कविता आज़ादी का जश्न मनाएं ।। August 13, 2021 / August 13, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment आज़ादी का जश्न मनायें, आओ झूमे गाएं ।दी है जान वतन पर जिसने, उनको नहीं भुलाएं।। वीरों ने जो सपने देखें, पूरा कर दिखलायाऔर विदेशी गोरों को भारत से मार भगायायाद उन्हें कर अपना तिरंगा, नभ में हम फहराएंआज़ादी का जश्न मनायें, आओ झूमे गाएं ।। जूझे थे जो भूख, विवशता, और जूझे कंगाली सेगोरों […] Read more » Celebrate Freedom आज़ादी का जश्न मनाएं
कविता मनु स्मृति और वर्ण व्यवस्था August 12, 2021 / August 12, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment -विनायक कुमार विनायकजी हां!मनु स्मृति को पढ़ते हुए ऐसा लगताकि तुम पिछड़े और कमजोर लघुमानवों केभविष्य को अबभी मुट्ठी में बंद किए हुएसत्तर वर्ष पूर्व राजेन्द्र-अम्बेडकर नेभृगु-वशिष्ठ के उस संविधान को बदलाजो मानव पिता मनु नहीं,बाबाभृगुकी कृति मनुस्मृति थी! मनु नेपहले अध्याय में ही कहा हैये भृगु इस संपूर्ण शास्त्र को तुम्हें सुनाएंगे‘एतद्वोऽयं भृगुः शास्त्रं […] Read more » मनु स्मृति और वर्ण व्यवस्था
कविता ब्राह्मणत्व को जाति में ढ़ालनेवाले August 11, 2021 / August 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ब्राह्मणत्व को जाति में ढालने वाले, अभिजात वर्ग के अधिकारी! क्या तुम इसकी परिधि में समा जाते अगर ब्राह्मण में द्विजत्व की पराकाष्ठा का अमृतत्व है, तो लघुता का विष,पतितों का अस्तित्व और शूद्रत्व का हलाहल भी है! जिसे मुश्किल हैतुम्हें पचा जाना! तुम महारस पायी देव हो! क्षुद्रता के रसपान से […] Read more » casters of brahminism ब्राह्मणत्व को जाति में ढ़ालनेवाले
कविता आदिवासी नहीं कोई जाति यह एक अवस्था है August 10, 2021 / August 10, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआदिवासी नहीं कोई जाति यह एक अवस्था है,आदिवासी जनजातिकीअवस्था सेहर नस्लवर्णजातिवर्गकोगुजरना होता है! आज की वर्तमानवर्णाश्रमी जातिकल कबिलाईआर्यआदिवासी जनजातिथी! एक समय में अनेक आदिवासी जनजाति होसकती,वर्णाश्रमी जातियों जैसीसमकालीनआदिवासी जनजातियों मेंसमानता नहीं होती! आज भारतीय आदिवासी हैंसंथाल,पहाड़िया, मुंडा, उरांव,हो,कोल,भील,किरात,खरबार, मीना आदिजनजाति,जो आपस में तनिक मेल नहीं खाती! खरबार,मीना, मुंडा जनजाति का रीति रिवाजमिलता है […] Read more » Tribal no caste it is a state आदिवासी
कविता सात मनुओं का काल कहलाता है सात मन्वन्तर August 10, 2021 / August 10, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसात मनुओं का काल कहलाता हैसात मन्वन्तर,पहला मनु स्वायंभुव, फिरस्वारोचिष,उत्तम,तामस,रैवत,चाक्षुष औरवैवस्वत मनु का यह मन्वन्तर! स्वायंभुव मनु से चाक्षुष मनु तक सभी मनु थेप्रथमस्वायंभुव मनु और शतरुपा के ही वंशधर! चाक्षुष मनु के काल में हुआ था महा जल प्रलयऔर पूरी मनुर्भरती संस्कृति का हो गया था लय! अबकथा हैवैवश्वत मनु केवर्तमान मन्वंतर […] Read more » The period of seven Manus is called Seven Manvantaras. सात मन्वन्तर
कविता स्वागतम् हिन्द का गौरव बढ़ाने वालों… August 10, 2021 / August 10, 2021 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment स्वागतम् सुस्वागतम् हिन्द का गौरव बढ़ाने वालों गगनभेदी उद्घोषों में विजयी पताका चहुंओर फहराकर राष्ट्रगान का मान बढ़ाने वालों। स्वर्ण, रजत, कांस्य में कोई फर्क नहीं, सब मातृभूमि के चरणों में हैं अर्पण। दृढ़ संकल्पित स्वर्ण लक्षित लबरेज उन्माद,विजयी प्रमाद हताशा निराशा से करो दूर अब अपना मन मस्तिष्क। जो गए थे सबके सब हैं […] Read more » हिन्द का गौरव बढ़ाने वालों
