कविता मोहब्बत December 20, 2020 / December 20, 2020 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment नदी की बहती धारा है मोहब्बतसुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बतसागर की गहराई सी है मोहब्बतनिर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बतख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बतशाख पर अरमानों के गुल है मोहब्बतख्वाहिशों के दरमियां ,एक सवाल है मोहब्बतदर्द का किश्तों में ,आदाब है मोहब्बतलबों से दिल का पैगाम है मोहब्बतशब्द कलम […] Read more » मोहब्बत
कविता अन्न भोजन संसार का, किसान का रोना है December 17, 2020 / December 17, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककिसान लड़ रहे कीमत पाने उस धान के लिए,जो खलिहान की खखरी, व्यापारी का सोना है! किसान आज अड़ गए अपने सम्मान के लिए,अन्न भोजन संसार का, किसान का रोना है! किसान गुहार कर रहे अपने सामान के लिए,जिसका मालिक वो, किन्तु भाग्य में खोना है! किसान कभी लड़ते नहीं स्वगुणगान के लिए,जिसे […] Read more » Food is the cry of the world the farmer अन्न भोजन संसार का किसान का रोना है
कविता जंग-ए-आज़ादी की जुबान हिन्दी December 16, 2020 / December 16, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दी अहसास है अपनापन का,हिन्दी इन्कलाब है भारतजन का,हिन्दी सम्मान है निज वतन का,हिन्दी अभियान है जन मन का! जंग-ए-आज़ादी की जुबान हिन्दी,रविन्द्र का जन मन गान हिन्दी,बंकिम की बंदे मातरम की बोली,आजाद, भगतसिंह की जुगलबंदी! बिस्मिल की शेरों-शायरी हिन्दी,गांधी के जेल की डायरी हिन्दी,असफाक की जंगी तैयारी हिन्दी,बाबू कुंवरसिंह की बिहारी हिन्दी! […] Read more » Jung-e-Azadi's tongue Hindi जंग-ए-आज़ादी की जुबान हिन्दी
कविता धन्य-धन्य हैं शहीदों के माता-पिता December 15, 2020 / December 15, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकधन्य! धन्य! है वह पिता,जिसके बेटे ने देश हित में सीना को तान दिया! धन्य! धन्य! है वह माता,जिसके लाल ने देश हित में अपने प्राण को दिया! ऐसे पिता का जोड़ कहां,जिसके खूने जिगर ने स्वदेश को अपना खून दिया! ऐसी माता का तोड़ कहां,जिसके लख्ते जिगर ने मां की कोख को […] Read more » Blessed are the parents of the martyrs धन्य-धन्य हैं शहीदों के माता-पिता
कविता हमें इंसानियत की वाजिब सूरतेहाल चाहिए December 15, 2020 / December 15, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहमें ना दोजख, ना जन्नत बेमिसाल चाहिए,हमें तो चैन-सुकून का भारत विशाल चाहिए! हमें ना किल्लत चाहिए, ना जिल्लत चाहिए,हमें अपने देश के लोगों में मिल्लत चाहिए! हमें ना मालामाल चाहिए, ना फटेहाल चाहिए,हमें सब कोई अपने देश में खुशहाल चाहिए! हमें ना गंजेड़ी-भंगेड़ी, ना कोई मताल चाहिए,हमें टी.वी.स्क्रीन पे सच्चरित्र मिसाल चाहिए! […] Read more » fair day for humanity इंसानियत
कविता साक्षरता अभियान अंगिका में December 15, 2020 / December 15, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसुनॅ हे भइया! सुनॅ बहिनियाँ!सुनॅ मजदूर किसानवाँना,घर आंगन के स्वर्ग बनावैलॅतोहरॅ द्वार खड़ा छीं हम्मे याचक बनीराष्ट्र निर्माता गुरु पाहुँनवांना! भेजॅ तो आपनो मुनिया-सुगनवाँगुरुकुल-आश्रम आरु शिक्षा भवनवाँ मेंअंधियारी कॅ कोहरा छांटी के लौटतौंतोहरॅ ललनवां पहनी कॅ विद्या गहनवांना! सुनॅ हे दशरथ! सुनॅ कौशल्या!सुनॅ केकई! सुनॅ सुमित्रा बहिनियाँनाआपन देश बा में रामराज्य लावैलॅतोहरॅ द्वार […] Read more » साक्षरता अभियान
