कविता शब्दांजलि December 28, 2022 / December 28, 2022 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहबज़ादों को ‘शब्दांजलि’ दसवें गुरु के नूर -ए -नज़र, चार नौनिहाल। तारीख़-ए-हिन्द में नहीं उनकी कोई मिसाल।। सानी नहीं था कोई अजीत और जुझार का। ज़ोरावर -ो – फ़तेह की थी क्या शान,क्या जलाल।। टूटी जो तेग़, जंग लड़ी तब मियान से। फिर भी क़रीब आये […] Read more »
कविता भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय December 23, 2022 / December 23, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय,गर्मी में देते हो ठंडी छांव प्रिय।मै भोली भाली ऐसी अबला हूं,मीठी निबोली खाती हूं प्राण प्रिए। मैं तेरी छांव में जीवन बिता दूंगी,अपना सब कुछ तुम पे लुटा दूंगी।एक बार तुम मुझको अपना लो,सातों जन्म तेरे साथ निभा दूंगी।। तुम मीठे फल देने वाले तरु मेरे,जीवन भर आश्रय देने […] Read more » even if you are bitter neem dear
कविता मां पिता और मेरी मां December 9, 2022 / December 9, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां! मां तुम कहां हो?मां तुम यहां हो! मां तुम वहां हो!मां तुम जमीं में हो या आसमां में होमां तुम चाहे जहां हो तुझमें ये सारा जहांमां तुम तो सारा जहां हो! मां तुझमें राम है/मां तुझमें श्याम हैमां तुझसे ही मेरा अस्तित्व व नाम है! मां तुम शतरुपा हो! मां तुम […] Read more »
कविता वैसा वैभव बेकाम की जो मिले किसी के रुदन में December 8, 2022 / December 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकदूसरों के प्रतिजितनी जहर होती इंसानी जेहन मेंउतनी ही जहरउग आती संतान के बीज बपन में! जिसने जितना विष घोलारिश्ते और पराए जीवन मेंउतना हलाहल लहलहाएगानिज संतति के अंतर्मन में! कोई जितनी घृणा द्वेष फैलातेबड़े छोटे स्वजन मेंवो सब कुछ उन्हें लौटकर आतेउनके वृद्धापन में! अगर मां पिता बंधु कोअपमानित किया धनार्जन मेंतो […] Read more » Such splendor is of no use
कविता रिश्तेदार सुख में साथ होते दुःख में बेवफा हो जाते December 5, 2022 / December 5, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक अमीरी और गरीबी स्थाई पहचान नहीं होती है आदमी की आज का अमीर कल गरीब हो जाता फिजूलखर्ची अनाचार से आज का गरीब कल संपन्न हो सकता शिक्षा और संस्कार से! मगर आदमी गरीबों से अपनी करीबी रिश्तेदारी को भी छिपाता और अमीरों से दूर की रिश्तेदारी भी बढ़ा चढ़ाकर बताता! पर […] Read more » Relatives remain unfaithful in sorrow while being together in happiness.
