कविता एक छात्र की जिज्ञासा ? October 4, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment हे आजाद भारत के माता पिताओं क्या है हम ? हमें तुम बताओ ? भेजा है जबसे स्कूल में आपने दबाते है किताबों के बोझ हमें आप में । किकर्तव्यमूढ़ पंक्तिबद्ध प्रार्थनाएँ हम गाते है अनभिज्ञ है हम, कभी समझ नहीं पाते है । स्कूलों में जब भी , हम अव्वल नंबर आते है आदर्श और उसूलों का, तब मेडल हम पाते है […] Read more » एक छात्र की जिज्ञासा ?
कविता मोबाईल बीमारी लाया है October 3, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment भूल चुके हो भावी चिंताएं, जब से मोबाइल हाथ आया है। घिर चुको हो समस्याओं में, संग ये कई बीमारी लाया है व्हाट्सएप-फेसबुक इंटरनेट ने, लील लिया है तुम्हारा कल।। करों चिंतन बैठ कर देखो, मोबाईल कितनी बीमारी लाया है? गुलाम हुए मोबाइल के इतने, खुमारी में रहते इसके हर पल अपना अमूल्य समय क्यों […] Read more » मोबाईल बीमारी लाया है
कविता लेख कुछ ऐसा काम करो जिससे मानवता की पहचान हो October 3, 2023 / October 3, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायक कुछ ऐसा काम करो जिससे मानवता की पहचान हो ईश्वर खुदा के नाम हैवान ना हो जाओ! कुछ ऐसा काम करो जिसमें धर्म मजहब का गुमान ना हो जिसमें धन वैभव का गुणगान ना हो! कुछ ऐसा काम करो जिसमें अलग सा दिखने का अहंकार ना हो दूसरे धर्म मजहब के लिए […] Read more » do something that reflects humanity
कविता मौत का अपमान October 3, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment एक दुधमुंहे शिशु का शव कारूणिक आर्तनाद के बीच सुर्ख लाल कपड़े में लिपटा अपने घर से निकला। जिसे कलेजे पर पत्थर रख उसकी जननी ने लोगों को सौंपा। उस परिवार में छाया रहा मातमी शोक जिसमें घर की दीवारें तक नम थी। ये सुबह उनके परिवार पर बिजली बनकर टूटी। बुझ गया उनके कुल […] Read more »
कविता सड़क की पीड़ा September 18, 2023 / September 18, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मैं ने सुनी हैं उसकी आहटें मौन पीड़ा और अकुलाहटें वह बिलखती और तड़पती भी है आँसूओं से नहाती भी है लेकिन… उसकी आवाज़ मौन है क्योंकि वह एक सड़क है ! अब वह अकेली है उजड़ गए हैं उसके श्रृंगार विस्तार के लिए काट दिए गए पेड़ वह अब नंगी […] Read more » road pain
कविता मां शब्द की क्या ही परिभाषा दूं? September 18, 2023 / September 18, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment भावना मेहराकपकोट, बागेश्वरउत्तराखंड मां शब्द की क्या ही परिभाषा दूं?मां एक शब्द है न लेख है,ना ही इस शब्द का कोई मोल है,मां शब्द एक एहसास है, एक प्यार है,जिंदगी के हर दुख में छुपे एक हंसी का एहसास है,जो साथ न होकर भी आसपास है,छोटे-छोटे कदमों का साथ है,जो आज भी हमारे साथ है,मां […] Read more » What definition should I give of the word mother?
कविता कश्मीर का गोनन्द से कर्कोटक कायस्थ,उत्पल कल्यपाल,लोहर खस,शाहमीर छिभ राजवंश September 18, 2023 / September 18, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ये कश्मीर वही है जहाँ ज्ञान की देवी श्री शारदा पीठ में रहती, शारदा कश्मीर की अधिष्ठात्री देवी जिससे निकली शारदा लिपी, ये कश्मीर वही जहाँ सती देह से सतीसर बना,वितस्ता निकली, सती ही कश्मीरा देवी,कश्यपमेरु से कश्यपमीड़ संज्ञा कश्मीर की कश्मीर के मूल निवासी नाग पिशाच व आर्य कश्यप की संतति […] Read more » Gonand to Karkotak Kayastha Lohar Khas Shahmir Chhib dynasty of Kashmir. Utpal Kalypal
कविता माफी सभी से सभी को प्रणाम September 18, 2023 / September 18, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment प्रणाम प्रणाम प्रणाम, मेरा आखिरी प्रणाम अंतिम सांसे है, शेष जीवन को प्रणाम देह में बसी थी, एक अंजान सी आत्मा तलाशती रही वह, न मिल सका परमात्मा अधूरी बची है साँसे, जीवन का है खात्मा आ रही है मृत्यु, यह जीवन मृत्यु के नाम प्रणाम प्रणाम प्रणाम ,मेरा मृत्यु को प्रणाम॥ 1।। बचपन का […] Read more » Apologies to all and greetings to all.
कविता तीन भाई सबसे जुदा September 14, 2023 / September 14, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment अपने ही घर में, एक कमरे में है बूढ़े माता पिता एक बेटे ने, नौकरी लगते ही उन्हे छोड़ दिया एक बेटे ने, घर की मर्यादा के लिए उन्हे छोड़ दिया दोनों निठल्लों के रहते, एक ने माँ बाप को छोड़ दिया ॥ एक भाई सुखी है, तमाम उम्मीदों के साथ एक भाई दुखी है, खुद की बुनी उलझनों में एक […] Read more »
कविता भारत से इंडिया बनने तक हमने क्या क्या खोया September 13, 2023 / September 13, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक जब हमारे देश का नाम भारतवर्ष था तब सिंधु रावी चिनाव झेलम सतलज ये पंच नद से हिन्दुकुश के आगे कैश्पियन सागर यानि कश्यप सागर तक संपूर्ण जम्बूद्वीप एशिया स्वायंभुव मनु के प्रपौत्र आदिनाथ प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव पुत्र भरत के साम्राज्य का हिस्सा था मोहनजोदड़ो औ’ हड़प्पा की सिंधु सभ्यता भारतवर्ष […] Read more » What did we lose from Bharat to becoming India? भारत से इंडिया बनने तक हमने क्या क्या खोया
कविता मैं मुमुक्षु हूं सत्य का September 12, 2023 / September 12, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जो लिखूंगासत्य लिखूंगाऐसा लिखूंगा किसत्य की कसौटी परसत्य को गवाही की जरूरत न हो ।ये क्या ?मैंने तो सत्य लिखने कासत्य प्रकट करने काखुद से वादा किया हैपर इतना लिख जाता हूँ किउसके सत्य होने पर खुद हीसंदेह करता हूँ औरपूरा डस्टबिन भर जाता है।डस्टबिन में लिखे संदेहों कोखुद के ही लिखे सत्य कोजाँचता हूँ […] Read more » I am a seeker of truth
कविता आत्मा की निरंतरता काया के बाहर भी होती September 12, 2023 / September 12, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायक आत्मा की निरंतरता काया में ही नहीं काया के बाहर भी होती जिसकी अनुभूति सोने के बाद भी होती! जीवित जीवंत काया के साथ जुड़े लोगबाग रिश्ते दिन भर दिखाई देते किन्तु रात्रि या कभी सो जाने पर स्वप्निल हो जाने पर अचेतन आत्मा से कमोबेश हट जाते सारे के सारे! अचेतावस्था […] Read more » The continuity of the soul exists even outside the body. आत्मा की निरंतरता काया के बाहर भी होती