कविता आज सनातन धर्म विभिन्न आस्था और अवस्था से गुजर इस मुकाम पर पहुँचा October 16, 2023 / October 16, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक आज भारतवर्ष का सनातन धर्म विभिन्न आस्था और अवस्था से गुजर कर इस मुकाम पर पहुँचा, जहाँ से हम पीछे की स्थिति में लौट नहीं सकते, वस्त्र त्याग कर नग्न जिन मुनि नहीं बन सकते, ब्याहता को छोड़कर गौतम बुद्ध नहीं बन सकते! आज हम ये कहकर सनातन से मुकर नहीं सकते […] Read more » आज सनातन धर्म विभिन्न आस्था और अवस्था से गुजर इस मुकाम पर पहुँचा
कविता हम सब हिंदुस्तानी हैं October 14, 2023 / October 14, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment महिमा जोशीकन्यालीकोट, उत्तराखंड ना पूछो ज़माने से किक्या हमारी कहानी हैहमारी पहचान बस इतनी हैकि हम सब हिंदुस्तानी हैंदेश से करते प्यार इतनाकि जान भी गंवाई हैमत पूछो हम कौन हैं?हम सब हिंदुस्तानी हैंनेहरू, गांधी और शास्त्रीसबकी एक ज़ुबानी थीमत पूछो वो कौन थेवो सब हिंदुस्तानी हैंवो मां होती है खुशनसीबजिनके बच्चों का बलिदान,आता है देश की […] Read more » हम सब हिंदुस्तानी हैं
कविता जाने क्यों मुझे देवता बनाते है? October 11, 2023 / October 11, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?मैं उन्हें कैसे समझाऊ कि मैं कोई देवता नहीं हॅू एक सीधा-साधा इंसान हॅू जो इंसानियत से जीना चाहता हॅू।पर वे मानते ही नहीं मुझे देवता की तरह पूजे आते हैं, जाने क्यों मुझ इंसान को देवता बताते है?ये दुनिया बड़ी जालिम है जो हम जैसों के पीछे पडी हैकभी ढंग के इंसान तो न बन पाये पर ये देवता बनाने पर अड़ी है।किन्तु मैं देवता नहीं बनना चाहता एक इंसान बनना चाहता हॅू ?इनके लिये किसी को भी देवता बनाना कितना सरल है ये हर सीधे सादे इंसान को पहले पत्थर जड बनाते हैं।उजाडकर दुनिया उसकी ये उसे नीरस बनाते है।जिन्हें ये देवता बनाते है अक्सर वह इनके करीब होता है इनका अपना तो कम उनके अपनों का सपना होता है।दूसरों के सपनों को चुराकर ये अपनी हकीकत बनाते है।प्रेम को जीने वालों को निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु ही पीड़ा का ताज पहनाकर बेबसी की माला पहनाते है।उनकी आँखों से जुदाई के आँसू बहाकर उनके हृदय में गर्मी का सैलाव लाते है।दो प्रेम करने वाले इंसानों को ये पहले बिछुडवाते है।प्रेम की लाश ढोने वाले हर इंसान को ये देवता बनाते है। आत्माराम यादव पीव Read more » जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?
