कविता साहित्य नारी पुत्री ही नही वो माता है पिता का भी December 28, 2020 / December 28, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनारी तुम्हारी बांहों में सोता है शिशु नर,नारी तुम्हारी बांहों में बंधा आकाशी नर! नारी तुम्हारी बांहों में रोता है मुमुक्षु नर,नारी तुम्हारी बांहों में शांति से मरता नर! नारी के प्यार में नर आता पुनः देह धर,नारी तुम्हारी गहराई को क्या नापेगा नर? नारी तुम्हारी सीमा को क्या बांधेगा नर?नारी तुम्हारा पग […] Read more » Not only a female daughter she is also a mother of a father नारी पुत्री ही नही वो माता है पिता का भी
कविता बन सौरभ तू बुद्ध !! December 27, 2020 / December 27, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment मतलबी संसार का, कैसा मुख विकराल !अपने पाँवों मारते, सौरभ आज कुदाल !! सिमटा धागा हो सही, अच्छे है कम बोल !सौरभ दोनों उलझते, अगर रखे ना तोल !! काँप रहे रिश्ते बहुत, सौरभ हैं बेचैन !बेरूखी की मार को, झेल रहें दिन-रैन !! जहर आज भी पी रहा, बनता जो सुकरात !कौन कहे है […] Read more » बन सौरभ तू बुद्ध
कविता इन दिनों।। December 27, 2020 / December 27, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनोंकुछ की बदल गयी है देखो चाल इन दिनोंजो हाथ मिलाते थे अदब से करें आदाबअब पूछते नहीं हमारा हाल इन दिनोंसुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।। क्या बात है मचा है क्यो बवाल इन दिनोंपूंजीपती ही देखो मालामाल इन दिनोंसड़कों पे उतरते हैं […] Read more » इन दिनों
कविता नारी तुम नारायणी हो नर का सृजनहार December 27, 2020 / December 27, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनारी के ह्रदय में अमृत, मन में प्यार,नारी तुम्हारे सामने,बौना है ये संसार! तुम असीम,अतुलनीय ईश्वरीय शक्ति,तुलना तुम्हारी नर से करना है बेकार! तुम्हीं सरस्वती-भगवती-भवानी-मानवी,तुम अक्षर-जर-शक्ति-संस्कृति आधार! तुम्हारे सिवा ईश्वर को देखा है किसने,ईश्वर-अल्ला-भगवान होते हैं निराकार! राम-कृष्ण-बुद्ध-जिन-ईसा-गुरु-पैगम्बर,पाए हैं सबने तुम्हारी कोख में आकार! हिमगिरि सा उतुंग, तुम सागर सी गहरीतुम दया-माया-ममता-करुणा की […] Read more » female Creator of male Woman you are Narayani नारी तुम नारायणी
कविता मां नाम है उस देवी की जो जन्म हमें देती है December 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां नाम है उस देवी की, जो जन्म हमें देती है,मां सृष्टि में इकलौती है, जो सिर्फ हमें देती है! माता की ममता ऐसी है,जिसमें मन्नत होती है,मां ईश्वरीय सृष्टि में जीते जी जन्नत होती है! मां का गुणगान केवल मां शारदे कर सकती है,सारे देवी-देवता मूरत, मां देवी साक्षात होती है! सूर्य-चंद्र-तारे-धरती […] Read more » Mother is the name of the goddess who gives birth to us poem on mother पोयम ऑन मदर
कविता खुदीराम बोस ने कृष्ण की गीता को लेकर शहादत दी थी December 26, 2020 / December 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयह व्यथा-कथा है तबकी जब बंगाल-बिहार-उड़ीसा एक थी,अंगिका-मैथिली-बंगला-उड़िया अलग से भाषा नहीं बनी थी! विद्यापति की पदावली अंग-बंग-कलिंग की साझी वाणी थी,ये हिन्दी आधुनिक साहित्य की भाषारुप में नहीं पनपी थी! आज की तरह हम बिहारी, बंगालियों के लिए बाहरी नहीं थे,दादी अंगिका गीत गाती थी,बाबा बंगला महाभारत पढ़ते थे! मां, सासु मां […] Read more » खुदीराम बोस