कविता नग्नता,फैशन और लड़कियां December 2, 2022 / December 2, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment दोष दे रही है लडको को आज लड़कियां,नग्नता प्रदर्शन करती है आज लड़कियां।लगाते नही है अंकुश मां बाप भी उन पर,कैसे बचेगी बलात्कार से आज लड़कियां।। नग्नता का प्रदर्शन कर रही है फिल्म हस्तियां,इसको दिखाकर पैसे बटोरते है फिल्मी हस्तियां।क्यो नही लगाता सेंसर बोर्ड इन पर अंकुश,क्योंकि खरीद चुके है इन्हेंआज फिल्मी हस्तियां।। विकृतिया फैला […] Read more » fashion and girls nudity
कविता रिश्ते November 30, 2022 / November 30, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment खामोशियों से रुकसत हो जाते हैं हर रिश्ते,अगर चुपचाप रहोगे गूंगे हो जाते है हर रिश्ते।कभी कभी बेमतलब ही बात कर लिया करो,बने रहेंगे हमेशा सदा तुम्हारे अपने हर रिश्ते।। बनाने से बन जाते हैं इस दुनिया में रिश्ते,बिगाड़ने से बिगड़ जाते हैं दुनिया में रिश्ते।कौन कहता है ऊपर से बनकर आते हैं रिश्ते,सच्चाई ये […] Read more » relations
कविता पाकिस्तान निर्माता जिन्ना अरबी तुर्की मुस्लिम नहीं गुजराती हिन्दू था November 30, 2022 / November 30, 2022 by विनायक शर्मा | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक पाकिस्तान निर्माता जिन्ना अरबी तुर्की मुस्लिम नहीं काठियावाड़ का एक गुजराती हिन्दू राजपूत लोहाना था! पूंजाभाई ठक्कर का पोता और जेनाभाई ठक्कर का बेटा मोहम्मद अली जेनाभाई उर्फ मोहम्मद अली जिन्ना बना! पूंजाभाई ठक्कर को गैर पारंपरिक हिंसाचारी मछली के व्यवसाय के कारण जाति से बहिष्कार का दण्ड मिला था! जिसने क्षोभ […] Read more » जिन्ना अरबी तुर्की मुस्लिम नहीं गुजराती हिन्दू था
कविता अक्षर अक्षर नाद ब्रह्म है अक्षर से शब्द जन्म लेते अर्थ ग्रहण करते November 28, 2022 / November 28, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक अक्षर अक्षर नाद ब्रह्म है अक्षर से ही सभी शब्द जन्म लेते अर्थ ग्रहण करते, शब्द समय समय पर अर्थ बदलते! शब्द उलटते पलटते और शब्द बोलते भी शब्द मनोरंजक होते और शब्द चलते भी शब्द ऊंचे उठके उन्नति करते नीचे गिरके अवनति शब्द मोटे होते, दुबले होते, शब्द घिसते पिटते रहते […] Read more »
कविता मुझे रास्ते का पता न था November 24, 2022 / November 24, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment चित्रा जोशी उत्तरोड़ा, कपकोट बागेश्वर, उत्तराखंड मुझे रास्ते का पता न था। मेरी माँ को मंजिल का पता न था।। बहुत ख़ूबसूरत था जीवन का सफर। जो आ गई मैं दुनिया में अगर। सुनाए थे मां को कितने ही ताने।। बदली थी सबकी खुशियां गम में। मगर मां के लिए मैं लक्ष्मी थी। उसके होंठों की एक ख़ुशी […] Read more »
कविता उठो! हिम्मत दिखाओ November 24, 2022 / November 24, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment प्रेरणा सिंह कोड, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड सपना देखना होता है आसान। तुम उसे पूरा करके दिखाओ।। दौड़ना तो हर कोई चाहता है। सबसे आगे बढ़ कर दिखाओ।। हार तो मिलती है ज़िंदगी में। हार को जीत कर दिखाओ।। मुश्किल हर किसी को आती है। उन मुश्किलों से लड़कर दिखाओ।। लोग गिराते है कदम-कदम पर। तुम […] Read more » उठो! हिम्मत दिखाओ
कविता ऐ ब्युटी लड़की! तुम नारी अहिल्या सी छली क्यों जाती कपटी इन्द्र से? November 24, 2022 / November 24, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ऐ ब्युटी लड़की! तुम सचमुच के बिष्ट से प्यार कर बैठी तुमने इंग्लिश मिशन स्कूल में कहानी पढ़ी ए फेयरी टेल ‘ब्युटी एण्ड द बिष्ट’ की जिसमें एक बिष्ट वास्तव में एक शिष्ट रहमदिल मगर राजकुमार था वो शापित! उस बिष्ट ने बिना ब्युटी की मर्जी से उसे छुआ तक नहीं जबतक […] Read more »