कविता देखो देखो सावन है आया ! July 7, 2023 / July 7, 2023 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment झम-झम बरसे मेघ,तरूओं के भीगे तन, भीगे हरेक आज मनदेखो देखो सावन है आया ! चम-चम चमके बिजलियां,झूम रहे तन और झूम रही सारी वनस्पतियांदेखो देखो सावन है आया ! नव ऊर्जा का हो रहा संचार,मन प्रफुल्लित है, धुल रहे सारे विकारदेखो देखो सावन है आया ! झर-झर झूमते झरने,खुश हैं पशु, खुश हैं पंछी, […] Read more » देखो देखो सावन है आया
कविता भारत कोई नवीन राष्ट्र नहीं आदि सनातन से चला आ रहा July 5, 2023 / July 5, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक भारत कोई नवीन राष्ट्र नहीं आदि सनातन से चला आ रहा पारंपरिक सनातनी जैन बौद्ध वैदिक हिन्दू राष्ट्र है! प्रथम स्वायंभुव मनु के मन्वन्तर से वर्तमान सातवें वैवस्वत मनु के मन्वन्तर तक भारत ने अपनी सभ्यता संस्कृति और विरासती पहचान को कभी नहीं छोड़ी! सप्त द्वीप नौ खंड में भारतवर्ष था जम्बूद्वीप […] Read more »
कविता मैं खुद के लिए काफी हूं July 4, 2023 / July 4, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment प्रियंका साहूमुज़फ़्फ़रपुर, बिहारमैं खुद के लिए काफी हूं,नहीं चाहिए मुझे,किसी की दोस्ती,किसी का प्यार,नहीं चाहिए मुझे,किसी की हमदर्दी,किसी का साथ,मुझे तो बस चाहिए, एक पंख जो ले जाए,मुझे मेरे सपनों के संग,जिसे देख दुनिया रह जाए दंग मैं खुद के लिए काफी हूं, फर्क नहीं पड़ता मुझे,लोगों के तानों का,उनकी बातों का,मुझे फर्क पड़ता है,मेरे सुनहरे सपनों […] Read more » मैं खुद के लिए काफी हूं
कविता बूंद-बूंद पानी का July 4, 2023 / July 4, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment संजना गढ़ियापोथिंग, उत्तराखंड कभी बूंद-बूंद बनकर गिरता है पानी,कभी बर्फ बनकर गिरता है पानी,टप टप टप टप करता है पानी,झर झर झर झर बहता है पानी,सबकी प्यास बुझाता है पानी,पर्वतों से निकल कर,नदियों में बहता है पानी,अंत में सागर से मिल जाता है पानी,बारिश बनकर लौट आता है पानी,फिर बूंद बूंद बन कर गिर जाता […] Read more » बूंद-बूंद पानी का
कविता जब लड़की पढ़ेगी July 4, 2023 / July 4, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment तानियाचोरसौ, उत्तराखंड लड़के को तो मिल जाती है उच्च शिक्षा,लड़की को क्यों नहीं मिलती वही शिक्षा?क्या सिर्फ इसलिए कि वो लड़की है?वो कुछ नहीं कर सकती है?इसी सोच ने समाज को तोड़ा है,लड़की को शिक्षा पाने से रोका है,क्यों बोल दिया जाता है?जाना तो तुम्हें पराए घर है,अरे ! उनकी भी तो एक दुनिया है,कुछ […] Read more »
कविता हिन्दू बौद्ध जैन सिख धर्म के संस्थापक ब्राह्मण नहीं क्षत्रिय हैं July 3, 2023 / July 3, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायकहिन्दू बौद्ध जैन सिख धर्म में एक समानता हैकि क्षत्रिय हैं चारों धर्म के संस्थापक व अनुयाईचारों धर्म में सूर्यवंशी आर्य क्षत्रिय मनु इक्ष्वाकुऔर चन्द्रवंशी इला पुरुरवा आदि के वंशज भाई! चार वर्ण को एक किया जा सकता क्षत्रिय वर्ण में,चारों धर्म के प्रवर्तक सात मनु, राम, कृष्ण, बुद्ध,चौबीस तीर्थंकर और दस गुरु […] Read more » The founder of Hindu Buddhist Jain Sikhism is not a Brahmin but a Kshatriya.
