कविता हिन्दुत्व सदियों से सिखाता प्रीत रीत को February 9, 2022 / February 9, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दू तन है, हिन्दू मन है, मैं हिन्दू हूं,हिन्दू आनन, गेरुआ वसन, मैं हिन्दू हूं! मैं हिन्दू हिंसा-दूषण, इंसा-पूजन करता हूं,मैं हिन्दू हूं,अहिंसा का गुणगान करता हूं! मैं हिन्दू हूं ईश्वर में आस्थावान रहता हूं,मैं हिन्दू हूं, मानवता का गान सुनाता हूं! मैं सनातनी हिन्दू, ना किसी से तनातनी,मैं बात करुं वेद-पुराण आगम-निगम […] Read more » Hindutva teaches Preet Rit for centuries
कविता आ तुझ को तुझ से चुरा लू February 8, 2022 / February 8, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आ तुझ को तुझ से चुरा लू,प्यार से तुझे दिल में बसा लू।ख्वासिश है यह आखरी मेरी,तुझ को मै अपना बना लू।। कजरे की जगह तुझे लगा लू,बंद नयनों में मै तुझे बसा लू।तुम मेरे श्याम हो मै राधा तेरी,यह मोहनी सूरत तेरी बसा लू।। गजरे की जगह तुझे लगा लू,बालो में तुझ को मै […] Read more » come steal you from you आ तुझ को तुझ से चुरा लू
कविता अफगान विजेता: सरदार हरि सिंह नलवा का जलवा February 8, 2022 / February 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअफगान विजेता सरदार हरि सिंह नलवा का जलवा,कुछ ऐसा कि बाघ का जबड़ा दो फाड़कर चीर दिया! महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें ‘बाघमार’ उपाधि दी,हरिसिंह को सम्मान में कहा था वीर राजा नल सा! तबसे महाराजा रणजीत सिंह की सेना खालसा का,वो सर्वोच्च कमांडर हरि सिंह कहलाने लगे नलवा! अठाईस अप्रैल सत्रह सौ […] Read more » Afghan Conqueror: Sardar Hari Singh Nalwa Sardar Hari Singh Nalwa सरदार हरि सिंह नलवा सरदार हरि सिंह नलवा का जलवा
कविता यहाँ नहीं कुछ तेरा जोगी February 8, 2022 / February 8, 2022 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » nothing here is your jogi यहाँ नहीं कुछ तेरा जोगी
कविता अ ई ता- अ ई ता बोलें February 7, 2022 / February 7, 2022 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment तुम भागो हम पीछे दौड़ें ,पकड़ा -पकड़ी खेलें | तुम किरणों की डोर पकड़कर ,चंदा के घर पहुँचो |काला उस पर दाग लगा जो ,खुरच- खुरच कर पोंछो |फिर साबुन पानी से अपने ,हाथ रगड़ कर धोलें | आँखों से, मेरी आँखों में ,धूल झोंककर जाओ |दौड़ लगाकर अम्माजी के ,आंचल में छुप जाओ |हम […] Read more » Say aee ta- a e ta अ ई ता- अ ई ता बोलें
कविता हे भारत की कोकिला…. February 6, 2022 / February 6, 2022 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment ●●●सूने-सूने गीत अब,सूने-सूने साज !संग लता के खो गयी,भारत की आवाज़ !!●●●आँखों में पानी भरा,पूरा देश उदास !गयी हमें तुम छोड़कर,गए नहीं अहसास !!●●●स्वर आपकी शान थे,स्वर आपकी आन !स्वर आपने जो चुने,स्वर बने पहचान !!●●●गूँज रही है आपकी,कण-कण में आवाज़ !हे भारत की कोकिला,हमको तुम पर नाज़ !!●●●नहीं नाम ये अब गुमे,अक्स रहेगा याद […] Read more » O Nightingale of India हे भारत की कोकिला