कविता भागी हुई लड़की October 9, 2023 / October 9, 2023 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment पकड़ कर लाई गई थी वह… चुपके से… रेलवे स्टेशन से,उतर गई थी वह लड़की न जाने क्यों सबके मन से!सवालिया नजरों से बिंधी जा रही थी उसकी देह,किसी को न रह गया था उससे कोई भी मोह-नेह,सबकी आँखों में उसको लेकर थे तरह -तरह के सवाल,हर नजर उतार लेना चाहती थी उसके जिस्म से […] Read more »
कविता नयनों से बात October 6, 2023 / October 6, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment तेरे मेरे सारे शब्द अब पडते हैं अधूरे हम नयनों से बात करें शब्द हो पूरे। प्रेम भरे शब्दों को हम कह-कह के ऊबे नयनों में नयन ड़ाल आज हम डूबे। सांसों से सॉस चले सहेलियों के साथ चले छेडती है तुमको मेरे प्यार की ये बोलियॉ। थिरकती पवन चले तेरे आँचल को तंग करे […] Read more »
कविता समाज ज़ुल्म का शिकार क्यों हैं लड़कियां ? October 6, 2023 / October 6, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सिमरन कुमारीमुजफ्फरपुर, बिहार क्यों अपने सपनों को पूरा ना कर पाए लड़कियां?क्यों मर्यादा की जंजीरों में बांध के रखी जाए लड़कियां?क्यों अपनी उड़ानों को ना भर पाए लड़कियां?क्यों घुट-घुट कर घर में रहती है लड़कियां?क्यों चारदीवारी के भीतर दम तोड़ देती हैं लड़कियां?क्यों अपनी मर्जी का कुछ ना कर पाए लड़कियां?क्यों अपने ही घर में […] Read more » Why are girls victims of oppression
कविता मां क्यों तूने मुझे रोका? October 6, 2023 / October 6, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment वर्षा आर्या मां क्यों तूने मेरी उड़ान कोघर की चारदीवारी में कैद करके रखा?क्यों तूने शाम चार बजे के बादघर से बाहर जाने से रोका?क्यों तूने सपनों को पंख लगाने से रोका?इन हैवानों के डर से मेरी इच्छा को तोड़ा?एक बार मुझे भी कदम तो उठाने देती,शैतानों को नारी शक्ति का एहसास कराने देती,मैं नारी […] Read more » मां क्यों तूने मुझे रोका?
कविता एक छात्र की जिज्ञासा ? October 4, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment हे आजाद भारत के माता पिताओं क्या है हम ? हमें तुम बताओ ? भेजा है जबसे स्कूल में आपने दबाते है किताबों के बोझ हमें आप में । किकर्तव्यमूढ़ पंक्तिबद्ध प्रार्थनाएँ हम गाते है अनभिज्ञ है हम, कभी समझ नहीं पाते है । स्कूलों में जब भी , हम अव्वल नंबर आते है आदर्श और उसूलों का, तब मेडल हम पाते है […] Read more » एक छात्र की जिज्ञासा ?
कविता मोबाईल बीमारी लाया है October 3, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment भूल चुके हो भावी चिंताएं, जब से मोबाइल हाथ आया है। घिर चुको हो समस्याओं में, संग ये कई बीमारी लाया है व्हाट्सएप-फेसबुक इंटरनेट ने, लील लिया है तुम्हारा कल।। करों चिंतन बैठ कर देखो, मोबाईल कितनी बीमारी लाया है? गुलाम हुए मोबाइल के इतने, खुमारी में रहते इसके हर पल अपना अमूल्य समय क्यों […] Read more » मोबाईल बीमारी लाया है
कविता लेख कुछ ऐसा काम करो जिससे मानवता की पहचान हो October 3, 2023 / October 3, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायक कुछ ऐसा काम करो जिससे मानवता की पहचान हो ईश्वर खुदा के नाम हैवान ना हो जाओ! कुछ ऐसा काम करो जिसमें धर्म मजहब का गुमान ना हो जिसमें धन वैभव का गुणगान ना हो! कुछ ऐसा काम करो जिसमें अलग सा दिखने का अहंकार ना हो दूसरे धर्म मजहब के लिए […] Read more » do something that reflects humanity
कविता मौत का अपमान October 3, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment एक दुधमुंहे शिशु का शव कारूणिक आर्तनाद के बीच सुर्ख लाल कपड़े में लिपटा अपने घर से निकला। जिसे कलेजे पर पत्थर रख उसकी जननी ने लोगों को सौंपा। उस परिवार में छाया रहा मातमी शोक जिसमें घर की दीवारें तक नम थी। ये सुबह उनके परिवार पर बिजली बनकर टूटी। बुझ गया उनके कुल […] Read more »
कविता सड़क की पीड़ा September 18, 2023 / September 18, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मैं ने सुनी हैं उसकी आहटें मौन पीड़ा और अकुलाहटें वह बिलखती और तड़पती भी है आँसूओं से नहाती भी है लेकिन… उसकी आवाज़ मौन है क्योंकि वह एक सड़क है ! अब वह अकेली है उजड़ गए हैं उसके श्रृंगार विस्तार के लिए काट दिए गए पेड़ वह अब नंगी […] Read more » road pain