कविता बच्चों का पन्ना चिड़िया पर एक बाल कविता March 5, 2022 / March 7, 2022 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on चिड़िया पर एक बाल कविता मम्मी कुछ चिड़ियां छत पर आई है,भूखी प्यासी और सुकचाई सी हैं।मुझको तुम चावल के दाने दो,छत पर मुझको तुम जाने दो।उनको मै चावल के दाने खिलाऊंगा,साथ में उनको मैं पानी पिलाऊंगा।कुछ दाने तो वे चिड़िया खायेगी,कुछ अपने बच्चों को ले जायेगी।चोंच में उनके दाना वह डालेगीतभी तो अपने बच्चों को पालेगी।बच्चे जब उसके बड़े […] Read more » a children's poem on a bird चिड़िया पर एक बाल कविता
कविता सुख नहीं दुख बांटने के लिए होते जन्म के रिश्ते March 4, 2022 / March 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on सुख नहीं दुख बांटने के लिए होते जन्म के रिश्ते —विनय कुमार विनायककुछ रिश्ते बन कर आते हैंकुछ रिश्ते बनाए जातेबनकर आने वाले रिश्तों के प्रतिजिम्मेवारियां बहुत होतीतैयारियां कुछ नहीं होतीबस फर्ज वफादारियां निभाई जातीपिता भ्राता को देखकरअगर खिलखिलाने लगे बहन बेटियांतो सुकून मिलता हैसमझो निभ गई सारी जिम्मेदारियांजबतक ब्याही गई बहन बेटियांमुस्कुरा कर विदा होतीतो समझो मिट गई सभी दुश्वारियांजब ब्याही गई बहन बेटियांआंखें […] Read more »
कविता नागार्जुन का शून्यवाद; कुछ भी ध्रुव सत्य नहीं होता March 4, 2022 / March 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनागार्जुन दक्षिण भारत के एक ब्राह्मण,एक सौ पचास से, ढाई सौ ई. मध्य में,माध्यमिक मतवादी बौद्ध दार्शनिक थे! आर्य नागार्जुन ने शून्यवाद दर्शन दिया,संसार में कुछ भी ध्रुव सत्य नहीं होता,सतत परिवर्तन को सत्य घोषित किया! नागार्जुन ने कहा था जिसे परम्परावादीवास्तविक ज्ञान कहते,वस्तुत:वे वस्तु केविषय में, निजी वक्तव्य होते किसी के! आमतौर […] Read more » ; nothing is true Nagarjuna's nihilism नागार्जुन का शून्यवाद
कविता बारूद के ढेर पर बैठी है आज ये दुनिया March 4, 2022 / March 4, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बारूद के ढेर पर बैठी है आज ये दुनिया,पता नही किधर जायेगी आज ये दुनिया।जब से हुआ है युद्ध रसिया यूक्रेन का,भयभीत हो गई है अब सारी ये दुनिया।। विश्व युद्ध न हो जाए,इससे परेशान है ये दुनिया,अपने अपने बचाव में लगी है सारी ये दुनिया,स्वार्थी सभी हो गए कोई किसी को न पूछता,कौन किसी […] Read more »
कविता ज्ञान बांटने में नहीं कुछ खोने का डर February 25, 2022 / February 25, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं शब्दों का हमसफरमैं शब्द की साधना करता हूंमैं स्वर की अराधना करता हूंअक्षर-अक्षर नाद ब्रह्म हैमैं अक्षर की उपासना करता हूं! मैं लेखनी का मसीधरमैं भावचित्र बनाता कागज परलेखनी से लिपि उकेरकरमन के उद्गार को देता स्वरमैं वाणी की वंदना करता हूं! मैं पुस्तकों का हूं सहचरपुस्तक के पन्नों को खोलकरबंद विचारों […] Read more » Fear of losing nothing in sharing knowledge ज्ञान बांटने में नहीं कुछ खोने का डर
कविता गुरु की महिमा February 25, 2022 / February 25, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment गुरु बिन न ज्ञान होत है,गुरु बिन न कोई है समान |गुरु बिन मार्ग दिखत है,गुरु बिन बढे न कोई शान || गुरु ज्ञान की बेल है,बाकी सब है कंटीली बेल |ये ऊपर ले जायेगी,बाकी हो जायेगी सब फेल || गुरु की नित वंदन करो,हर दिन है गुरुवार |गुरु ही देता शिष्य को अच्छे अचार […] Read more » गुरु की महिमा
