के अनुसार मनुज-मनुज में भेद नहीं करना March 11, 2024 / March 11, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक पूजा पद्धति के अनुसार मनुज-मनुज में भेद नहीं करना, मानव मात्र का एक समान जन्म लेना जीना और मरना! सृष्टिकर्ता ने तनिक भेदभाव नहीं किया हमारे सृजन में, किसी ब्रह्मा ने पैदा किया नहीं ब्राह्मण को उपनयन में! खुदा बाप ने खुद किया नहीं किसी ईसाई का बपतिस्मा, अल्लाह ने किसी मुस्लिम […] Read more » Not making any distinction between Manuj and Manuj according to the method of worship.
कविता कठपुतली March 11, 2024 / March 11, 2024 by श्लोक कुमार | Leave a Comment ये डोर मेरी खलासी को इख्तियार कर लिएमेरे कर, पद बंदिश में हैंओ! नटवर मुझे छोड़ दो ,मेरे अनुरागी को दो टेकहै एक डोर हमाराशुष्क दरख़्त की भांति मेरा हयात हैंप्रशाखा की भांति कर मेरेखुश्क दरख़्त की भांति मैं खड़ीविवश मैं , बिन तुम्हारे वियोग में पड़ीमेरे अश्क है बेशकीमतगिरते ही बन जाते मोतीइन्हे रोक […] Read more » puppet
कविता कुछ कर्म भलाई का कर ले March 10, 2024 / March 12, 2024 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment जीवन में आशाओं कामोल कहाँ मिल पाएगाइस मतलब की दुनिया मेंकौन साथ निभाएगा। सोना चाँदी हीरे मोतीमिट्टी तक बिक जाती हैबाजारों में गिरवी है जोइज्जत तक बिक जाती है। पहने धरम करम का चोलापाप कमाई करता मानवईश्वर तक को भूल गयाईश्वर से कब डरता मानव। शापित है हर शख्स यहाँहैरान भी है परेशान है मानवअपनों […] Read more » By doing some good deeds with dreams in your eyes