कविता काश कि तुम विषपायी होते शिव के जैसे August 9, 2021 / August 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककल तक जो पानीपी-पीकरकोस रहे थेदलित आदिवासी पिछडे़जन कोमत दो,शिक्षा और नौकरी में आरक्षण,वही आजआरक्षण का अमृत पान कर चुप क्यों हैं? काश कि तुम विषपायीहोते शिव के जैसे,एक शिव हीहैं जो बिना वर्ण-जाति विचारेसबको वरदान देते, खुद कालकूटपी लेते,सबको अमृत पिलाने वाले, खुद नहीं पीते! आरक्षण तबतक बुरा जबतकनहीं मिला,आरक्षण नहीं, आरक्षित […] Read more » काश कि तुम विषपायी होते शिव के जैसे
कविता तुम्हारे पूर्वज खुदा नहीं राम कृष्ण हैं August 9, 2021 / August 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment विनय कुमार विनायकधन्य-धन्य हैंवो मानव दुनिया में,जिसने भारत भूमि में जन्म लिया,भारत है वसुंधा में एक मुल्कऐसा,जिसनेसमग्र विश्व को ज्ञान दिया! भारतहैअतिसुन्दरदेशजहां में,जहां देवता आने से ललचातारहा,भारत की सभ्यता और संस्कृति हैऐसीजोसंपूर्णजगको भातीरही! भारत सर्वदा सत्य,अहिंसा पर चला,भारत में रहते हर जाति मजहबकेलोग,भारत देशहैसबके लिए भला,भारतवंशियोंने नहीं किसी को छला! अगर तुम हो भारत माता […] Read more » Ram Krishna Your ancestors are not God तुम्हारे पूर्वज खुदा नहीं राम कृष्ण हैं\
कविता जीत नहीं तो क्या हुआ, जीत से बढ़कर ये हार है… August 7, 2021 / August 7, 2021 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment हारीं तुम नहीं चन्द्रिके,हारा वो हर शख्श है,जिसने सदा तुम्हें टोकाबढ़ते कदमों को पीछे मोड़ा,प्रगति पथ पर बन कर रोड़ा। जमाना औरों के लिए सुखदायी था,पर तुम्हारे लिए ये सदा खराब रहा,हल्की सी हंसी भी, तीर ज्यों चुभीसांस भी सोच समझकर लिया,क्योंकि,भले घर का मेडल, तुम्हारे ही नाम रहा। वक्त न कभी बुरा था, न […] Read more » जीत नहीं तो क्या हुआ जीत से बढ़कर ये हार है…
कविता हे भाई स्वदेश को अपना देश समझो August 4, 2021 / August 4, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे भाई स्वदेश को अपना देश समझो,तुममां भारती के स्वदेशी बेटे होअपने स्वदेशी धर्म में वापसी कर लो! हे भाई स्वमाता-पिता को अपना समझो,तुम अरबी,तुर्की मूलके वासिंदेनहीं होफिरविदेशी मजहब के गुलाम क्यों बने हो! हे भाई तुमने क्यों परित्याग कर दिया,देशी धर्म,संस्कृति,शास्त्रऔ’दर्शनकोअपना लिए अबूझ मजहबी किताब को! हे मानव अपनेस्वदेशी भाई-बहनोंसेक्योंनफरत करते होकाफिर […] Read more »
कविता क्या पाया प्रेम करके August 4, 2021 / August 4, 2021 by लिमटी खरे | Leave a Comment कोई पूछे अगर मुझसेक्या पाया?प्रेम करके,सहज कह दूंगा! वहीं ढेर सारी यादेंजो अक्सर रह जाती हैंएक प्रेमी के पास! कई दिवा स्वप्नजो दिवा स्वप्न ही रहेसाकार ना हो सके! कुछ किरचें वेदनाओ कीचुभी हैं अब तकरिस रही है मवाद जिनसे! टूटा हुआ दिलजो धड़कता था वफादारी सेप्रेम ही के लिएदम तोड रहा है उसी की […] Read more » क्या पाया प्रेम करके
कविता धर्म और मजहब में बहुत अधिक अंतर होता August 2, 2021 / August 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवह भी कोई धर्म-मजहब है क्या?जिस धर्म-मजहब में हर सत्कर्मसिर्फगुनाह ही गुनाह लगता हो,हर मानवता विरोधीदुष्कर्म के लिएमजहब मेंकेवलवाह-वाह हो! भलावोधर्म-मजहबहोता कहींजिसमें राखी की कीमत नहीं,भाई मानकर बहन राखीपहनाएया नहीं, कोई अंतर होता नहीं! कोई विदेशीमजहबी, गैरमजहबीधर्मावलंबियोंसेनैतिक,पवित्र, चारित्रिक रिश्ता निभाता कभी नहीं!मजहब में पाप-पुण्य,जायज-नाजायज, नेकी-बदीकेवलजाति-बिरादरी,मजहबीकौमसापेक्षसही! विदेशीमजहबवालेगैरमजहबी स्वदेशी भाईयोंकोछल-कपट प्रपंचतलवारसे जोर आजमाइशकरकेधर्मांतरित करस्वमजहबी बनाने […] Read more » There is a big difference between religion and religion धर्म और मजहब में बहुत अधिक अंतर होता