कविता मृत्यु के कई कई दिनों बाद मौत की अनुभूति होती February 24, 2022 / February 24, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमृत्यु के कई कई दिनों के बाद हीमनुष्य को मौत की अनुभूति होती! मृत्यु के बाद सूक्ष्म देहधारी आत्मामृत देह के पास जाती प्रयास करतीअपने मृत शरीर में जाने समाने की! परिजनों को अवाक होकर निहारतीकभी इसके पास, कभी उसके पासकभी श्मशान कभी कब्रिस्तान जाती! स्वप्नवत् उन्हें कभी बहुत पीड़ा होतीजलते जलाते हुए […] Read more » मृत्यु के कई कई दिनों बाद मौत की अनुभूति होती
कविता आत्म चेतना यानि अपनी चैतन्यता से परमात्मा को पाना February 23, 2022 / February 23, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआत्मा ही अपना है बाकी बेगानाआत्मा ‘मैं हूं’ नहीं हैमैं तो अहं है अहंकार का सृजनकर्ताआत्मा का अर्थ आत्मन स्वयं होताअस्तु ‘मैं’ का अहं त्याग करसिर्फ ‘हूं’ होना होता आत्म चेतनायह ‘हूं’ ही है परम चेतना परमात्माये ‘मैं’ के आवरण से घिरी आत्मामैं के अहंकार भाव से मुक्त होकरआत्मा ही परमात्मा को प्राप्त […] Read more » आत्म चेतना यानि अपनी चैतन्यता से परमात्मा को पाना
कविता पति पत्नि की नोक झोंक February 23, 2022 / February 23, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment क्या बताऊं मैं तुमको दोस्तो,मेरी पत्नि क्या-क्या करती है।सुबह सुबह रामायण पढ़ती है,सारे दिन महाभारत करती है।। जब उससे तू-तू, मैं-मै होती है,या उससे मेरी हाथापाई होती है।सारे घर के दरवाजे बंद करके,वह बेलन से मेरी खबर लेती है।। व्यस्त रहती है वह मोबाइल पर,जरा भी उसे फुर्सत न मिलती है।संगीत की वह बहुत शौकीन […] Read more » पति पत्नि की नोक झोंक
कविता प्रभु का नाम जप ले तू बन्दे February 21, 2022 / February 21, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कर ले इस जीवन का सदुपयोग,ये बार बार न तुझे मिल पाएगा।अच्छे कर्म करेगा इस जीवन में,अच्छे फल दूजे जीवन में पाएगा। दोनो हाथ से कर ले तू दान अब,फिर समय तुझे न मिल पायेगा।जो तूने कमाई है धन व दौलत,मरने के बाद यही रह जायेगा।। प्रभु का नाम जप ले तू बंदे,तभी तू जीवन […] Read more » प्रभु का नाम जप ले तू बन्दे
कविता भारतवर्ष को चाहिए था चारु वाक् यानि चार्वाक दर्शन February 17, 2022 / February 17, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत वर्ष को चाहिए था चारु वाक्;सुन्दर साफ सुथरा कथन व प्रवचन,यानि चार्वाक दर्शन; नास्तिकता का,‘नास्तिको वेद निन्दक:’चार्वाक ऐसा! यानि न अस्ति स्वर्ग,न अस्ति नर्क,नहीं है अस्तित्व इस लोक के सिवा,ना दूजा लोक अमर देव अप्सरा का,जो इस लोक में वही लोकायत मत! भारत का बहुत अधिक हुआ शोषण,खोखली ब्राह्मणवादी आस्तिकता से!पुरोहितों ने […] Read more » . Charvak Darshan India wanted Charu Vak i.e. Charvak Darshan चार्वाक दर्शन
कविता जिंदगी का सच February 16, 2022 / February 16, 2022 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment हम सबने मानव जीवन पायाकुछ अच्छा कर दिखलाने कोसब धर्म एक है ,एक ही शिक्षाफिर हम सब हैं इतने बेगाने क्योंजो दूसरों का है दुःख समझतेदुःख रहता उनके पास नहींऔरों को हंसाने वालेरहते कभी उदास नहींआचरण हमारा ही हम सबकोहर ऊँचाई तक पहुंचाता हैअगर यह दुराचरण बन जायेतो गर्त तक ले जाता हैकष्ट उठाने से […] Read more » जिंदगी का सच