कविता उन्हें भी होगा कोविड-19 सा डर December 24, 2020 / December 24, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकचलते हैं हम मास्क लगाकरजैसे रुस का ऋक्ष और भारत केटोटमवादी वानर जामवंत, हनुमानकभी बन जाते थे ब्राह्मण औरकभी पूंछधारी लंगूर सा बन्दर! शायद उन्हें भी होगा कोविड-19 सामानव प्रजाति के विनाश का कोई डर! मानव जो भयभीत रहतेअपने अस्तित्व बचाने को लेकरतकनीकी यद्यपि थी काफी विकसित,हनुमान उड़ सकते थे सिंगल सीटरवायुयान की […] Read more » कोविड-19 सा डर
कविता श्री अनुपम मिश्र : सबसे लम्बी रात का सुपना नया December 22, 2020 / December 22, 2020 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी सबसे लम्बी रात का सुपना नयादेह अनुपम बन उजाला कर गया।रम गया, रचता गयारमते-रमते रच गया वह कंडीलों कोदूर ठिठकी दृष्टि थी जोपता उसका लिख गयासबसे लम्बी रात का सुपना नया… रमता जोगी, बहता पानीरच गया कुछ पूर्णिमा सीकुछ हिमालय सा रचा औहैं रची कुछ रजत बूंदेंशिलालेखों में रचीं कुछ सावधानीवह खरे तालाब […] Read more » श्री अनुपम मिश्र
कविता सत्य बोलने में सदा होता है भूमा का सुख December 22, 2020 / December 22, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे भगवन!मुझे ज्ञान दो! मुझे जानना क्या? ‘सत्य जानने योग्य है, तुम सत्य को जानोऔर सत्य संभाषण करो! सच हमेशा बोलो’सत्य के सिवा सब है मिथ्या औ’ अविद्या! मिथ्या को सत्य मान कदापि नहीं बोलना! जब ज्ञान नही, तो सत्य भान कैसे होगा?सत्य से अनजान हूं,मैं सत्य कैसे बोलूंगा? ‘अस्तु सत्य जानने के […] Read more » सत्य बोल
कविता पैसा नही रचना कोई ईश्वर की December 21, 2020 / December 21, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकखत्म हुआ आदमियतसब कुछ हो गया पैसा,मिला नहीं अवैध पैसाकलतक जो अपना था,अब हो गया ऐसा-वैसा! सभी जानता पैसा अनाफना होनेवाला असासा,पास होने पर अहसासदिलाता है अच्छाई का,आदमी बुरा बिना पैसा! पैसा पाकर जैसा-तैसाआदमी समझने लगताअपने को ऐसा, मानोपैसा ही सबकुछ होता,ईश्वर से उपर है पैसा! पैसों में परख नहीं हैआदमियत इंसान का,सबकुछ […] Read more » Money is not created by any God पैसा नही रचना कोई ईश्वर की
कविता भगवान कृष्ण हैं योग क्षेम के ईश्वर December 20, 2020 / December 20, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभगवान कृष्ण हैं नटवर!धेनु चराते वंशी धुन परनर्तन करते नाग के फन परपर्वत उठाते उंगली परयोग-क्षेम और युद्ध-प्रेम के ईश्वरभगवान कृष्ण हैं नटवर! भगवान कृष्ण हैं योगेश्वर!कर्मयोग, सांख्ययोग,भागवत भक्ति की घूंटीभ्रमित अर्जुन को पिलायायुद्ध भूमि में योगेश्वर बनकरभगवान कृष्ण हैं योगेश्वर! भगवान कृष्ण हैं मुनिवर!ज्ञान मिला था कृष्ण कोघोर आंगिरस अरिष्ठनेमी से,जो बाईसवें […] Read more » Lord Krishna is the God of Yoga भगवान कृष्ण
कविता तुमसे मेरे ख्वाब ! December 20, 2020 / December 20, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment घर-आँगन खुशबू बसी, महका मेरा प्यार !पाकर तुझको है परी, सपन हुआ साकार !! मंजिल कोसो दूर थी ,मैं राही अनजान !पता राह का दे गई, इक तेरी मुस्कान !! मैं प्यासा राही रहा, तुम हो बहती धार।अंजुली भर तुम बाँट दो, मुझको प्रिये प्यार।। मेरी आदत में रमे, दो ही तो बस काम।एक हाथ […] Read more » My dreams to you तुमसे मेरे ख्वाब