कविता कोरोना मे दिन मैंने कैसे काटे December 14, 2020 / December 14, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मत पूछो,कोरोना मे दिन कैसे मैंने काटे,हाथो मे पड थे छाले,पैरों में चुभे थे कांटे।दर दर ठोकरें हर जगह मुझे खानी पड़ी थी,ये मेरे लिए मुश्किल की बहुत बड़ी घड़ी थी। घर में बन्द था,नहीं जा सकता था मै बाहर,बच्चे भी मना कर रहे थे,जाओ नहीं बाहर।घर में बैठ कर लिखता था मै कुछ कविता,तड़फ […] Read more » How did I cut the day in Corona कोरोना मे दिन मैंने कैसे काटे
कविता ओ मां! भारत मां! December 14, 2020 / December 14, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment ओ मां! मेरी मां! भारत मां!तेरी कोख को ना भूल पाऊंगा,तेरी गर्भ में जन्म ले आऊंगा,ओ मां! मेरी मां! भारत मां! कभी बेटा बनकर तन जाऊंगा,कभी बेटी बन-ठनकर आऊंगा,कभी बनूंगा तेरा पहरेदार!ओ मां! मेरी मां! भारत मां! कभी तुम्हारी धानी चुनरिया,कभी तिरंगा बन लहराऊंगा,कभी सीमा की कटीली झार!ओ मां! मेरी मां! भारत मां! कभी अमुवां […] Read more » भारत मां
कविता किस से करे गुहार ! December 14, 2020 / December 14, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment सच्चे पावन प्यार से, महके मन के खेत !दगा झूठ अभिमान से, हो जाते सब रेत !! किस से बातें वो करे, किस से करे गुहार !भटकी राहें भेड़ जो, त्यागे स्व परिवार !! मंत्र प्यार का फूँकते, दिल में रखते घात !रिश्ते क्या बेकार है, करना उन से बात !! नेह-स्नेह सूखे सभी, पाले […] Read more » Whom to plead with! किस से करे गुहार
कविता कोरोना मे दिन मैंने कैसे काटे December 11, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मत पूछो,कोरोना मे दिन कैसे मैंने काटे,हाथो मे पड थे छाले,पैरों में चुभे थे कांटे।दर दर ठोकरें हर जगह मुझे खानी पड़ी थी,ये मेरे लिए मुश्किल की बहुत बड़ी घड़ी थी। घर में बन्द था,नहीं जा सकता था मै बाहर,बच्चे भी मना कर रहे थे,जाओ नहीं बाहर।घर में बैठ कर लिखता था मै कुछ कविता,तड़फ […] Read more » How did I cut the day in Corona कोरोना मे दिन मैंने कैसे काटे
कविता पिता बिन कहे सब कहे, मां कभी चुप ना रहे December 11, 2020 / December 11, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपिता जो बिन कहे सबकुछ कहेउसे पिता कहते हैं! माता जो कभी चुप ना रहे कहेमुंह गोहे मां कहते हैं! पिता जो रोए बिना आवाज केमुस्कुराए मन ही मनउसे पिता कहते हैं! माता कभी रोती नहीं सामनेसिर्फ उदास हो लेतीउसे मां कहते हैं! पिता सोए बच्चों को निहार केआश्वस्त हो लेते हैं!मां बार-बार […] Read more » Father says everything mother should never shut up पिता बिन कहे सब कहे मां कभी चुप ना रहे
कविता बिहार सासाराम का शेरशाह सूरी December 10, 2020 / December 10, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकछबीला बाबर छब्बीस दिसंबरपन्द्रह सौ तीस में मर गया!किन्तु ,“पानी’ ‘खा’ ‘चन्द’ ‘घाघ” जीता रहा(पानीपत की लड़ाई/20 अप्रैल 1526 ई.बाबर और इब्राहीम लोदी के बीच/अफगान शक्ति पराजित)(खान्वा की लड़ाई/16 मार्च 1527 ई.बाबर और राणा सांगा के बीच/हिन्दू शक्ति पराजित)(चंदेरी की लड़ाई/29 जनवरी 1528 ई.बाबर और मेदिनी राय के बीच/हिन्दू शक्ति पराजित)(घाघरा की लड़ाई/06 […] Read more » बिहार सासाराम का शेरशाह सूरी