कविता क्यों करते है वो ऐसा? July 1, 2023 / July 1, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मनीषा छिम्पालूणकरणसर, राजस्थान क्यों करते है वो ऐसा?एक नहीं देते पैसा,लाख बार रुलाते हैं,काम सारा करवाते हैं,मज़दूरी भी करवाते हैं,मगर किसी चीज के लिएपैसा एक नहीं देते हैं,ये भी करो, वो भी करो,बस पूरे दिन काम करो,किस बात का अभिमान करते हैं,मानवता को बदनाम करते हैं,लड़की भी चाहती है जीवन में आगे बढ़ना,फिर क्यों बोझ […] Read more » क्यों करते है वो ऐसा?
कविता सारे हिन्दू ऋषियों के गोत्रज, जाति छोड़ो गोत्र धारण करो June 21, 2023 / June 21, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब ब्राह्मण भी हिन्दू है और गैर ब्राह्मण भी हिन्दू है,तो दोनों हैं हिन्दू भाई, फिर विवाह और श्राद्ध भोज मेंएक साथ एक पाँति में बैठकर क्यों नहीं भोजन करते?ब्राह्मण भोज के नाम अलग अगली पाँति क्यों चाहते? इस स्थिति में दोनों में कोई एक हिन्दू नहीं हो सकते,हिन्दू हो, तो हिन्दू कहने […] Read more » Gotra of all Hindu sages leave caste and adopt Gotra
कविता सोने की घड़ी June 5, 2023 / June 5, 2023 by श्लोक कुमार | Leave a Comment ओ सोने से बनी बेशकीमती साअत तू इतनी भी खास तो नही समय का तनिक भी एहसास तो नही तेरे समय के पन्ने कुछ दस्तुरे ए ख़ालिस तो नही सिर्फ चढ़ी हैं जर की चरसा सा भ्रम क्या हर समय , हर वक्त बदलते हैं तेरे सुई के क्रम कांचन की तु सारंगी […] Read more » सोने की घड़ी
कविता भगवान राम कृष्ण भी पूर्वजन्म के कर्मफल से बचा नहीं कोई May 29, 2023 / May 29, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक पूर्वजन्म का कर्मफल भोगने से बचा नहीं कोई, चाहे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम चन्द्र हों या गीताज्ञानी योगेश्वर लीलाधर कृष्ण कन्हाई! पूर्वजन्म का कर्मफल भोगने से बचा नहीं कोई, चाहे भगवान श्रीराम की माता हो कौशल्या माई या विमाता कैकई कर्मफल से बंधे हैं सारे भाई! चाहे लाख करो छल, छंद, चतुराई, […] Read more » भगवान राम कृष्ण भी पूर्वजन्म के कर्मफल से बचा नहीं कोई
कविता संसद में सिंगोल May 29, 2023 / May 29, 2023 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment स्थापित होगा संसद में सिंगोल, बदल जायेगा विपक्ष का भूगोल। उदंडता दिखाएगा जो संसद में, दंड देगा अब उसको ये सिंगोल।। जब जब सत्ता में परिवर्तन आएगा ये सिंगोल उसको दिया ही जायेगा। याद दिलाएगा उसको अपने कर्तव्य, तभी भारत का हित हो पाएगा।। स्पीकर के ये दाई तरफ लगा होगा, स्पीकर का स्थान भी […] Read more » संसद में सिंगोल
कविता प्रेम May 25, 2023 / May 25, 2023 by भाविक देसाई | Leave a Comment पता नहीं प्रेम है या नहीं ?पर चाहता हूँतुम्हारी बाहों में गिर करपूरी राततारे गिनता रहूँ… प्रेम यदि अनंत है अपने आप मेंतोप्रेमउस व्यक्ति को भी अनंत करने की संभावना रखता हैजो प्रेम में है जानते है अनंतता को गिन नहीं सकतेपर गिन तो सकते है अनंत तक ! प्रेम अनंत हैऔर प्रेम करते रहनाप्रेम […] Read more » प्रेम