कविता दुआ August 22, 2022 / August 22, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment दुआ दिल के बेहद करीब रहती हैपर हर किसी को कहाँ नसीब होती है।मोल नहीं इसका यह अनमोल मोती हैदुआ में शामिल खुदा की नेहमत रहती है। पूरी होगी आरजू मन में विश्वास धरेंदुआ उन जवानों के लिए आज करेंजो हमारी सुरक्षा हेतु सीमा पर खड़े।आँच न पहुंचे हम में से किसी परयही दुआ मन […] Read more »
कविता कृष्ण तुम ही हो मेरे खेवनहार August 22, 2022 / August 22, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment माखन-चोर कन्हैया की छटा निरालीशीश पर मोर-पंख, अधरों पर लाली।गोपियों के रास-रचैया, भक्तों के तारणहारकृष्ण तुम ही हो मेरे खेवनहार। तुझ संग मेरी प्रीत लगी ओ साँवरे !आकर मेरी पतवार तू थाम ले।तन-मन-जीवन तुझ पर अर्पणस्वीकार कर कान्हा मेरा समर्पण।गोपियों के रास-रचैया, भक्तों के तारणहारकृष्ण तुम ही हो मेरे खेवनहार। आततायी कंस ने जब मचाया […] Read more » Krishna you are my savior कृष्ण तुम ही हो मेरे खेवनहार
कविता परशुराम के वंशज हैं August 21, 2022 / August 21, 2022 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment हम भगवान परशुराम के वंशज हैं,जप तप पूजा पाठ करना जानते हैं,सनतान धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए,दुश्मनों को युद्ध में परास्त करना जानते हैं। हिम्मत व हौसले के दम पर युद्ध में हम,विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी,मानव व मानवता की रक्षा की खातिर,अद्वितीय वीरता से लड़ना जानते हैं। अन्याय होता है जब […] Read more » परशुराम के वंशज हैं
कविता समय नहीं है | समय नहीं है | August 18, 2022 / August 18, 2022 by अभिषेक कुमार | Leave a Comment रोज सबेरे उठकर हम ,शुद्ध पवन का स्पर्श पाकर; प्रांगण जाया करते थे ,मंद गति से पैदल चलकर ; मध्य प्रांगण में बैठकर हम , आत्म शांति का अनुभव कर ; मन एकाग्रित करते थे ,पलक झपक कर ,हाथ जोड़ कर ; हाथ फैलाकर , पैर मोड़कर , कमर झुका कर , गर्दन ऊपर कर ; व्यायाम किया […] Read more » समय नहीं है
कविता किताबों की दुनिया August 18, 2022 / August 18, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मानसी आर्यचोरसौ, गरुड़बागेश्वर, उत्तराखंड किताबों की अनूठी दुनिया है महान।स्वच्छ, सफलता और शिखर का इसमें ज्ञान।। मुश्किल है थोड़ा इसको पढ़ना।लेकिन यह है शिक्षा का भण्डार।। पढ़ना लिखना जिसने चाहा।उच्च शिखर को पाना चाहा।। गर सपने को हो पूरा करना।किताबों की अनूठी दुनिया में घुस जाना।। रंग-बिरंगे पन्ने हैं जिसके।है जिसमें सतरंगी सवाल।। बूझो तो यह है जाना।किताबों […] Read more »
कविता हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है August 15, 2022 / August 15, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे पार्थ! जीव आत्मा है परमात्मा है,पर शरीर से जाना पहचाना जाता है! शरीर की गतिविधि से ही ज्ञात होती,आत्मा की स्थिति, मानसिक अवस्था! शारीरिक क्रियाकलाप से ही पता चलताआत्मा की उपस्थिति और जीव की दशा! शरीर ही पहचान है सब जीव-जन्तुओं का,देह की वजह से ही किसी का नेह मिलता,देह की वजह […] Read more » Hey Partha! The soul is the soul but is identified with the body हे पार्थ! जीव आत्मा है पर शरीर से पहचाना जाता है
कविता उड़े तिरंगा बीच नभ August 12, 2022 / August 12, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment आज तिरंगा शान है, आन, बान, सम्मान।रखने ऊँचा यूँ इसे, हुए बहुत बलिदान।।नहीं तिरंगा झुक सके, नित करना संधान।इसकी रक्षा के लिए, करना है बलिदान।।देश प्रेम वो प्रेम है, खींचे अपनी ओर।उड़े तिरंगा बीच नभ, उठती खूब हिलोर।।शान तिरंगा की रहे, दिल में लो ये ठान।हर घर, हर दिल में रहे, बन जाए पहचान।।लिए तिरंगा […] Read more » poem on Independence Day
कविता मेरा भारत मेरा तिरंगा August 12, 2022 / August 12, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सूरज बन कर जग में चमके,भारत देश हमारा।हर घर में तिरंगा फहराए ये मिशन अब हमारा।। विश्व गुरु हों जाए भारत,यही कामना करते है।सुख शांति हो सारे विश्व में,ये भावना रखते है।। अन्त हों आतंकवाद का,जो डर फैलाया करते है।सफाया हो उन सबका,जो बिना बात ही लड़ते है।। सबके दिल में प्रीत बनाओ,बोलकर मीठी वाणी।सारा […] Read more » my india my tricolor poem on Independence Day
कविता आज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब? August 12, 2022 / August 12, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज क्यों इतना छुईमुई हो गया धर्म मजहब?क्यों ईश्वर अल्लाह रब हो गया अलग अलग? आज का आदमी आदमी से करने लगा नफरत,आदमी आदमी रहा नहीं हो गया फिरकापरस्त! आज ऐसा है माहौल कि चहुंओर जहरीला बोल,आदमी काफिर कसाई होकर बन चुका माखौल! अपनी मनमानी को खुदा की नाफरमानी कहते,अब आदमी धर्म मजहब […] Read more » Why has religion become so touchy today?
कविता अब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते August 12, 2022 / August 12, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअब राजनीति में नेताचोला नहीं अंतरात्मा बदल लेतेकल तक जो भ्रष्टाचारी थेउन्हें महात्मा कहने पर बल देतेस्वार्थ सिद्धि हेतु जनता से छल करते! भाई भतीजावाद के लिए जीते मरतेअब राजनेता क्या क्या नहीं करते रहते?कुकर्म को सुकर्म, सुकर्म को कुकर्म कहते! ऐसे तो मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना होतेराजनीति में राम में रावण होते, रावण […] Read more » अब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते
कविता ये तिरंगा परचम लहरानेवाला भारत की महान संस्कृति का August 8, 2022 / August 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअब तो सन दो हजार बाईस ईस्वी में मनाना है,अब तो आजादी का पचहत्तरवां दिवस को आना है,हां! पंद्रह अगस्त को घर-घर में तिरंगा फहराना है,आजादी का अमृत महोत्सव हम सबको मनाना है! हर घर में तिरंगा हो,जय हो,हर हाथ में तिरंगा हो,ना देश में दंगा हो, नहीं कोई भूखा प्यासा नंगा हो,ईमान […] Read more » This tricolor hoist is a symbol of great culture of India.
कविता भारत के वीर सेनानियों के प्रति भावांजलि August 4, 2022 / August 4, 2022 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment देश के सपूतों, मातृभू के रक्षकों, क्रांतिवीर बन्धुओं, शूरवीर सैनिकों, साहसी सेनानियों !! माँ तुम्हें पुकारती, माँ तुम्हें पुकारती। * आज […] Read more » poem on Independence Day Tribute to the brave fighters of India