कविता बसंत ऋतु है आई February 4, 2022 / February 4, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आलोकिक आनंद देने वाली, बसंत ऋतु है आई।धरती ने फूलो के गहने पहने,वह आज है मुस्काई।। महक उठी सारी धरती,गगन से मिलने को है आतुर।पहन बसंती वस्त्र नर नारी बसंत मनाने को है आतुर।। पुष्प चढ़ाकर, करते है मां सरस्वती को हम नमन।देती विद्या का दान,जब हो जाती वह हमसे प्रसन्न।। ओढ़ी पीली चादर खेतो […] Read more » it's spring बसंत ऋतु है आई
कविता जातिवाद, वृन्दावन से लुम्बिनीवन तक February 3, 2022 / February 3, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकजातिवाद का जहरवृन्दावन से लुम्बिनीवन तकजस का तस पसरा पड़ा है! प्रिय दलित-अंत्यजो!ईश्वर-खुदा-भगवान भीहो सकते नहीं इस मर्ज की दवासदियों से सैकड़ों दिए इम्तहानपर क्या मिला तुम्हें आज तकएक अदद आदमी होने का सम्मान? तुम्हें शुद्ध करने में खुदभगवान हो गए अशुद्धबुद्ध से गांधी तक खूब फजीहत हुईतुम्हारी और तुम्हारे भगवान की भी! […] Read more » Casteism from Vrindavan to Lumbinivan जातिवाद वृन्दावन से लुम्बिनीवन तक
कविता ऐसे रब किस काम के जो सबके काम न आवे February 3, 2022 / February 3, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकऐसे रब को क्या माननाजिसको मानने के लिए पड़ जाएसर पर कफन को बांधनाजिसे मनवाने के लिए जरूरी हो जाएविधर्मियों पर मुक्का ताननाजिसको फरियाद सुनाने के लिए जरूरीबुक्का फाड़ फाड़कर चिल्लाना! ऐसे रब को क्या माननाजो उपलब्ध हो किसी खास स्थान मेंजिससे मिलने जाने के लिए पड़ जाएपरदेश जाना भीसा पासपोर्ट बनवाना! ऐसे […] Read more » What is the use of such a Lord who does not work for everyone? ऐसे रब किस काम के जो सबके काम न आवे
कविता एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती January 31, 2022 / January 31, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक राशि वालों की नियति एक नहीं होती,राम ने रावण को संहारा,कृष्ण ने कंस को,गोडसे ने गांधी को मारा रहस्य को समझो,राशिफल देखके क्या फायदा कर्मफल देखो! जैसी करनी वैसी भरनी कहावत कैसे बनी?गीता को छूकर सिर्फ कसम मत लो, पढ़ो,जैसा कर्म करते हैं लोग वैसा फल मिलता,कोई राम रावण, कोई गोडसे गांधी […] Read more » Destiny of same zodiac is not same एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती
कविता याद मेरी,तुम्हे आती तो होगी January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment याद मेरी तुम्हे आती तो होगीआकर तुम्हे सताती तो होगी।। सुबह जब तुम उठती तो होगी,नींद तुम्हारी खुलती तो होगी।पास न पाती जब तुम मुझको,दिल में बैचैनी होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,,,,, ठंडी हवा सुबह चलती तो होगी,मेरा संदेश तुम्हे देती तो होगी।मिलता न जब संदेश तुम्हे मेरा,दिल में तडपन होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,, नहाने जब […] Read more » तुम्हे आती तो होगी याद मेरी याद मेरी तुम्हे आती तो होगी
कविता डोली व अर्थी में वार्तालाप January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते चली। अर्थी बोली डोली से,तू पिया के घर चली,मै प्रभु के घर चली।तू डोली में बैठ चली,मै चार कंधो पर चली।फर्क इतना है दोनो में सखि,तू अपने जहां में चलीमै अपने जहां से चली।”एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते […] Read more » conversation between doli and earth