कविता धन धरती का चीज बेटी कोख में उगती October 8, 2020 / October 8, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबेटा पतोहू ठुकराए तो बेटी काम आती,बेटा गेहूं की बाली है तो बेटी धान होती! वह मौत भी क्या जो आंखें नम न हो,कोई रोए ना रोए जनाजे पर बेटी रोती! बेटा है कि सबकुछ बांट लेता, डांट देता,बेटी खामोश हो के मन मसोस के रहती! बेटी को बेदखलकर नाम मिटा देते घर […] Read more » धरती का चीज बेटी
कविता परिवर्तन October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment अचानक कैसे बदल जाता है सब कुछराह चलते चलते आदमी तक बदल जाता है।गांव से शहर जाने वाले का पता बदल जाता हैऔर तो और चेहरे का नकाब बदलता है हर पल।मुझे लगता है सिर्फ नहीं बदलता तो जनवादमूर का ‘यूटोपिया’ और समाजवाद का वह स्वप्न‘प्रत्येक से उसकी योग्यता अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवशयकतानुसार’।पिछले 73 […] Read more » परिवर्तन
कविता रिश्तों का भ्रम October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment हर रिश्ते की बुनियाद में स्वार्थ छिपा है,हर बात के पीछे कुछ न कुछ भावार्थ छिपा है,पैसों की इस दुनिया में भावनाओं का क्या काम,खोखले हैं रिश्ते सारे रख लो चाहे कोई भी नाम।जिसने खामोशी को बोलते, उदासी को चहकते नहीं देखा,धूप को ठिठुरते, आकाश को छटपटाते नहीं देखा,सागर को तरसते और आंसू को हंसते […] Read more » the illusion of relations रिश्तों का भ्रम
कविता नारी October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment उठो, जागो और लड़ोखुद के आत्मसम्मान के लिएखुद के अस्तित्व के लिए।सुना है न, भगवान भीउनकी मदद करता हैजो अपनी मदद खुद करते है।तो फिर इंतजार क्योंकिसी और से उम्मीद क्योंबहुत बनी तू सीता, द्रोपदीनिरीह बना तुझे लाज सौप दीजब चाहा प्यार कर लियाजब चाहा तलवार घोंप दी।कठुआ, दिल्ली, उन्नाव, हाथरसबहुत हुआ ये चीत्कार बसरूक […] Read more » poem on women नारी
कविता आर्य कौन, कहां से आए October 7, 2020 / October 7, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य कौन है?आर्य कहां से आए?यह आज भी पहेली हैकोई नही बुझा पाए हैंयह गुत्थी खुलती नहीकोई खोल नही पाए हैंसभी धारणा भटकाए! आर्य कौन थे?आर्य कहां से आए?आर्य यहां उग आए थेयहीं आर्यावर्त बसाए थेपूरी वसुधा में छाए थेधरा में स्वर्ग बसाएआर्य भारतवर्ष के! आर्य यही के थेआर्य नही बाहर केआर्य नही […] Read more » who are arya and from where do they came आर्य कौन
कविता मेरी ताकत लेखनी, तू रखता हथियार ! October 5, 2020 / October 5, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment लुके-छिपे अच्छा नहीं, लगता अब उत्पात !कभी कहो तुम सामने, सीधे अपनी बात !!भूल गया सब बात तू, याद नहीं औकात !गीदड़ होकर शेर की, पूछ रहा है जात !!मेरी ताकत लेखनी, तू रखता हथियार !दोनों की औकात को , परखेगा संसार !!शीशों जैसे घर बना, करते हैं उत्पात !रखते पत्थर हाथ में, समझेंगे कब […] Read more » मेरी ताकत लेखनी
कविता दुर्गा प्रतिमा नही प्रतीक है नारी का October 5, 2020 / October 5, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकदुर्गा प्रतिमा नही प्रतीक है नारी काचाहे कोई उपासक हो सूर्य या चंद्र कानारी एक सी होती तमाम धर्म की! नारी दस भुजा होती दुर्गा जैसीएक से घर, दूसरे से द्वार, तीसरे सेपहली और चौथे से दूसरी दुनिया बांकी में हथियार जो थामे होतीवो कम ही होती है उनकी सुरक्षा मेंऐसे भी दुर्गा […] Read more » Durga idol is not a symbol of a woman दुर्गा प्रतिमा
कविता शिक्षक October 5, 2020 / October 5, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment सद्गुणों व दुर्गुणों के वोहोते हैं सर्वश्रेष्ठ ईक्षकईश्वर के तुल्य ही होतेहम कहते जिनको शिक्षक करते दूर अज्ञानता कोजलाते हैं ज्ञान का दीपकहमारी धीरता व नम्रता केहोते हैं वो कुशल परीक्षक जीवन जीने की कला सिखातेगुरु ही होते पथप्रदर्शकआधारशिला होते समाज केशिक्षक ही सच्चे मार्गदर्शक ✍️आलोक कौशिक Read more » poem on teacher शिक्षक
कविता कैसे छोड़ दू साथ प्रिये ! October 4, 2020 / October 4, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कैसे छोड़ दू साथ प्रिये !जीवन की ढलती शामो में,धूप छांव की साथी रही होमेरे दुख सुख के कामों में।। साथ मरेंगे साथ जिएंगे,ये वादा किया था दोनों ने,क्यो अलग हो जाए हम ,जब साथ फेरे लिए थे दोनों ने जर्जर शरीर हो चला दोनों काअब तो कोई इसमें न दम रहाएक दूजे की करगे […] Read more » How can I leave dear कैसे छोड़ दू साथ प्रिये
कविता बच्चों का पन्ना पानी पीते नए ढंग से October 4, 2020 / October 4, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » पानी पीते नए ढंग से
कविता पूर्वोत्तर भारत की गौरव गाथा व्यथा October 4, 2020 / October 4, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपूर्वोत्तर भारत की सत बहनाअरुणाचल, मिजोरम, मणिपुर,मेघालय,नागालैण्ड,त्रिपुरा औरसिक्किम की माता असम कानाम कभी था प्राग्ज्योतिषपुर! महाभारत युद्ध का युद्ध वीरभगदत्त का पिता था नरकासुरएक राजा असम का अत्याचारीजिसका कृष्ण से बध होने परभगदत्त बना प्राग्ज्योतिषपुरेश्वर! भगदत्त था पीत किरात मंगोलहिन्दचीनी मंगोल बर्मी रक्त काचीन था शक्तिहीन एक तटस्थकबिलाई, हुआ नहीं था शामिलमहाभारत के […] Read more » Pride saga of Northeast India पूर्वोत्तर भारत की गौरव गाथा
कविता उड़े छतों से कपड़े लत्ते October 3, 2020 / October 3, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment आये शाम को आज अचानक,काले- काले बदल नभ में। बूँद पड़ी तो बुद्धू मेंढक,मिट्टी के भीतर से झाँका।ओला गिरा एक सिर पर तो,जोरों से टर्राकर भागा।तभी मेंढकी उचकी, बोली,ओले करें इकट्ठे टब में। आवारा काले मेघों ने,धूम धड़ाका शोर मचाया।चमकी बिजली तो वन सारा,स्वर्ण नीर में मचल नहाया।बूढ़ा बरगद लगा नाचनेंजो अब तक था खड़ा […] Read more » Hanging clothes from rooftops उड़े छतों से कपड़े लत्ते