कविता सुभाष चंद्र बोस January 23, 2021 / January 23, 2021 by मनीषा कुमारी आर्जवाम्बिका | Leave a Comment अटल था स्वदेश प्रेमइरादे थे उनके ठोसनेताजी कहते थे सबनाम था सुभाष चंद्र बोस विलक्षण बुद्धि के थे वोअद्वितीय था पराक्रमदेश की आज़ादी के लिएकिए उन्होंने सारे श्रम स्वाधीनता के बदलेवीरों से माँगते थे रक्तकरता है राष्ट्र नमनवो थे सच्चे देशभक्त ✍️ मनीषा कुमारी आर्जवाम्बिका Read more » सुभाष चंद्र बोस
कविता जन को-रोना से उबार दे January 22, 2021 / January 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकना राजा काना रानी काईश वंदना करता हूंनेता, अफसर, चपरासी काहक उपर से नीचे आएबीच में ना लटक जाएभ्रष्टाचार संहार दे! ना सस्ती काना महंगी काईश वंदना करता हूंमाल गोदाम तलाशी काखेत में पानी,जन को रोटीनकद में, उधार मेंअपना एक बाजार दे! ना तुलसी छंदना मुक्तक काईश वंदना करता हूंकबीरा की उलटबासी कानिराला […] Read more » जन को-रोना से उबार दे
कविता हे हंसवाहिनी माँ January 22, 2021 / January 22, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हे हंसवाहिनी माँहे वरदायिनी माँ अज्ञान तम से हूँ घिराअवगुणों से हूँ मैं भरासुमार्ग भी ना दिख रहाजीवन जटिल हो रहा ज्योति ज्ञान की जलाकरगुणों की गागर पिलाकरसत्पथ की दिशा दिखाकरजीवन सफल बना दो माँ हे हंसवाहिनी माँहे वरदायिनी माँ तू ही संगीत तू ही भाषातुम ही विद्या की परिभाषातेरी शरण में जो भी आताबुद्धि […] Read more » हे हंसवाहिनी माँ
कविता करो न गम की बाते January 22, 2021 / January 22, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करो न गम की बाते,आंखो को यू नम न करो |रखो दिल मे तसल्ली ,यू दिल मे गम न करो || पास बैठा हूँ मै तुम्हारे,जरा मुड़ कर तो देखो |प्यार करती हो मुझको बस उसे कम न करो || अभी दम है मेरे प्यार मे,उसे मरा न समझो |दम मे दम रखो तुम,उसे जरा […] Read more » करो न गम की बाते
कविता भीष्म:प्रतिभा अमर होती मिटती नहीं भौतिक प्रहार से January 21, 2021 / January 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment विनय कुमार विनायकभीष्म;प्रतिभा अमर होतीनाश हो सकती नहींकिसी घातक वार से जैसे कि ऊर्जा मिटती नहींकिसी भौतिक प्रहार से बदल जाती परिस्थितिनुसार असंभव था भीष्म को मारनानाकाफी थी अठारह अक्षौहिणी सेना किन्तु काफी था एक शिखण्डीभीष्म की जिजीविषा कोचिता भष्मी में बदलने के लिए शिखण्डी नाम नहींकिसी वीर्यवान पौरुष काया नारी की शक्ति का! शिखण्डी […] Read more » Bhishma: Pratibha immortal does not fade with physical hit भीष्म
कविता द्रोणाचार्य: प्रतिभा नाश हो सकती नहीं घातक वार से January 21, 2021 / January 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकद्रोण; प्रतिभा अमर होतीनाश हो सकती नहींकिसी घातक वार से जैसे कि ऊर्जा मिटती नहींकिसी धारदार औजार से अस्तु हथियार डाल देतीहकीकत की दीदार से कृष्णार्जुन की जोड़ी थीनाकाफी द्रोण बध के लिएकाफी था स्वजन का मृत्यु अहसास‘अश्वस्थामा हतो’ की अनुभूति अश्वस्थामा संज्ञा नहीं थीनर या कुंजर की अश्वस्थामा संज्ञा हैउस महामाया की […] Read more » द्रोणाचार्य
कविता अभिमन्यु:प्रतिभा नाश होती नहीं रसायन की मार से January 21, 2021 / January 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on अभिमन्यु:प्रतिभा नाश होती नहीं रसायन की मार से —विनय कुमार विनायकअभिमन्यु; प्रतिभा अमर होतीनाश हो सकती नहींकिसी घातक वार से जैसे कि ऊर्जा मिटती नहींकिसी रसायन की मार से अस्तु उत्परिवर्तित हो जातीहमारी भौतिक संसार से प्रतिभाशाली बालक अभिमन्युअवध्य था, हरियाली थाकिसी मां की गोद का विरवा था किसी पिता की सृष्टि का!सुहाग था किसी नवव्याहता बाला का!छतनार वृक्ष था किसी अजन्मा शिशु […] Read more » अभिमन्यु
कविता मां गुमसुम सी सोचती कहूं किसको? January 19, 2021 / January 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमानव जीवन में झमेले ही झमेले,छठी से अर्थी तक पीड़ा ही झेलते! सबका साथ रिश्तों का रेलम-पेला,यहां दुःख भोगे सब कोई अकेला! दुःख के दिन, अंगद पांव के जैसे,टस से मस की गुंजाइश ना होते! दर्द आवारा आशिक देखे ना दिन,झोपड़ी से महल तक दबोच लेते! सुख नेवला आए,दुःख सांप दुबके,फिर डंसने को […] Read more » मां गुमसुम सी सोचती कहूं किसको?
कविता थार के पारिस्थितिक तंत्र में अक्षय ऊर्जा की संभावनाएं January 18, 2021 / January 18, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment दिलीप बीदावत बाड़मेर, राजस्थान रेगिस्तान में अक्षय ऊर्जा अर्थात सौर और विंड एनर्जी निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। यहां साल के अधिकांश दिनों में सूर्य दर्शन होता है तथा तेज हवाएं भी चलती रहती हैं। अक्षय ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और वितरण पर कार्य चल […] Read more » Renewable energy prospects in Thar ecosystem अक्षय ऊर्जा की संभावनाएं
कविता तेरी कविताओं को काली स्याह सड़कें नहीं पढ़ती January 18, 2021 / January 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबार-बार जिसके खिलाफ लिखते कवितावे पढ़ते नहीं,मरती नहीं उनकी मानसिकताहर बार मर जाती तेरी कविता! जिसे रोज-रोज ही नोनिआए ईंट के माफिकएक-एक सड़े अवयव को फेंकते रहतेऔर चिपका देते हो तुम नव खरपाक ईंटेंफिर क्यों बालू की भीत सीभहरा-भहरा जाती तेरी लिखी कविताएं!! तेरी कविता तेरी रहती,होती नहीं उनकीजबतक वो नहीं पढ़ते जिनके […] Read more » काली स्याह सड़कें तेरी कविताओं को काली स्याह सड़कें नहीं पढ़ती
कविता तुम कब ठहरोगे अंगुलीमाल January 18, 2021 / January 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअंगुलीमाल अंगुली काटता थाजिसके पास माल होता था! अंगुलीमाल सिर्फ नहीं था डाकूबल्कि पाप-पुण्य बोधवाला थाबाल-बच्चेदार सामाजिक प्राणी! जिसकी तादाद आज भी समाज में,बहुतायत में मिलते, ढेर अंगुलीमाल!अंगुलीमाल अपने ठौर से गुजरतेहर राहगीर की अंगुली नहीं काटता था! वर्णा गौतम बुद्ध कैसे लौट आतेसभी अंगुलियों के साथ आशीर्वाद देने! इतिहास अकसर झूठ नहीं […] Read more » तुम कब ठहरोगे अंगुलीमाल
कविता मोबाईल में है अब जिंदगी January 16, 2021 / January 16, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सारे रिश्ते सिमट गए हैं आज मोबाइल मे,सारे सम्बन्ध चिपट गए हैं आज मोबाईल मे,कितना बदल गया है इंसान इस ज़माने मेंसारा दिन चिपटा रहता हैं वह इस मोबाईल मे।। शोक संदेश भी आने जाने लगे हैं मोबाईल से,निमंत्रण भी मिलने लगे है आज मोबाईल से,आता जाता नहीं इंसान किसी के दुख सुख में,सुख दुख […] Read more » मोबाईल में है अब जिंदगी